15/03/2026
दो दिन की स्ट्रिंग आर्ट कार्यशाला की तस्वीरें।
कागज पर कढ़ाई, यही कहेंगे लेकिन सरल भी नहीं था। जब तक चीजें या सीखना बोर्ड और कागज कलम पेंसिल तक सीमित था, आसान था। कहीं गलत हो गया तो मिटा सकते थे और नया बना सकते थे। धीरे धीरे जब कॉन्सेप्ट समझ आ गया तो फिर असली काम शुरू हुआ। कागज बोर्ड दिए गए जिन पर पहले से ही मार्किग थी। अब सुई थी, धागे थे और अपनी कल्पना। शुरुआती जद्दोजहद के बाद चीज़ें आकार लेने लगीं, चेहरे के तनाव गायब होने लगे और मेरा देखो, ये ठीक बना क्या, धागा टूट गया, धागे की गांठ लगा दो,,,,आवाजें आ रहीं थीं।
सफल कार्यशाला। धन्यवाद डॉ मनीष गौड़ का जिन्होंने बेहद धैर्य के साथ सभी को सिखाया। नारी शाला अधीक्षक श्रीमती अंशुल जी और उनके स्टाफ का आभार जिन्होंने कार्यशाला को सुगम बनाने में अपना सहयोग प्रदान किया।