क्षत्रिय समाज

क्षत्रिय समाज वीर भौग्य वसुन्धरा का गूंज उठा जो नारा है।
गर्व से कहो हम राजपूत है, राजपूताना हमारा है।।

24/09/2026

2018–2023 के IIT, NIT और IIM के आंकड़े एक डरावना सवाल छोड़ जाते हैं सामान्य वर्ग के बच्चों की चीख आखिर कौन सुनेगा?

General के नाम पर अक्सर यह मान लिया जाता है कि इनके बच्चे सक्षम हैं, सुविधासंपन्न हैं, संभाल लेंगे लेकिन हर सामान्य वर्ग का बच्चा सुविधा में नहीं पलता…कई बच्चे किसान के घर से आते हैं, किसान मजदूर पिता की कमाई से पढ़ते हैं, अपनी पूरी जिंदगी की उम्मीद लेकर प्रतियोगिता में उतरते हैं।
अन्य संपन्न दलित पिछड़े बच्चे से ज्यादा उन सामान्य वर्ग के बच्चों पर भी असफलता का भय है, परिवार की उम्मीदों का बोझ है, फीस और भविष्य की चिंता है, और सबसे बढ़कर हर हाल में खुद को साबित करने का दबाव है और ऊपर से जातीय राजनीति में उन अभागों को सामान्य और सवर्ण बोल कर अपमानित किया जाता है EWS में मिलने वाले आरक्षण का आधार आर्थिक आधार होता है जिसके कारण उन्हें आरक्षण मिला है लेकिन उन्हें पिछड़ों और दलितों के जैसा न परीक्षा फीस कम लगती है और न ही हॉस्टल के खर्च कम होते है न जातीय स्कॉलरशिप मिलती है फिर जब वही बच्चा टूटकर चला जाता है, तो उसके आँकड़े में सिर्फ “General” लिखा रह जाता है।

उसके पीछे रोती माँ का नाम नहीं होता,
पिता की टूटी हुई कमर नहीं होती,
और उस घर का उजड़ चुका भविष्य नहीं होता।

सामाजिक न्याय जरूरी है, लेकिन सामान्य वर्ग के गरीब और दबाव में जी रहे बच्चों का दर्द भी अदृश्य नहीं होना चाहिए।

किसी बच्चे की जाति देखकर उसकी पीड़ा छोटी-बड़ी नहीं हो सकती।

Rahul Gandhi PMO India Narendra Modi

23/09/2026

इस देश के एकीकरण के लिए अगर सबसे ज्यादा क्रेडिट दिया जाना चाहिए तो वो
( "महाराजा हरि सिंह जी") को इनके त्याग और समर्पण के कारण ही आज जम्मू-कश्मीर और लदाख भारत 🇮🇳 का हिस्सा है..।।

क्षत्रिय समाज अगर जागरूक और प्रयासरत रहा तो क्षत्रियों के हर महापुरुषों को सम्मान मिलेगा..।।

परम देशभक्त महाराजा हरि सिंह जी के नाम पे केंद्र सरकार को इनके सम्मान और त्याग के खातिर दिल्ली में एक संग्राहालय बनवाना चाहिए..ताकि नई पीढ़ी को अपने देश के लिए योगदान देने वाले वीर सपूतों के बारे में रुबरु हो सकें..तब जाकर जम्मू - कश्मीर को भारत में विलय करने वाले महाराजा हरि सिंह जी को असल सम्मान मिलेगा..।।🇮🇳

भारत के असली हीरो महाराजा हरि सिंह जी को उनके जन्मजयंती पे नमन रहेगा..
आपका अग्र सोच के लिए ये देश सदा आपका ऋणी रहेगा..अमर रहें..।। 👏🌺 🇮🇳

23/09/2026

महाराजा हरि सिंह जी की जयंती पर जम्मू के राजे द्वारा भव्य शोभा यात्रा

महाराजा हरि सिंह जी की 131वीं जयंती पर शत्-शत् नमन।जम्मू-कश्मीर में शिक्षा, सिंचाई, स्वास्थ्य, सड़क एवं जनकल्याण के क्षे...
23/09/2026

महाराजा हरि सिंह जी की 131वीं जयंती पर शत्-शत् नमन।
जम्मू-कश्मीर में शिक्षा, सिंचाई, स्वास्थ्य, सड़क एवं जनकल्याण के क्षेत्र में उनके योगदान को सदैव स्मरण किया जाएगा। 1927 का State Subject कानून डोगरा समाज के अधिकारों और हितों की रक्षा की दिशा में उनके महत्वपूर्ण कदमों में से एक था।
उनका जीवन, दूरदृष्टि और जम्मू-कश्मीर के विकास के प्रति समर्पण हमारी ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
महाराजा हरि सिंह जी अमर रहें 🙏

22/09/2026

महाराजा हरि सिंह जी को उनके जयंती पर कोटि कोटि नमन 🙏

22/09/2026

बिहार ,जमुई कांड के बाद तमाम तरह के बुद्धिजीवी कह रहे है कि अपराधी की कोई जाति नही होती ।
क्या ये बुद्धिजीवी इस फार्मूले को हर अपराध में लागू कर पाएंगे?
इस कांड के आरोपी तथाकथित समाजवादी और स्वघोषित सामाजिक न्याय वाले वर्ग से है इसलिए इनकी कोई जाति नही है।
पर यही अपराध ब्राह्मण, क्षत्रिय,या सामान्य वर्ग से संबंधित किसी जाति के द्वारा होता तब अपराधी मनुवादी,सामंती हो जाते।
फिर 5000 वषों के फर्जी शोषण,उत्पीड़न के तराने गाये जाते।
गलती से अपराधी मुसलमान होता तो अभी तक उसका फुल एनकाउंटर हो चुका होता।
अपराध के मामले में समाज का सेलेक्टिव और सब्जेक्टिव होना ही अपराध को बढ़ावा देता है।

21/09/2026

गाजी मियां के पोते दामो को ये वीडियो देखना चाहिए। उसे बुंदेलखंड का सरकारी गजेटियर पढ़ना चाहिय। दामो तो ठहरा अनपढ़ इसलिए अपने कलंकित इतिहास को छुपाने के लिए दूसरों पर टिप्पणी करते रहता है।

#नोट :- दिनरात दूसरों पर टिप्पणी करनेवाले कुछ नीच लोग भूल जाते हैं उनका खुद का इतिहास कितना कलंकित रहा है, उनकी औरतों को 2 दीनार में नीलाम किया जाता था।
हमारे पास बहुत से प्रमाण है लेकिन हम नहीं डालते,लेकिन कोई अति करेगा तो उसे सच दिखाना ही होगा।

ये झोपड़ी वाला  कफील खान जब से बीआरडी मेडिकल कॉलेज  गोरखपुर से भगाया गया तब से कोई भी बच्चा वहाँ जापानी बुखार से नहीं मर...
15/09/2026

ये झोपड़ी वाला कफील खान जब से बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर से भगाया गया तब से कोई भी बच्चा वहाँ जापानी बुखार से नहीं मरता है।

ये वहाँ जब रहता था तब , आक्सीजन बंद कर बच्चो को मार देता था।

दिव्या की दिव्य शक्तियाँ!दिव्या दीदी जी की पत्रकारिता में इन दिनों एक नई दिव्य शक्ति प्राप्त हुई है—योगी जी को देखकर उनक...
13/09/2026

दिव्या की दिव्य शक्तियाँ!

दिव्या दीदी जी की पत्रकारिता में इन दिनों एक नई दिव्य शक्ति प्राप्त हुई है—योगी जी को देखकर उनके मन की बात पढ़ लेने की शक्ति!
योगी जी इनको देख कर डर गए, नहीं दीदी बिल्कुल नहीं आप डरावनी थोड़ी ही हो जो वो डरेंगे.
रही मुस्कराहट की बात तो किसी ने कहा था की "smile is very dangerous" तो दीदी आपके चिल्लाने की तुरंत बाद कोई भी मुस्कराहट के साथ आपकी कुटिलता के भाव को देख सकता हैं.

दिव्या जी, एक दिन पहले आपका सवाल था कि छोटे पत्रकारों को रस्सी के घेरे में क्यों रखा जाता है। बस एक छोटी-सी जानकारी: सुरक्षा प्रोटोकॉल नाम की भी कोई चीज होती है। मुख्यमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था किसी पत्रकार को छोटा-बड़ा बताने के लिए नहीं, सुरक्षा जोखिमों को ध्यान में रखकर होती है। प्रेस कॉन्फ्रेंस और सार्वजनिक कार्यक्रम की सुरक्षा व्यवस्था को एक ही तराजू पर तौलना भी पत्रकारिता नहीं है।

और फिर आती है वह महान पत्रकारिता की डिग्री वाली दलील।
उत्तर प्रदेश में हजारों पत्रकारों के पास पत्रकारिता की डिग्री है। क्या मुख्यमंत्री की कुर्सी के पास उतनी ही कुर्सियाँ लगा दी जाएँ? 😄
वहाँ बैठे कई पत्रकार आपसे वर्षों वरिष्ठ हैं। सवाल डिग्री का नहीं, मौके, मर्यादा और पत्रकारिता के विवेक का है।

जहाँ तक मुख्यमंत्री की प्रेस वार्ता का सवाल है, कार्यक्रम समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री के मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम का अपना प्रोटोकॉल होता है। ऐसे में आखिरी क्षण में टोका-टोकी को लेकर बनाई गई पूरी कहानी को देखकर लगता है कि घटना छोटी थी, लेकिन नैरेटिव की दिव्य शक्ति बहुत बड़ी थी।

अब आते है आपकी निष्पक्षता पर,

राहुल गांधी को जन्मदिन की शुभकामना, अखिलेश यादव को जन्मदिन की शुभकामना—बिल्कुल दीजिए, हो सकता है दीदी ये वाली पोस्ट डिलीट अब कर दे इसलिए स्क्रीनशॉट्स लगा दिया हूँ, इसमें कोई समस्या नहीं की अखिलेश यादव संसद में बोलें तो शेर की तरह दहाड़ने वाला विशेषण भी दीजिए। पर अपने को निष्पक्षता वाली बात मत बोलिए, समाजवादी पार्टी के नए पोस्टर बॉय लक्ष्मण यादव और आप वाले संजय सिंह से आपके अति मधुर संवाद आपकी निष्पक्षता की गवाही दे रहे है,
लेकिन फिर उसी सोशल मीडिया पर यह दावा भी कि हम पूरी तरह निष्पक्ष हैं, हमारा किसी राजनीतिक विचारधारा से कोई झुकाव नहीं है, तो पाठक को सवाल पूछने का अधिकार तो दीजिए।
निष्पक्षता का दावा करने से निष्पक्षता सिद्ध नहीं होती, आपकी पूरी सार्वजनिक पत्रकारिता देखकर पाठक खुद निष्कर्ष निकालता है।

और सबसे मजेदार बात—योगी आदित्यनाथ जी को डराने की कहानी!

योगी जी को सवालों से डरने वाला बताने से पहले उनके सार्वजनिक इंटरव्यू और राजनीतिक जीवन का इतिहास देख लेना चाहिए। वामपंथी पत्रकारिता के आप लोगो के भगवान एनडीटीवी वाले प्रणव रॉय, the print वाले शेखर गुप्ता या अंजुम साहेब के वाले सारे इंटरव्यू इंटरनेट पर भरे पड़े है योगी जी कठिन से कठिन मुद्दों पर खुलकर जवाब दिए हैं। जिन्हें आपके ही पसंदीदा पत्रकार अक्सर सपाट, बेबाक और बिना लाग-लपेट बोलने वाला नेता बताते रहे हैं, उन्हीं योगी जी के बारे में अचानक यह नैरेटिव कि वे एक सवाल से डर गए—कुछ जमता नहीं।

योगी जी निडर थे। निडर हैं। निडर रहेंगे।

उनकी सबसे बड़ी खूबी यही है कि उन्हें अपनी बात कहने के लिए किसी पत्रकार से डरने की जरूरत नहीं है और किसी पत्रकार को अपनी बात कहने से रोककर अपनी राजनीति चलाने की भी जरूरत नहीं है।

बाकी दिव्या जी की दिव्य शक्तियाँ अपनी जगह हैं।
वह मुस्कुराहट पढ़ सकती हैं, मन पढ़ सकती हैं, डर पढ़ सकती हैं और शायद मुख्यमंत्री के मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम में भी छिपी राजनीतिक साजिश पढ़ सकती हैं।

हम साधारण लोग हैं।
हम तो बस इतना जानते हैं—पत्रकार सवाल पूछे, नेता जवाब दे और दोनों के बीच का फैसला वीडियो देखने वाला दर्शक करे।
न कि पत्रकार खुद सवाल भी बनाए, फैसला भी सुनाए और फिर अपनी ही कहानी को पत्रकारिता का प्रमाणपत्र भी दे दे। 😄 

08/09/2026

प्रशासनिक अधिकारी से जन्माष्टमी के दिन की घटना के सच्चाई सुनिए, ग्वाला प्रधान पहले अंबेडकर जी की मूर्ति लगाकर जमीन कब्जा करना चाहता था जब नहीं हो पाया तो जन्माष्टमी के नाम पर कब्जाने की कोशिश किया।
जब प्रशासन रोक लगाई तो ये ग्वाला खुद चबूतरा तोड़ा प्रसाद फेका ओर सनातन धर्म के खिलाफ नारा लगाया।
अब सिंपैथी के लिए ठाकुरों को बदनाम कर रहा है जिनका कोई लेनादेना नहीं है इस घटना से।

#सुल्तानपुर के पलहीपुर गांव में जन्माष्टमी के दिन सरकारी जमीन पर चबूतरा बनाने, प्रसाद सड़क पर फेंकने और धार्मिक उन्माद फैलाने के आरोपों को लेकर प्रधान प्रतिनिधि और उनके सहयोगियों के उप्पर मुकदमा दर्ज हुआ है। प्रशासन के अनुसार राजस्व एवं पुलिस की संयुक्त जांच के बाद सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की गई है।

लेकिन सवाल यह है कि क्या हर प्रशासनिक कार्रवाई को जातीय संघर्ष का रूप देकर समाज को बांटना ही राजनीति रह गई है?

#सुल्तानपुर प्रशासन से मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए। किसी भी व्यक्ति को जाति या राजनीतिक प्रभाव के नाम पर कानून से ऊपर नहीं रखा जाना चाहिए।

#नोट :- Akhilesh Yadav इतना गिर गया है कि अपने स्वजातीय गुंडों का पक्ष ले कर झूठी अफवाह फैला रहा है, ये लोग भगवान को भी बदनाम कर रहे हैं।
ऐसा व्यक्ति मुख्यमंत्री के लायक ही नहीं है।

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