30/03/2026
"...यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो
समझो जिससे यह व्यर्थ न हो"
मैथिलीशरण गुप्त जी की इन पंक्तियों को समझने और चरितार्थ करने का अवसर और गुण हर मनुष्य में कहां समाहित होते हैं, लेकिन हमारी स्मृतियों, प्रेरणाओं में शेष यतीन्द्र जी इसी विचारधारा और परिवेश के थे।
जो यश लोग अपने संपूर्ण जीवनकाल में नहीं कमा पाते अल्प आयु में वह यश कमाने वाले, समाज सेवा के हित अपना सकल जीवन समर्पित करने वाले तथा यती संकल्प संस्थान के प्रेरणा स्रोत, अपने सत्कर्मों से कानपुर के युवाओं के हृदय में विराजने वाले कीर्तिशेष यतींद्र जी की पुण्यतिथि पर हम उन्हें नमन करते हैं। जब तक उनका जीवन रहा तब तक वह अपने कर्मों से लोगों को प्रेरणा देते रहे और उन्हीं की दृष्टि, आशीर्वाद व प्रेरणा से समाज सेवा की नई इबारत लिख रहा है यती संकल्प संस्थान। कीर्तिशेष यतीन्द्रजीत जी की दूरगामी सोच और त्याग समर्पण की विधा को ही यती संकल्प संस्थान के माध्यम से आगे ले जाया जा रहा है। उनका संकल्प था जो आज हम साकार कर रहे हैं। सिर्फ शिक्षा ही नहीं इसके अलावा युवा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, गौ-सेवा और पिछड़े इलाकों को स्वावलंबी बनाने जैसे पुण्य कर्मों को धरातल पर साकार रूप प्रदान किया है। ऐसे सत्कर्मों की लीक व रूढ़ीवादी विचारों से हटकर उन्हें विराजित करने वाले एवं उसमें कीर्तिमान स्थापित करने वाले कीर्तिशेष यतींद्रजीत सिंह जी (यती भईया)की पुण्य तिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
अनन्त प्रेरणा स्रोत यती भैया को सादर नमन । 🙏🏻💐