26/03/2026
जय हिंद 🇮🇳
कब खत्म होगा ''तारीख पर तारीख'' का यह खेल /सिलसिला 🤔
तहसील और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते-काटते आम इंसान की चप्पले घिस गई लेकिन सरकारी दफ्तरों में फाइलों की धूल तक नहीं हट रही । छोटे-छोटे कामों के लिए महीना और सालों तक ''तारीख पर तारीख '' मिलना प्रशासन की मनमानी और असंवेदनशीलता का प्रत्यक्ष प्रमाण है .तहसील यमकेश्वर ।
- आम आदमी का सवाल--
. क्या आम नागरिक का समय कीमती नहीं है,
. एक छोटे से आय - जाति प्रमाण पत्र ,जमीन के दाखिल खारिज, आपत्तियों का निराकरण या खतौनी दुरुस्त करने के लिए बार-बार क्यों दौड़ाया जाता है , क्या डिजिटलीकरण के युग में भी फाईलों का गुम होना या प्रशासन का दफ्तर में ना बैठना. बहाना जायज है,
भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ रही है आम जनता की मेहनत की कमाई और समय । जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी तब तक सिस्टम ऐसा ही रेगतां रहेगा , और परेशान रहेगा आम नागरिक ।
प्रशासन को हर काम के लिए समय सीमा तय करनी चाहिए, देरी होने पर जिम्मेदार अधिकारी पर सख्त कार्रवाई हो, तहसील में ऑनलाइन स्टेटस ट्रैकिंग अनिवार्य हो. प्रशासन को सेवक की भूमिका निभानी चाहिए ना कि शासक की ।
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