On 14th February 2013 thousands of women in different parts of Uttar Pradesh will flag their Odhanis to demand an end to violence against women and girls. The odhani (scarf/headcloth) will be raised as a symbolic parcham (flagpost) against patriarchal values. Odhani - the symbol of patriarchal domination and subjugation of women will be transformed into a symbol of revolution as thousands of Odhan
is will be tied together by women and men to unitedly express their resentment and raise their voice in protest of widespread violence against women and girls. A chain of such odhanis will be joined to express solidarity with women survivors of violence.
उत्तर प्रदेश में ओढ़नी का परचम अभियान
उत्तर प्रदेश में भी औरतों के खिलाफ हिंसा को ख़त्म करने और पितृसत्ता से उपजी सांेच के खिलाफविरोध दर्ज करने के लिए 14 फरवरी को हज़ारों की संख्या में महिलाएं अपनी ओढ़नी (दुपट्टा) का परचम लहराएंगी। मुद्दे से जुड़े लोग इस अवसर पर ओढ़नियों की एक श्रृंखला बनाएगें। महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थानों पर ओढ़नी की श्रृंखला के साथ-साथ नृत्य, संगीत, नारे, नुक्कड़ नाटक आदि का प्रदर्शन भी किया जायेगा।
सदियों से पुरुष-प्रधान समाज में महिलाओं का दमन होता रहा है। ओढ़नी के परचम को प्रतीक
मानकर हम इन बेडि़यों को मिलकर तोडेगें। ओढ़नियों की श्रृंखला महिलाओं के लिए घर के अंदर
व बाहर सुरक्षित माहौल बनाने का एक प्रयास है। इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार के सामने कुछ ठोस मांगें भी रखी जाएंगी।
आप भी अभियान का हिस्सा बन सकते हैं
इस अभियान में सामूहिक तौर पर आवाज़ उठाने के लिए हम आपको आमंत्रित करते हैं। हमें उम्मीद है कि आप अपने गांव, कस्बे या शहर में लोगों को नई या पुरानी ओढ़नी देकर इस अभियान का हिस्सा बनेगें। ओढ़नी के एक कोने में देने वाले व्यक्ति का नाम और पता लिख दें ताकि भागीदारी की सनद रहे। आप अपने दोस्तों को एस एम एस, मेल अथवा फेसबुक के माध्यम से इस मुहिम में जोड़ सकते हैं।
ओढ़नियां कहाँ दे सकते हैं
1- सनतकदा
130, जगदीश चन्द्र बोस मार्ग, कैसरबाग, लखनऊ।
फोनः 0522 4077698, मोबाइलः 9415104361
2- हमसफर
27, न्यू बेरी रोड, टाइम्स आफ इंडिया के पास, लखनऊ।
फोनः 0522 2205215
3- सहयोग
ए-240, इंदिरा नगर, लखनऊ।
फोनः 0522 2310860, 2341319
लखनऊ कार्यक्रम का स्थान: बेगम हजरत महल पार्क से जी.पी.ओ. तक।
समय: दोपहर 1 बजे से 5 बजे।
तिथि: 14 फरवरी 2013
तेरे माथे पे ये आँचल बहुत ही ख़ूब है लेकिन,
तू इस आँचल से इक परचम बना लेती तो अच्छा था!!
-मजाज़ लखनवी,