22/08/2026
1. कार्यशाला से प्रेरित होकर, प्रधानाचार्या और शिक्षकों ने लिया नेत्रदान संकल्प
2. 'नो बैग डे' पर विद्यार्थियों ने जाना, दृष्टिहीन भी कर सकते हैं नेत्रदान
शाइन इंडिया फाउंडेशन के 'अंगदान जीवन संजीवनी अभियान' के अंतर्गत हाड़ौती संभाग में अंगदान,नेत्रदान व देहदान की जागरूकता का कार्य लगातार प्रगति पर है । संस्था प्रति शनिवार को 'नो बैग डे' पर हाड़ौती संभाग के सभी राजकीय एवं निजी विद्यालयों में अंगदान नेत्रदान के प्रति जागरूकता कार्यशालायें आयोजित कर रही है।
इसी क्रम में आज राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बड़ागांव में प्रधानाचार्या निधि पाठक के, नेतृत्व में अंगदान नेत्रदान के विषय पर जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया । जिसमें प्रमुख वक्ता डॉ कुलवंत गौड़ ने बच्चों को बताया कि, किस तरह से एक ब्रेन डेथ व्यक्ति, नौ से अधिक व्यक्तियों को जीवनदान दे सकता है ।
डॉ गौड़ ने बताया कि, मृत्यु के बाद जहां शरीर को बेकार मानकर जला या दफ़ना दिया जाता है,उससे बेहतर है कि, मृत शरीर के किसी हिस्से से यदि किसी के जीवन में बहुत बड़ा बदलाव आता है,तो यह कार्य किया जाना चाहिए । डॉ गौड़ ने यह भी बताया कि, रेटिना एवं ऑप्टिक नर्व के खराब होने से हुई अंधता के बाद भी ऐसे दृष्टिबाधित अपना कॉर्निया दान कर सकते हैं ।
मृत्यु के बाद आंखों की कोशिकाएं 6 से 8 घंटे तक जीवित रहती हैं, समय रहते,यदि इनका दान किया जाए,तो दो दृष्टिहीन लोगों की जीवन में हमेशा के लिए अंधियारा दूर किया जा सकता है ।
कार्यशाला से प्रेरित होकर प्रधानाचार्या निधि पाठक सहित,प्रियंका चौहान (व्याख्याता होम साइंस),सरोज (व्याख्याता रसायन विभाग) ने अपने नेत्रदान के संकल्प पत्र भरे, जिसके उपरांत संस्था द्वारा सभी संकल्पकर्ताओं को प्रशस्ति पत्र भेंट किए गए ।