17/11/2025
"बकरी की लेंडी… छोटे-छोटे दाने, लेकिन किसान की बड़ी उम्मीदें"
हमारे खेत, हमारी मिट्टी, और हमारी रोज़ी-रोटी, इन सबका रिश्ता बहुत गहरा है।
आज जब खेती का खर्च बढ़ता जा रहा है, तब बकरी की लेंडी से बनी जैविक खाद किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभर रही है।
लेंडी खाद की यात्रा — मिट्टी, मेहनत और उम्मीदों की कहानी
गाँव में खुली हवा में चरती बकरियाँ,
उनके पीछे गिरते छोटे-छोटे लेंडी के दाने…
पहले कभी इन पर किसी की नज़र नहीं जाती थी।
लेकिन आज इन्हीं दानों ने कई परिवारों की किस्मत बदलनी शुरू कर दी है।
गाँव की पशु सखी इन लेंडी को बकरी पालकों से खरीदती है, एक-एक मुट्ठी से शुरू होकर यह उसके लिए रोज़ की आमदनी बन जाती है और बकरी पालक भी खुश हैं कि उनके घर में निकलने वाली यह “लेंडी” अब पैसे में बदल रहा है।
पशु सखी इन्हीं लेंडी का उपयोग करके जैविक खाद तैयार करती है, नीम की पत्तों की परत, लेंडी की परत, और थोड़ा पानी…
हर हफ्ते प्यार से उलट-पलट, 45–60 दिन बाद यही लेंडी बन जाती है काली, भुरभुरी और पौष्टिक मिट्टी का अमृत।
"यह खाद सिर्फ खाद नहीं… गाँव की महिलाओं की आत्मनिर्भरता है"
✔इससे मिट्टी मुस्कुराती है।
✔ खेत की उपज बढ़ती है।
✔ किसानों का खर्च कम होता है।
✔ और सबसे खूबसूरत बात
गाँव की पशु सखी अपने घर के पास ही रहकर प्रतिदिन अच्छी कमाई कर पा रही है।
यह खाद सिर्फ खेतों में ताकत नहीं भरती, यह गाँव की महिलाओं के सपनों में भी जान भर देती है।