06/01/2024
*भारत जोड़ो*
निकलेगा पूरब से पश्चिम तक जायेगा।
वो जनमानस के प्रश्नों का उत्तर लायेगा।
अंधियारा हो घना तो मन की आस सहारा।
इतिहास देख लो कब तम से दीपक हारा।
हो संकल्पित, लड़ो, न किंचित रण छोड़ो
निकल पड़ो, भारत जोड़ो।
जाति धर्म में बाँट देश किया खंड-खंड।
चरम पर मंहगाई,जनता में क्रोध प्रचंड।
संकल्प एकता का धारो, अब ललकारो
राम हो तुम कलयुग के रावण को मारो।
कर्तव्यपथ पर दौड़ो, न किंचित रण छोड़ो
निकल पड़ो, भारत जोड़ो।
जुमलों से न देश चले सब जान गये।
सच्ची राष्ट्रभक्ति है क्या पहचान गये।
लोकलुभावन भाषण की दरकार नहीं।
विदूषक सर्कस में सोहे, सरकार नहीं।
छोड़ो अंधभक्ति पर किंचित न रण छोड़ो
निकल पड़ो, भारत जोड़ो।
द्वारा : संजय तिवारी।