25/09/2024
मेरे लिए यह जानकारी सचमुच चौंकाने वाली थी कि मेरे गांव के साप्ताहिक बाजार में कद्दू 20 रुपये किलो और लौकी 30 रुपये नग बिकते हैं। विस्मय इसलिए था कि जिनकी बेलें कभी हर घर की छत, मुंडेरों और छप्परों पर मौजूद हुआ करती थीं, वही सब्जियां बाजार के एक दिन में करीब पांच क्विंटल खप जाती हैं। बड़ी हवेली का अहाता हो या फिर किसी गरीब का छप्पर, हरी सब्जियों की वे बेलें पहले हर जगह से झांकती नजर आती थीं। लेकिन इन दिनों उसी गांव का हाल यह है कि पूरे साल में उसके करीब दस लाख रुपये इन्हीं सब्जियों पर खर्च हो जाते हैं। अपने गांव को पूरे ग्लोब में रखकर देखता हूं, तो सवाल कई गुना बड़ा होकर सामने आ खड़ा हो जाता है।