15/06/2026
एक सच्चे गुरु शाश्वत होते हैं और अपने भक्तों का कभी साथ नहीं छोड़ते। यद्यपि यह भौतिक शरीर नश्वर और क्षणभंगुर है, किन्तु गुरु का प्रेम, मार्गदर्शन और आशीर्वाद देह त्याग के पश्चात भी सदैव बने रहते हैं। महाराज जी का जीवन हमें यह शिक्षा देता है कि हमारी श्रद्धा केवल आँखों से दिखाई देने वाली वस्तुओं पर नहीं, बल्कि दिव्य सत्य पर आधारित होनी चाहिए। ईश्वर और गुरु के प्रति पूर्ण समर्पण ही जीवन में शांति, संरक्षण तथा आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।