19/02/2026
कृष्णकुल उत्पन स्वामी मेघा भगत अहीर
रामलीला को धरातल पर उतारकर उसके विधिवत मंचन की परंपरा शुरू कराने में जिस महान व्यक्तित्व की मुख्य भूमिका मानी जाती है,
वे थे स्वामी मेघा भगत अहीर।
16वीं शताब्दी में काशी (वाराणसी) के विशेश्वरगंज में एक ग्वालवंशी अहीर परिवार में जन्मे स्वामी मेघा भगत, तुलसीदास के सहपाठी व मित्र थे।
उन्होंने एक ही गुरुकुल में अपनी शिक्षा ग्रहण की थी, और वो उस वक्त के संस्कृति के महा ज्ञानियो में से एक थे।
राम लीला का खाका स्वामी मेघा भगत ने वाल्मीकि रामायण के आधार, राम चरित मानस के पहले तैयार की थी।
इसीलिए आज तक नाटी इमली की रामलीला संस्कृत में होती है।
उन्होंने वाराणसी में प्राचीनतम रामलीला की शुरुआत की और इसका मंचन वाल्मीकि रामायण के आधार पर किया। विशेष बात यह रही कि उन्होंने रामलीला का आरंभ राम जन्म से नहीं, बल्कि वन गमन प्रसंग से किया — जो उनकी विशिष्ट दृष्टि और परंपरा की गहराई को दर्शाता है।
ऐसे संत और परंपरा के प्रवर्तक पर हम सबको गर्व है।
धर्म, संस्कृति और मंचन परंपरा को जन-जन तक पहुँचाने में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।