श्री राम राज्य मिशन

श्री राम राज्य मिशन सनातन धर्म की रक्षा और देश में राम राज्य की स्थापना के लिए क्रियाशील

राम राज्य आखिर क्या है? आजतक के समस्त शासन काल और पद्धतियों में सर्वश्रेषठ शासन काल और शासन पद्धति का नाम है ‘‘राम राज्य’’। लेकिन ऐसा क्या है राम राज्य में, कि वह सभी के लिए आदर्श व्यवस्था आजतक बनी हुयी है। भारतीय मनीषी और विद्वानों का ही नही बल्कि विश्व के समस्त विद्वान इस बात में एकमत हैं कि ‘‘रामराज्य’’ एक आदर्श शासन व्यवस्था है। केवल भूलोक के लिए ही नहीं अपितु देवलोक के लिए भी रामराज्य एक सु

खद और आकर्षक शासन व्यवस्था है। यही कारण है कि समस्त देव गण भी श्री राम के राज्य में मनुष्य रूप धारण कर उनके प्रजाजन और परिजन बनने से अपने आपको रोक नहीं पाए। आखिर ऐसी क्या सुखद स्थिति है रामराज्य में कि देवलोक और स्वर्ग के आनंदो को छोड़ देवगण और मरुद गण भी रामराज्य में प्रजाजन बनकर आ जाते हैं? रामराज्य में कोई जीवन स्तर नागरिकों का सुविधाओं में हो ऐसा भी नही था। क्योंकि शासक से शासित तक सभी कामगार और मजदूर श्रेणी के प्रजाजन भी थे। कोई व्यक्ति स्वच्छंद घूमता हो ऐसा भी नही था। या आज तेजी से स्त्री स्वतंत्रता के नाम पर नग्न प्रदर्शन को मौज मस्ती कह प्रचारित कर रहे हैं ऐसी भी कोई छूट नही थी। लोग खूब धनवान हों ऐसा भी नही था।
फिर क्या था आखिर ऐसा ? यही सर्वाधिक विचारणीय विषय है। तो रामराज्य का अर्थ हम अपने भाषा विज्ञान और संधि विच्छेद के वैज्ञानिक एवं प्रमाणिक तरीके से ही देखते है। ‘‘रामराज्य’’=राम का राज्य = रअअमअ रअअमअ अर्थात जो रमा हुआ है सभी के। उसका अर्थ हुआ कि ऐसा राज्य जो सभी के अन्दर रमा हुआ है। अर्थात यह प्राकृतिक, जन्मजात और सभी के रमा हुआ मतलब अन्दर तक घर किया हुआ हो ऐसा राज्य। राम प्रतीक हैं सभी के अन्दर धारण किये धर्म के, राम प्रतीक है प्राकृतिक न्याय के, राम प्रतीक है अटल सत्य के। तो धर्म के राज्य, न्याय के राज्य और सत्य के राज्य को कहते हैं राम राज्य। क्योंकि कि यह समस्त लोक के कल्याण का है इसलिए पुर्णतः वास्तविक लोकतंत्र भी केवल और केवल मात्र ‘‘राम राज्य’’ ही है। प्रजाजनों का एक भी व्यक्ति चाहे वह कर्म से मात्र शूद्र ही हो सीधा राजा से धर्म, न्याय में अपनी बराबरी की ही अपेक्षा रखता है। राजा प्रजाहित में किसी भी निर्णय के लिए पूर्णतः स्वतन्त्र है किन्तु स्वयं के व्यक्तिगत फैसले में पूर्णतः धर्म और न्याय की मर्यादाओं में जकड़ा हुआ है। राजा का चरित्र एकदम पारदर्शी एवं सर्वथा अनुकरणीय है। राजा हर तरह से प्रजा के लिए मापक है वह आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श मित्र, आदर्श पति, आदर्श शत्रु,आदर्श छात्र, आदर्श पिता हैं इसीलिए वह आदर्श राजा भी होता है। वह स्वयं शासन करता है, लेकिन ईश्वर के प्रतिनिधि के रूप में। और यदि कभी कोई शंका उत्पन्न भी हो मन में तो उन ऋषियों से परामर्श करता है जो हर तरह से उस उत्पन्न परिस्थिति से निर्लिप्त और निरपेक्ष हैं। राजा से न भय खाते हैं और न ही प्रभावित होते हैं। इसलिए इतने वर्षो बाद भी आज देश का हर नागरिक चाहता है कि देश में रामराज्य स्थापित हो। देश की सभी राजनैतिक पार्टियाँ भी हर चुनाव में जनता को रामराज्य का स्वप्न दिखाती है। हर पार्टी रामराज्य स्थापित करने का वादा भी करती है। आजादी के आन्दोलन में तो देश की जनता से रामराज्य स्थापित करने के नाम पर ही समर्थन जुटाया था। गांधी जी की हर सभा व हर काम राम के नाम से शुरू होता था। गांधीजी द्वारा प्रस्तुत भजन ‘‘रघुपति राघव राजा राम’’ आज भी जन जन की जुबान पर है। जनता द्वारा रामराज्य की कामना और नेताओं द्वारा रामराज्य स्थापित करने की बात करने से साफ है कि यह आज के सभी राजनेता भी मानते हैं कि शासन पद्धतियों में रामराज्य सर्वश्रेष्ठ आज भी है। एक ऐसी राजतंत्र शासन पद्धति जिसमें जनता को सभी लोकतांत्रिक अधिकार प्राप्त हो, जनता का राजा से सीधा संवाद हो, जातिगत व्यवस्था होने के बावजूद कोई जातिगत भेदभाव नहीं हो, सभी के मूलभूत अधिकारों व सुरक्षा के लिए राजा व्यक्तिगत रूप से प्रतिबद्ध हो, राज्य के संसाधनों पर सभी नागरिकों का समान अधिकार हो, श्रेष्ठ तो होगी ही। रामराज्य की परिकल्पना के मुख्य तत्त्वों पर प्रकाश डालेंगे तो पायेंगे कि सत्य एवं विश्वसनीयता, जन-समुदाय की इच्छा जानकार कार्य करना, लोकमत के अनुसार शासन-प्रशासन का संचालन करना तथा दुष्ट प्रकृतिजनों का विनाश करना आदि तत्व स्वतः नजर आयेंगे। स्पष्ट है कि सभी को न्यायसम्मत व्यवस्था देने, सुखमय शासन देने, सुरक्षित जीवन-प्रणाली उपलब्ध कराने, लोकतान्त्रिक कार्यव्यवस्था बनाये रखने का नाम ही रामराज्य है। तभी तो आज लोग रामराज्य का स्वप्न देखते है।
लेकिन वर्तमान राजनेता सिर्फ रामराज्य के नाम पर लोगों की धार्मिक भावनाओं का, लोगों के स्वप्न का दोहन करते हुए सिर्फसत्ता पाना चाहते है और सत्ता मिलने के बाद रामराज्य की बजाय ‘‘रावण राज्य’’ (भय और आतंक का राज जिसमें स्वयं राजा का भाई भी स्वतंत्र नही तो आम प्रजाजन की तो बात ही क्या करें) का अनुसरण करते है। अतः ऐसी परिस्थियों में हम क्षत्रियों का दायित्त्व है कि हम जनता की भावना के अनुरूप अपने आपको वास्तविक नेतृत्व के काबिल बनाकर जनता का नेतृत्व करते हुए रामराज्य की स्थापना की और कदम बढायें और जनता का रामराज्य पाने का स्वप्न पूरा कर अपने क्षात्र धर्म का निर्वहन करें। आज चूँकि हर क्षत्रिय अपने आपको नेतृत्व के काबिल समझता है पर ऐसे व्यक्ति को नेतृत्व के लिए आगे आने या इच्छा मात्र रखने से पहले उसे अपने आपका स्वयं अवलोकन करना चाहिए कि क्या वो वास्तविक नेतृत्व के काबिल है? वास्तविक नेतृत्व क्या होता है?
कैसा होता? इसकी जानकारी स्वर्गीय कुं.सा.आयुवान सिंह जी शेखावत हुड़ील ने अपनी पुस्तक ‘‘राजपूत और भविष्य’’ में ‘‘वास्तविक नेतृत्व’’ अध्याय में बहुत ही विस्तृत तरीके से दी है जिसका हर क्षत्रिय को अध्ययन कर अपनी स्वयं की नेतृत्व क्षमता का विश्लेषण करना चाहिए और यदि कोई कमी है तो उसे दूर कर अपने आपको वास्तविक नेतृत्व के रूप में प्रस्तुत करना चाहिए।
स्व.आयुवान सिंह जी के अनुसार- ‘‘जब हम पतन और उत्थान के संधि स्थल पर खड़े होकर उत्थान के मार्ग पर अग्रसर होने को पैर बढ़ाते हैं तब हमें सहसा जिस प्रथम आवश्यकता की अनुभूति होती है, वह है योग्य नेतृत्व।हालाँकि ‘‘योग्य नेतृत्व स्वयं प्रकाशित, स्वयं सिद्ध और स्वयं निर्मित्त होता है।’’ फिर भी सामाजिक वातावरण और देश-कालगत परिस्थितियां उसकी रूपरेखा को बनाने और नियंत्रित करने में बहुत बड़ा भाग लेती हैं।“ रामराज्य की स्थापना के लिए हमें वास्तविक नेतृत्व तैयार करने हेतु हमें स्व.आयुवान सिंह जी के शोध एवं आदरणीय महार साहब की तपस्या के अनुसार गुरुकुलों में पाठ्यक्रम तैयार कर वास्तविक नेतृत्व के लिए क्षत्रिय युवाओं को तैयार करना होगा । जिनकी वास्तविक विचारधारा में समाज के सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा, क्षात्र धर्म का पालन करते हुए सिद्धांतों पर चलने के गुण, समाज के आखिरी व्यक्ति तक के प्रति पीड़ा, ध्येय व वचन पर दृढ़ता, अनुशासन, दया, उदारता, विनय, क्षमा के साथ सात्विक क्रोध, स्वाभिमान, संघर्षप्रियता, त्याग, निरंतर क्रियाशीलता आदि स्वाभाविक क्षत्रिय गुण मौजूद हो। ऐसा ही योग्य क्षत्रिय समाज व देश का नेतृत्व कर रामराज्य स्थापित कर देश व जनता को सही दिशा दे सकता है।अतः हमें अपने गुरुकुलों को अध्ययन एवं प्रशिक्षण प्राप्त ऐसे क्षत्रिय जिन्हें स्वयं श्री राम के मर्यादित गुणों की झलक होगी के तैयार होने पर हमारे द्वारा स्थापित या प्रचलित राजनितिज्ञों की टीम जो अबतक रामराज्य की ओर से ‘‘भरत राज्य’’ यानि ‘‘रामचरण पादुका’’ राज्य चला रहे थे स्थान रिक्त कर ‘‘रामराज्य’’ के लिए तैयार किये गए वास्तविक नेतृत्व को धीरे धीरे पदस्थापित करती जाएगी।
वास्तविक नेतृत्व की पहला स्नातक बेच वासुदेव श्री कृष्ण की कृपा रही तो सन 2039 में राष्ट्र को समर्पित होगा जिसमे सम्भवतः 50 हजार से 1 लाख स्नातक क्षत्रिय हर वर्ष समर्पित होंगे। तो सन 2049 तक 5 से 10 लाख वास्तविक नेतृत्व वाले क्षत्रिय राष्ट्र और समाज के लिए समर्पित हो चुके होंगे और ‘‘भरत राज्य’’ मंे शासन सम्भालनंे वाले सभी महानुभव अवकाश ग्रहण कर चुके होंगे। और तब जो श्री क्षत्रिय वीर ज्योति मिशन से जुड़े महारथी होंगे वे सन्यास गृहण कर पूरी तरह निर्लिप्त, निरपेक्ष, भय रहित और बिना प्रभावित हुए वनों में स्थान लेंगे तथा ‘‘रामराज्य’’ के शासकों को केवल माँगने पर यथा योग्य मार्ग दर्शन देंगे।

शेखावत क्षत्रिय वंश के संस्थापक वीर योद्धा महाराव शेखा जी के महानिर्वाण दिवस पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।
19/04/2026

शेखावत क्षत्रिय वंश के संस्थापक वीर योद्धा महाराव शेखा जी के महानिर्वाण दिवस पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।

11/04/2026

एकदम 👍 सटीक

11/04/2026

श्री राम राज्य मिशन पूरी तरह राष्ट्रीय अध्यक्ष राजऋषि जी के साथ है ।
🙏

02/04/2026

अंग्रेजी माध्यम शिक्षा के नाम पर यूँ लुट रहे हैं अभिभावक और हो रहा है बच्चों का भविष्य ख़राब
बता रहे हैं मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजऋषि राजेन्द्रसिंह नरुका

Kshatriya Rajendra Singh Naruka

01/04/2026
31/03/2026

कछवाह राजवंश पर परिचर्चा में राजऋषि राजेन्द्रसिंह जी नरुका का उदबोधन
#रामराज्य Kshatriya Rajendra Singh Naruka

29/03/2026

रामनवमी की संध्या पर महाराज सूर्यसेन कछवाह द्वारा स्थापित ग्वालियर में माँ जमवाय की महा आरती ।
जय रघुनाथजी ।
जय माँ जमवाय

Kshatriya Rajendra Singh Naruka GCPA News Namita Barman Ratan Roy Gcpa        #रामराज्य
13/03/2026

Kshatriya Rajendra Singh Naruka
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#रामराज्य

08/03/2026

यूजीसी के विघटनकारी नियमों के खिलाफ विरोध करने पर राजऋषि जी को गिरफ्तार किया गया।
Kshatriya Rajendra Singh Naruka

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