08/06/2026
खुदाई के दौरान अमीन गाँव से मिली प्राचीन मूर्तियों का इतिहास
अमीन (अभिमन्युपुर) गाँव के लोगों को छोड़कर बहुत कम लोग जानते हैं कि 1960 के दशक में ससमाली तीर्थ के निकट हुई खुदाई के दौरान दो अत्यंत महत्वपूर्ण प्राचीन मूर्तियाँ प्राप्त हुई थीं। आज यह क्षेत्र पुरातात्विक दृष्टि से संरक्षित है।जिस तालाब के आसपास यह ऐतिहासिक स्थल स्थित है, उसमें वर्तमान में गाँव की सीवरेज का पानी भी पहुँचता है।
मूर्तियों की अद्भुत कहानी
खुदाई के दौरान जब ये मूर्तियाँ मिलीं तो उन्हें सुरक्षित रखने के लिए सूर्यकुण्ड के निकट स्थित मंदिर में स्थापित कर दिया गया। सूर्यकुण्ड पर प्रतिवर्ष विशाल मेला आयोजित होता है।कहा जाता है कि एक बार मेले में आए किसी कला-पारखी व्यक्ति की नज़र इन दुर्लभ मूर्तियों पर पड़ी। उसने उनकी तस्वीरें लीं और बाद में उनकी हूबहू प्रतिकृतियाँ तैयार करवाईं। कुछ समय बाद असली मूर्तियों को हटाकर उनकी जगह नकली प्रतिमाएँ रख दी गईं और मूल मूर्तियाँ चोरी कर ली गईं।
आज भी वे प्रतीकात्मक प्रतिकृतियाँ माता मनसा देवी मंदिर में रखी हुई बताई जाती हैं।
लंदन से भारत वापसी
कहानी यहीं समाप्त नहीं होती। चोरी हुई ये मूर्तियाँ किसी प्रकार तस्करी के माध्यम से ब्रिटेन पहुँच गईं। बाद में भारतीय उच्चायोग के प्रयासों से इन्हें वापस भारत लाया गया। वर्तमान में ये दोनों मूर्तियाँ National Museum में सुरक्षित संरक्षित हैं। हालाँकि आज तक यह रहस्य पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सका कि ये मूर्तियाँ विदेश तक कैसे पहुँचीं और किन माध्यमों से उनकी तस्करी की गई।
मूर्तियों की विशेषताएँ:
कार्बन डेटिंग और कला-शैली के आधार पर इनका काल दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व माना जाता है। जो कि लगभग 2200 वर्षों का समय काल है।
इनकी कला शैली Pushyamitra Shunga के कालीन शुंगकालीन स्थापत्य परंपरा से साम्यता रखती है।
मूर्तियाँ लाल बलुआ पत्थर से निर्मित हैं।
इनमें प्रसिद्ध Mathura School of Art की स्पष्ट झलक दिखाई देती है।
एक मूर्ति यक्ष की है, जबकि दूसरी एक प्रेमी युगल (Amorous Couple) की है। प्रेमी युगल की मूर्ति पर अत्यंत सूक्ष्म और जटिल नक्काशी की गई है तथा आभूषणों का सुंदर अंकन इसकी कलात्मक उत्कृष्टता को दर्शाता है।
अमीन की गौरवशाली विरासत
ये मूर्तियाँ केवल पत्थर की कलाकृतियाँ नहीं हैं, बल्कि अमीन (अभिमन्युपुर) की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, यहाँ विकसित हुई उच्चकोटि की स्थापत्य कला और इस क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास की अमूल्य धरोहर हैं। वे इस बात का प्रमाण हैं कि प्राचीन काल में यह क्षेत्र कला, संस्कृति और धार्मिक गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा होगा। गाँव अमीन के पुरातात्विक इतिहास के साथ इसका पौराणिक इतिहास भी है। जो महाभारत काल से जुड़ता है। ये कुरुक्षेत्र की 48 कोस क्षेत्र का भाग है। जहाँ प्रतिवर्ष हज़ारो सैलानी पहुंचते हैं। यही नहीं गांव अभिमन्युपुर इकलौता गाँव है जहाँ 5 तीर्थ हैं-
सूर्यकुंड, अदिति कुंड, अम्बातीर्थ, ससमाली तीर्थ, गगाना तीर्थ।
आज आवश्यकता इस बात की है कि इन धरोहरों की कहानी अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचे, ताकि अमीन का ऐतिहासिक महत्व राष्ट्रीय स्तर पर पहचान प्राप्त कर सके।
राष्ट्रीय संग्रहालय में राजेश चौहान और विकास शर्मा ने अलग-अलग समय पर इन मूर्तियों का अवलोकन किया।