12/02/2026
हर ज़ोर-जुल्म की टक्कर में हड़ताल हमारा नारा है!
हड़ताल को लम्बे संघर्ष में तब्दील करो!
मनरेगा मज़दूरों की माँग — पूरे साल काम दो, काम के पूरे दाम दो!
12 फ़रवरी, कलायत। आज देशव्यापी हड़ताल के तहत मज़दूरों, कर्मचारियों व किसान संगठनों ने कलायत ब्लॉक और शहर में रोष प्रदर्शन कर हड़ताल को सफल बनाया। क्रान्तिकारी मनरेगा मज़दूर यूनियन ने भी देशव्यापी आम हड़ताल में बढ़-चढ़कर भागीदारी की। मनरेगा यूनियन द्वारा बीडीपीओ कार्यालय में मनरेगा के तहत काम की माँग को लेकर ज्ञापन सौंपा गया।
प्रदर्शन में मनरेगा मज़दूरों और किसानों के साथ बड़ी संख्या में कच्चे कर्मचारी, कर्मचारी का दर्जा न मिलने से पीड़ित आंगनवाड़ी वर्कर, आशा वर्कर, मिड-डे मील वर्कर, ग्रामीण सफ़ाई कर्मचारी आदि शामिल हुए। विभिन्न संगठनों के नेताओं ने अपने वक्तव्य में सरकार को चेतावनी दी कि यदि समय रहते कच्चे कर्मचारियों को पक्का दर्जा नहीं दिया गया, तो आंदोलन और तेज़ किया जाएगा।
जनसभा को संबोधित करते हुए मनरेगा यूनियन के अजय ने कहा कि चार लेबर कोड के ज़रिए मोदी सरकार मज़दूरों के बचे-खुचे काग़ज़ी अधिकारों को भी छीनने पर तुली हुई है। यह सरकार लगातार मज़दूरों की ताक़त को कमज़ोर कर रही है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में ‘विकसित भारत – रोज़गार एवं आजीविका गारण्टी मिशन (ग्रामीण), 2025’ (VB-GRAM-G) जैसी योजनाएँ दरअसल रोज़गार गारण्टी को ही ख़त्म करने की साज़िश हैं। ऐसी योजनाओं के ज़रिए सरकार अपनी क़ानूनी जवाबदेही से बचना चाहती है। उन्होंने कहा कि 125 दिनों के रोज़गार का दावा महज़ एक खोखला नारा है। सरकार ने स्वयं संसद में स्वीकार किया है कि हाल के वर्षों में मज़दूरों को औसतन केवल 50.35 दिन का ही काम मिला है। मौजूदा बजट में भी VB-GRAM-G के तहत प्रावधान केवल लगभग 52 कार्यदिवसों के लिए ही फंड उपलब्ध कराते हैं। गाँव सिमला के मेट अनिल ने बताया कि मनरेगा क़ानून स्वयं अधूरा है, क्योंकि यह केवल 100 दिनों के रोज़गार तक सीमित है, जबकि वास्तविक आवश्यकता वर्ष के 365 दिनों के लिए क़ानूनी रूप से गारण्टीकृत और स्थायी रोज़गार की है।
रोष प्रदर्शन के अंत में क्रान्तिकारी मनरेगा मज़दूर यूनियन ने अपने संबोधन में कहा कि जब तक मज़दूर वर्ग स्वयं संगठित होकर संघर्ष नहीं करेगा, तब तक मज़दूर-विरोधी नीतियाँ और अधिक आक्रामक ढंग से थोपी जाती रहेंगी। इसलिए ग्रामीण और शहरी मज़दूरों से आह्वान है कि वे देशव्यापी हड़ताल को व्यापक बनाते हुए इसे अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदलने की दिशा में आगे बढ़ें।