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मेरे सम्मान को आप सभी के योगदान ने दुगुनी ऊँचाई प्रदान की है ।आप सभी मीडिया का आभार
25/01/2025

मेरे सम्मान को आप सभी के योगदान ने दुगुनी ऊँचाई प्रदान की है ।
आप सभी मीडिया का आभार

हितेश मलकानी ने 46वीं बार डोनेट की एसडीपी - पेशेंट को भी लगातार 7वीं बार चढी एसडीपी, टीम जीवनदाता बनी तारणहार कोटा.कोटा ...
18/02/2024

हितेश मलकानी ने 46वीं बार डोनेट की एसडीपी
- पेशेंट को भी लगातार 7वीं बार चढी एसडीपी, टीम जीवनदाता बनी तारणहार

कोटा.

कोटा में एसडीपी की आवश्यकता की पूर्ति टीम जीवनदाता द्वारा की जा रही है, प्रतिदिन हर समय लोगों की मदद को टीम तैयार रहती है और अथक प्रयास कर जरूरतमंद को एसडीपी उपलब्ध करा दी जाती है। ऐसा ही एक मामला सामने आया जब मरीज नफीसा को ए पॉजीटिव एसडीपी चढाई जानी थी। मरीज के परिजन हमेशा की तरह अपना ब्लड सेंटर पहुंचे और टीम जीवनदाता के संयोजक व संरक्षक भुवनेश गुप्ता से सम्पर्क किया। गुप्ता ने बताया कि मरीज नफीसा को पहले भी एसडीपी उपलब्ध करवाई जा चुकी है, ऐसे में मरीज के परिजन निश्चिंत होकर यहां आते हैं। उन्होंने कहा कि एसडीपी की व्यवस्था के लिए हितेष मलकानी को कॉल किया तो वह सहज तैयार हो गए और अपना ब्लड सेंटर तलवंडी पहुंचे और 46वीं बार एसडीपी डोनेट की है। वह इससे पूर्व 75 बार ब्लड भी डोनेशन कर चुके है। मरीज को 7वीं बार एसडीपी चढाई गई। मलकानी एक सेल्समेन के तौर पर कार्य कर हैं लेकिन जब भी किसी को मदद की दरकार होती है वह अपने सभी कार्य छोडकर एसडीपी डोनेशन के लिए पहुंच जाते हैं।

रात की खामोशी में जिंदगी का शोर लेकर अभी अभी पधारे है पिकेश जी...................स्वागत....!!!                अभिनंदन......
14/11/2023

रात की खामोशी में जिंदगी का शोर लेकर अभी अभी पधारे है पिकेश जी...................

स्वागत....!!!
अभिनंदन.......!!!

*पिंकेश जी के द्वारा रात 3.30 बजे एसडीपी डोनेशन*

। *रक्त प्रेरक कहानी : अवश्य पढ़े* ।✍️*प्रेरणा पुंज भुवनेश गुप्ता ने 66वीं बार डोनेट की एसडीपी, अनजान बहिन के बचाए प्राण...
08/11/2023

। *रक्त प्रेरक कहानी : अवश्य पढ़े* ।
✍️
*प्रेरणा पुंज भुवनेश गुप्ता ने 66वीं बार डोनेट की एसडीपी, अनजान बहिन के बचाए प्राण।*
*कुल 171 वा डोनेशन पूर्ण कर युवाओं के बने है प्रेरणास्रोत।*
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कोटा। प्रेरणापुंज के रूप में 28 सालों से मानव सेवा कर रहे टीम जीवन दाता के संरक्षक व संयोजक भुवनेश गुप्ता ने एक अनजान बेटी के लिए देर रात बी पॉजिटिव एसडीपी डोनेट की है। *भुवनेश गुप्ता ने 66वीं बार एसडीपी डोनेट की है, जबकि वह 105 बार ब्लड डोनेशन कर चुके हैं। इस तरह कुल 171 बार डोनेशन करके भुवनेश युवाओं के लिए प्रेरणा पुंज बने है।*
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*टीम जीवनदाता के सहसंयोजक वर्द्धमान जैन* ने बताया कि एक पुलिसकर्मी के दो बच्चे तनिष्क और वंशिका डेंगू से अस्पताल में भर्ती हैं जिसमें बेटी को बी पॉजिटिव एसडीपी की आवश्यकता थी, मरीज की प्लेटलेट काउंट 10000 रह गई थी। ऐसे में चिकित्सको ने एसडीपी शीघ्र लाने के लिए कहा, परिजन परेशान हुए ऐसे में वह *अपना ब्लड सेंटर तलवंडी* पहुंचे जहां भुवनेश गुप्ता ने पहले तो कई लोगों को कॉल कर डोनर उपलब्ध कराने के लिए प्रयास किया लेकिन जब व्यवस्था नहीं हुई तो स्वयं ने एसडीपी डोनेट कर एक अनजान बेटी से अपना मानवता का धर्म निभाया।
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भुवनेश गुप्ता ने कहा कि डेंगू का प्रकोप धीरे-धीरे कम हो रहा है लेकिन फिर भी मरीज आ रहे हैं और परिजन बहुत परेशान हो रहे है। प्लेटलेट्स कम होने पर एसडीपी की आवश्यकता महसूस की जा रही है। उन्होंने कहा कि कॉलेज टाइम से ही वह रक्तदान के क्षेत्र में लोगों की सेवा करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि _यह सेवा अनवरत इस जीवन में जारी रहेगी। लोगों को भी इस क्षेत्र में आगे आकर एक ईश्वरीय कार्य में मदद करनी चाहिए। गुप्ता अभी तक हजारों लोगों को इस सेवा कार्य से जोड़ चुके हैं और उनके अथक प्रयासों से लाखो के जीवन बचाएं जा सके हैं।_
युवाओं की एक बड़ी टीम उनके नेतृत्व में काम कर रही है जिससे 24 घंटे जरूरतमंद की मदद की जा रही है
पूरे देश में इसी नेटवर्क के माध्यम से गुप्ता लोगो को जरूरत पर रक्त उपलब्ध करवाकर यथासंभव मदद करते रहते है । उल्लेखनीय है कि *वे गत 28 वर्षो से निरंतर इस सेवाकार्य को कर रहे है।*
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*इस सफर में ये रहे हमसफर*
भुवनेश गुप्ता के पुत्र नमन गुप्ता, मित्र नवीन चौहान, टीम जीवनदाता के समर्पित साथी मनीष माहेश्वरी, रोगी के पिता कृष्ण मुरारी, एल आई सी के विकास अधिकारी श्रवन बिश्नोई , सुनील, सोनू, रामप्रसाद, अरविंद, रवि और विनीत ने पहुंचकर उत्साहवर्धन किया।

जीवंतपर्यंत की सेवा, जाने के बाद रोशन करेंगे ब्रजेश विज दो जिंदगी।- परिवार में पहली बार हुआ नेत्रदानlकोटा.सेवा का भाव हो...
12/07/2023

जीवंतपर्यंत की सेवा, जाने के बाद रोशन करेंगे ब्रजेश विज दो जिंदगी।
- परिवार में पहली बार हुआ नेत्रदानl
कोटा.सेवा का भाव हो, मन में मानव व समाज के लिए कुछ करने की चाहत हो तो जीवित रहते हुए और जाने के बाद भी सेवा का कार्य करते हुए कई लोग अपने पीछे प्रेरणा के बीज छोड जाते हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया जब महावीर नगर तृतीय निवासी ब्रजेश विज के निधन पर उनकी इच्छा के अनुसार परिवारजन ने उनका नेत्रदान करवाया और परिवार में कई लोगों को वे जाने के बाद सेवा की सीख भी दे गए।
टीम जीवनदाता के संयोजक व लायंस क्लब डिस्ट्रिक ब्लड चैयरमैन भुवनेश गुप्ता ने बताया कि ब्रजेश विज सेवाभावी थे और हमेशा प्रातःकाल नियमित रूप से मथुराधीशजी के दर्शन कर सेवा कार्य कर अपने काम से निकलते थे, उन्होंने संकल्प लिया था कि वह नेत्रदान करेंगे और उनकी इसी इच्छा को बुधवार को परिवार ने पूरा किया।
गुप्ता ने बताया कि इसमें शाइन इंडिया फाउंडेशन और लायंस क्लब कोटा टेक्नो का सहयोग रहा। आई बैंक के टेक्नीशियन टिंकू ओझा ने नेत्रदान प्रक्रिया को सम्पन्न करवाया और नेत्र संकलित किए। भुवनेश गुप्ता ने बताया कि ब्रजेश विज के सीने में दर्द उठा और उन्हें अस्पताल लेकर गए तो वह वहीं अचेत हो गए और उनकी मृत्यु हो गई, ऐस९ में उनके भांजे अभिनव मंग्गु ने गुप्ता को फोन किया और नेत्रदान करवाने हेतु अनुरोध किया। उसके बाद नेत्रदान की प्रक्रिया सम्पन्न हुई। परिजनों का कहना है कि उनकी सीख हमेशा याद रहेगी और उनके जाने के बाद हम सभी नेत्रदान का संकल्प लेंगे।
परिवार में उनकी दो बहिनें रंजना विज और अंजना विज मौजूद है जिसमे अंजना के बड़े पुत्र जयपु

पिता के पद चिन्हों पर चलते हुए नमन गुप्ता ने की एसडीपी डोनेट- घर परिवार से मिले सेवा कार्य, सेवा से ही जीवन में मिल रही ...
07/07/2023

पिता के पद चिन्हों पर चलते हुए नमन गुप्ता ने की एसडीपी डोनेट
- घर परिवार से मिले सेवा कार्य, सेवा से ही जीवन में मिल रही सफलता
कोटा.
सेवा और संस्कार के कार्य सर्वप्रथम अपने घर परिवार से ही मिलते हैं और वही संस्कार जीवन में आगे बढ़ते हुए मंजिल तक ले जाने में अपनी सार्थक भूमिका निभाते हैं। टीम जीवनदाता के संयोजक व लायंस क्लब डिस्ट्रीक्ट के ब्लड डोनेशन चेयरमैन भुवनेश गुप्ता द्वारा सालों से निरंतर सेवा कार्य किए जा रहे हैं और लोगों को एसडीपी व रक्त उपलब्ध कराया जा रहा है वहीं शिक्षा और संस्कार उनके पुत्र नमन गुप्ता में भी देखने को मिल रहे हैं। महज 18 साल की उम्र में उन्होंने दूसरी बार एसडीपी डोनेट की है। नमन गुप्ता का हाल ही में बारहवीं क्लास के तुरंत उपरांत नीट एग्जाम क्रेक किया है। और मेडिकल में सलेक्शन के पीछे भी वह इस सेवा कार्य की ही दुआएं मानते हैं। भुवनेश गुप्ता ने बताया कि भारत विकास परिषद अस्पताल में भर्ती मरीज हरिओम सिंह ( 75 ) को बी पॉजिटिव एसडीपी की आवश्यकता थी। उनके पुत्र जितेंद्र सिंह काफी समय से परेशान घूम रहे थे। उसके बाद भुवनेश गुप्ता को कॉल किया तो गुप्ता ने एसडीपी के लिए हमेशा की तरह मैसेज करना शुरू ही कर रहे थे कि इतने में उनके पुत्र नमन ने देखा और एसडीपी डोनेशन की इच्छा जाहिर की । उसने कहा कि मेरा नीट प्रथम प्रयास में ही क्लीयर हो गया है, ये दुवाओ का प्रतिफल है। अब मेरी इच्छा है कि मैं भी इस काम को निरंतर गति देते हुए आगे बढाउ। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में मेडिकल कॉलेज में भी एक टीम बनाकर एसडीपी और ब्लड डोनेशन के लिए काम किया जाएगा। नमन गुप्ता अपने पिता के साथ अपना ब्लड सेंटर तलवंडी पहुंचे और मरीज के लिए एसडीपी डोनेशन किया। ये एसडीपी डोनेशन दूसरी बार था। इस अवसर पर नमन गुप्ता का कहना है कि उन्हें यह सेवा के संस्कार परिवार से ही मिले हैं। बचपन से ही घर में एसडीपी और ब्लड डोनेशन को लेकर चर्चा आम बात है। ऐसे में इस सेवा कार्य की वजह से ही आगे निरंतर उपलब्धियां हासिल हो रही है, उसी को देखते हुए ईश्वरीय कार्य मानते हुए इस कार्य को निरंतर आगे बढ़ाया जाएगा। दूसरी बार एसडीपी पर उनकी मां डॉ क्षिप्रा गुप्ता, दादी शकुंतला गुप्ता ने भी आशीर्वाद स्वरुप आगे इसी तरह निरंतर कार्य करने की बात कही।

नियमित रक्तदान के संकल्प के साथ रक्त उत्सव का समापन - कोचिंग स्टूडेंटों ने रक्तदान के क्षेत्र में कार्य करने का दिलाया व...
18/06/2023

नियमित रक्तदान के संकल्प के साथ रक्त उत्सव का समापन
- कोचिंग स्टूडेंटों ने रक्तदान के क्षेत्र में कार्य करने का दिलाया विश्वास
कोटा.
मां भारती जन कल्याण चेरीटेबल ट्रस्ट, टीम जीवनदाता, अपना ब्लड सेंटर व जेसीआई चम्बल के संयुक्त तत्वावधान में चार दिवसीय विश्व रक्तदाता दिवस पर आयोजित कार्यक्रमों का समापन गुरूवार को हुआ। टीम जीवनदाता के संयोजक व लायंस क्लब के रीजन चेयरमैन भुवनेश गुप्ता ने बताया कि इन चार दिनों तक रक्तदान शिविर, मोटिवेशन कैंप, प्रश्नोत्तरी, हस्ताक्षर अभियान, पम्पलेट वितरण, सोशल मीडिया पर जागरुकता संदेश सहित कई तरह के आयोजन किए गए। समापन कार्यक्रम की मुख्य अतिथि मां भारती जन कल्याण ट्रस्ट की चेयरपर्सन पुष्पांजलि विजय थी। विशिष्ट अतिथि मोदी लॉ कॉलेज की प्रिंसीपल डॉ. क्षिप्रा गुप्ता व शकुंतला गुप्ता रहीं। मुख्य अतिथि पुष्पांजलि विजय ने कहा कि महिलाओं में भी अब रक्तदान को लेकन भ्रांतियां दूर हुई हैं। कोटा शहर में आज सैकडों महिलाएं हैं जो रक्तदान कर रही हैं। डॉ. क्षिप्रा गुप्ता ने कहा कि कोटा अब रक्तदान के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बनाता जा रहा है। हमे भी इस कार्य में भागीदारी निभानी चाहिए। भुवनेश गुप्ता ने बताया कि समापन अवसर पर 23 लोगों ने रक्तदान किया। इन चार दिनों तक कोचिंग स्टूडेंटों ने हस्ताक्षर अभियान के माध्यम से अपने मन की बात लिखी और आने वाले समय में रक्तदान का संकल्प लिया। इस अभियान में दौ से अधिक विद्यार्थियो ने रक्तदान करने के पूर्व और करने के पश्चात होने वाले अनुभव शेयर किए। प्रश्नोत्तरी में विजेताओं को नवाजा गया वहीं नियमित रक्तदाता वर्धमान जैन, अंकित पोरवाल, मनीष माहेश्वरी, रजनीश खंडेलवाल, अतुल विजय, डॉ. घनश्याम राठी, रश्मि राठी, नितिन मेहता का सम्मान किया गया। ये सभी लोग नियमित रक्तदान के लिए तैयार रहते हैं। इस अवसर पर विनीत वार्ष्णेय, सुनील मेहता, राम प्रसाद, रवि मीणा, महावीर सहित ग्यारह रक्तप्रेरकों का विशेष सम्मान किया गया। इस दौरान आयोजन में अधिकतम कोचिंग विधार्थी उपस्थित रहकर रक्तदान से जुड़ी लाभदायक बातो को समझा और भांतियो का उन्मूलन किया।

डॉ. कुलवंत गौड ने 45वें जन्मदिवस पर 45वीं बार किया रक्तदान- टीम जीवनदाता व शाइन इंडिया की मनुहार पर 18  लोग आए आगे।कोटा....
07/06/2023

डॉ. कुलवंत गौड ने 45वें जन्मदिवस पर 45वीं बार किया रक्तदान
- टीम जीवनदाता व शाइन इंडिया की मनुहार पर 18 लोग आए आगे।

कोटा.
"जन्मदिन हो या त्यौहार, रक्तदान करके दें उपहार"।की सोच के साथ कोटा में युवाओं की टीम निरंतर सेवा करती चली आ रही है. नेत्रदान के क्षेत्र में हाडौती संभाग में नेत्रज्योति का उजियारा कर रहे शाइन इंडिया फाउंडेन के संस्थापक डॉ. कुलवंत गौड ने अपने 45वीं जन्मदिवस के उपलक्ष्य में 45वीं बार रक्तदान किया। टीम जीवनदाता के संयोजक व लायंस क्लब के रीजन चेयरमैन भुवनेश गुप्ता ने बताया कि डॉ. कुलवंत गौड को सुबह जन्मदिवस की बधाई देने के साथ ही रक्तदान के लिए मनुहार की तो वह सहज तैयार हो गए और वह अपने साथियों के साथ तलवंडी स्थित अपना ब्लड सेंटर पहुंचे और रक्तदान किया। उनके साथ जोधपुर से आई संगीता सिंहा, एमपी के उत्कर्ष मिश्रा, कृष्णा दुबे, करण योगी, चेतन गुप्ता, कुलदीप सैनी, राम प्रसाद, सिमरजीत, सुधांशु, भवानी सिंह, अजयवीर सिंह सहित 18 लोगों ने रक्तदान किया। इस अवसर पर डॉ. गौड ने कहा कि नेत्रदान के साथ ही रक्तदान, अंगदान और देहदान का अपना ही महत्व है, व्यक्ति को मानव शरीर के रूप में ईश्वर द्वारा मिले वरदान से दूसरों को भी लाभांवित करना चाहिए। डॉ. गौड 22 बार एसडीपी भी कर चुके हैं। उनका मानना है उन्होंने अपने जीवन का सिद्धांत बना रखा है कि जिंदगी के साथ रक्तदान बहुत जरूरी है तो ज़िंदगी के बाद नेत्रदान देहदान और अंगदान । इस सोच के साथ आमजन को अपने जीवन के संस्कार बनाना चाहिए।
सहयोग करने वालो में एडवोकेट वैश्य समाज के प्रदेश युवा सचिव अंकित पोरवाल, रामप्रसाद, विनीत , सुनील , निर्भीक, महावीर समेत कई लोग उपस्थित थे।

रेफर हुवे गंभीर पेशेंट को समय पर उपलब्ध कराई एसडीपी–टीम जीवनदाता के प्रयास से पुष्पेंद्र ने सातवीं बार डोनेट की एसडीपीको...
31/05/2023

रेफर हुवे गंभीर पेशेंट को समय पर उपलब्ध कराई एसडीपी
–टीम जीवनदाता के प्रयास से पुष्पेंद्र ने सातवीं बार डोनेट की एसडीपी
कोटा।
कोटा में एसडीपी और रक्तदान को लेकर कार्य निरंतर जारी है। भीषण गर्मी और अतिव्यस्तता होने के बाद भी टीम जीवनदाता के प्रयास से जरूरतमंद को एसडीपी समय पर मिल रही है। ऐसा ही एक मामला मध्य प्रदेश का सामने आया जब फूलवती नमक पेशेंट को निजी अस्पताल में भर्ती किया गया जिसके लिए एसडीपी की आवश्यकता थी। पेशेंट को जयपुर शिफ्ट किया जाना था लेकिन प्लेटलेट घटकर 6000 रह गई थी ऐसे में चिकित्सकों ने एसडीपी चढ़ाने के बाद उसे जयपुर ले जाने के लिए सलाह दी। मरीज के अटेंडर ने टीम जीवन दाता के संयोजक व लायंस क्लब के रीजन चेयरमैन भुवनेश गुप्ता को संपर्क किया। उसके बाद भुवनेश गुप्ता ने अविलंब छावनी निवासी पुष्पेंद्र सिंह को पूरी वस्तु स्थिति से अवगत कराया और कहा कि यदि पेशेंट के एसडीपी नहीं चढ़ी तो गंभीर स्थिति बन सकती है। ऐसे में पुष्पेंद्र सिंह आरटीओ से संबंधित कार्य करते हैं वह अपने कार्य को छोड़कर सीधे अपना ब्लड सेंटर तलवंडी पहुंचे और एक अनजान के लिए जीवन बचाने की सोच के साथ एसडीपी डोनेट की। पुष्पेंद्र पूर्व में 7 बार प्लाज्मा डोनेशन कर चुके हैं, उनकी यह 7वी एसडीपी थी। वह 15 बार ब्लड डोनेशन भी कर चुके हैं। इस अवसर पर नमन गुप्ता, सुनील, सोनू, राम प्रसाद, विनीत और रोगी के अटेंडर सहित कई लोग उपस्थित रहे। पुष्पेंद्र का मानना है कि जीवन बचाने से बढ़कर कोई कार्य नहीं हो सकता , माता पिता ने यही संस्कार दिए है कि मानव धर्म को हमेशा सर्वोपरि मानते है । कोरोना काल में भी पुष्पेंद्र का योगदान उल्लेखनीय रहा था।

भुवनेश गुप्ता ने 62वीं बार डोनेट की एसडीपी - अब तक 106 बार रक्तदान के साथ 168 बार कर चुके हैं डोनेशन ।- उपराष्ट्रपति सहि...
22/05/2023

भुवनेश गुप्ता ने 62वीं बार डोनेट की एसडीपी
- अब तक 106 बार रक्तदान के साथ 168 बार कर चुके हैं डोनेशन ।
- उपराष्ट्रपति सहित एक हजार बार के करीब हो चुके सम्मानित ।
कोटा.
कोटा शहर में लोगों की मदद करने का सिलसिला निरंतर जारी है। एसडीपी और रक्तदान के क्षेत्र में लोगों की परेशानी को समझते हुए टीम जीवनदाता के संयोजक व लायंस क्लब के रीजन चेयरमैन भुवनेश गुप्ता द्वारा निरंतर 29 साल से काम किया जा रहा है। ऐसे में वह अब तक हजारों की संख्या में लोगों को मोटिवेट कर चुके हैं जिनके माध्यम से कोटा शहर ही नहीं संभाग और राज्य राष्ट्रीय स्तर के अलावा बाहर भी लोग अब अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में जब भी आवश्यकता होती है वह स्वयं भी प्रेरणा बनकर मदद को आगे आते हैं। भुवनेश गुप्ता ने बताया कि निजी अस्पताल में भर्ती यास्मीन बानो एनीमिक पेशेंट है। प्लेटलेट लगातार गिरती जा रही थी, ऐसे में अलसुबह करीब ढाई 3 बजे उनके पति अजीजुद्दीन का कॉल आया और एसडीपी के लिए कहा गया। अल सुबह का समय था लोगों को फोन किए मैसेज भी किए लेकिन इतनी जल्दी लोगों द्वारा मैसेज देखना संभव नहीं था वहीं लोगों ने फोन कॉल भी नहीं उठाए। फिर गुप्ता स्वम तलवंडी स्थित अपना ब्लड बैंक पहुंचे जहां सुबह करीब 4 बजे बी पॉजिटिव एसडीप डोनेट कर मरीज के अटेंडर को दी गई। भुवनेश गुप्ता ने बताया कि यह उनकी 62वीं एसडीपी थी जबकि वह 106 बार ब्लड डोनेशन कर चुके हैं। अब तक वह 168 बार डोनेशन कर चुके हैं और वर्ष 1994 से निरंतर रक्तदान के क्षेत्र में लोगों की सेवा करते चले आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वयं को भी निरंतर रक्तदान के लिए आगे रखते हैं, इन उपलब्धियों के लिए उन्हें अब तक जिला, संभाग, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तकरीबन हजारों बार सम्मानित किया जा चुका है। इस उपलब्धि के लिए वह उपराष्ट्रपति से भी सम्मानित हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी में लोगों को एसडीपी व रक्तदान के लिए छोटे-छोटे ग्रुप के माध्यम से रक्तदान करना चाहिए ताकि एक जरूरतमंद को समय पर रक्त उपलब्ध हो सके और उसके जीवन को बचाने में हमारा बहुमूल्य योगदान हो सके।

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