12/07/2026
गोमती श्रमदान मूवमेंट के 12वें दिन बढ़ा जनसहयोग, अब कई जिलों तक पहुँचा अभियान
मोहम्मदी (लखीमपुर खीरी)। गोमती नदी को स्वच्छ, निर्मल और अविरल बनाने के उद्देश्य से चल रहे गोमती श्रमदान मूवमेंट का रविवार को 12वाँ दिवस उत्साह और जनसहभागिता के साथ सम्पन्न हुआ। अभियान में स्थानीय नागरिकों के साथ लखनऊ से दो पर्यावरण प्रेमी स्वयंसेवक विशेष रूप से श्रमदान करने पहुँचे। बच्चों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। सन्वी, शुभ, स्वस्तिक, अनुभव, मन्थन सहित अनेक बच्चों ने स्वयं नदी तट की सफाई कर लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
अभियान में शुरुआत से जुड़े गोमती मित्रों ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई। उनके निरंतर प्रयासों और स्थानीय लोगों के सहयोग से यह अभियान अब एक जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है। स्वयंसेवकों ने लोगों से गोमती नदी को प्रदूषण मुक्त रखने और जल स्रोतों के संरक्षण का संकल्प भी दिलाया।
गोमती श्रमदान मूवमेंट का प्रभाव अब अन्य जनपदों में भी दिखाई देने लगा है। इस पहल से प्रेरित होकर शाहजहाँपुर, लखनऊ, हरदोई, गाजीपुर और सुल्तानपुर में भी स्थानीय स्तर पर स्वच्छता एवं नदी संरक्षण के लिए श्रमदान अभियान प्रारम्भ हो चुके हैं। इसी क्रम में महंत प्रमोद गिरी एवं आलोक वर्मा के नेतृत्व में बाबा पालननाथ मंदिर परिसर में नियमित साफ-सफाई एवं श्रमदान की शुरुआत की गई है, जिसे स्थानीय श्रद्धालुओं का सहयोग मिल रहा है।
प्रशासनिक स्तर पर भी गोमती नदी के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। मोहम्मदी क्षेत्र में गोमती नदी का सीमांकन कार्य पूरा हो चुका है। अब गोला क्षेत्र में सीमांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नदी से गाद हटाने का कार्य प्रारम्भ किया जाएगा। इससे नदी के प्राकृतिक प्रवाह को पुनर्जीवित करने और जल संरक्षण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
लगातार चल रहे जनजागरूकता अभियान का असर लोगों के व्यवहार में भी दिखाई देने लगा है। पहले पूजा-अर्चना के बाद बड़ी मात्रा में पूजन सामग्री और मूर्तियाँ गोमती नदी में प्रवाहित कर दी जाती थीं, जिससे नदी प्रदूषित होती थी। अब स्थिति में सकारात्मक बदलाव आया है। नदी की सफाई के दौरान पहले की तुलना में मूर्तियाँ बहुत कम मिल रही हैं, जबकि पुलों पर लगाए गए पूजन सामग्री संग्रह पात्र अधिकांशतः भरे हुए मिलते हैं। इससे स्पष्ट है कि लोग अब धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी अपनी जिम्मेदारी समझने लगे हैं।
अभियान से जुड़े स्वयंसेवकों का कहना है कि गोमती को बचाने का यह प्रयास केवल नदी की सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में पर्यावरण संरक्षण की स्थायी संस्कृति विकसित करने का अभियान है। आने वाले समय में अधिक से अधिक विद्यालयों, सामाजिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं और युवाओं को इस जनआंदोलन से जोड़ने की योजना है।
गोमती श्रमदान मूवमेंट लगातार यह संदेश दे रहा है कि जब समाज स्वयं आगे आता है, तो पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं रह जाता, बल्कि जनभागीदारी से बड़े परिवर्तन संभव होते हैं।