Raja Ror Sewa Dal - राजा रोड़ सेवा दल

Raja Ror Sewa Dal - राजा रोड़ सेवा दल Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Raja Ror Sewa Dal - राजा रोड़ सेवा दल, Community Organization, Kurukshetra.

राजा रोड़ सेवा दल (R.R.S.D.) रोड़ समाज का एक सामाजिक संगठन है। सेवा दल द्वारा व्यक्तिगत व निजी राजनैतिक स्वार्थ सिद्ध नहीं किये जाते, हमेशा बिरादरी हित का ही प्रयास किया जाता है। रोड़ बिरादरी के प्रत्येक व्यक्ति का सेवा दल के पेज पर स्वागत है। जय राजा रोड़

आदरणीय बंधुवर प्रणाम,  क्षत्रिय रोड़ समाज सभी क्षेत्रों में अपनी गौरवमयी मौजूदगी दर्ज़ करवा रहा हैं। शायद ही ऐसा कोई क्ष...
29/04/2026

आदरणीय बंधुवर प्रणाम, क्षत्रिय रोड़ समाज सभी क्षेत्रों में अपनी गौरवमयी मौजूदगी दर्ज़ करवा रहा हैं। शायद ही ऐसा कोई क्षेत्र होगा जिसमें रोड़ समाज ने परचम नहीं लहराया हो। विशेषकर खेल के क्षेत्र में तो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी - बड़ी उपलब्धि हासिल कर अपने आप को खास और विशेष साबित कर रहा है। इसके इतिहास और अस्तित्व से संबंधित सन 1208 से लेकर आज 2026 तक के सारे प्रमाण मौजूद होने के बावजूद भी कुछ स्वार्थी, बेसुरे और सिर फिरे लोग, रोड़ समाज को हम सभी के आदरनीय हिंदू सम्राट छत्रपति शिवाजी महाराज की आड़ लेकर नाहक "म**ठा" जैसी संज्ञा देकर गुमनामी के अंधेरों में धकेलने का काम करते रहते हैं।
पिछले 25 साल से नई पीढ़ी को बरगलाकर, पम्पीस्तान पर बैठकर अपने मराठी काका से लिखवाए 22 पृष्ठिय मनगढंत इतिहास को समाज का इतिहास बताकर एक विशेष ब्रांड रोड़ जैसी मार्शल कौम का अस्तित्व खतरे में डाल दिया गया है। धर्म बदलते दुनिया सुनी और देखी थीं परंतु यहां तो असंभव होने वाला कार्य, डी एन ए और जाति को ही बदलने के अनूठे और अचंभित करने वाले प्रयास किए जा रहे हैं जबकि यह सभी शिक्षित लोगों को पता है कि यह कन्वर्जन असंभव है।
जय राजा रोड़।
ओम ततसत।।
अधिक जानकारी के लिए पढियेगा रोड़ समाज के बारे में चौ. ईश्वर सिंह मैहला द्वारा लिखा गया एक संकलन...
https://www.amazon.in/Anthology-Ror-Caste-Northern-Uttarakhand/dp/B0C5FJFKQR

आदरणीय बंधुवर प्रणाम,       रोड़ समाज के प्रतिष्ठित और पंजीकृत सामाजिक संगठन की मासिक बैठक क्षत्रिय रोड़ धर्मशाला कुरुक्...
15/04/2026

आदरणीय बंधुवर प्रणाम,
रोड़ समाज के प्रतिष्ठित और पंजीकृत सामाजिक संगठन की मासिक बैठक क्षत्रिय रोड़ धर्मशाला कुरुक्षेत्र में दिनांक 12 अप्रैल 2026 दिन रविवार को बाद दोपहर बुलाई गई, जिसमें रोड़ समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर गंभीरता से विस्तार पूर्वक चर्चा की गई थी। इन मुद्दों में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा संगठनात्मक संरचना का रहा। जिससे कि संगठन का विस्तार करते हुए, प्रत्येक क्षेत्र के लोगों को संगठन की प्रभावशाली सामाजिक सोच के साथ जोड़ते हुए अमुक क्षेत्र विशेष के कर्मठ लोगों को संगठन में प्रतिनिधित्व देते हुए समाज से जुड़े मुद्दों को ज्यादा से ज्यादा महत्व दिया जा सके।
आज दिनांक 15 अप्रैल 2026 दिन बुधवार को राष्ट्रीय कार्यकरिणी की संस्तुति पर इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए, सर्वश्री आदरणीय " चौधरी पदम सिंह जी रोड़" निवासी लाखनौर (उत्तर प्रदेश) को सर्वसम्मति से उत्तर प्रदेश राज्य के प्रधान जैसे गरिमापूर्ण पद की जिम्मेदारियां दी जाती हैं। साथ ही साथ उनको स्वतंत्र रूप से उत्तर प्रदेश राज्य की कर्मठ और समर्पित कार्यकारिणी गठित करने की ज़िम्मेदारी भी दी जाती है। जिससे कि आखिरी से आखिरी छोर पर बैठे रोड़ समाज के व्यक्ति तक संगठन की पहुंच बनाकर रोड़ समाज को नई दिशा दी जा सके। हमें आशा ही नहीं सम्पूर्ण विश्वास है कि आदरणीय चौधरी पदम सिंह जी रोड़ अपनी सामर्थ्य /विवेक अनुसार बेहतरीन से बेहतरीन समाज को देने का हर सम्भव प्रयास करेंगे।
जैसा कि सर्वविदित है कि "राजा रोड़ सेवा दल" पिछले दस साल से अपने लिखित संविधान के अनुरूप ही कार्य करने के लिए जाना जाता है। राजा रोड़ सेवा दल की सारी शक्तियां किसी व्यक्ति विशेष में निहित न होकर उसके अपने लिखित संविधान में निहित हैं। सभी आदरणीय पदाधिकारियों को संविधान के दायरे में रहकर सामाजिक हितों से जुड़ी गतिविधियों को उनके असली मुकाम तक पहुंचाना होता है। राजा रोड़ सेवा दल में पद, प्रतिष्ठा और पैसा की चाह रखने वाले लोगों के लिए कतई कोई स्थान नहीं है। यूं कहिए कि निस्वार्थ भाव से कार्य करने वालों को भरपूर सम्मान दिया जाता है।

ना है कोई जल्दबाजी,
ना है कोई मरोड़,
ना है किसी से होड़,
हम हैं राजा रोड़।।

जय राजा रोड़।
ओम तत्सत।।

आदरणीय बन्धुवर प्रणाम,       आज आटा - साटा प्रथा को लेकर एक वीडियो सुना तो ऐसा लग रहा था जैसे वह भाई इस प्रथा को लेकर आट...
08/04/2026

आदरणीय बन्धुवर प्रणाम,
आज आटा - साटा प्रथा को लेकर एक वीडियो सुना तो ऐसा लग रहा था जैसे वह भाई इस प्रथा को लेकर आटा - साटा करने वाली जातियों, कबिलों का परिहास कर रहा हो। अक्षर परिहास वही लोग करते हैं जो असल में आटा - साटा प्रथा के पीछे लुप्त हुए गौरवशाली इतिहास से बिल्कुल अनभिज्ञ हैं या फिर झेम्प मिटाने के लिए असली इतिहास जानना ही नहीं चाहते। 500 ईस्वी से लेकर 1600 ईस्वी तक मुस्लिम आक्रनताओं ने अन्य धर्म और जाति के लोगों पर अनंत जुल्म ढहाये जिनको कलमब्द करते हुए हाथ काँपने लगते हैं।
जिन जातियों ने मुस्लिम आक्रनताओं की गुलामी स्वीकार कर डोले देने शुरू कर दिए, यूं कहिये कि उनके साथ अपने सामाजिक रिश्ते जोड़ लिए, वह बड़ी - बड़ी रियासतों और अथाह चल - अचल सम्पत्ति के मालिक बन गए थे बाकी जिन जातियों, समुदाय और कबिलों ने मुस्लिम आक्रनताओं / शासकों की अधीनता स्वीकार नहीं की, यूं कहिये कि डोले नहीं दिए और मुस्लिम धर्म नहीं अपनाया वह विरोधस्वरुप लड़ते - लड़ते घुमन्तु कबिले और जातियों में परिवर्तित हो गएँ। घटती आबादी के कारण, दहेज़ रूपी दानव से निपटने के लिए, तलाक जैसी नामुराद बीमारी से निपटने के लिए, कालांतर में इन लोगों ने आमने - सामने रिश्ते करके अर्थात आटा - साटा प्रथा अपना कर अपने डी. एन. ए को शुद्ध रख कर सामाजिक ताने - बाने को बरकरार रखा।
प्राचीन भारतीय इतिहास में इसका सबसे बड़ा उदाहरण सन 1208 में दिल्ली रियासत के मुग़ल शासक क़ुतुबदीन ऐबक ने बादली रियासत के शासक राजा रोड़ माहिलबाग से डोला माँगा तो उसने साफ मना कर युद्ध जैसी विभीषिका को स्वीकार कर हार का सामना करते हुए, स्थान छोड़ना ज्यादा ऊचित समझा। इससे सबक लेते हुए, इसी तर्ज़ पर अन्य हिंदूँ शासकों ने भी मुस्लिम शासकों का विरोध करना शुरू कर दिया था।
जिन - जिन जातियों में आटा - साटा प्रथा व्याप्त थी और आज भी व्याप्त है आप यूं कह सकते हैं कि उनके पूर्वज तलवार के सामने झुके नहीं, गर्दन कटवानी मंजूर हुई पर आतातायी लोगों से रिश्ते मंजूर नहीं किये। आप सभी अपने आस - पास निगाह मार कर देख लें। उन जाति कबिलों से किसी एक व्यक्ति ने भी मुस्लिम धर्म को नहीं अपनाया। इस त्रासदी से तो आमने - सामने रिश्ते स्थापित करना अर्थात आटा - साटा प्रथा अपनाना कई लाख गुणा बेहतर था। यध्यपि आधुनिक युग में अधिकतर समाज के लोगों ने इस प्रथा का त्याग कर दिया है क्यूंकि आजकल यह प्रथा एक अभिशप्त प्रथा बनकर रह गई है। जिसमें मजबूर लोगों को भी समय अनुसार बहुत अधिक बदलाव करना अति आवश्यक है।
जय राजा रोड़।
ॐ तत्सत।।

आदरणीय बन्धुवर प्रणाम,      क्षत्रिय रोड़ समाज का रजिस्टर्ड और पंजीकृत संगठन "राजा रोड़ सेवा दल" अपने रोड़ समाज के वीर  सैन...
22/03/2026

आदरणीय बन्धुवर प्रणाम,
क्षत्रिय रोड़ समाज का रजिस्टर्ड और पंजीकृत संगठन "राजा रोड़ सेवा दल" अपने रोड़ समाज के वीर सैनिक सपूत स्वर्गीय मेजर मलखान सिंह ख़शबर रोड़वंशी को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए नमन करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता है। उनका जीवन काल (25 जुलाई 1943 – 17 मार्च 2026) तक रहा जो हम सभी के लिए प्रेरणा श्रोत है। 🇮🇳
हरियाणा के करनाल जिले के गाँव शामगढ़ में एक साधारण रोड़ किसान परिवार से उठकर भारतीय सेना में मेजर जैसे सम्मान जनक पद को सुशोभित कर देश सेवा की उमदा मिसाल कायम की। उनका पूरा जीवन अनुशासन, परिश्रम, आत्मसम्मान और देशभक्ति से ओत - प्रोत रहा। उन्होंने न केवल देश की सेवा की, बल्कि अपने परिवार और समाज को भी सही दिशा देने में बहुमूल्य योगदान दिया।सेवानिवृत्ति के बाद भी वे समाज और क्षत्रिय रोड़ समाज के इतिहास के प्रति समर्पित रहे और जीवन के अंतिम क्षण तक एक सच्चे सैनिक की तरह मजबूत बने रहे। उनके जीवन के संदेश हमेशा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेंगे।
आदरणीय स्व. मेजर मलखान सिंह ने देश प्रेम के चलते सैन्य सेवा को चुनकर एक अच्छा मुकाम हासिल किया। रोड़ समाज के इतिहास की खोज के लिए उन्होंने अपना कीमती समय, उस वक़्त दिया जब हमारे समाज के शिक्षित और प्रथम पंक्ति के लोग इतिहास जैसे गंभीर विषय पर मौन धारण किये हुए थे। उन्होंने अपनी पुस्तक को इंग्लिश भाषा में निर्भीकता से लिखा ताकि आने पीढ़ियां और दूसरी भाषा जानने वाले ज्यादा से ज्यादा लोग रोड़ समाज के गौरवशाली अतीत को जान सकें।
उनके अपने ही पड़ोस में लिखी जा रही 22 पृष्ठी झूठी थ्योरी का पर्दाफाश कर दिया। बिना किसी स्वार्थ के लिए इतिहास लिखने के लिए साक्ष्य इकट्ठे करना ही एक बड़ी उपलब्धि है फिर उसको कलमबद्ध कर पुस्तक का स्वरूप देना एक बेजोड़ उपलब्धि है। उन साक्ष्यओं को कसौटी पर कसना पाठको पर छोड़ दिया जाता है।
"राजा रोड़ सेवा दल" की इतिहास पर काम करने वाली टीम ने उनसे बहुत कुछ सीखा, जिससे वह इस क्षेत्र में बहुत आगे बढ़ पाई। इतिहास जैसे के विषय में सम्भावनाओं का विशेष स्थान रहता है जिसको वह तर्को के आधार पर आसानी से मंजूर भी कर लिया करते थे। आज उनसे प्रेरणा लेकर सैकड़ों युवा इतिहास के क्षेत्र में शोध कर अपना सही मुकाम हासिल कर रहे हैं। ऐसे महान व्यक्तित्व को शत-शत नमन और एक बार पुनः विनम्र श्रद्धांजलि।
जय हिंद 🇮🇳 |
ॐ शांति ॐ 🙏
अर्थात हमें अपने स्वाभिमानी पूर्वजों पर गर्व है।
जय राजा रोड़।
ॐ तत्सत।।

आदरणीय बन्धुवर प्रणाम,    क्षत्रिय रोड़ समाज की आम सभा को बदनाम करने का कुछ भटके हुए, भाईयों ने ठेका ले लिया, ऐसा प्रतीत ...
18/03/2026

आदरणीय बन्धुवर प्रणाम,
क्षत्रिय रोड़ समाज की आम सभा को बदनाम करने का कुछ भटके हुए, भाईयों ने ठेका ले लिया, ऐसा प्रतीत होता है। क्या हम अपने समाज में अच्छी नीतियों और कुरीतियों पर चर्चा भी ना करें ? क्षत्रिय रोड़ समाज को मनगडन्त झूठी थ्योरी के दम पर जाति बदलने के लिए जबरदस्ती दबाव बनाया जा रहा है जो कि अत्यंत दुःखद है।पिछले 25 साल से रोड़ बिरादरी के लोगों को झूठी मराठा थ्योरी को लेकर बरगला रहे हैँ। पिछले दस सालों में इतिहास पर बहुत काम हुआ हैँ। अभी रोड़ इतिहास के हजारों सबूत मौजूद हैं। दर्जनों पुस्तकें लिखी जा चुकी हैं।
सन 1208 से तो सारे तथ्य/ सबूत मौजूद हैं परन्तु ये मानने के लिए तैयार ही नहीं हैं। समय समय अन्य समाजों में रोड़ समाज का जुलुस निकालकर रख दिया हैँ। फंडिंग खाने के चक्र में रोड़ समाज को तबाह कर दिया हैँ।
हर बार, हर एक चुनाव में उतरकर रोड़ बिरादरी को हासिये पर ला खड़ा कर दिया हैँ। राजनैतिक लोग मौन क्यूँ हैं समझ से परे हैं? शायद वह इनको वोट बैंक समझ बैठे हैं।समस्त रोड़ समाज को सरेआम सोशल मीडिया और भौतिक रूप से गालियां देकर विभिन्न संज्ञा देकर नवाज रहे हैँ।
गजब तो देखिये इनके सामाननंतर हरियाणा का आदरणीय धानक समाज भी अपने आप को पानीपत की तीसरी लड़ाई 1761 से जोड़कर देखता हैँ जिसके सभी प्रमाण मौजूद हैं मराठा लाइट इन्फेन्टरी इसका सबसे बड़ा प्रमाण है। फिर इस इतिहास में इन नकलियों का क्या रह जाता है ? अपने आप को बुद्धि जीवी कहने वाले आर्य समाज के कुछ मुठी भर लोग इनको गाहे - बगाहे प्रोमोट करते रहते हैं जिससे इन भटके हुए लोगों के होंसले बढ़ जाते हैं।
रोड़ बिरादरी की हर एक सामाजिक मीटिंग को अनपढ़ बाउंसरों के दम पर खराब करते हैं। अभी समय आ गया हैँ कि इनका सामाजिक बहिष्कार करना होगा। बहुत हो चूका अभी रोड़ वंश से सहा नहीं जाता। आखिर कब तक इन शर्म प्रूफ लोगों से भाईचारा निभाएंगे ? राजा रोड़ सेवा दल समस्त रोड़ समाज और अखिल भारतीय रोड़ महासभा से पूरजोर अपील करता है कि इस नासूर बन चुके "गुम्मड" का सर्जिकल ओप्रशन आप सभी को एक साथ मिलकर करवाना ही होगा अन्यथा बहुत देर हो जाएगी।

जय राजा रोड़।
ॐ तत्सत।।

आदरणीय बन्धुवर प्रणाम,सोशल मीडिया पर खोजते हुए कुछ लोग रोड़ समाज के कर्मठ, प्रतिष्ठित और पंजीकृत संगठन "राजा रोड़ सेवा दल"...
07/03/2026

आदरणीय बन्धुवर प्रणाम,

सोशल मीडिया पर खोजते हुए कुछ लोग रोड़ समाज के कर्मठ, प्रतिष्ठित और पंजीकृत संगठन "राजा रोड़ सेवा दल" के विषय में उत्सुकतावश बहुत कुछ जानना चाहते हैं। इस विषय में "राजा रोड़ सेवा दल" सार्वजनिक रूप से कई बार अपनी स्तिथि स्पष्ट कर चूका है। सर्वप्रथम आदरणीय "अखिल भारतीय रोड़ महासभा" के भंग होने के चलते 2016 में "राजा रोड़ सेवक संघ" के नाम से संगठन खड़ा करने के प्रयास किये गए, जिसके बैनर तले लगभग दो साल काम किया गया। क्यूंकि सामाजिक, राजनैतिक रूप से रोड़ समाज की सुध लेने और उसके हितों की आवाज़ उठाने वाला कोई भी संगठन एक्टिव नहीं था।
रोड़ समाज की आदरणीय "रोड़ एम्प्लॉय एसोसिएशन" नामक संस्था अवश्य थी लेकिन वह भी सरकारी सेवा नियमों में बंधे होने और कुछ अन्य विशेष कारणों के चलते निष्क्रिय ही थी। इसलिए 2018 के अंत में रजिस्ट्रेशन करवाने की जरुरत महसूस हुई, किसी भी सामाजिक संगठन को रजिस्टर्ड करवाने के लिए तीन नाम प्रस्तावित किये जाने आवश्यक होते हैं जिनमें एक नाम " राजा रोड़ सेवा दल" भी था। इस प्रकार सन 2019 के शुरू में "राजा रोड़ सेवा दल" पंजीकृत हुआ।
"राजा रोड़ सेवा दल" अपने आप को रोड़ समाज का तीन नम्बर का संगठन मानता है। क्यूंकि "अखिल भारतीय रोड़ महासभा" और "रोड़ एम्प्लॉय एसोसिएशन" हमारे आदरणीय बुजुर्गों द्वारा ख़डी की गई दोनों संस्था हम सभी की आदरणीय संस्थाएं हैं। "राजा रोड़ सेवा दल" अपनी दोनों संस्थाओं का प्रतिद्वंदी कतई नहीं है। लेकिन अपनी दोनों आदरणीय संस्थाओं का परस्पर सहयोग करते हुए, बहुत कुछ आशा और अपेक्षा जरूर रखता है।
"राजा रोड़ सेवा दल" अपने रोड़ समाज के सामाजिक अस्तित्व और राजनैतिक हितों की रक्षा करने के लिए वचनबद्ध है। इसके साथ - साथ अपने रोड़ समाज में फैली कुरीतियों, बुराईयों और भ्रान्तियों को मिटाने पर काम करने में अटूट विश्वास रखता है। जरुरत पड़ने पर, बिना किसी प्रचार - प्रसार और दिखावे के अपने रोड़ समाज की अपने दम पर अपनी सामर्थ्य अनुसार हर सम्भव मदद करने का आदि है। विदित रहे "राजा रोड़ सेवा दल" सदस्यता शुल्क 100 रूपए के अलावा किसी से भी कलेक्शन नहीं करता है। सदस्यता शुल्क 100 रुपया वापसी का भी प्रावधान / विकल्प है। खास और विशेष बात यह है कि "राजा रोड़ सेवा दल" संगठन का अपना लिखित संविधान है। राजा रोड़ सेवा दल की सारी सीमाएँ/ शक्तियाँ किसी व्यक्ति विशेष में ना होकर उसके संविधान में निहित हैं। "राजा रोड़ सेवा दल" फर्म एंड सोसाइटी एक्ट 2012 के अधीन ही अपनी सभी क्रियाओं को अमल में लाता है। "राजा रोड़ सेवा दल" में किसी पद, प्रतिष्ठा और पैसे (PPP) की चाह रखने/दिखावा करने वाले के लिए कोई स्थान नहीं है।

जय राजा रोड़।
ॐ तत्सत।।

आदरणीय बन्धुवर प्रणाम,      रोड़ समाज का प्रतिष्ठित और समर्पित संगठन "राजा रोड़ सेवा दल" इस बात को लेकर चिंतित है कि समस्त...
05/03/2026

आदरणीय बन्धुवर प्रणाम,
रोड़ समाज का प्रतिष्ठित और समर्पित संगठन "राजा रोड़ सेवा दल" इस बात को लेकर चिंतित है कि समस्त रोड़ समाज के बी.जे.पी के प्रति समर्पण भाव के बावजूद लोकसभा और राजयसभा के सदस्य चुनने के लिए टिकट वितरण में अनदेखी क्यूँ की जा रही है ? बी. जे. पी में ऐसा कौन सा नेता है जो हमारी अनदेखी कर और करवा कर यूज एंड थ्रो की नीति पर काम कर रहा है।
पिछले लम्बे समय तक रोड़ समाज का शोषण कांग्रेस पार्टी करती रही है। यूं कहिये कि आजादी से लेकर आज तक उसने एक बार भी लोकसभा या राज्य सभा का टिकट रोड़ समाज के नेताओं को देने की जहमत नहीं उठाई। लगता है उसी तर्ज़ पर बी. जे. पी भी काम कर रही है जो अत्यंत पीड़ादायक है।
समस्त रोड़ समाज द्वारा लोकदल का खुलल्म खुला साथ देने पर, लोकदल जैसी क्षेत्रीय पार्टी ने भी क्रमशः 1984 और 1991में चौधरी देवी सिंह कल्याण (कुटेल )और चौधरी रणजीत सिंह (कालखा) को लोकसभा का टिकट देकर रोड़ समाज का मान - सम्मान बढ़ाया था। हरियाणा में दस विधानसभा और दो लोकसभा, उत्तर प्रदेश में दो विधान सभा और एक लोकसभा, उत्तराखंड में भी दो विधान सभा और एक लोकसभा कुल 14 विधान सभाओं और चार लोकसभा क्षेत्रों में अपना निर्णायक प्रभाव रखने वाले और लगातार दो दशक से बी. जे. पी का साथ देने पर, रोड़ समाज को एक लोकसभा और एक राज्यसभा का टिकट तो बी. जे. पी को भी देकर मान - सम्मान देना चाहिए।
राजा रोड़ सेवा दल पूरजोर यह मांग करता है कि सभी राजनैतिक दल रोड़ समाज की अनदेखी बन्द करें अन्यथा परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें। लोग हमारे ऊपर तोहमत लगाएंगे कि हम जातिवादी हैं जबकि ऐसा कतई नहीं है। दूसरा जग बदल रहा युग बदल रहा, हम बदले क्या नई बात ? ऐसा भी नहीं है कि हमारे रोड़ समाज के पास अनुभवी, वरिष्ठ कार्यकर्ता और नेता नहीं हैं। अपनी - अपनी पार्टी से जुड़े रोड़ समाज के उन नेताओं का तो मुंह बंद रखना बनता भी है लेकिन "राजा रोड़ सेवा दल" निडरता और बेबाकी से अपने रोड़ समाज के नेताओं, समाज के राजनैतिक अस्तित्व और उसकी हर एक जायज मांग और हितों के लिए संघर्ष करने का आदि है। समस्त रोड़ समाज हर एक समाज और उसके राजनेता का सम्मान करता रहा है और यह आशा भी रखता है कि वह भी रोड़ समाज को सम्मान दें। लेकिन कुछ राजनेता लोग रोड़ समाज को कम आंकते हुए, खुद के जातिवादी होने के सबूत प्रस्तुत कर रहे हैं। जो आप सभी के सामने है शायद किसी व्यक्ति विशेष का नाम लेने और कहने की जरुरत नहीं है। ये पब्लिक है सब जानती है। यदि ऐसा ही चला तो कांग्रेस जैसी हालात होने में ज्यादा वक़्त नहीं लगेगा।
रोड़ समाज एक राष्ट्रवादी कौम है जो अपने देश की आन - बान - शान के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। जो विभिन्न क्षेत्रों में देश का नाम रोशन कर चुकी है। आशा है समस्त राजनैतिक दल हमारे अनदेखी रूपी दर्द को समझते हुए रोड़ समाज और उसके नेताओं को लोकसभा / राज्यसभा में भेजकर ऊचित सम्मान प्रदान करेंगे।
जय राजा रोड़।
ओम तत्सत।।

सभी देशवासियो को happy होली...
04/03/2026

सभी देशवासियो को happy होली...

03/03/2026

गाँव कौल में प्रख्यात बाहुबली राजा रोड़ सम्राट धज की प्रथम पाषाण प्रतिमा की स्थापना।

आदरणीय बंधुवर प्रणाम, आप सभी को जानकर अति प्रसन्नता होगी कि आज दिनांक 03/03/2026को रोड़ समाज की राजधानी नाम से प्रख्यात ग...
02/03/2026

आदरणीय बंधुवर प्रणाम, आप सभी को जानकर अति प्रसन्नता होगी कि आज दिनांक 03/03/2026को रोड़ समाज की राजधानी नाम से प्रख्यात गांव कौल में बस अड्डे के सामने चौंक पर, राजा रोड़ सम्राट धज की सिंघासन पर विराजमान पाषाण प्रतिमा स्थापित की गई है। आज से यह चौंक "राजा रोड़ चौंक" के नाम से जाना जायेगा।
इस पुनीत कार्य के लिए रोड़ समाज का प्रतिष्ठित संगठन "राजा रोड सेवा दल" आदरणीय विधायक पुण्डरी श्री सतपाल जी जाम्बा, कैथल जिला परिषद अध्यक्ष श्री कर्मवीर जी सगवाल, कौल गाँव के सरपंच श्री नरेश जी आढ़ती एवंम समस्त ग्राम पंचायत कौल, सर्वश्री रामपाल जी सगवाल (कौल) हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष राजा रोड़ सेवा दल, समस्त कौल गाँव के निवासियों और तमाम रोड़ बिरादरी के समर्पित/ सहयोगी बन्धुओं का तहदिल से आभार व्यक्त करता है जिनके अथक प्रयासों से हमारे द्वारा कई दशक पहले से देखा गया लंबित यह बहु प्रतिक्षित सपना साकार हुआ है।
रोड़ समाज के रजिस्टर्ड और रोड़ समाज को समर्पित संगठन "राजा रोड़ सेवा दल" के पास आप सभी की स्तुति के लिए शब्द नहीं हैं। यू कहिये कि आप सभी की स्तुति में शब्द बौने प्रतीत हो रहे हैं। यह ऐतिहासिक पल हम और आप सभी के गौरवान्वित करने वाला है। इस स्वाभिमान और अस्तित्व की जंग में सफलता प्राप्त करने के लिए आप सभी बधाई के पात्र हैं।
जय राजा रोड़।
ॐ तत्सत।।

आदरणीय बन्धुवर प्रणाम,    पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया पर कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा रोड़ समाज के अस्तित्व पर सवाल खड़े क...
28/02/2026

आदरणीय बन्धुवर प्रणाम,
पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया पर कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा रोड़ समाज के अस्तित्व पर सवाल खड़े करते हुए, नकली इतिहास को प्रमोट किया जा रहा है। राजा रोड़ सेवा दल पिछले दस सालों से अपने स्तर पर बहुत से प्रमाण प्रस्तुत कर चूका है। राजा रोड़ सेवा दल के अलावा इतिहास में रूचि रखने वाले रोड़ समाज के शुभचिंतक, शिक्षित और बुद्धिजीवी साथियों ने भी झूठी थ्योरी को शुरू से ही सिरे से ख़ारिज किया है।
यहाँ अंधे के आगे रोइये अपने नयन खोइये वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। मौका मिलते ही ये अपना राग अलापने लगते हैं। अनपढ़ और गँवार तो माफ़ी के पात्र भी हैं लेकिन हमारे कुछ भाई शिक्षित और मामलों की समझ रखने के बावजूद भी इन्हीं की तरह सोशल मीडिया पर, इनकी हाँ में हाँ मिलाते हुए कदम ताल करने लगते हैं जिससे इनके झूठ और होंसले को बल मिलता है। पिछले 25 साल से यही कुछ चल रहा है।
पिछले दस सालों में इतिहास के क्षेत्र में बहुत अधिक काम हुआ, राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर पर बहुत सा धन खर्च करके बहुत से लिखित साक्ष्य एकत्रित किये गए। बहुत सी खोज भी हुई, कुछ भाईयों ने सरकारी गजटियर और रिकार्ड्स को खंगाला। प्रोफ़ेसर स्तर के भाईयों ने साक्ष्यों को कोट करते हुए सैकड़ों पुस्तकें लिख डाली। ये भाई अभी भी वही 2001 वाला राग अलाप रहे हैं।
सबूत और प्रमाण तो इन नकली लोगों को देने चाहिए ये सबूत और प्रमाण रोड़ वंशियों से मांगने लगते हैं। सबूत देने पर मौन हो जाते हैं थोड़े से अर्से बाद फिर एक्टिव हो जाते हैं। नई जनरेशन को बरगलाने लगते हैं जिससे सामाजिक भाई चारे की बहुत बड़ी हानि होती है। अखिल भारतीय रोड़ महासभा को आगे आकर इस मुद्दे को सदा के लिए समाप्त करना चाहिए। कबूतर द्वारा आँख बन्द कर लेने से बिल्ली का खतरा टल नहीं जाता। बहुत हो चूका। लगता है, अब रोड़ बिरादरी इस सामाजिक अत्याचार को नहीं सह पाएगी। इनको अलग - थलग करना ही एकमात्र विकल्प बचा है। जबकि विघटन को कतई सही नहीं ठहराया जा सकता है लेकिन मज़बूरी में अप्रिय फैसले भी लेने पड़ते हैं।
जय राजा रोड़।
ओम तत्सत।।

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