महाकवि आचार्य विद्यासागर छात्रावास, दादाबाड़ी, कोटा ( राज.) की स्थापना परमपूज्य मुनि पुंगव 108 श्री सुधासागरजी महाराज के आशीर्वाद एवं प्रेरणा के फलस्वरूप हुयी थी । संस्कृति के सजग प्रहरी संस्कार प्रणेता परम पूज्य मुनि श्री जी के पावन वर्षायोग (नशियांजी, कोटा 2001) के समय जब कुछ जैन छात्रों ने महाराज श्री के पास आकर शिक्षा नगरी कोटा में जैन भोजन के अभाव में आलू , प्याज खाने की मजबूरी व्यक्त की, तो
महाराज श्री का धर्म और सांस्कृतिक अनुराग प्रस्फुटित हुआ, अतः कोटा जैन समाज को एक जैन छात्रावास के निर्माण हेतु प्रेरणा एवं आशीर्वाद दिया । सदा की तरह यह आशीर्वाद भी फलित हुआ और कोटा की दिगम्बर जैन समाज ने श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र, नशियांजी, दादाबाड़ी, कोटा के समीप अथक प्रयासों से एक आधुनिक सुविधाओ से युक्त महाकवि आचार्य विद्यासागर छात्रावास का निर्माण किया ।
कोटा ( राज. ) को वर्तमान में शिक्षानगरी कहा जाता है । इस शिक्षानगरी में डाँक्टर और इंजीनियरिग की पूर्व तैयारी हेतु देश के कोने – कोने से लाखों की तादाद् में जैन-अजैन छात्र – छात्रायें अध्ययन हेतु आते हैं ।
यह छात्रावास आधुनिक शिक्षा के साथ जैन युवा पीढ़ी में धर्म, अध्यात्म, संस्कृति और संस्कारों की शिक्षा व्यवस्था हेतु संकल्पबद्ध है । अर्थात यहाँ पर बच्चों को धर्म और संस्कृति के संस्कारों हेतु भी प्रेरित एवं जागरूक किया जाता है ।