उत्तर प्रदेश साहित्य सभा

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उत्तर प्रदेश साहित्य सभा गाजियाबाद इकाई की कविता गोष्ठी संपन्न ***************************************गाजियाबाद:  आज दिन...
18/05/2025

उत्तर प्रदेश साहित्य सभा गाजियाबाद इकाई की कविता गोष्ठी संपन्न
***************************************
गाजियाबाद: आज दिनांक 18 मई 2025 को उत्तर प्रदेश साहित्य सभा गाजियाबाद इकाई की कविता गोष्ठी वरिष्ठ साहित्यकारा श्रीमती मीरा शलभ जी की अध्यक्षता और श्री वागीश शर्मा जी एवं भाजपा गाजियाबाद महानगर महामंत्री श्री पप्पू पहलवान जी के सान्निध्य में सफलता पूर्वक संपन्न हुई l
सभी कवियों और मेहमानों ने मां सरस्वती के चरणों में दीप प्रज्ज्वलन करके गोष्ठी का शुभारंभ किया l
गोष्ठी का सफल संचालन कवि दुर्गेश अवस्थी ने किया और सरस्वती वंदना श्रीमती अंजना शर्मा जी ने अपनी मधुर वाणी से की l
उत्तर प्रदेश साहित्य सभा एवं समाधान शक्ति सामाजिक संस्था गाजियाबाद के संयुक्त तत्वावधान में कविता गोष्ठी का प्रोग्राम , उत्तर प्रदेश साहित्य सभा गाजियाबाद इकाई की प्रधान , कवयित्री श्रीमती नंदिनी श्रीवास्तव जी के संयोजन
में संपन्न हुआ l
3 घंटे तक चली इस कविता गोष्ठी में कई कवियों ने काव्य पाठ किया जिसमें मीरा शलभ , वागीश शर्मा , नंदिनी श्रीवास्तव , दुर्गेश अवस्थी, अंजना शर्मा , संगीता वर्मा , मनोज यादव , कुलदीप बरतरिया , बबली सिन्हा शामिल रहे l श्रोताओं में स्वप्निल श्रीवास्तव जी , भाजपा गाजियाबाद महानगर महामंत्री श्री पप्पू पहलवान जी, प्रतीक माथुर जी , सुमन सती जी शामिल रहे l
अंत में उत्तर प्रदेश साहित्य सभा गाजियाबाद इकाई की प्रधान, कवयित्री नंदिनी श्रीवास्तव ने उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के संस्थापक श्री सर्वेश अस्थाना व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ शिवओम अम्बर सहित सभी कवियों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया l

बधाई गाज़ियाबाद सभा
16/05/2025

बधाई गाज़ियाबाद सभा

09/05/2025

*पाक-साफ*
भारत पर आतंकी बादल छाया है
धूर्त पड़ोसी के कारण यह आया है
मानवता की हर शिक्षा ठुकराई है
सिर्फ गुनाहों की बस्ती बनवाई है
काश्मीर की मुस्काती सी वादी में
भोले बच्चों की हँसती आज़ादी में
आतंकी शोलों से आग बिछाई है
और क्रूरता की भट्टी सुलगाई है
जिसने भोले पर्यटकों को मारा है
पाक नही वो बस केवल हत्यारा है
जिसके चरित्र में है कोई ईमान नही
क्रूर दरिंदे है बसते हैं इंसान नही
ऐसे हत्यारे का मरना ईश्वर की ही इच्छा है
वो पल आने वाला है जिसकी हमे प्रतीक्षा है
आज हिन्द की सेना ने यलगार किया
अपने वीर सैनिकों को तैयार किया
अब इन नापाकों को घुस कर मारेंगे
हर आतंकी का हम शीश उतारेंगे
काश्मीर को फिर से स्वर्ग बनाना है
शांति प्रेम का तोरण द्वार सजाना है
वीर जवानों आगे बढ़ो प्रहार करो
विजयश्री से भारत का श्रृंगार करो।
हर हर बम बम का मिलकर उद्घोष करो
पाक साफ कर भारत का जयघोष करो।।
*@सर्वेश अस्थाना*

उत्तर प्रदेश साहित्य सभा की खुशखबरी उत्तर प्रदेश पॉलिटेक्निक कर्मशाला अनुदेशक(शिक्षक) संघ के चुनाव गांधी भवन रेजिडेंसी क...
19/04/2025

उत्तर प्रदेश साहित्य सभा की खुशखबरी
उत्तर प्रदेश पॉलिटेक्निक कर्मशाला अनुदेशक(शिक्षक) संघ के चुनाव गांधी भवन रेजिडेंसी के सामने लखनऊ में सम्पन्न हुए।
उत्तर प्रदेश साहित्य सभा कानपुर देहात के सनयोजक संजीव सार्थक भारी मतों के अंतर से प्रदेश अध्यक्ष चुने गये। Sarvesh Asthana व सभा की ओर से बहुत बहुत बधाई।

आज रक्षामंत्री राजनाथ सिंह जी से उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के भवन हेतु मुलाकात की व पत्र सौंपा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ...
19/04/2025

आज रक्षामंत्री राजनाथ सिंह जी से उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के भवन हेतु मुलाकात की व पत्र सौंपा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शीघ्र ही कार्य हो जायेगा। मैंने उनको स्वरचित 'अवधी गीता' भेंट की।

पिछले 7 अप्रैल को बदायूँ में आचमन फाउंडेशन द्वारा चौथे आचमन सम्मान एवं कविसम्मेलन का आयोजन किया गया जो कि भारत के विशुद्...
12/04/2025

पिछले 7 अप्रैल को बदायूँ में आचमन फाउंडेशन द्वारा चौथे आचमन सम्मान एवं कविसम्मेलन का आयोजन किया गया जो कि भारत के विशुद्ध काव्य आयोजनों में एक है। डॉ सोनरूपा विशाल द्वारा संयोजित एवं संचालित इस कवि सम्मेलन का एक अलग ही कलेवर होता है। मंच पर विशुद्ध कविता के लोग ही आमन्त्रित होते हैं भले वो मंच के प्रसिद्ध कवि ही हों। देश के तमाम कवि इस आयोजन में आने के लिए उत्सुक रहते हैं।
आचमन सम्मान इस वर्ष श्रेष्ठ गीतकार यश मालवीय को दिया गया। इक्यावन हज़ार की धनराशि का यह सम्मान डॉ सोनरूपा विशाल के व्यक्तिगत भावों का प्रकटीकरण है। सोनरूपा और उनके पति विशाल तथा उनके दोनों बेटे दिवम व शिंजन तथा सोनरूपा के छोटे भाई अक्षत अशेष का समर्पित और उत्साहजन्य सम्मिलन इसको पारिवारिक सुगन्ध से भर देता है।
इस बार तो डॉ सोनरूपा की भांजी साखी ने अपने हाथों से एक एक कवि का प्रतीकचिन्ह बनाया। बहुत खूबसूरत प्रतीकचिन्ह बने। उसकी भी पवित्र भावनाओं ने आचमन को आत्मीयता प्रदान की।
इस अवसर पर सोनरूपा की छठी पुस्तक जब सपनो से निकले हम का बहुत ही गरिमामय विमोचन हुआ। पुस्तक के मुख पृष्ठ से रंगयोजित रेशमी कपड़े से ढकी पुस्तकों पर से जब वह कपड़ा हटाया गया तो सचमुच एक सुंदर चेहरे से घूंघट सरकाने जैसा नज़ारा सबको हर्षित कर गया।
डॉ सोनरूपा का यह एक स्वप्न साकार हुआ है जिसमे उनको संचालन का दायित्व भी अत्यंत करीने से प्रदर्शित करते हुये देख कर श्रोताओं में भी आश्चर्य व हर्ष का मिश्रित भाव दिखा। नगर के कवि श्रीदत्त शर्मा के अलावा बाहर से आमन्त्रित कवि विकास बौखल, सान्या रॉय, शिवांगी प्रेरणा, मदन मोहन दानिश व आशीष अनल ने अत्यंत प्रभावशाली काव्यपाठ किया। डॉ विष्णु सक्सेना का समापन काव्यपाठ हमेशा की तरह उत्कर्ष तक ले गया। तालियों और वाह वाह से गूँजता बदायूँ क्लब दूधिया रोशनी में नहाया हुआ सा था जिसमे गीतों और मुक्तकों की वर्षा हो रही थी।
डॉ सोनरूपा और उनके परिवार का यह व्यक्तिगत व भावनासिक्त आयोजन भारत मे एक पहचान बना चुका है और कालांतर में यह 'आचमन' अपनी श्रेष्ठता में चहुंदिश सम्मान प्राप्त करेगा। डॉ उर्मिलेश जी की काव्य परंपरा को संभाल कर उसे और अधिक ऊंचाइयां देने के लिए कृतसंकल्प सोनरूपा और विशाल जी को अगणित बधाइयां।
सैकड़ों गणमान्य अतिथियों के बीच इनकी माता जी श्रीमती मंजुल उर्मिलेश जी की खुशी से चमकती आँखे इनको आशीष देती हई सम्मुख उपस्थित थीं। इस आयोजन में सकारात्मक भूमिका निभाने वाले सभी लोगों को बधाई। मुझे भी इस आयोजन का साक्षी बनने का अवसर मिला।
उत्तर प्रदेश साहित्य सभा की तरफ से भी डॉ सोनरूपा जी को साधुवाद।

प्राण निचोड़ कर रख दिये राव नेराव अजातशत्रु यूं तो मंच के प्रसिद्ध और सिद्ध कवि हैं। मंच पर उनकी पहचान शुरुआती दौर में हा...
12/04/2025

प्राण निचोड़ कर रख दिये राव ने

राव अजातशत्रु यूं तो मंच के प्रसिद्ध और सिद्ध कवि हैं। मंच पर उनकी पहचान शुरुआती दौर में हास्य व्यंग्य के कवि के रूप में ही थी। कालांतर में शनै शनै शत्रु ने अपने हास्य व्यंग्य के साथ-साथ उसमे धीरे-धीरे वास्तविक कविता का समावेश भी प्रारंभ कर दिया। विगत पन्द्रह वर्षों में राव अजातशत्रु जब काव्य पाठ करके वापस अपना स्थान लेते हैं तो उनके बारे में श्रोता वर्ग एक जिम्मेदार कवि की अवधारणा बन चुका होता है। यह अजातशत्रु का स्वयं का प्रयास और सफ़लतापूरित अभिव्यक्ति है। प्रसिद्ध तो हल्के पन से भी प्राप्त की जा सकती है लोग प्राप्त कर ही रहे हैं। किंतु लोकप्रियता हमेशा अच्छाई की ही होती है। मुझे बहुत खुशी है की राव अजातशत्रु ने अपने भीतर के कवि को दो हिस्सों में बांट रखा है पहला हिस्सा वह जो मंच पर दिखाई देता है जिसमें राव शत्रु एक मस्ती भरे संचालक और उत्साह पूरित कवि के रूप में दिखाई पड़ते हैं, दूसरा हिस्सा वह है जिसमें राव अजातशत्रु एक जिम्मेदार और गंभीर कवि के रूप में नजर आते हैं।
राव आजात की पुस्तक 'मगर हमें तो सच गाना है' मुझे मिली पृष्ठ दर पृष्ठ बढ़ते हुए राव अजातशत्रु की वैचारिक भाव भूमि से परिचय होता गया और धीरे-धीरे यह परिचय प्रणम्य होता गया क्योंकि किसी कवि की सफलता, खासकर गीतकार की सफलता उसकी कल्पनाओं की नव्यता पर निर्भर करती है और उस नव्यता को शिल्प की रेशमी ओढ़नी उढा कर उसे कोमल गीत बना सके। कवि जितना अधिक नई-नई कल्पनाएं करेगा और उनका भावनाओं से श्रृंगार करेगा वह उतना ही अधिक अपना कैनवस विस्तृत करता चलेगा। मुझे आश्चर्य है कि राव अजातशत्रु के पास कल्पना के आयाम तो हैं ही किंतु साथ ही साथ सम्प्रेषण के सोपान भी हैं। जब कल्पना नित नए आयाम के साथ सम्प्रेषण के सोपान चढ़ती है तो कविता पुष्ट और सौन्दर्यमयी होती चलती है। कल्पना की जितनी ऊंची उड़ान होगी कविता की गहराई भी उतनी ही अधिक होगी। कवि अजातशत्रु की मुझे एक विशेषता दिखाई पड़ी कि वह पहले गीत का आकाश बनाते हैं फिर उस आकाश पर शब्दों के सूर्य चंद्र स्थापित करते हैं और फिर उन्हें भावनाओं और संवेदनाओं के सितारों से आच्छादित कर देते हैं। परिणामस्वरूप गीत का सुंदर झिलमिलता आकाश नमूदार हो जाता है। अजातशत्रु के गीत पढ़ते पढ़ते मुझे सहसा यश मालवीय जी याद आ जाते हैं। यश मालवीय जी गीत के वह अप्रतिम हस्ताक्षर हैं जिनका प्रत्येक गीत पिछले गीत से बिल्कुल अलग होता है। बिंब विधान अलग हो जाता है और प्रतीकों का चयन भी बिल्कुल मुखर होकर अलग होता है कुछ ऐसा ही मुझे अजातशत्रु की गीतमाला में भी दिखा है.
उनकी नई पुस्तक 'मगर हमें तो सच गाना है' सात खण्डों में विभक्त है। जिस प्रकार से एक इंद्रधनुष में सप्तरंगिए विधान होते है इसी तरह से उनकी इस इंद्रधनुषी गीत पुस्तक में सात खण्डों में सात प्रकार के भाव भूमियों के गीत हैं। प्रत्येक खंड का गीत अपने भाव पक्ष को गहराई से समझते हुए अपने विधान को सिद्ध करता चलता है। जहां तक बात छंद विधान की है तो अजातशत्रु उसमें सिद्धार्थ के समान सिद्ध है। मैं उनके तमाम गीतों के सृजन का साक्षी भी हूँ। यह बड़े भैया कहकर अक्सर मुझे अपना पहला श्रोता बनाते रहे हैं मैं भी बड़ा भैया बनकर प्रेमचंद के बड़े भाई साहब की तरह इनको कोई ना कोई परामर्श देता रहता हूं और यह मुस्कुरा कर उस परामर्श को यह कहकर शामिल कर लेते हैं की भाई आप बड़े भाई हैं बात तो माननी ही पड़ेगी।
यह बात तो माननी ही पड़ेगी का वाक्य राव अजातशत्रु को बड़ों के प्रति आदर देने वाला व्यक्ति साबित करता है। चूंकि अजातशत्रु एक अध्यापक हैं और उनका अनेक विद्यार्थियों से रोज सामना होता है या यूं कहा जाए विद्यार्थियों के रूप में उन्हें विभिन्न प्रकार के मनोवैज्ञानिक भावों से साक्षात्कार करना होता है। यह साक्षात्कार ही अजातशत्रु के गीतों में फूट पड़ता है और शब्दों का आवरण पहन कर गीत बनकर मुस्कराने लगता है।
इस पुस्तक के कुछ गीत तो एक तरह से अजातशत्रु की काव्य रचना के मील के पत्थर बनने योग्य हैं जिनमें से एक नहीं दो नहीं पांच या सात गीत ऐसे हैं जो राव को एक बड़ा गीतकार सिद्ध कर रहे हैं।
अगर दूसरे शब्दों में कहा जाए तो जिस प्रकार नीरज जी की कविता 'ऐ भाई जरा देख कर चलो' उनकी सिग्नेचर शायरी बनी और कारवां गुजर गया भी उनकी पहचान का गीत बना। इसी प्रकार से राव अजातशत्रु के भी कई गीत इसी श्रेणी में है। लोग आश्चर्य कर सकते हैं पर मुझे लगता है कि उनकी कविता 'प्राण के संवाद' उनकी महत्वपूर्ण कविताओं में से एक बनेगी। क्या ही अद्भुत पंक्तियां हैं -देखकर व्याकुल व्यथित बेचैन धरती आज फिर बादल उतर कर आ गए हैं' । इस कविता में नीरज भी महकते हैं और बुद्धि नाथ मिश्रा भी झलकते हैं इनके गीतों में जहां डॉक्टर माहेश्वर तिवारी की सी माटी की सुगंध मिलती है तो वहीं डॉक्टर सुरेश की यायावरी भी झलकती है। इनके गीतों में देवल आशीष के गीतों की मिठास है तो डॉक्टर विष्णु सक्सेना के गीतों की सी लयात्मकता भी है। अजातशत्रु के गीतों में डॉक्टर रमानाथ अवस्थी के गीतों का बिम्ब चित्रण भी दिखता है तो वीरेंद्र मिश्र जैसी साहित्यिक वीथिका भी खुली हुई नजर आती है। कभी-कभी मुझे यूं लगता है कि उनके किसी गीत में राजेंद्र राजन जी की सामाजिक चेतना है तो कभी-कभी डॉक्टर कुंवर बेचैन जैसी सकारात्मक का बोध भी है, क्योंकि राव अजातशत्रु अभी उम्र के उस पड़ाव पर हैं जहां ना तो वह वयो वृद्ध कवि हैं और ना ही नवांकुर इनके गीतों में प्रौढ़ता है और परिपक्वता की पक्की सड़क भी। 'मैं गंगा में बहता शव हूं' कविता किशन सरोज जी की याद दिलाती है। इस गीत में अजातशत्रु ने अपने प्राण निचोड़ कर रख दिए हैं अगर यह सावधानी से काम लें तो इनका यह गीत भी इनकी पहचान का गीत बनेगा। कवि सम्मेलनों के अच्छे श्रोता इनसे इन गीतों की बार-बार सुनाने की प्रार्थना करेंगे। इनका एक और गीत मुझे इनको किशन सरोज जी के पास खड़ा दर्शाता है वह गीतत है - क्या करूं इन चिट्ठियों का।
आज मुझे बहुत खुशी है की अजात शत्रु की यह पुस्तक मेरे पास है और मैं इसे आद्योपांत पढ़ चुका हूं। आमतौर पर वर्तमान समय में किसी भी कविता की पुस्तक को पढ़ना एवरेस्ट पर बिना ऑक्सीजन के चढ़ने के बराबर है लेकिन राव आजात शत्रु की यह किताब मैं पढ़ता ही चला गया। उसकी वजह यह थी कि मैं भीतर भीतर इस किताब की कमियां ढूंढना चाहता था इसीलिए और अधिक मन लगाकर इस पुस्तक को पढ़ा लेकिन अंत में निराशा हाथ लगी और मैं हाथ मलता रह गया क्योंकि मैं इस पुस्तक के किसी भी गीत में किसी भी प्रकार की कोई भी कमी नहीं निकाल पाया।
हालांकि सौ प्रतिशत खरा कोई नहीं होता अजातशत्रु भी नहीं है, लेकिन यह भी सच है की सौ प्रतिशत पारखी भी कोई नहीं होता वह मैं भी नहीं हूँ। अजातशत्रु का गीतों के प्रति समर्पण इनको एक बड़े गीतकार के रूप में स्थापित करेगा तब मंच पर अजातशत्रु एक संचालक नहीं एक हास्य व्यंग्य कवि नहीं बल्कि एक वरिष्ठ गीतकार के रूप में समग्रता से उपस्थित होंगे।
तो होंगे चलते-चलते बस यही कहूंगा की वास्तविक कवि वही है जो यह कहे 'हम जीते ना तुम हारे'। प्रिय राव अजातशत्रु को ढेरों शुभकामनाएं और साथ ही उनकी एक और नई गीत पुस्तक की प्रतीक्षा रहेगी।

सर्वेश अस्थाना

22 मार्च को
22/03/2025

22 मार्च को

22/03/2025

निधि बाजपेयी कानपुर

1 अप्रैल 2025 को आप सादर आमंत्रित हैंकुछ स्थान आरक्षित हैं शेष पर पहले आओ पहले कब्जिआओ। शाम 5 30 से स्थान लेना शुरू कर द...
07/03/2025

1 अप्रैल 2025 को आप सादर आमंत्रित हैं
कुछ स्थान आरक्षित हैं शेष पर पहले आओ पहले कब्जिआओ। शाम 5 30 से स्थान लेना शुरू कर दें। 5 45 तक ले लें। फिर तो प्रोग्राम शुरू हो जायेगा।
आपकी प्रतीक्षा में हम सब

सब लोग कनक जैसा कनक बनने के लिए कनक हॉस्पिटल के उद्घाटन में कवियों की कनकीय कविता का आनंद लेने आइये।
07/03/2025

सब लोग कनक जैसा कनक बनने के लिए कनक हॉस्पिटल के उद्घाटन में कवियों की कनकीय कविता का आनंद लेने आइये।

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