Beas Ways Development Society

Beas Ways Development Society NGO based # Harsi Pattan, Tehsil, Jaisinghpur, Distt,Kangra H.P

ॐ मानव शरीर में सप्तचक्रों के प्रभाव का रहस्य...अंत तक जरुर पढ़े🧵1. *मूलाधारचक्र* : यह शरीर का पहला चक्र है। गुदा और लिं...
21/01/2025



मानव शरीर में सप्तचक्रों के प्रभाव का रहस्य...अंत तक जरुर पढ़े🧵

1. *मूलाधारचक्र* :
यह शरीर का पहला चक्र है। गुदा और लिंग के बीच 4 पंखुरियों वाला यह 'आधार चक्र' है। 99.9% लोगों की चेतना इसी चक्र पर अटकी रहती है और वे इसी चक्र में रहकर मर जाते हैं। जिनके जीवन में भोग, संभोग और निद्रा की प्रधानता है उनकी ऊर्जा इसी चक्र के आसपास एकत्रित रहती है।

मंत्र : लं
चक्र जगाने की विधि : मनुष्य तब तक पशुवत है, जब तक कि वह इस चक्र में जी रहा है इसीलिए भोग, निद्रा और संभोग पर संयम रखते हुए इस चक्र पर लगातार ध्यान लगाने से यह चक्र जाग्रत होने लगता है। इसको जाग्रत करने का दूसरा नियम है- यम और नियम का पालन करते हुए साक्षी भाव में रहना।

प्रभाव : इस चक्र के जाग्रत होने पर व्यक्ति के भीतर वीरता, निर्भीकता और आनंद का भाव जाग्रत हो जाता है। सिद्धियां प्राप्त करने के लिए वीरता, निर्भीकता और जागरूकता का होना जरूरी है।
2. *स्वाधिष्ठानचक्र* -

यह वह चक्र है, जो लिंग मूल से 4 अंगुल ऊपर स्थित है जिसकी 6 पंखुरियां हैं। अगर आपकी ऊर्जा इस चक्र पर ही एकत्रित है तो आपके जीवन में आमोद-प्रमोद, मनोरंजन, घूमना-फिरना और मौज-मस्ती करने की प्रधानता रहेगी। यह सब करते हुए ही आपका जीवन कब व्यतीत हो जाएगा आपको पता भी नहीं चलेगा और हाथ फिर भी खाली रह जाएंगे।

मंत्र : वं

कैसे जाग्रत करें : जीवन में मनोरंजन जरूरी है, लेकिन मनोरंजन की आदत नहीं। मनोरंजन भी व्यक्ति की चेतना को बेहोशी में धकेलता है। फिल्म सच्ची नहीं होती लेकिन उससे जुड़कर आप जो अनुभव करते हैं वह आपके बेहोश जीवन जीने का प्रमाण है। नाटक और मनोरंजन सच नहीं होते।
प्रभाव : इसके जाग्रत होने पर क्रूरता, गर्व, आलस्य, प्रमाद, अवज्ञा, अविश्वास आदि दुर्गणों का नाश

होता है। सिद्धियां प्राप्त करने के लिए जरूरी है कि उक्त सारे दुर्गुण समाप्त हों तभी सिद्धियां आपका द्वार खटखटाएंगी।

3. *मणिपुरचक्र* :

नाभि के मूल में स्थित यह शरीर के अंतर्गत मणिपुर नामक तीसरा चक्र है, जो 10 कमल पंखुरियों से युक्त है। जिस व्यक्ति की चेतना या ऊर्जा यहां एकत्रित है उसे काम करने की धुन-सी रहती है। ऐसे लोगों को कर्मयोगी कहते हैं। ये लोग दुनिया का हर कार्य करने के लिए तैयार रहते हैं।
मंत्र : रं

कैसे जाग्रत करें : आपके कार्य को सकारात्मक आयाम देने के लिए इस चक्र पर ध्यान लगाएंगे। पेट से श्वास लें।
प्रभाव : इसके सक्रिय होने से तृष्णा, ईर्ष्या, चुगली, लज्जा, भय, घृणा, मोह आदि कषाय-कल्मष दूर हो जाते हैं। यह चक्र मूल रूप से आत्मशक्ति प्रदान करता है। सिद्धियां प्राप्त करने के लिए आत्मवान होना जरूरी है। आत्मवान होने के लिए यह अनुभव करना जरूरी है कि आप शरीर नहीं, आत्मा हैं।
आत्मशक्ति, आत्मबल और आत्मसम्मान के साथ जीवन का कोई भी लक्ष्य दुर्लभ नहीं।

4. *अनाहतचक्र* -

हृदयस्थल में स्थित द्वादश दल कमल की पंखुड़ियों से युक्त द्वादश स्वर्णाक्षरों से सुशोभित चक्र ही अनाहत चक्र है। अगर आपकी ऊर्जा अनाहत में सक्रिय है तो आप एक सृजनशील व्यक्ति होंगे। हर क्षण आप कुछ न कुछ नया रचने की सोचते हैं। आप चित्रकार, कवि, कहानीकार, इंजीनियर आदि हो सकते हैं।

मंत्र : यं

कैसे जाग्रत करें : हृदय पर संयम करने और ध्यान लगाने से यह चक्र जाग्रत होने लगता है। खासकर रात्रि को सोने से पूर्व इस चक्र पर ध्यान लगाने से यह अभ्यास से जाग्रत होने लगता है और सुषुम्ना इस चक्र को भेदकर ऊपर गमन करने लगती है।

प्रभाव : इसके सक्रिय होने पर लिप्सा, कपट, हिंसा, कुतर्क, चिंता, मोह, दंभ, अविवेक और अहंकार समाप्त हो जाते हैं। इस चक्र के जाग्रत होने से व्यक्ति के भीतर प्रेम और संवेदना का जागरण होता है। इसके जाग्रत होने पर व्यक्ति के समय ज्ञान स्वत: ही प्रकट होने लगता है। व्यक्ति अत्यंत आत्मविश्वस्त, सुरक्षित, चारित्रिक रूप से जिम्मेदार एवं भावनात्मक रूप से संतुलित व्यक्तित्व बन जाता है। ऐसा व्यक्ति अत्यंत हितैषी एवं बिना किसी स्वार्थ के मानवता प्रेमी एवं सर्वप्रिय बन जाता है।

5. *विशुद्धचक्र* -

कंठ में सरस्वती का स्थान है, जहां विशुद्ध चक्र है और जो 16 पंखुरियों वाला है। सामान्य तौर पर यदि आपकी ऊर्जा इस चक्र के आसपास एकत्रित है तो आप अति शक्तिशाली होंगे।

मंत्र : हं

6 *आज्ञा चक्र*
सक्रिय है तो ऐसा व्यक्ति बौद्धिक रूप से संपन्न, संवेदनशील और तेज दिमाग का बन जाता है लेकिन वह सब कुछ जानने के बावजूद मौन रहता है। इसे बौद्धिक सिद्धि कहते हैं।

मंत्र : उ

कैसे जाग्रत करें : भृकुटी के मध्य ध्यान लगाते हुए साक्षी भाव में रहने से यह चक्र जाग्रत होने लगता है।

प्रभाव : यहां अपार शक्तियां और सिद्धियां निवास करती हैं। इस आज्ञा चक्र का जागरण होने से ये सभी शक्तियां जाग पड़ती हैं और व्यक्ति सिद्धपुरुष बन जाता है।

7. *सहस्रारचक्र* :

सहस्रार की स्थिति मस्तिष्क के मध्य भाग में है अर्थात जहां चोटी रखते हैं। यदि व्यक्ति यम, नियम का पालन करते हुए यहां तक पहुंच गया है तो वह आनंदमय शरीर में स्थित हो गया है। ऐसे व्यक्ति को संसार, संन्यास और सिद्धियों से कोई मतलब नहीं रहता है।

मंत्र : ॐ

कैसे जाग्रत करें : मूलाधार से होते हुए ही सहस्रार तक पहुंचा जा सकता है। लगातार ध्यान करते रहने से यह चक्र जाग्रत हो जाता है और व्यक्ति परमहंस के पद को प्राप्त कर लेता है।

प्रभाव : शरीर संरचना में इस स्थान पर अनेक महत्वपूर्ण विद्युतीय और जैवीय विद्युत का संग्रह है। यही मोक्ष का द्वार है।

ॐ 🙏🏻

 #बे_धड़क_करते_है_किसी_काम_को_हम।  #बो_कोई_और_होंगे_जो । #तूफान_दिल_में_दबाए_रखते_है।।सादगी,स्वरूप,जीवन से भरपूर, प्रफुल...
15/12/2024

#बे_धड़क_करते_है_किसी_काम_को_हम।
#बो_कोई_और_होंगे_जो ।
#तूफान_दिल_में_दबाए_रखते_है।।
सादगी,स्वरूप,जीवन से भरपूर, प्रफुल्लित मन, साहसी, दयाशील, पराक्रमी, सहनशीलता के भरपूर, नवीनता से परिपूर्ण, मातृभूमि के प्रेमी और आने वाली पीढ़ियों के लिए कुछ कर गुजरने की शक्ति इन सब गुणों का संगम करोड़ों में से किसी विरले में ही देखने को मिलता है। हमारा सौभाग्य है ऐसी महान हस्ती हमारे आदरणीय बड़े भाई , संस्था के संस्थापक और हमारे मार्गदर्शक, प्रेरणास्त्रोत #श्री_विनोद_रियाल_जी को सेवा सेवानिवृति के मौके पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं ! समस्त इलाका वासियों को आपसे पूर्ण आशा है कि अब आप हमारे इलाके के उत्थान के लिए अपना भरपूर सहयोग देंगे और हारसी पत्तन को विश्व के मानचित्र पर लाने के लिए पूर्ण सहयोग करेंगे और आशा है हम सफल होंगे। अक्षर सरकारी नौकरी लगने के बाद लोग केवल अपना ओर अपने परिवार का भला सोचते है उन्हें सामाजिक उत्थान से कोई सरोकार नहीं होता है मगर आपने अपनी सर्विस के दौरान जो ऊर्जा का संचार इस सोसाइटी के माध्यम से हम सब के मन में भरा है वो सदैव जीवंत रहेगा जब तक यह कार्य पूरा नहीं हो जाता है। आपके अथक प्रयास और निर्भीकता, एकजुटता ओर स्पष्टता से अपने मंसूबों पर डटे रहने का गुण हम सब में नई ऊर्जा ओर उत्साह वर्धन करता है। आप जब तक हमारे साथ खड़े है सफलता निश्चित है। कई मोड आए कुछ अवरोधक बने मगर इच्छा शक्ति और एकजुटता की शक्ति से अवरोधक हमेशा पार हो ही जाते है और पीछे छूट जाते है। परमात्मा से प्रार्थना है कि आप स्वस्थ रहे और दीर्घ आयु को प्राप्त करें।

अक्षर सरकारी नौकरी लगने के बाद लोग बादशहित में जीवन जीने लगते है अपने पद प्रतिष्ठा का रॉब समाज में दिखाते और अहंकार बस भ...
29/02/2024

अक्षर सरकारी नौकरी लगने के बाद लोग बादशहित में जीवन जीने लगते है अपने पद प्रतिष्ठा का रॉब समाज में दिखाते और अहंकार बस भूल जाते है की सरकारी नौकरी एक सेवा है कोई बदसाही नही। मगर ऐसे लोगों की अधिकता के बीच कुछ ऐसे भी है जो सरकारी नौकरी को सेवा भाव से करते है। ऐसे ही महानुभाव है हमारे और आप सब के प्रिय भाई *श्री प्रकाश चंद* जी जो आज पीजीआई से सेवानिवृत हो रहे है। हमारे हारसी के लिए यह गर्व की बात है की इस मिट्टी ने ऐसे सपूत पैदा किए है। प्रकाश भाई के कार्यकाल में जिसे भी पीजीआई में जहां बिना सिफारिश इलाज करवाना किसी चुनौती से कम नहीं होता है और आप सब जानते है पीजीआई हर गहन बिमारी के लिए एक आखरी उम्मीद होती है। इस संकट में जब भी किसी ने प्रकाश भाई को उनकी सेवाओं के लिए अनुरोध किया है तब तब प्रकाश भाई जी ने अपना काम छोड़ कर हर जरूरत मंद की तन मन और धन से उसका सही इलाज करवाने में हर प्रक्रिया में उनकी निस्वार्थ सेवा की है। मदत से इंकार न करना मानो उनके स्वभाव और संस्कार की देन को दर्शाता है । सिकन नाम की कोई लकीर कभी उनके माथे पर नही देखी। बड़ी प्रसन्नता से हर जरूरतमंद का सहारा बनने में मानो उन्हे अनंत खुशी मिलती हो। आज इस हारसी के सपूत का सेवानिवृत होना समस्त इलाके के लिए एक बहुत बड़ा नुकसान है। हम सब के लिए पीजीआई में बह एक उम्मीद थी। सेवानिवृति तो केवल एक संस्थान से हो सकती है मगर उनके स्वभाव और संस्कार से उनकी सेवाओं में कभी कमी नही आयेगी क्योंकि उन्होंने देश के इस सबसे बड़े संस्थान में अपनी एक अलग पहचान बनाई है जिसके कारण हमे लगता है बह सदैव जरूरतमंद लोगों की सेवा करते रहेंगे। उनके अनुभव और इस सेवा भाव के स्वभाव की हम समाज में एक अच्छे बदलाव की शुरआत के तौर पर देखते है उम्मीद है बह अपने इस अनुभव से समाज में जरूर बदलाव लाएंगे। *हमारी सोसाइटी और प्रबुद्ध जनता की तरफ से उन्हे सह परिवार हार्दिक बधाई एवम शुभकामनाएं। ईश्वर सदैव अपना आशीर्वाद आप पर बनाए रखे।*

*सभार*: व्यास वेज डेवलपमेंट सोसाइटी.

 #हिमाचल_के_भोले_भाले_लोग_हो_रहे_ठगी_का_शिकारजिस भोलेपन, सीधे साधे और सच्चे लोगों की पहचान से जाने वाले हिमाचल की जनता क...
27/11/2023

#हिमाचल_के_भोले_भाले_लोग_हो_रहे_ठगी_का_शिकार
जिस भोलेपन, सीधे साधे और सच्चे लोगों की पहचान से जाने वाले हिमाचल की जनता को इसी कारण कई बार ठगी का शिकार होना पड़ा है। पहले ग्रीनटेक फर्मों ने लुटा अब यह कृपटो करेंसी के नाम पर ठगी। 90% साक्षर प्रदेश के लोग कैसे लालच बस अपनी गाड़ी कमाई खो बैठ रहे है। विचारणीय है। हिमाचल के शिक्षकों से अनुरोध है की सप्ताह में एक बार केवल बच्चो को केवल आधा घंटा यदि ऐसे विषयों के प्रति स्चेता की क्लास दी जाए तो शायद काफी हद तक ऐसी घटनाओं पर काबू पाया जा सकता है।

जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं
07/09/2023

जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं

 ी_आज़ादी पंद्रह अगस्त मना रहे हैं वह तो प्रतीक की बात है खुशी कहां है? आनंद कहां है? स्वतंत्रता का प्रेम कहां है स्वतंत...
15/08/2023

ी_आज़ादी
पंद्रह अगस्त मना रहे हैं वह तो प्रतीक की बात है खुशी कहां है? आनंद कहां है? स्वतंत्रता का प्रेम कहां है स्वतंत्रता का उल्लास कहां है? स्वतंत्र होने की वृत्ति कहां है? वृत्ति तो गुलाम होने की है, और गुलाम बनाने की है आप कहेंगे, हम तो किसी को गुलाम नहीं बनाए हुए हैं तो अपनी जिंदगी खोजने से पता चलेगा कि बाप बेटे को गुलाम बनाए हुए हैं या नहीं और पति पत्नी को गुलाम हुए बनाए हैं या नहीं? और मां अपने बच्चों को गुलाम बनाए हुए हैं या नहीं? गुरु अपने विद्यार्थियों को गुलाम बनाने की सब कोशिश कर रहा है या नहीं? राजनेता पूरे देश को नियम बना बना कर गुलाम बनाए हुए है,चैबीस घंटे हम दूसरे को गुलाम बनाने की कोशिश में लगे हैं, और कोई हमें भी गुलाम बनाने की कोशिश में लगा है सारी जिंदगी गुलामी की कहानी है और स्वतंत्रता के हम त्यौहार मनाते हैं वे त्यौहार झूठे हो जाते हैं गुलाम आदमी स्वतंत्रता के त्यौहार कैसे मना सकते हैं? नहीं, दुनिया में स्वतंत्रता के त्यौहार नहीं चाहिए, स्वतंत्रता चाहिए और स्वतंत्रता होगी तो सारी जिंदगी एक त्यौहार होगी; क्योंकि गुलामी से बड़ा बोझ और गुलामी से बड़ा दुख और क्या हो सकता है?

ये तो ठीक वैसे ही है कि 364 दिन बीमार रहेन और एक दिन हेल्थ डे मना लें।

28/07/2023

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