All India Gaddi Youth Federation

All India Gaddi Youth Federation हमारा मुख्य उद्देश्य समाज का शैक्षिक,सामाजिक, आर्थिक,राजनीतिक उन्नयन करना

🌙 जश्ने ईद मिलादुन्नबी ﷺ की दिली मुबारकबाद 🌙जश्ने ईद मिलादुन्नबी ﷺ के इस मुबारक मौके पर आप सभी को दिल की गहराइयों से बहु...
26/08/2026

🌙 जश्ने ईद मिलादुन्नबी ﷺ की दिली मुबारकबाद 🌙

जश्ने ईद मिलादुन्नबी ﷺ के इस मुबारक मौके पर आप सभी को दिल की गहराइयों से बहुत-बहुत मुबारकबाद।

रसूल-ए-अकरम हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ की ज़िंदगी पूरी इंसानियत के लिए रहमत, मोहब्बत, अमन, भाईचारे और नेक किरदार का बेहतरीन नमूना है।

आप ﷺ ने हमें सिखाया कि कमज़ोरों और ज़रूरतमंदों का सहारा बनो, पड़ोसियों के साथ अच्छा व्यवहार करो, यतीमों और मिस्कीनों का ख्याल रखो, सच बोलो, इंसाफ़ करो और किसी पर ज़ुल्म न करो।
आप ﷺ ने इंसान की पहचान उसके अच्छे अख़लाक़ और किरदार से बताई तथा नफ़रत के बजाय मोहब्बत और रहमत का रास्ता दिखाया।

आइए, इस मुबारक दिन पर हम अहद करें कि हम सीरत-ए-मुस्तफ़ा ﷺ की शिक्षाओं को अपनी ज़िंदगी में अपनाएँगे और अपने समाज में अमन, इंसाफ़, भाईचारे और इंसानियत की ख़िदमत को बढ़ावा देंगे।

अल्लाह तआला हम सबको नबी-ए-करीम ﷺ की सुन्नत और उनकी पाक तालीमात पर चलने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन। 🤲

🌹 जश्ने ईद मिलादुन्नबी ﷺ मुबारक हो 🌹

— मोहम्मद तारीक गाजी

गद्दी समाज को आज इल्ज़ाम नहीं, इत्तेहाद की ज़रूरत हैआज हमारे गद्दी समाज के सामने जो हालात हैं, वे बेहद संजीदा और फ़िक्र ...
23/08/2026

गद्दी समाज को आज इल्ज़ाम नहीं, इत्तेहाद की ज़रूरत है

आज हमारे गद्दी समाज के सामने जो हालात हैं, वे बेहद संजीदा और फ़िक्र की बात हैं। ऐसे वक़्त में पूरे समाज को एकजुट होकर अपनी आवाज़ बुलंद करनी चाहिए, लेकिन अफ़सोस की बात है कि हमारे ही कुछ साथी एक-दूसरे पर लांछन लगाने, इल्ज़ाम लगाने और एक-दूसरे को नीचा दिखाने में लगे हुए हैं।

सच्चाई यह है कि मेरी जानकारी में समाज का शायद ही कोई ऐसा शख़्स होगा, जो मौजूदा हालात को देखकर दुखी और परेशान न हो। हर शख़्स अपने-अपने स्तर पर समाज की भलाई के लिए कुछ न कुछ करना चाहता है, लेकिन हालात और मजबूरियाँ हर किसी के सामने अलग-अलग हैं। इसलिए किसी की नीयत पर सवाल उठाना या अपनी बात को सही साबित करने के लिए दूसरे को गलत ठहराना किसी मसले का हल नहीं है।

हमें यह भी समझना होगा कि हर बात के लिए किसी सियासी जमात, रहनुमा या दूसरे शख़्स को ज़िम्मेदार ठहराने से हमारा समाज मज़बूत नहीं होगा। अगर हम आपस में ही बँटे रहेंगे, एक-दूसरे पर भरोसा नहीं करेंगे और हर कोशिश में कमी निकालते रहेंगे, तो फिर पूरे समाज की सामूहिक आवाज़ कौन बनेगा?

हमारे बुज़ुर्गों ने समाज के लिए जिस तरह मेहनत की, संघर्ष किया और समाज को आगे बढ़ाने का रास्ता बनाया, उसे हम कभी नहीं भूल सकते। जिन लोगों ने अपने दौर में समाज के लिए मेहनत और संघर्ष किया, हम उन सभी का दिल से शुक्रिया और एहतराम करते हैं। इसी तरह समाज से जुड़े रहे साबिक़ सांसद और साबिक़ विधायक भी अपने-अपने कार्यकाल में समाज की ख़िदमत और भलाई के लिए कोशिश करते रहे हैं। उनके योगदान और ख़िदमात को तस्लीम करना और उनका एहतराम करना भी हमारी ज़िम्मेदारी है।

लेकिन आज वक़्त की नज़ाकत बेहद संजीदा है। हमें मौजूदा हालात को जज़्बात के बजाय समझदारी और संजीदगी से समझने की ज़रूरत है। जिस तरह की कार्रवाइयाँ और वाक़ियात सामने आ रहे हैं, उनसे समाज का एक बड़ा तबका फ़िक्रमंद और परेशान है। आज मुस्लिम समाज के प्रति जिस तरह का माहौल दिखाई दे रहा है, उसमें हमारे समाज के लोगों को भी कई जगह परेशानियों और कार्रवाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

साथ ही हमें ख़ुद एहतेसाब भी करना होगा। हमारे समाज के बारे में जो “दबंग” छवि बनी है, उसे सिर्फ़ बाहरी नैरेटिव कहकर नज़रअंदाज़ कर देना भी मुनासिब नहीं होगा। यह छवि काफी हद तक हमारे अपने रवैये, तौर-तरीक़ों और वर्षों में बनी हमारी सामाजिक पहचान से भी जुड़ी हुई है। अगर हमें इस छवि को बदलना है, तो इसकी शुरुआत भी हमें ख़ुद से करनी होगी—क़ानून का एहतराम, प्रशासन के साथ बातचीत, तालीम, सब्र, तहज़ीब और सकारात्मक सामाजिक क़यादत के ज़रिए।

इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि अगर किसी बेगुनाह के साथ ज़ुल्म हो तो हम ख़ामोश रहें। ज़ुल्म के ख़िलाफ़ आवाज़ भी बुलंद होनी चाहिए और अपने रवैये में इस्लाह भी होना चाहिए। ये दोनों बातें एक साथ चल सकती हैं।

सबसे अहम सवाल यह है कि आज भी हम अपने समाज के किसी गाँव, मोहल्ले या घर में बैठकर आपसी इख़्तिलाफ़ात भुलाकर संजीदगी से अपनी समस्याओं पर बातचीत नहीं कर पाते। आपसी हसद, जलन, नफ़रत और एक-दूसरे को पीछे खींचने की सोच हमें अंदर से कमज़ोर कर रही है।

इसलिए आज ज़रूरत किसी एक शख़्स को बड़ा या छोटा साबित करने की नहीं, बल्कि अपने अंदर झाँकने की है। हमें तय करना होगा कि हम आने वाली नस्ल को क्या देना चाहते हैं—आपसी झगड़े और दिखावा, या तालीम, इज़्ज़त, रोज़गार और एक मज़बूत मुस्तक़बिल?

मेरी समाज के तमाम साथियों से पुरख़ुलूस अपील है कि बाहरी दिखावे और आपसी खींचतान से ऊपर उठकर तालीम, शऊर, आर्थिक मजबूती, क़ानून के एहतराम और सामाजिक इत्तेहाद पर तवज्जो दें।

कोई दूसरा हमारी आवाज़ बनने नहीं आएगा। जब तक हम ख़ुद बेदार होकर अपने हक़ूक़ और अपने मुस्तक़बिल के लिए मुत्तहिद नहीं होंगे, तब तक हमारी समस्याएँ बनी रहेंगी।

आज किसी पर इल्ज़ाम लगाने का नहीं, समाज को जोड़ने का वक़्त है।
किसी को नीचा दिखाने का नहीं, एक-दूसरे का हाथ थामने का वक़्त है।
एक-दूसरे को हराने का नहीं, अपनी आने वाली नस्ल को कामयाब बनाने का वक़्त है।

आइए, इख़्तिलाफ़ रखें लेकिन दिलों की दूरियाँ ख़त्म करें। शख़्सियत से ऊपर समाज को रखें। आज के हालात से आगे बढ़कर आने वाली नस्ल के मुस्तक़बिल के लिए काम करें।

अपने बुज़ुर्गों की जद्दोजहद का एहतराम करें। जिन लोगों ने समाज के लिए अपने वक़्त, सामर्थ्य और वसाइल के मुताबिक़ काम किया, उनकी ख़िदमात को तस्लीम करें। साथ ही अपनी कमियों को भी ईमानदारी से पहचानें और उन्हें दूर करने की कोशिश करें।

हमारी पहचान सिर्फ़ “दबंग” छवि से नहीं, बल्कि हमारी तालीम, मेहनत, ईमानदारी, कारोबार, समाजी ख़िदमात, क़ानून के एहतराम और आपसी भाईचारे से होनी चाहिए।

हमें यह समझना होगा कि किसी भी समाज की असली ताक़त सिर्फ़ तादाद में नहीं होती, बल्कि उसकी इत्तेहाद, तालीम, आर्थिक मज़बूती, समाजी शऊर और सकारात्मक सोच में होती है।

आइए, आज अहद करें—

इत्तेहाद + तालीम + शऊर + आर्थिक मज़बूती + क़ानून का एहतराम + मेहनत = गद्दी समाज की असली तरक़्क़ी।

समाज मज़बूत होगा तो हमारी आवाज़ मज़बूत होगी, और समाज की आने वाली नस्ल मज़बूत होगी तो हमारा मुस्तक़बिल भी मज़बूत होगा।

22/08/2026

इंसाफ भी हो, व्यवस्था भी हो—गरीब पशुपालकों को उजाड़ा न जाए

लखनऊ में पशुपालक गद्दी समाज के साथ कथित अवैध वसूली, उत्पीड़न और भेदभाव की जो शिकायतें सामने आ रही हैं, उन्हें गंभीरता से लिया जाना चाहिए। किसी भी नागरिक के साथ उसकी मुस्लिम पहचान, सामाजिक पृष्ठभूमि या आर्थिक स्थिति के आधार पर अन्याय होना लोकतांत्रिक व्यवस्था और कानून के शासन के खिलाफ है।

माननीय न्यायालयों के आदेशों की मूल भावना का सम्मान करते हुए सरकार और प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जब तक पशुपालकों के लिए उचित एवं वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान या प्रताड़ित न किया जाए। केवल प्रशासनिक कार्रवाई के नाम पर गरीब परिवारों की रोज़ी-रोटी छीन लेना किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता।

गद्दी समाज का एक बड़ा वर्ग वर्षों से पशुपालन और दुग्ध व्यवसाय के माध्यम से मेहनत करके अपना जीवनयापन करता आया है। इन्हीं पशुओं से उनके परिवारों की रोज़ी-रोटी जुड़ी हुई है और यही मेहनतकश लोग शहर के लाखों परिवारों तक दूध एवं दुग्ध उत्पाद पहुँचाने का काम करते हैं।

यदि नगर निगम या प्रशासन को पशुपालन को लेकर कोई समस्या है, तो उसका समाधान संवाद, कानून और सम्मानजनक वैकल्पिक व्यवस्था के माध्यम से किया जाना चाहिए। गरीब पशुपालकों को अचानक उजाड़ना, उनके पशु हटाना, कारोबार प्रभावित करना या कथित रूप से दबाव बनाकर वसूली करना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है।

यदि नगर निगम कर्मचारियों द्वारा महीने के हिसाब से अवैध वसूली किए जाने की शिकायतें सही हैं, तो इसकी निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। कानून सबके लिए बराबर है—न गरीब के साथ ज्यादती होनी चाहिए और न किसी अधिकारी या कर्मचारी को अपने पद का दुरुपयोग करने की अनुमति मिलनी चाहिए।

सरकार से हमारी स्पष्ट मांग है कि पहले पशुपालकों के लिए व्यवहारिक, सम्मानजनक और स्थायी वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, उसके बाद ही कोई कार्रवाई की जाए। प्रशासन कानून का पालन करे, लेकिन साथ ही मानवीय संवेदना, न्याय और गरीबों की रोज़ी-रोटी का भी ध्यान रखे।

न्याय चाहिए, टकराव नहीं।
व्यवस्था चाहिए, उत्पीड़न नहीं।
पहले व्यवस्था कीजिए, फिर कार्रवाई कीजिए।
गरीब पशुपालकों को उजाड़िए नहीं—उनके जीवन और रोज़गार का सम्मान कीजिए।
कानून का राज हो और कानून सबके लिए बराबर हो।

#गद्दी_समाज #पशुपालक_समाज #लखनऊ #इंसाफ #न्याय #कानून_का_राज #अवैध_वसूली_बंद_हो #पहले_व्यवस्था_फिर_कार्रवाई

13/08/2026

“चेहरे अलग हैं, मगर तस्वीर एक कहानी कह रही है—
कभी हालात इंसान की ताक़त नहीं, उसके सब्र का इम्तिहान लेते हैं।
लेकिन इन सबके बीच भी इंसान की आँखों में अपने लोगों, अपने रिश्तों और अपने कल की उम्मीद ज़िंदा रहती है।
वक्त हमेशा एक जैसा नहीं रहता…
आज जो मुश्किल है, कल वही इतिहास का एक पन्ना होगा।”

कुछ तस्वीरें सिर्फ़ तस्वीरें नहीं होतीं,
वो आने वाले वक्त के लिए एक गवाही बन जाती हैं।

जीवन लंबा नहीं बल्कि महान होना चाहिए.भारत रत्न, बाबा साहेबडॉ. भीमराव अम्बेडकर जी की जयंती पर उन्हें खिराज-ए- 'अकीदत
14/04/2026

जीवन लंबा नहीं बल्कि महान होना चाहिए.
भारत रत्न, बाबा साहेब
डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी की जयंती पर
उन्हें खिराज-ए- 'अकीदत

माननीय पूर्व विधायक एवं पूर्व मंत्री श्री अंसार अहमद जी (जिन्हें सब प्यार से अंसार पहलवान कहते हैं) तथा उनके पुत्र मंजूर...
24/03/2026

माननीय पूर्व विधायक एवं पूर्व मंत्री श्री अंसार अहमद जी (जिन्हें सब प्यार से अंसार पहलवान कहते हैं) तथा उनके पुत्र मंजूर के साथ प्रयागराज पुलिस द्वारा अपराधियों जैसा बर्ताव करना दिल को बहुत चुभता है और अत्यंत निंदनीय है। अंसार पहलवान जी सदैव एक दयालु, हमदर्द और दानी इंसान रहे हैं। इलाके में कोई भी मदद मांगने आया हो, कभी खाली हाथ नहीं लौटा। गरीबों की मदद, जरूरतमंदों का साथ — यही उनकी पहचान रही है। उनकी छवि कभी अपराध या गलत काम से नहीं जुड़ी। ऐसे मिलनसार और नेक दिल इंसान के साथ इस तरह का अपमानजनक व्यवहार देखकर मन भर आता है। दुर्भाग्यवश कोल्ड स्टोरेज में हुई इमारत गिरने की यह घटना एक दुखद हादसा है। इसमें जिन चार मजदूर भाइयों की जान चली गई और कई घायल हुए, उनके परिवारों के दर्द की हम कल्पना भी नहीं कर सकते। उन सभी पीड़ित परिवारों के प्रति हमारी गहरी संवेदना और शोक है। अल्लाह ताला उन शहीदों को जन्नतुल फिरदौस नसीब फरमाए और घायलों को जल्द से जल्द शिफा अता फरमाए। लेकिन इस हादसे को बहाने बनाकर पूर्व मंत्री जी और उनके परिवार को मीडिया के सामने अपराधियों की तरह पेश करना, उनकी निजता का हनन करना और उनके सम्मान को ठेस पहुंचाना सत्ता के नशे की हद पार करना है। कानून सबके लिए बराबर है, पर गरिमा और इंसानियत भी तो बनाए रखनी चाहिए।आम जनमानस को इस अपमानजनक बर्ताव पर गहरा दुख और आक्रोश है। हम अपील करते हैं कि पुलिस निष्पक्ष जांच जरूर करे, लेकिन अनावश्यक मीडिया ट्रायल और दिखावे से बचे। न्याय के साथ-साथ सम्मान भी दिया जाए।अंसार पहलवान जैसे दानी और दयालु इंसान के साथ यह सलूक कतई उचित नहीं।
अल्लाह ताला सभी पीड़ितों को सब्र दे, घायलों को स्वास्थ्य और परिवारों को हिम्मत प्रदान करे। आमीन।

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