एस0 एन0 सेन बी0बी0 पी0जी0 कालेज कानपुर के हिन्दी विभाग की विभागाध्यक्ष डा0 सुजाता वर्मा अपने अल्प शिक्षण काल में छात्राओं को सकारात्मक चिंतन तथा रचनात्मक लेखन के लिए सदा प्रेरित करती रही थी। उनकी मृत्योपरान्त उनके इस प्रयास को गतिमान रखने के उद्देश्य से उनके स्वजनों तथा सहयोगियों ने ‘डा0 सुजाता वर्मा स्मृति समिति’ का गठन किया।
डा0 सुजाता वर्मा के अधूरे स्वप्न को पूरा करने के उद्देश्य से ही उनकी स
्मृति में इस समिति का गठन उनके स्वजनों अभिन्न मित्रों व प्रशंसकों के सद-प्रयासों से हुआ है। समिति एक ऐसा पटल या प्लेटफार्म है जो युवा लेखकों को प्रोत्साहित करने की दिशा में कार्य करेगा। यह लाभार्जन की भावना से नहीं अपितु लेखन-कौशल ( टैलेन्ट ) को विकसित करने के उद्देश्य से प्रेरित है। समिति डा0 सुजाता वर्मा के स्पप्नों के प्रति कटिबद्ध है जो अपने संसाधनों से सकारात्मक लेखन को प्रोत्साहित करने का प्रयास करेगीं ।
समिति द्वारा प्रतिवर्ष अन्तर-महाविद्यालयों स्तर पर किसी एक विषय पर लेखन प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी तथा डा0 सुजाता वर्मा के जन्मदिवस 22 सितम्बर को पुरस्कार वितरण समारोह में विेजेता प्रतिभागियों को नगद पुरस्कार,प्रशस्ति पत्र तथा प्रतिभागिता प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा। प्रथम पुरुस्कार ३१०० रु , द्वतीय पुरुस्कार २१०० रु , तृतीय पुरुस्कार ११०० रु तथा दो सांत्वना पुरुस्कार ५०० रु प्रत्येक दिए जायेंगे | इस अवसर पर पुरस्कृत सात लेखों को उसी विषय पर अन्य विशिष्ट लेखकों के आमंत्रित लेखों के साथ पुस्तक में संकलित किया जायेगा तथा ISBN नम्बर की एक पुस्तक के रूप में इनका प्रकाशन भी किया जायेगा।
यह आयोजन 2016 अक्टूबर में डा0 सुजाता वर्मा की मृत्यु के उपरान्त वर्ष 2017 से प्रारम्भ किया जा रहा है।
स्मृति समिति के गठन से लेकर लेखन प्रतियोगिता आयोजन के प्रस्ताव को पति जी0पी0 वर्मा तथा उनकी पुत्री प्रिया वर्मा ने कार्यरूप में परिणित किया। इसके पश्चात् इस आयोजन हेतु स्वजनों सुश्री सरन पी0 वर्मा अवकाश प्राप्त राजपत्रित अधिकारी ( पी0 सी0 एस0), श्री पी0 पी0 वर्मा आई0 ए0 एस0 ( पूर्व मुख्य सचिव असम सरकार ), इंजीनियर श्रीमती अनवीक्षा वर्मा, इंजीनियर श्री रवि खोखर, श्री आदित्य वर्मा,श्रीमती नम्रता वर्मा,स्वर्गीय डा0 सुजाता वर्मा की बड़ी भाभी श्रीमती रेवा सचदेव, भाई कृष्ण मोहन सचदेव, श्री कीर्ति रमन सचदेव, श्रीमती सरोज सचदेव, श्रीमती इन्दु सचदेव तथा परिवार के अन्य सदस्यों ने समिति के गठन में अपना योगदान दिया।
इंडियन साइंस कांग्रेस एसोसिएशन (कानपुर चैप्टर) के पूर्व अध्यक्ष डा0 अशोक सक्सेना व उनकी पत्नी व इंडियन साइंस कांग्रेस एसोसिएशन की महामंत्री डा0 विजय लक्ष्मी सक्सेना ने इस योजना में अपनी-अपनी भागीदारी की पहल की।
जब योजना की चर्चा डा0 सुजाता की पुस्तकों के प्रकाशक श्री पंकज बाजपेई से हुई तो उन्होंने समिति को नया क्षितिज दिया और वह स्वयं भी इस समिति से जुड़ गए। महाविद्यालयों तक समिति की योजना को प्रसारित करने से लेकर पुस्तक प्रकाशन का पूरा उत्तरदायित्व उन्होंने स्वीकार किया।
इसी प्रकार नगर की प्रतिष्ठित चार्टर्ड एकाउन्टेन्ट कम्पनी श्रीवास्तव एस0एण्ड कम्पनी के स्वामी सीए एस0सी0 श्रीवास्तव ने समिति गठन व उसको पंजिकृत करने का बहुमूल्य सुछाव दिया और उन्होंने समिति के पंजीकृत करने व आजीवन समिति के लेखा-परीक्षण करने का उत्तरदायित्व स्वतः ले लिया।
बुनियादी स्तर पर योजना को मूर्तिरूप देने के पश्चात् एस0एन0सेन बी0वी0 पी0जी0 महाविद्यालय के प्रबन्ध तंत्र के वरिष्ठ सदस्यों श्रीमती दीपाश्री सेन, श्री प्रवीण मिश्रा ( अध्यक्ष ), श्री पी0के0 सेन ( मंत्री ), श्री सुब्रो सेन ( संयुक्त मंत्री) तथा प्राचार्या डा0 पूर्णिमा त्रिपाठी के समक्ष समिति का प्रस्ताव प्रेषित किया तो सभी ने एक स्वर से प्रयास की सराहना की तथा आश्वस्त किया कि समिति के आयोजन में महाविद्यालय की भागीदारी रहेगी।
प्रबन्ध तंत्र ने महाविद्यालय के सभागार में ही समिति द्वारा किये जा रहे समारोह को सम्पन्न करना सुनिश्चित किया।
महाविद्यालय के सभी विभागों के विभागाध्यक्षों तथा प्राध्यापिकाओं ने जिनमें डा0 रानी वर्मा, डा0 निशि प्रकाश, डा0 रेखा चैबे, डा0 निशा अग्रवाल, डा0 चित्रा सिंह तोमर, डा0 अलका टंडन, डा0 गार्गी यादव, डा0 संध्या सिंह, डा0 पूनम अरोड़ा तथा डा0 हरीश झा आदि प्रमुख हैं, समिति गठन की सराहना की तथा इसमें अपने स्तर से सम्पूर्ण सहयोग किया।
जाने-माने हास्य कवि डा0 सुरेश अवस्थी व डा0 कमल मुसद्दी ने भी समिति गठन व उसकी भावी योजनाओं के कार्यावयन में पूर्ण सक्रियता से भागीदारी स्वीकारी। इस प्रकार मात्र एक माह के अन्तराल में इस समिति का नया स्वप्निल पौधा प्रस्फुटित हुआ है जो कालान्तर में सभी के सहयोग से वट वृक्ष का रूप लेने के लिए उद्धत है।