क्षत्रिय समाज

क्षत्रिय समाज वीर भौग्य वसुन्धरा का गूंज उठा जो नारा है।
गर्व से कहो हम राजपूत है, राजपूताना हमारा है।।

जो देशभक्त जेल में अनुग्रह बाबू के चौके में खाते थे, वे जब जेल से निकले तो यह कहते निकले कि अनुग्रह बाबू सचमुच प्रांत के...
18/06/2026

जो देशभक्त जेल में अनुग्रह बाबू के चौके में खाते थे, वे जब जेल से निकले तो यह कहते निकले कि अनुग्रह बाबू सचमुच प्रांत के अर्थमंत्री पद के योग्य हैं। इस काम में उनसे कोई बाज़ी नहीं मार सकता।"-

- राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर

बिहार विभूति श्री अनुग्रह नारायण सिंह जयंती कि हार्दिक शुभकामनाएंऔऱ नमन🙏

जब राजपूत राजा प्रताप उज्जैनिया(परमार) को पटना शहर के पश्चिमी द्वार पर फाँसी दे दी गईजैसे ही शाहजहाँ को राजा प्रताप के व...
17/06/2026

जब राजपूत राजा प्रताप उज्जैनिया(परमार) को पटना शहर के पश्चिमी द्वार पर फाँसी दे दी गई

जैसे ही शाहजहाँ को राजा प्रताप के विद्रोह का पता चला, उसने क्रमशः बिहार और इलाहाबाद के राज्यपालों अब्दुल्ला खान फिरोज जंग और बाकर खान नज्म सानी को विद्रोही के खिलाफ एक साथ मार्च करने का आदेश जारी किया। गोरखपुर के जागीरदार फिदाई खान और मुंगेर के फौजदार मुख्तार खान को भी भोजपुर पर चढ़ाई करने का आदेश दिया गया। हालाँकि, राजा प्रताप इलाहाबाद और बिहार के राज्यपालों की संयुक्त सेनाओं का मुकाबला नहीं कर सके, हालाँकि उन्होंने कड़ा प्रतिरोध किया। मुजफ्फर खान और फरीदुन बेग, जबरदस्त खान (एक मुगल सरदार) के दो बेटे किले के चारों ओर के बगीचे की दीवार में सेंध लगाने में सफल रहे।

त्रिबाक, कलूर और दस अन्य छोटे किलों पर विजय प्राप्त करने के बाद साम्राज्यवादियों ने भोजपुर के मुख्य किले की घेराबंदी कर दी। घेराबंदी अभियान छह महीने तक जारी रहा लेकिन उज्जैनिया के राजा ने प्रतिरोध जारी रखा और फरीदुन बेग और मुजफ्फर खान को मार डाला। हालांकि, प्रावधानों की कमी के कारण किले के अंदर की स्थिति गंभीर हो गई। हताशा में, राजा ने भागने का प्रयास किया लेकिन सफल नहीं हो सका। चूंकि अब कोई प्रतिरोध संभव नहीं था, इसलिए उसने अपने आदमियों को अब्दुल्ला खान फिरोज जंग के पास भेजा और शांति का अनुरोध किया। एक विवरण के अनुसार, उसने खुद को एक लंगोटी में बदल दिया और अपनी पत्नी का हाथ पकड़कर, वह सीधे अब्दुल्ला खान के पास समझौता करने के लिए पहुंचा। रास्ते में, उसे गिरफ्तार कर लिया गया और बाद में उसके सामने पेश किया गया। अब्दुल्ला खान ने तुरंत सम्राट को विद्रोह के दमन, भोजपुर की विजय और राजा प्रताप और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी के साथ-साथ अभियान के दौरान जब्त किए गए छत्तीस हाथियों और पचास घोड़ों और अन्य कीमती सामानों की रिपोर्ट भेजी। रिपोर्ट पढ़ने के बाद सम्राट ने राजा प्रताप को फाँसी देने का आदेश दिया। राजा को पटना ले जाया गया और संभवतः पश्चिमी द्वार पर फाँसी शहर के दे दी गई।

Singh Abhishek

राम मंदिर से चढ़ावा चोरी की परत दर परत खुल रही .. ट्रस्ट के महासचिव  चंपत राय, सदस्य अनिल मिश्रा के अलावा संघ के एक पदाध...
16/06/2026

राम मंदिर से चढ़ावा चोरी की परत दर परत खुल रही .. ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, सदस्य अनिल मिश्रा के अलावा संघ के एक पदाधिकारी है जिनका का नाम दबी बुजान से अयोध्या, कारसेवकपुरम और साकेत निलयम की आबो हवा में तैर रहा.. और वह भाई साहब कोई और नहीं क्षेत्रीय संपर्क प्रमुख (पूर्वी उत्तर प्रदेश) मनोज जी है । मनोज जी भाई साहब ने अपने संपर्क वाले दायित्व का एकदम सही और सटीक इस्तेमाल किया… चढ़ावा चोरी में कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आ रही है और 50 के संख्या में कर्मचारी संदेह के दायरे है । मनोज जी भाई साहब ने पहले अपने संपर्को का इस्तेमाल कर चंदा राशि की गड़ना करने वालो में अपने जान पहचान वालो की नियुक्त करवाई । मनोज जी भाई साहब की सिफारिश पर नियुक्त कर्मचारियों का नाम कुछ इस तरह है ।
1.लवकुश मिश्रा
2.अनुकल्प मिश्रा
3. शिवम् पांडेय
4.आशीष दूबे
और एक बैंक का कर्मचारी भी इन लोगों के साथ इस इस कुकर्म में सम्मिलित था
5.रत्नेश चतुर्वेदी (SBI)

ये सभी लोग अभी चढ़ावा चोरी मामले में संदेह के घेरे में है, तो SIT को ये भी जाँच करनी चाहिए की ये जो कर्मचारी चोरी में संलिप्त पाए गए है उनकी नियुक्ति किसने किया था और किसके रिकमेण्डेशन पर इनको नौकरी पर रखा गया था.
सबसे मजे की बात है ये संपर्क प्रमुख मनोज जी भाई साहब राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य नहीं है लेकिन इनका संपर्क केन्द्र अयोध्या है और उन्होंने अयोध्या में भारी मात्रा में संपर्क कर दिया , इतना संपर्क नहीं करना था भाई साहब ।

विनम्र श्रद्धांजलि बिहार के लाल सुशांत सिंह राजपूत को
14/06/2026

विनम्र श्रद्धांजलि बिहार के लाल सुशांत सिंह राजपूत को

भारत के महान निशानेबाज एवं प्रशिक्षक जस्पाल राणा जी के असामयिक निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है।भारतीय खेल जगत में उनका यो...
12/06/2026

भारत के महान निशानेबाज एवं प्रशिक्षक जस्पाल राणा जी के असामयिक निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है।
भारतीय खेल जगत में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें एवं शोकाकुल परिजनों को यह दुःख सहन करने की शक्ति दें।
भावपूर्ण श्रद्धांजलि 😥🙏🙏

बुंदेलखंड के राजपूतों का इतिहास राजस्थान के राजपूतो जितना ही गौरवशाली  है इतिहास गवाह है कि दिल्ली सल्तनत से लेकर मुगलों...
05/06/2026

बुंदेलखंड के राजपूतों का इतिहास राजस्थान के राजपूतो जितना ही गौरवशाली है
इतिहास गवाह है कि दिल्ली सल्तनत से लेकर मुगलों तक, जब-जब भी मुस्लिम शासकों ने बुंदेलखंड पर कब्जा किया, कुछ ही दिनों बाद राजपूत वीरों ने अपनी तलवार के दम पर उन्हें खदेड़कर इसे वापस स्वतंत्र करा लिया लेकिन वामपंथी इतिहासकार मुसलमानों की सिर्फ जीत बताते हैं लेकिन कब राजपूतो ने उन्हें हराकर भगा दिया वह हमें नहीं पढ़ाया जाता
एक उदाहरण 👇
​1202-1203 ई. में कुतुबुद्दीन ऐबक ने चंदेल राजा परमर्दिदेव को हराकर कालिंजर पर कब्जा कर लिया था तुर्कों को लगा कि उन्होंने बुंदेलखंड जीत लिया।

​लेकिन कहानी यहाँ खत्म नहीं हुई! 🚩

​परमर्दिदेव के वीर पुत्र राजा त्रिलोक्यवर्मन ने हार नहीं मानी। उन्होंने एक साल बाद ही 1203-1205 के बीच 'काकाददह' के युद्ध में तुर्कों को बुरी तरह खदेड़ा और कालिंजर व पूरे बुंदेलखंड पर दोबारा सनातन का परचम लहरा दिया।

​अजयगढ़ के शिलालेखों में त्रिलोक्यवर्मन की तुलना 'भगवान विष्णु' से की गई है, जिन्होंने तुर्कों के आक्रमण रूपी दलदल से इस धरती को बाहर निकाला था।

​( प्रसिद्ध इतिहासकार एच.सी. राय की पुस्तक 'Dynastic History of Northern India'👇👇

सूर्यवंश की बैस शाखा के कुलदीपक, कन्नौज के महान अधिपति, लिच्छवी गणराज्य की वंश परंपरा से आने वाले, एवं कुम्भ को उसके वर्...
02/06/2026

सूर्यवंश की बैस शाखा के कुलदीपक, कन्नौज के महान अधिपति, लिच्छवी गणराज्य की वंश परंपरा से आने वाले, एवं कुम्भ को उसके वर्तमान स्वरूप में प्रतिष्ठित करने वाले महादानवीर सम्राट हर्षवर्धन बैस जी को उनकी जयंती पर शत-शत नमन।

उनका जीवन क्षात्र तेज, उदारता और भारतीय संस्कृति की रक्षा का अनुपम उदाहरण है।

#क्षत्रिय🚩
#क्षत्रिय_सम्राट_हर्षवर्धन_बैस

भारत में क्रिकेट को समझना हो तो सिर्फ स्कोरबोर्ड मत देखिए, लोगों की आँखों में देखिए।यह वह देश है जहाँ एक चौका किसी गरीब ...
28/05/2026

भारत में क्रिकेट को समझना हो तो सिर्फ स्कोरबोर्ड मत देखिए, लोगों की आँखों में देखिए।

यह वह देश है जहाँ एक चौका किसी गरीब बच्चे के चेहरे पर मुस्कान ला देता है, और एक छक्का करोड़ों लोगों के भीतर दबे सपनों को कुछ पल के लिए उड़ान दे देता है। यहाँ क्रिकेट केवल खेल नहीं, सामूहिक भावना है एक ऐसा उत्सव जिसमें पूरा देश अपनी उम्मीदें डाल देता है।

शायद इसी कारण भारत में क्रिकेटर सिर्फ खिलाड़ी नहीं बनते, वे अपने समय के प्रतीक बन जाते हैं। कभी Sunil Gavaskar, Kapil Dev, Sachin Tendulkar, Virender Sehwag, Sourav Ganguly, Rahul Dravid, MS Dhoni, Yuvraj Singh, Virat Kohli और Rohit Sharma जैसे नाम समय-समय पर करोड़ों लोगों की भावनाओं के प्रतीक बने।

आज वैभव सूर्यवंशी को खेलते हुए लगा कि समय फिर किसी नए चेहरे को चुन रहा है।

29 गेंदों में 97 रन…

यह सिर्फ तेज बल्लेबाज़ी नहीं थी, यह उस बिहार की घोषणा थी जहाँ दशरथ मांझी जैसे लोग अकेले पहाड़ तोड़ देते हैं। वैभव ने भी मानो रिकॉर्डों की दीवार तोड़ दी सबसे ज्यादा छक्के, सबसे तेज स्ट्राइक रेट, प्लेऑफ में कम गेंदों पर अर्धशतक… उसकी बल्लेबाज़ी में एक अजीब सी निर्भीकता थी। ऐसा लग रहा था मानो वह दुनिया को बता रहा हो कि उम्र अनुभव का प्रमाण हो सकती है, लेकिन साहस का नहीं।

रिकॉर्ड बनना और टूटना इतिहास का नियम है, लेकिन कुछ खिलाड़ी ऐसे होते हैं जो रिकॉर्ड तोड़ने के लिए ही पैदा होते हैं।
वैभव सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि करोड़ों मिडिल क्लास परिवारों की आकांक्षाओं का चेहरा है। वह यह विश्वास दिलाता है कि साधारण परिस्थितियों से निकलकर भी असाधारण बना जा सकता है।

✍️ अभिषेक कुमार सिंह

अब तो आईना की तरह साफ़ है आल्हा उदल खाटी राजपूत है उनका अहीर ग्वालों से कोई लेना देना नहीं है😎दसराज की 1 पत्नी बसदेव परि...
25/05/2026

अब तो आईना की तरह साफ़ है आल्हा उदल खाटी राजपूत है उनका अहीर ग्वालों से कोई लेना देना नहीं है😎

दसराज की 1 पत्नी बसदेव परिहार की बेटी दिवाला परिहार जो कि परिहार राजपूत थी उनके 2 बच्चे हुए आल्हा और उदल

दासराज का 1 अहीर औरत से भी बच्चा था जिसका नाम चौरा था

परमाल ने पूरे भारत पर विजय प्राप्त की। पहला शहर जिस पर उसने विजय प्राप्त की वह बुंदेलखंड का महोबा था, जिसके राजा बासदेव परिहार थे। बासदेव का एक पुत्र माहिल और तीन पुत्रियाँ थीं— मइना (जिन्हें पद्मिनी भी कहा जाता था), दिवाला और तिलका। परमाल ने मइना से विवाह किया और माहिल के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार किया, लेकिन माहिल ने अपने पिता के विजेता को कभी क्षमा नहीं किया और वह उसके अंतिम पतन का कारण बना। वह इस पूरी कथा-चक्र का खलनायक है।

चन्देल प्रथा के अनुसार, परमाल के पास राजपूतों की बानाफर जनजाति के दो वफादार सेवक थे। उनके नाम दसराज और बछराज थे। दसराज को उसने अपनी साली दिवाला विवाह में दी, और बछराज को तिलका। इन विवाहों से, दसराज के दो पुत्र हुए— आल्हा और (काफी छोटे) ऊदल, तथा बछराज का एक पुत्र हुआ, मलखा। दसराज का एक अहीर महिला से एक और पुत्र था, जिसका नाम चौंरा या चौंड़ा था। उसके जन्म के समय उसे नदी में छोड़ दिया गया था, जहाँ से उसे दिल्ली के पृथ्वीराज चौहान ने उठा लिया और गोद ले लिया, और जब वह बड़ा हुआ, तो उसे अपनी सेना में एक कमान (पद) सौंप दी। इस प्रकार हम उसे, अंतिम तबाही (युद्ध) में, अपने सौतेले भाइयों आल्हा और ऊदल के खिलाफ लड़ते हुए पाते हैं। दसराज की एक पुत्री भी थी, जिससे सीहा नाम का पुत्र हुआ।

क्षत्रिय (बनाफर कुल ) शिरोमणि महान वीर योद्धा आल्हा जी की जयंती पर उन्हें कोटी कोटी नमन 🙏

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