क्षत्रिय समाज

क्षत्रिय समाज वीर भौग्य वसुन्धरा का गूंज उठा जो नारा है।
गर्व से कहो हम राजपूत है, राजपूताना हमारा है।।

21/08/2026

25 दिन के अंदर बिहार सारण से 3 राजपूत देश के लिए शहीद हुए हैं

24 जुलाई को छपरा के भगवानपुर बाजार के अजय कुमार सिंह
16 अगस्त को दाउदपुर के बंगरा गांव के सुधांशु शेखर सिंह
कल सोनपुर के दरियापुर शिकारपुर गांव के नवीन सिंह

बाबर अपनी बाबरनामा में राणा सांगा और हिंदुओं के बारे में लिखता है कि इस्लाम के क्षेत्रों में लगभग 200 शहरों पर काफिरों क...
20/08/2026

बाबर अपनी बाबरनामा में राणा सांगा और हिंदुओं के बारे में लिखता है कि इस्लाम के क्षेत्रों में लगभग 200 शहरों पर काफिरों का वर्चस्व था, उनमें मस्जिदें व तीर्थस्थल खंडहर बन गए थे।

बाबर ने राणा सांगा, रावल उदय सिंह, मेदनी राय, नरपत हाड़ा, धर्मदेव, वीर सिंह देव आदि राजाओं के नाम लिखे है और ये सभी क्षत्रिय थे।

बाबर लिखता है की क्षत्रिय ही हिंदुओं को बचा रहे है और निरंतर युद्ध कर रहे है अन्यथा हम मुगल कबका हिंदुस्तान को मुस्लिम देश बना देते !

लड़े क्षत्रिय ,,मरे क्षत्रिय , जौहर करे क्षत्राणियां फिर भी कुत्तों भौंकते है की क्षत्रियों ने क्या किया !

पता नहीं वह कौनसे चूजे है जिन्हें क्षत्रियों में बुराई दिखाई देती है !

19/08/2026

1962 ई. के भारत-चीन युद्ध के हीरो .. ीनी_सैनिकों को 72 घंटे तक भूखे-प्यासे रोककर रखने वाले अपने पोस्ट को अकेले ही रक्षा करने वाले अकेले ही 300 चीनी सैनिकों को मारने वाले 4th गढ़वाल राइफल के देवभूमि उत्तराखंड के लाल वीर जवान राइफल मैन ंत_सिंह_रावत_जी को नमन रहेगा..।। 👏❣️🚩

जय हिंद..भारत माता की जय ..।। 🇮🇳

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सुभद्र कुमारी चौहानसुभद्रा चौहान का जन्म उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के निहालपुर गाँव में एक राजपूत परिवार में हुआ था। उन्...
16/08/2026

सुभद्र कुमारी चौहान

सुभद्रा चौहान का जन्म उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के निहालपुर गाँव में एक राजपूत परिवार में हुआ था। उन्होंने शुरुआत में प्रयागराज के क्रॉस्थवेट गर्ल्स स्कूल में पढ़ाई की, जहाँ वह महादेवी वर्मा से वरिष्ठ थीं और उनकी मित्रता थी और 1919 में मिडिल-स्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण की। उन्होंने शादी कर ली। 1919 में खंडवा के ठाकुर लक्ष्मण सिंह चौहान, जब वह सोलह वर्ष की थीं, जिनसे उनके पांच बच्चे हुए। उसी वर्ष खंडवा के ठाकुर लक्ष्मण सिंह चौहान के साथ विवाह के बाद, वह मध्य प्रांत के जुब्बुलपुर (अब जबलपुर) चली गईं।

घोड़े गाड़ी की सवारी करते हुए लिखने के लिए जानी जाती थी सुभद्रा

उन्होंने कम उम्र से ही लिखना शुरू कर दिया था। वह कम उम्र से ही एक उत्साही लेखिका थीं और स्कूल जाते समय घोड़े की गाड़ी की सवारी करते हुए भी लिखने के लिए जानी जाती थीं। उनकी पहली कविता 9 साल की उम्र में प्रकाशित हुई थी।

सुभद्रा का अनुकरणीय कार्य साहित्य के पुरुष-प्रधान युग के दौरान प्रमुखता से बढ़ा। सुभद्रा एक प्रसिद्ध कवयित्री थीं और उनकी विचारोत्तेजक राष्ट्रीय कविता 'झांसी की रानी' को हिंदी साहित्य में सबसे अधिक पढ़ा जाने वाला माना जाता है।

महिलाओं की कठिनाइयों पर केंद्रित होते थे उनके गद्य व पद्य

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की एक प्रतिभागी के रूप में, उन्होंने अपने प्रभावशाली लेखन और कविताओं का इस्तेमाल दूसरों को राष्ट्र की संप्रभुता के लिए लड़ने के लिए प्रेरित करने के लिए किया। उनके पद्य और गद्य मुख्य रूप से भारतीय महिलाओं की कठिनाइयों और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उनके द्वारा पार की गई चुनौतियों पर केंद्रित थे।

1921 में, सुभद्रा कुमारी चौहान और उनके पति महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में शामिल हो गये। उन्होंने 1940 के दशक में जेल के अंदर और बाहर दोनों जगह स्वतंत्रता की लड़ाई में क्रांतिकारी बयान देना जारी रखा, कुल 88 कविताओं और 46 लघु कथाओं को प्रकाशित किया। वह नागपुर में गिरफ्तारी देने वाली पहली महिला सत्याग्रही थीं और 1923 और 1942 में ब्रिटिश शासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उन्हें दो बार जेल भेजा गया था।

वह राज्य (तत्कालीन मध्य प्रांत) की विधान सभा की सदस्य थीं। 1948 में मध्य प्रदेश की तत्कालीन राजधानी नागपुर से जबलपुर लौटते समय सिवनी, मध्य प्रदेश के पास एक कार दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई, जहाँ वह विधानसभा सत्र में भाग लेने के लिए गई थीं।

भारतीय तट रक्षक जहाज आईसीजीएस सुभद्रा कुमारी चौहान का नाम कवि के नाम पर रखा गया था। मध्य प्रदेश सरकार ने जबलपुर के नगर निगम कार्यालय के सामने सुभद्रा कुमारी चौहान की एक प्रतिमा लगाई।

6 अगस्त 1976 को, इंडिया पोस्ट ने उनकी स्मृति में एक डाक टिकट जारी किया।

16 अगस्त 2021 को, Google ने सुभद्रा कुमारी को उनकी 117वीं जयंती पर डूडल बनाकर याद किया। Google ने टिप्पणी की: "चौहान की कविता ऐतिहासिक प्रगति के प्रतीक के रूप में कई भारतीय कक्षाओं में प्रमुख बनी हुई है, जो भावी पीढ़ियों को सामाजिक अन्याय के खिलाफ खड़े होने और जश्न मनाने के लिए प्रोत्साहित करती है।" ऐसे शब्द जिन्होंने एक राष्ट्र के इतिहास को आकार दिया"।

बिहार के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्हें फाँसी की सज़ा हुई थी।सारण के शेर बाबू रामदेनी सिंहमलखाचक (सारण) के बाबू साह...
15/08/2026

बिहार के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्हें फाँसी की सज़ा हुई थी।

सारण के शेर बाबू रामदेनी सिंह

मलखाचक (सारण) के बाबू साहब रामदेनी सिंह

रामदेनी सिंह जन्म- 1904; बलिदान- 4 मई, 1932) बिहार के स्वतंत्रता सेनानी थे। सारण के दिघवारा प्रखंड का मलखाचक गांव जहाँ के बहुत कम लोग जानते हैं कि बिहार में 'इंकलाब जिंदाबाद!' 'वंदेमातरम!' 'भारत माता की जय' का जयघोष कर फांसी के फंदे को चूम कर झूल जाने वाले और कोई नहीं सारण का शेर ठाकुर रामदेनी सिंह थे। वह बिहार के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्हें फाँसी की सज़ा हुई थी।

भगत सिंह और बबुआन रामदेनी सिंह की कुश्ती

सन 1904 में दिघवारा प्रखंड के मलखाचक गांव में एक कृषक क्षत्रिय परिवार में जन्मे रामदेनी सिंह सन 1921 में ही स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े थे। तब मलखाचक गांधी कुटीर नरम दल व गरम दल के नेताओं की शरण स्थली थी। सरदार भगत सिंह 1923 में अपने साथियों सहित ‘हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' की विचारधारा को प्रसारित करने आए थे। स्वर्गीय स्वतंत्रता सेनानी लालसा सिंह ने 2003 में बताया था कि सरदार भगत सिंह और बबुआन रामदेनी सिंह की कुश्ती भी हुई थी और सरदार भगत सिंह ने उनकी बहादुरी की सराहना करते हुए उन्हें सारण का एरिया कमांडर मनोनीत कर दिया था।

लाहौर षड्यंत्र, चौराचौरी कांड, काकोरी षड्यंत्र से उद्वेलित ठाकुर रामदेनी सिंह की धमनियों का लहू उबलने लगा और अपने मित्र व वैशाली एरिया कमांडर योगेन्द्र शुक्ल के साथ मिलकर धन संग्रह की योजना बनायी ताकि उग्र राष्ट्रवादी विचारधारा को बल मिले। बहरहाल, हाजीपुर रेलवे स्टेशन ट्रेन में डाका डाला गया, गार्ड व स्टेशन मास्टर को मार कर खजाना लूट लिया गया और रकम लेकर हाजीपुर पुल पार कर सारण की सीमा में प्रवेश करना ही चाह रहे थे कि सारण व वैशाली पुलिस ने पुल के पूरब पश्चिम में घेर लिया।

लिहाजा, दोनों साइकिल सवार साइकिल सहित गंडक नदी में कूद पड़े और साइकिल सहित पटना साहिब घाट पर जा निकले। ब्रिटिश सरकार ने रामदेनी सिंह की गिरफ्तारी के लिए इनाम घोषित किया और एक ग्रामीण गद्दार की गद्दारी से गंगा स्नान कर सूर्य को अर्घ्य दे रहे रामदेनी सिंह सुरमा को जाल फेंक कर पकड़ लिया गया। जिसके बाद मुजफ्फरपुर जेल में एक विशेष अदालत गठित की गई।

मुजफ्फरपुर जेल में एक विशेष अदालत गठित की गई थी। जैसा कि प्रत्याशित ही था, अदालत ने रामदेनी सिंह को फाँसी की सज़ा देने का फैसला किया और अपील का अवसर दिये बिना ही 4 मई, 1932 को उन्हें फाँसी दे दी गई। 'भारत माता की जय' का उद्घोष कर रामदेनी सिंह ने फाँसी का फंदा चूमा था। बाद में अखाड़ा घाट, मुज्जरपुर में उनका दाह संस्कार भी कर दिया गया। खुदीराम बोस के बाद मुज्जरपुर जेल में फाँसी की सज़ा पाने वाले रामदेनी सिंह दूसरे बलिदानी थे।

यह विडंबना ही है कि रामदेनी सिंह की स्मृति को जीवित रखने की कोई कोशिश स्थानीय स्तर पर नहीं की गई। बिहार के पहले शहीद में शुमार रामदेनी सिंह की न कोई तस्वीर है उनके वंशजों के पास, न कोई समाधि।

15/08/2026

स्वतंत्रता दिवस की ढेरों सारी शुभकामनाएं।
जय हिंद

14/08/2026

राहुल गाँधी जैसा रिजेक्टेड व्यक्ति यदि एक पूरा संसद सत्र बर्बाद कर सकता है, तो यह तो निश्चित रूप आपकी कमी है।
और कांग्रेस को ठीक करने के लिए ही जनता ने आपको चुना है।
राहुल गाँधी को ना तो शर्म है और ना ही उनको देश से कोई मतलब, वह अपनी सनक में जीता है।
लेकिन आप तो जनता में जाकर तीसरी बार मेजोरिटी लाए है, आप क्या कर रहे है?

इतना बैकफुट पर जाकर कैसे गवर्नेंस होगा ?

Hit them hard like no tomorrow..

Paritosh Singh

आरक्षण की मलाई की लूट:गूजरों द्वारा स्वयं को ओबीसी से अलग कर एसटी में शामिल करने के लिये एक आंदोलन किया गया था।ओबीसी से ...
14/08/2026

आरक्षण की मलाई की लूट:

गूजरों द्वारा स्वयं को ओबीसी से अलग कर एसटी में शामिल करने के लिये एक आंदोलन किया गया था।ओबीसी से अलग होने के पीछे उनका मुख्य तर्क था कि जाटों को ओबीसी में शामिल करके 70% आरक्षण पर जाट समुदाय का कब्जा हो गया है और गूजरों को उनका हक़ नहीं मिल पा रहा है।

लेकिन एसटी में जाटों जैसी ही लाभ उठाने वाली क़ौम मीणा आड़े आ गये।वह किसी दूसरे को अपने वर्ग में कैसे आने देते।

गूजरों द्वारा गूजर बाहुल्य गाँव के पास से निकलने वाली रेल पटरियाँ उखाड़ दी गई और उस रूट का रेल यातायात पूर्णतः वाधित हो गया।

अंततः: सरकार ने एक नई तरकीब निकाली।चार अन्य जातियों के साथ गूजरों के लिए एक नई केटेगरी एमबीसी बनाकर ओबीसी से अलग 5% एक्स्ट्रा आरक्षण निर्धारित करवा कर गूजर समुदाय भी जाट और मीणा दोनों समुदायों से बच कर अलग से आरक्षण की मलाई खाने में कामयाब हो गया।

12/08/2026

अभी राम मंदिर के चढ़ावा चोरी के लिए छाती पीट रहे अखिलेश यादव और चुनावी हिन्दू बनकर घूम रहे थे। आज संसद मे बिल जो कि हिन्दुओ के हित में और देश हित में है , उसका विरोध करते हुए कह रहे हैं कि सरकार अल्पसंख्यक विरोधी है और हिन्दुओ के लिए काम करती है।

अखिलेश भैय्या ज्यादा दिनों तक हिन्दू बनकर नहीं रह सकते क्योंकि वे अंदर से हिन्दू है ही नहीं और ना ही हिन्दुओ से उनकी कोई सहानुभूति ।

#हिंदूसंस्कृती

क्षत्रियो का बौद्धिक स्तर कितना है इसका अंदाजा लगाना हो तो आप दिग्विजय सिँह और योगी जी के समर्थन से लगा सकते है |आप पुरे...
11/08/2026

क्षत्रियो का बौद्धिक स्तर कितना है इसका अंदाजा लगाना हो तो आप दिग्विजय सिँह और योगी जी के समर्थन से लगा सकते है |
आप पुरे देश के क्षत्रियो से सवाल कर लीजिये की उन्हें जाति के नेता के तौर पर दिग्विजय सिँह पसंद है या योगी जी,तय बात है की 99% क्षत्रिय योगी जी को पसंद करेंगे जय जय कार करेंगे और 90% लोग दिग्विजय सिँह को गाली देंगे|

दोनों 10 साल लगभग मुख्यमंत्री रह चुके

दिग्विजय सिँह -

1- दिग्विजय सिँह वो व्यक्ति है जिन्होंने राज्यसभा मे EwS सरलीकरण की मांग की
2- दिग्विजय सिँह ज़ब मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने टीचर, पुलिस और सचिव के पदों पर क्षत्रियो की अंधाधुंध भर्ती करवाई
3- दिग्विजय सिंह के प्रभाव के कारण ही ज़ब कमलनाथ की सरकार बनी तो उसमे 8 क्षत्रिय मंत्री बनाये गए जबकी उसके पहले भाजपा हमेशा 2 मंत्री बनाती थी |
4- दिग्विजय सिँह ज़ब राजस्थान के प्रभारी रहे तो सबसे ज्यादा सांसदी का टिकट क्षत्रियो को दिए और 2 केंद्र मे मंत्री बनवाने मे अहम भूमिका निभाई |
5- 2013 मे फ़रीदाबाद मे तबके हिसाब से 5 करोड़ की जमीन क्षत्रिय महासभा को फ्री मे दिलवाया
6- कर्नाटक मे धर्म सिँह को मुख्यमंत्री बनवाने मे योगदान दिया
7- आज भी वो इतने सहज और सरल है की कोई भी आम कार्यकता उनसे ज़ब चाहे मिल सकता है बात कर सकता है अपने काम की फरियाद कर सकता है, गांव का प्रधान भी उनसे जुडा हुआ है
8- काफ़ी क्षत्रियो को आर्थिक तौर पर राजनीतीक तौर पर आगे बढ़ाये

योगी जी -
1- क्षत्रिय महापुरुषों को वोट के लिए कभी तेली तो कभी पासी और राजभर बता देते है
2- EWS सरलीकरण छोड़िये आज तक यूपी कांस्टेबल जिसकी समान्य उम्र सीमा 22 वर्ष है उसे बढ़ा नहीँ पाए है तो EWS सरलीकरण तो दूर की बात
3- नौकरी मे किसी की पैरवी करेंगे या किसी को प्राथमिकता देंगे ये सोचना भी महा पाप है
4- क्षत्रिय महासभाओ को जमीन देंगे ये सोचने से बेहतर है की जो जमीन मिली है उसे बचाये कैसे ये सोचा जाये
5- न टिकट देते न ही किसी की पैरवी करते न ही आर्थिक तौर पर मजबूत करते
6 -कार्यकरता छोड़िये विधायक की इतनी हिम्मत नहीँ की डायरेक्ट फोन कर सके, खुद सांस रोककर बात करते है विधायक
7- आर्थिक तौर पर मजबूत करेंगे ये सोचना भी महा पाप है

लेकिन क्षत्रिय पसंद किसे करते है? योगी जी को, और गाली किसे देते है? दिग्विजय सिँह को

योगी जी हिंदुत्व के योद्धा है और दिग्विजय सिंह आरएसएस विरोधी है इसीलिए देशद्रोही धर्मद्रोही दोनों है, वो अलग बात है की दिग्विजय सिँह निजी जीवन मे अत्यधिक धार्मिक व्यक्ति है और उनकी 1993-2003 की सरकार को मिडिया तब साधु संतो की सरकार कहता था |

भाई एक क्षत्रिय को चाहिए क्या? मुल्ले टाइट रहे हिंदुत्व का परचम फहराता रहे आरएसएस के शाखा मे दंड बैठकी हो इससे ज्यादा जीवन मे क्या चाहिए? समाज और खुद का विकास तो अगले जन्म मे भी किया जा सकता है, ये जीवन हिंदुत्व आरएसएस बीजेपी के नाम.....

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