Musht Sansthan - Hunar Ki Paathshala

Musht Sansthan - Hunar Ki Paathshala To empower the marginal communities in a manner that they are able to secure their human & constituti

24/02/2026

✨ *सीखने, समझने और सपनों को छूने का सफ़र* ✨

गाँव की सादगी से निकलकर बड़े शहर की चकाचौंध भरी दुनिया में कदम रखना हमारी टीम के लिए सिर्फ़ एक ट्रिप नहीं था, बल्कि ज़िंदगी का एक नया चैप्टर था। खासकर हमारी लड़कियों के लिए, यह अनुभव बहुत मज़ेदार व उत्साह भरा था—पहली बार ट्रेन का सफ़र, सड़कों पर अनगिनत गाड़ियों को दौड़ते देखना, रात में भी जागता शहर, वेस्टर्न टॉयलेट का इस्तेमाल, मेट्रो में सफ़र,और उस विशाल स्टेशन की भीड़ में खो कर फिर खुद को उस बड़ी स्टेशन की भीड़ में पाना। गाँव के पारंपरिक खाने के स्वाद से लेकर शहरी फ़ास्ट फ़ूड आज़माने तक, घर की बनी गर्म रोटियों से लेकर बाहर के खाने तक—सब कुछ नया था। इन सबके बीच, संस्थाओं का काम देखना, लोगों से मिलना, उनकी कहानियाँ सुनना—कुछ कड़वी, कुछ मीठी—हमारे साथियों के लिए सीखने का खज़ाना बन गया। साथ इस सफ़र ने एक गहरी सीख भी दी—इंसानियत के बारे में। लौटते समय, एक युवा साथी ने कहा, “शहर में, लोगों के पास बड़े घर और बड़ी गाड़ियां है, लेकिन शायद दिल छोटे होते हैं। वे कम काम करते हैं, फिर भी अक्सर कहते हैं कि उनके पास समय नहीं है।” शहर की भीड़ में छोटी-छोटी बातों पर एतराज़ -- एक कमरे के बजाय दूसरे कमरे का टॉयलेट इस्तेमाल कर लिया तो प्रॉब्लम, गाड़ी को छूते हुए खड़े होना एक प्रॉब्लम और सबसे मज़ेदार एक्सपीरियंस—गाँव से इतनी लंबी दूरी तय करके, ऑटो-रिक्शा, मेट्रो और पैदल चल कर जब साहब से मिलने पहुंचे, तो जवाब मिला, “आप लेट हो गए हैं, अब कल मिलना।”
फिर भी, शहर की अपनी खूबसूरती है। लोग कैसे भी हों, अनुभव अनमोल था।यह लर्निंग विजित उन साथियों के लिए और भी खास थी जो अपने परिवार में से दिल्ली पहुँचने वाले पहले व्यक्ति बने, जिन्होंने मेट्रो में सफ़र किया, लिफ्ट और मॉल देखे, और इतिहास को करीब से महसूस किया।
लाल किले की शान,
लोटस टेंपल की शांति,
इंडिया गेट की शान,
मीना बाज़ार की रौनक,
और जामा मस्जिद की ऐतिहासिक शान,
सरोजिनी नगर मार्केट में अपने साइज़ के कपड़े ढूंढना—जिसके चर्चे गांव के वीकली मार्केट में भी पॉपुलर हैं—
ये सब सिर्फ़ किताबों और वीडियो में नहीं देखा, बल्कि देखा, महसूस किया, असलियत में जिया, और कुछ वहम भी टूटे।
ये सफ़र सिर्फ़ एक शहर देखने का नहीं था—ये सपनों को आकार देने का था।कुछ नए सपने बुने, कुछ पुरानी सोच बदली, और दिल में ये यकीन जगा कि दुनिया कितनी भी बड़ी क्यों न हो जाए, अपनी जड़ों से जुड़े रहना ही असली ताकत है।
*ये पुरानी तस्वीरों से बनी यादें हैं।*💐

19/02/2026

📚✨किताबें जो बातें करती हैं📚✨
किताबें सिर्फ पन्नों तक सीमित नहीं हैं,वे बोलती हैं, मुस्कुराती हैं, सवाल पूछती हैं और सपनों को जगाती हैं।जब शिक्षक कहानी खोलते हैं,तो हर बच्चा अपनी कल्पना की उड़ान भरने लगता है।ज़मीन पर बैठी ये नन्हीं आँखें,हर शब्द को ऐसे सुन रही हैं जैसे किताब सच में उनसे बातें कर रही हो।किताबें सिर्फ पढ़ाई नहीं सिखातीं,वे सोचने का तरीका देती हैं,हिम्मत देती हैं,और दुनिया को समझने की नई नज़र देती हैं।
आइए, मिलकर मुश्त संस्थान के लोकविद्या कार्यक्रम के माध्यम से ऐसे हर कोने तक शिक्षा, कहानियां और अवसर और “बातें करती किताबें” हर बच्चे तक पहुंचाएं,ताकि हर गाँव, हर एक बच्चे की सपनों की आवाज़ गूंजे।

20/01/2026

तरंग बाल मेला 2026

इस बार मेहलू में बच्चों की मुस्कान, सपनों की उड़ान और पूरे गाँव की खुशियों का अद्भुत संगम देखने को मिला ।

“तरंग बाल मेला 2026” सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह बच्चों की प्रतिभा, आत्मविश्वास और सामुदायिक एकता का उत्सव था। इस मेले में गाँव के सभी लोग—बुजुर्ग, महिलाएं , युवा और बच्चे—सभी ने मिलकर भाग लिया और इस दिन को खास बना दिया

🎈 बच्चों की हँसी
🎭 रंग-बिरंगी प्रस्तुतियाँ
🎨 रचनात्मक गतिविधियाँ
🤝 सबका साथ—सबका उत्साह

इस मेले ने यह संदेश दिया कि जब गाँव एक साथ आता है, तब बच्चों का भविष्य और भी उज्जवल बनता है

हम गाँव मेहलू के सभी सम्मानित ग्रामीणों और बच्चों को दिल से धन्यवाद देते हैं, जिन्होंने इस बाल मेले को सफल और यादगार बनाया

👧🧒 बच्चों की हँसी, खेल, उत्साह
👨‍👩‍👧‍👦 गाँव के हर परिवार की भागीदारी
🤝 एकता और अपनापन—हर तरफ

हम गाँव मेहलू के सभी ग्रामीणों को दिल से धन्यवाद देते हैं,
जिन्होंने इस मेले को सिर्फ कार्यक्रम नहीं, एक यादगार उत्सव बना दिया

06/12/2025

"स्पेशल बाल अधिकार सप्ताह"
बढ़ने दो हमको भी बापू क्यों मोहे हाथ में काम देवत हो, बाल मन है मोहे क्यों जिम्मेदारी का बोझ देवत हो, मेरो भी तो मन करता खेली न खुदान को देख मेरो संगे साथी पढ़नो को जावट हैं, मोहे भी खूब पढ़नू है, पढ़ लिखूंणु अफसर बन्नू हैं।

संवाद 2025हर बार नवाचारों के साथ समुदाय से मिलना।
15/10/2025

संवाद 2025
हर बार नवाचारों के साथ समुदाय से मिलना।

इन मासूम मुस्कानों में छुपा है हमारा असली मक़सद। यह बैग केवल स्कूल किट नहीं, बल्कि सपनों और उज्ज्वल भविष्य का तोहफ़ा है।...
08/09/2025

इन मासूम मुस्कानों में छुपा है हमारा असली मक़सद। यह बैग केवल स्कूल किट नहीं, बल्कि सपनों और उज्ज्वल भविष्य का तोहफ़ा है।

हम मिलकर एक ऐसी दुनिया बना रहे हैं जहाँ हर बच्चा सीख सके, हँस सके और आत्मविश्वास से आगे बढ़ सके। जिसके लिए यह Goonj और musht का साझा पहल है

जब किताबें घर तक पहुँचती हैं, तो सपने भी रास्ता ढूँढ लेते हैं।गाँव-गाँव तक कहानियाँ, हर बच्चे तक सीखने की रोशनी
01/09/2025

जब किताबें घर तक पहुँचती हैं, तो सपने भी रास्ता ढूँढ लेते हैं।
गाँव-गाँव तक कहानियाँ, हर बच्चे तक सीखने की रोशनी

शैक्षिक संवाद शिक्षक और शिक्षा के बीच के सम्बन्ध मे है निरंतर सीखने की प्रकिया और अपने कार्यों में  गुणवत्ता को लाना खाल...
22/08/2025

शैक्षिक संवाद
शिक्षक और शिक्षा के बीच के सम्बन्ध मे है निरंतर सीखने की प्रकिया और अपने कार्यों में गुणवत्ता को लाना खालवा तहसील में शिक्षक अपनी पूरी क्षमता के साथ (बच्चों को बेहतर सीखने सिखाने के लिए) लगातार तैयारी कर रहे है

"पगडंडी यात्रा स्वागत और उन्मुखीकरण"मेरे पूर्वजो की सम्पदा और संस्कृति का प्रतीक है यह 150 साल पुराना आम का पेड़ । यह कहा...
16/03/2025

"पगडंडी यात्रा स्वागत और उन्मुखीकरण"
मेरे पूर्वजो की सम्पदा और संस्कृति का प्रतीक है यह 150 साल पुराना आम का पेड़ ।
यह कहानी है पगडण्डी यात्रा उन्मुखीकरण जिस पेड़ की छांव में किया गया उस पेड़ की।

अंबाडा गांव के समीप जंगल के किनारे लगे एक खेत के बीचों बीच खड़ा फलदार पेड़ जिसकी हर झुकती शाख को एक लकड़ी के सहारे से खड़ा किया गया है जिसे देख दूर से ही जान पाओगे की यह कोरकू आदिवासी का खेत है। कड़मा दादा बताते है कि यह पेड़ तब से है जब मेरे पूर्वज ने खेती करना शुरू किया यह पेड़ 150 साल से भी अधिक समय से ऐसा ही है। में अभी 70 साल का हूं और हम हर साल इससे ढेर सारे मीठे आम लेते हैं। इसकी शाखाओं को ऊपर रखने के लिए अलग से इसमें लकड़ी का सहारा देते है। हमारे समुदाय में कभी भी फलदार पेड़ को नहीं काटते हैं। यह पेड़ मेरे पूर्वजों की देन है और हम इसे पीढ़ी दर पीढ़ी संभालते आ रहे हैं, मेरे साथ मेरे बच्चे इसकी देखभाल करते हैं उनके बाद मेरे पोता पोती संभालेगे जैसे मेरे पिता ने मुझे सिखाया मैंने अपने बेटो को सिखाया है।
बदलते मौसम के प्रभाव पर कड़मा दादा ने कहा हम ताजी हवा और सुकून को अपनी विरासत मानते है और शहर बसाने वाले इसे मिटाते जा रहे है अगर ये भी खत्म हो गया तो शहर में लोगो का जीना मुश्किल हो जाएगा। हवा अब बदल गई है
और इसका नुकसान हम पर भी हुआ है।

🚜पगडंडी यात्रा का 9 वाँ सीजन🚜" जल, जंगल, जमीन  के रखवाले आदिवासी समुदायों को जानने और आदिवासियत के जीवन को समझने और पहल ...
15/02/2025

🚜पगडंडी यात्रा का 9 वाँ सीजन🚜

" जल, जंगल, जमीन के रखवाले आदिवासी समुदायों को जानने और आदिवासियत के जीवन को समझने और पहल करने वाले कारवाँ में आपका स्वागत है "

आदिवासी संस्कृति हमारी भारतीय विरासत का अनमोल हिस्सा है, जो प्रकृति, परंपरा, और सामूहिक जीवन के अद्वितीय संगम को दर्शाती है। उनकी जीवनशैली में सादगी, उत्सवों, उल्लास, और परंपराओं में गहराई छिपी होती है। पगडण्डी यात्रा न केवल आपको आदिवासी जीवन के करीब लाएंगी, बल्कि उनकी परंपराओं और मूल्यों से प्रेरित भी करेंगी। इस वर्ष यात्रा का विषय "जलवायु परिवर्तन से आदिवासी समुदायों और आदिवासी विरासत (जल, जंगल,जमीन) पर होने वाले प्रभावों का उनके जीवन पर असर और समुदाय का नजरिया को समझने का मौका देती है।पगडण्डी यात्रा एक चलित कारवाँ है जो अपने 8 दिन के सफ़र में मध्यप्रदेश के खंडवा जिले की खालवा तहसील के सतपुड़ा के जंगलो में यात्रा होंगी जिसमें देशभर के युवा,सामजिक कार्यकर्ता, कला, संवाद, आदिवासियत और जल जंगल जमीन से जुड़ने वाले साथी 1 से 8 मार्च तक यात्रा में शामिल होंगे।

समुदाय के उत्सव, संगीत कला, नृत्य और सतपुड़ा की सुन्दरता के साथ एक दुसरे से सीखने सिखाने की पहल और मानवीय मूल्यों पर आधारित प्रस्तुति और संवाद के आयोजन में हम आपका स्वागत करते हैं|

इस यात्रा में शामिल होने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जल्दी से अपना पंजीयन कीजिए :-
https://forms.gle/6baRho7pUpznPxgK7

यह फॉर्म दिनांक 20 फरवरी तक खुला है।
संपर्क नंबर - 9009516558

Address

Hunar Ki Paathshala Kendra Village Bavdiya Teh. Khalwa
Khandwa
450117

Telephone

+919009516558

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