Shine India Foundation Trust

Shine India Foundation Trust Work for promotion of health activities, Blood donation camp, Eye Donation, Medical camps..etc..

NITI aayog & MCA registered NGO of Kota city, working for , AND DONATION,since last 15 yrs,and collected 3100+ cornea from Kota city and it's peripheral.

1. शहर के समाजसेवी झंवर का संपन्न हुआ नेत्रदान2. भीषण गर्मी में,कोटा से आई टीम ने लिया नेत्रदान आज गुरुवार को कार्तिक कॉ...
22/05/2026

1. शहर के समाजसेवी झंवर का संपन्न हुआ नेत्रदान
2. भीषण गर्मी में,कोटा से आई टीम ने लिया नेत्रदान

आज गुरुवार को कार्तिक कॉलोनी,सिलोर रोड,बूंदी निवासी मोहनलाल झंवर (सेवानिवृत बैंककर्मी), का आकस्मिक निधन हो गया ।

सादा जीवन,उच्च विचार, विनम्र स्वभाव और खुशमिजाज मोहनलाल धर्म कर्म में आस्था रखने वाले एक प्रतिष्ठित समाजसेवी व्यक्ति थे।

चिकित्सकों द्वारा मोहनलाल की मृत्यु की पुष्टि होते ही, बेटे बेटियों नीलम,हेमंत,अल्का और सुनील ने पिता के नेत्रदान की इच्छा,संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन के ज्योति मित्र इदरीस बोहरा को बतायी।

इदरीस की सूचना पर,भीषण गर्मी में 30 किलोमीटर दूर,कोटा से ईबीएसआर बीबीजे चैप्टर के कोऑर्डिनेटर डॉ कुलवंत गौड़,नेत्र संकलन वाहिनी ज्योति-रथ,लेकर तुरंत बूंदी पहुंचें।

तय समय पर पहुँच कर डॉ गौड़ ने,परिवार के सभी सदस्यों के बीच नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न की। डॉ गौड़ ने यह भी बताया कि,गर्मियों में कॉर्निया की गुणवत्ता सही बनी रहे, इसके लिए प्रयास करें कि, नेत्रदाता की आंखों पर रखा हुआ गीला कपड़ा, हर आधे घंटे में गीला करके रखते रहे ।

बूंदी निवासी श्रीमान  #मोहन_लाल_जी_झंवर साहब के आकस्मिक निधन के उपरांत, परिजनों ने संस्था शाइन इंडिया के माध्यम से  #नेत...
21/05/2026

बूंदी निवासी श्रीमान #मोहन_लाल_जी_झंवर साहब के आकस्मिक निधन के उपरांत, परिजनों ने संस्था शाइन इंडिया के माध्यम से #नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न कराई।

आत्मिक श्रद्धांजलि 💐🙏

1. बेटियों ने संपन्न कराया पिता का नेत्रदानतलवंडी निवासी गंभीर सिंह संचेती, का रविवार को शहर के निजी अस्पताल में आकस्मिक...
21/05/2026

1. बेटियों ने संपन्न कराया पिता का नेत्रदान

तलवंडी निवासी गंभीर सिंह संचेती, का रविवार को शहर के निजी अस्पताल में आकस्मिक निधन हो गया था । कारण से ही नेत्रदान की खबरों को पढ़ते रहने से गंभीर ने अपनी पत्नी विमला देवी को, अपने नेत्रदान की इच्छा जता रखी थी ।

परिवार में जैसे ही यह दुखद घटना घटी बेटी ममता, डॉ० नीलू,पूर्णिमा और कविता ने संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन को संपर्क किया । परिजनों की सहमति के अनुसार, शाइन इंडिया और ईबीएसआर कोटा चैप्टर के,सहयोग से नेत्रदान का पुनीत कार्य संपन्न हुआ ।

 #देहदान हेतु किसी भी आवश्यक जानकारी व संकल्प पत्र भरने हेतु हमें संपर्क करें। शाइन इंडिया फाउंडेशन कोटा कॉल : 083869 00...
20/05/2026

#देहदान हेतु किसी भी आवश्यक जानकारी व संकल्प पत्र भरने हेतु हमें संपर्क करें।
शाइन इंडिया फाउंडेशन कोटा कॉल : 083869 00102

Lalit Modak

Make a phone call to enlighten someone's life. 📲
20/05/2026

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Highlights from the press coverages
19/05/2026

Highlights from the press coverages

https://youtube.com/shorts/lX_-vua6lrM?si=rt7hYwr-1pGLBtnV
18/05/2026

https://youtube.com/shorts/lX_-vua6lrM?si=rt7hYwr-1pGLBtnV

1. बहन से प्रेरित हो,ऑटो चालक का सहपत्निक देहदान संकल्पदो माह पूर्व, महावीर नगर विस्तार योजना निवासी अनीता सर्राफ न....

गत दिवस कोटा निवासी संचेती परिवार की बेटियों ने कराये पिता के नेत्रदान। शत शत नमन। 💐
18/05/2026

गत दिवस कोटा निवासी संचेती परिवार की बेटियों ने कराये पिता के नेत्रदान।
शत शत नमन। 💐

1. बहन से प्रेरित हो,ऑटो चालक का सहपत्निक देहदान संकल्पदो माह पूर्व, महावीर नगर विस्तार योजना निवासी अनीता सर्राफ ने शाइ...
18/05/2026

1. बहन से प्रेरित हो,ऑटो चालक का सहपत्निक देहदान संकल्प

दो माह पूर्व, महावीर नगर विस्तार योजना निवासी अनीता सर्राफ ने शाइन इंडिया फाउंडेशन के देहदान जागरूकता अभियान से प्रेरित होकर अपना देहदान संकल्प पत्र भरा था ।

उसके बाद अनीता से जुड़े परिवार के अन्य सदस्यों ने भी देहदान के बारे में जानकारी प्राप्त की । इससे प्रेरित होकर अनीता के भाई भवानी शंकर भावनानी और पत्नी आरती देवी भावनानी ने अपना देहदान का संकल्प पत्र शाइन इंडिया के साथ भरा।

भवानी शंकर ऑटो चालक हैं और आरती घर के आस-पड़ोस के दैनिक कार्य करके,अपना जीवन चला रहे हैं। अपना मनुष्य जन्म सार्थक हो और यह जीवन किसी के काम आ सके, इस उद्देश्य से दोनों ने अपना देहदान संकल्प पत्र बेटी काजोल (अविका) के समक्ष और सहमति से भरा है।

शाइन इंडिया संस्थापक डॉ संगीता गौड़ ने कहा कि, 3 वर्ष के सघन देहदान जागरूकता अभियान से हाडोती संभाग के 367 लोगों ने अपने देहदान संकल्प पत्र संस्था के साथ भरे हुए हैं । संस्था के माध्यम से अभी तक 50 देवलोकगामियों के देहदान भी,संबंधित मेडिकल कॉलेज में संपन्न हो चुके हैं।

पुणे के चांदनी चौक में ट्रैफिक सिग्नल पर, दोपहर की चिलचिलाती गर्मी में गाड़ियां लाइन में लगी थीं। एक लग्ज़री ऑडी कार में...
17/05/2026

पुणे के चांदनी चौक में ट्रैफिक सिग्नल पर, दोपहर की चिलचिलाती गर्मी में गाड़ियां लाइन में लगी थीं। एक लग्ज़री ऑडी कार में 35 साल की अनुराधा बैठी थीं, उन्होंने सनग्लासेस लगाए हुए थे। लेकिन उन चश्मों के पीछे उनकी आंखें लगातार रो रही थीं।

आज 15 अप्रैल था। ठीक तीन साल पहले, आज ही के दिन, अनुराधा का इकलौता बेटा, 7 साल का अंश, एक भयानक एक्सीडेंट में गुज़र गया था। अंश ब्रेन डेड हो गया था, और बहुत हिम्मत करके, अनुराधा और उनके पति ने उसके सभी ऑर्गन डोनेट करने का फैसला किया था। आज अंश की बरसी थी। अनुराधा, उदास और दुखी, एक अनाथालय में डोनेशन देकर घर लौट रही थीं।

सिग्नल रेड हो गया। गर्मी बर्दाश्त से बाहर थी। अचानक, एक 10-11 साल का लड़का, पसीने से तर लेकिन बहुत प्यारे चेहरे वाला, अनुराधा की कार की खिड़की पर थपथपाया। उसके एक हाथ में चमेली की माला और दूसरे हाथ में पानी का खाली गिलास था।

अनुराधा को चिढ़ हुई। उसने गुस्से में खिड़की थोड़ी नीचे की, अपने पर्स से ₹50 का नोट निकाला, उसकी तरफ फेंका और कहा,
“ये पैसे लो और जाओ! मुझे कोई माला नहीं चाहिए, और मैं किसी से बात नहीं करना चाहती।”

लेकिन लड़के ने ₹50 का नोट नहीं उठाया। बड़ी इज़्ज़त से, वह खिड़की के पास आया और बोला,
“मैडम, मेरी मम्मी कहती हैं कि हमें कभी भी मुफ़्त में पैसे नहीं लेने चाहिए। यह पाप हो जाता है। मैं कोई भिखारी नहीं हूँ। आप एक माला ले लो, फिर मैं ₹50 ले लूँगा।”

उसकी आवाज़ की मासूमियत ने अनुराधा का ध्यान खींचा। उसने अपना सनग्लासेस हटाया और उसकी तरफ देखा। उसका चेहरा शांत और मुस्कुरा रहा था।
अनुराधा ने पूछा,
“तुम इतनी गर्मी में माला क्यों बेच रहे हो? क्या तुम्हारा स्कूल नहीं है?” लड़का प्यार से मुस्कुराया और बोला,
“मेरा स्कूल सुबह का है, मैडम। लेकिन मेरी माँ मेड का काम करती है। उन पर बहुत बड़ा कर्ज़ है, इसलिए मैं उनकी मदद करता हूँ। और वैसे भी, मैडम… आज मेरा ‘दूसरा जन्मदिन’ है!”
अनुराधा कन्फ्यूज़ थी।
“दूसरा जन्मदिन? तुम्हारा क्या मतलब है?”
लड़के ने अपनी शर्ट का कॉलर खिसकाया और अपनी छाती पर सर्जरी का एक बड़ा निशान दिखाया।
उसने कहा,
“मैडम, तीन साल पहले मेरे दिल में छेद था। डॉक्टरों ने कहा था कि मैं मर जाऊँगा। मेरी माँ ने पैसे उधार लिए और मुझे पुणे, ‘सह्याद्री हॉस्पिटल’ ले आईं। लेकिन फिर मुझे एक फरिश्ता मिला! ठीक तीन साल पहले, 15 अप्रैल को, एक छोटे लड़के का एक्सीडेंट हुआ… और मैडम… डॉक्टरों ने उस लड़के का धड़कता हुआ दिल मेरी छाती में डाल दिया! उस भगवान जैसे लड़के ने मुझे ज़िंदगी दी। तो आज मेरा दूसरा जन्मदिन है!”
ये शब्द सुनकर अनुराधा के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। उसकी साँसें थम सी गईं। ‘सह्याद्री हॉस्पिटल’… ‘15 अप्रैल’… ‘हार्ट ट्रांसप्लांट’…
कांपती आवाज़ में अनुराधा ने पूछा,
“बच्चे… तुम्हारा नाम क्या है?”
लड़के ने जवाब दिया,
“मेरा नाम कबीर है, मैडम।”
अनुराधा ने अपने हाथों से अपना सिर पकड़ लिया। तीन साल पहले, उन्होंने अंश का दिल कबीर नाम के एक गरीब लड़के को डोनेट किया था… और आज, वही कबीर उसके सामने खड़ा था!
एक पागल औरत की तरह, अनुराधा ने अपनी कार का दरवाज़ा खोला और बिज़ी सड़क पर भागी। उसने पसीने से तर कबीर को दोनों हाथों से पकड़ लिया। उसके चेहरे पर आँसू बेकाबू होकर बहने लगे।
“कबीर… बच्चे, मुझे बस एक काम करने दो…”
उसने अपना कान कबीर की छाती से लगा दिया।
धप-धप… धप-धप…
इस बेचारे लड़के की छाती के अंदर, उसके अपने बेटे अंश का दिल धड़क रहा था!
जिस दिल की धड़कन को उसने तीन साल पहले हमेशा के लिए बंद समझ लिया था, वह आज ज़िंदा थी—एक बहादुर, सेल्फ-रिस्पेक्टिंग बच्चे की छाती में!

अनुराधा सड़क के बीच में घुटनों के बल गिर पड़ी और फूट-फूट कर रोई। उसने कबीर को कसकर गले लगा लिया। सिग्नल हरा हो गया था, हॉर्न बज रहे थे, लेकिन एक माँ को अपना खोया हुआ फ़रिश्ता फिर से मिल गया था।

उसी दिन, अनुराधा को कबीर की माँ मिल गई। उसने तुरंत उनके हॉस्पिटल के सारे कर्ज़ चुका दिए और कबीर की पढ़ाई की पूरी ज़िम्मेदारी ले ली। क्योंकि एक करोड़पति माँ के अंश का दिल आज एक गरीब लेकिन इज्ज़तदार लड़के के शरीर में ज़िंदा था।

*यह इमोशनल और रुला देने वाली घटना बस यही बताती है कि विनम्रता पैसे से कहीं बढ़कर है और ऑर्गन डोनेशन के बारे में एक पवित्र संदेश देती है*।

👍🙏🏻

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18 वर्ष पूरे होते ही रक्तदान....18 साल पहले रक्तदान की प्रेरणा के लिए अभियान (Generation club)  की शुरुआत की थी, जब वर्ष...
16/05/2026

18 वर्ष पूरे होते ही रक्तदान....

18 साल पहले रक्तदान की प्रेरणा के लिए अभियान (Generation club) की शुरुआत की थी, जब वर्ष 2007 में हमारे घर में नए मेहमान मृत्युंजय का जन्म हुआ था ।

मृत्युंजय के हर जन्मदिवस पर, उसके 18 वर्ष का होने तक,मैंने 18 बार,और पत्नी डॉ संगीता ने 7 बार रक्तदान किया ।

हमारा रक्तदान अभियान तो जारी है पर अब, रक्तदान के इस क्षेत्र में हमारे पुत्र मृत्युंजय गौड़ ने, जनरेशन क्लब के तहत, रक्तदान की कमान संभाली है,अब यह अपने हर जन्मदिवस पर रक्तदान करेंगे और जब तक करते रहेंगे, जब तक इनकी आने वाली पीढ़ी 18 वर्ष की नहीं हो जाती ।

रक्तदान के इस अनोखे,रोचक,प्रेरणादायक महा-अभियान में आप भी सहायक बन सकते हैं । Call : 8386900102

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AA-1, Vasundhra Vihar, Bajrang Nagar, Kota
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