28/05/2026
भारत में क्रिकेट को समझना हो तो सिर्फ स्कोरबोर्ड मत देखिए, लोगों की आँखों में देखिए।
यह वह देश है जहाँ एक चौका किसी गरीब बच्चे के चेहरे पर मुस्कान ला देता है, और एक छक्का करोड़ों लोगों के भीतर दबे सपनों को कुछ पल के लिए उड़ान दे देता है। यहाँ क्रिकेट केवल खेल नहीं, सामूहिक भावना है एक ऐसा उत्सव जिसमें पूरा देश अपनी उम्मीदें डाल देता है।
शायद इसी कारण भारत में क्रिकेटर सिर्फ खिलाड़ी नहीं बनते, वे अपने समय के प्रतीक बन जाते हैं। कभी Sunil Gavaskar, Kapil Dev, Sachin Tendulkar, Virender Sehwag, Sourav Ganguly, Rahul Dravid, MS Dhoni, Yuvraj Singh, Virat Kohli और Rohit Sharma जैसे नाम समय-समय पर करोड़ों लोगों की भावनाओं के प्रतीक बने।
आज वैभव सूर्यवंशी को खेलते हुए लगा कि समय फिर किसी नए चेहरे को चुन रहा है।
29 गेंदों में 97 रन…
यह सिर्फ तेज बल्लेबाज़ी नहीं थी, यह उस बिहार की घोषणा थी जहाँ दशरथ मांझी जैसे लोग अकेले पहाड़ तोड़ देते हैं। वैभव ने भी मानो रिकॉर्डों की दीवार तोड़ दी सबसे ज्यादा छक्के, सबसे तेज स्ट्राइक रेट, प्लेऑफ में कम गेंदों पर अर्धशतक… उसकी बल्लेबाज़ी में एक अजीब सी निर्भीकता थी। ऐसा लग रहा था मानो वह दुनिया को बता रहा हो कि उम्र अनुभव का प्रमाण हो सकती है, लेकिन साहस का नहीं।
रिकॉर्ड बनना और टूटना इतिहास का नियम है, लेकिन कुछ खिलाड़ी ऐसे होते हैं जो रिकॉर्ड तोड़ने के लिए ही पैदा होते हैं।
वैभव सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि करोड़ों मिडिल क्लास परिवारों की आकांक्षाओं का चेहरा है। वह यह विश्वास दिलाता है कि साधारण परिस्थितियों से निकलकर भी असाधारण बना जा सकता है।
✍️ अभिषेक कुमार सिंह