02/01/2026
🚨 1 जनवरी की रात — सिस्टम फेल, जनता मजबूर 🚨
ये तस्वीरें 1 जनवरी की रात की हैं।
खड्डा PHC में एक्सीडेंट के गंभीर मरीज पड़े थे —
ना डॉक्टर, ना इमरजेंसी सेवा।
👉 मजबूरी में हम, हमारी टीम और गाँव के लोगों ने मिलकर
खुद एंबुलेंस मंगवाई और
मरीजों को Community Health Centre Turkaha भेजा।
लेकिन दर्दनाक सच्चाई ये है कि
वहाँ से भी सभी मरीजों को रेफर कर दिया गया।
अब किसी को नहीं पता कि
उनकी जान बची या नहीं…
❌ PHC बंद
❌ CHC से भी रेफर
❌ हर जगह सिर्फ कागजी व्यवस्था
अगर जनता उस रात साथ न खड़ी होती,
तो शायद मरीजों को अस्पताल तक पहुँचने का मौका भी न मिलता।
रेलवे ढाला बंद हो जाए तो 30 मिनट–1 घंटा लग जाता है,
गन्ना सीजन में ट्रैक्टर-ट्रॉली से रास्ता जाम रहता है —
ऐसे में रेफर-रेफर खेल
सीधे मौत का कारण बन जाता है।
❓ सवाल सीधे प्रशासन से
जब PHC और CHC दोनों हैं तो
➡️ इलाज कहाँ मिलेगा?
➡️ गरीब आदमी जाए तो जाए कहाँ?
➡️ रेफर सिस्टम कब तक जान लेता रहेगा?
✊ हमारी मांग
✔️ खड्डा PHC में 24×7 डॉक्टर और इमरजेंसी
✔️ CHC तुर्कहा में ट्रॉमा/एक्सीडेंट ट्रीटमेंट की व्यवस्था
✔️ रेफर करने से पहले स्थिर इलाज (First Aid + Stabilization)
✔️ जिम्मेदार अधिकारियों पर जवाबदेही तय हो
आज हमें नहीं पता
उन घायलों का क्या हुआ…
लेकिन इतना तय है —
यह सिस्टम अगर नहीं बदला,
तो अगला नंबर किसी और का होगा।
आवाज़ उठाइए, शेयर कीजिए।
खामोशी भी इस सिस्टम की साथी है।