06/08/2026
End Of An Era...
आज फिर मातम उतर आया।
एक जवान बेटे का यूँ अचानक दुनिया से चले जाना ऐसा ज़ख्म है, जिसकी टीस उम्र भर कम नहीं होती। जिन आँखों ने उसके लिए अनगिनत ख़्वाब देखे थे, आज वही आँखें उसे आख़िरी बार देख रही होंगी।
करीब तीन वर्ष पहले इसी परिवार ने पिता, चाचा और भाई को खोने का असहनीय सदमा झेला था। समय शायद उन ज़ख्मों को भी पूरी तरह भर नहीं पाया था कि तक़दीर ने एक और गहरा घाव दे दिया। लगातार अपनों का बिछड़ना किसी भी परिवार के लिए बेहद कठिन इम्तिहान होता है।
मौत न उम्र देखती है, न हैसियत, न नाम और न पहचान। जब वह आती है, तो पीछे सिर्फ़ ख़ामोशी, यादें और अपनों के दिलों में कभी न भरने वाला दर्द छोड़ जाती है।
हर बहस, हर मतभेद और हर सियासत से ऊपर इंसानियत होती है। किसी माँ की गोद का सूना हो जाना, किसी परिवार का जवान सहारा छिन जाना—यह ऐसा ग़म है जिसे शब्दों में बयाँ नहीं किया जा सकता।
अल्लाह तआला मरहूम की मग़फिरत फरमाए, उनकी क़ब्र को नूर से भर दे, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुकाम अता फरमाए और उनके तमाम अहले-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। अल्लाह तआला इस परिवार पर अपनी रहमत नाज़िल फ़रमाए और उनके दिलों को सुकून अता करे।
إِنَّا لِلَّٰهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ
आमीन या रब العالمين।