17/11/2025
*स्वच्छ भारत अभियान की कलई खोलता बीएमसी के-पश्चिम प्रभाग!!* बीएमसी के-पश्चिम प्रभाग अंतर्गत *बैक रोड, लोखंडवाला, मेट्रो लाइन -०६ साइडिंग ट्रैक* के समीप कई महीनो से रखे गए गर्डर आधा किलोमीटर लंबी सड़क के लिए नासूर बन गए हैं। भारी भरकम गर्डरों के मध्य आज इतनी गंदगी जमा हो चुकी है कि आम आदमी का वहां से निकलना दूभर हो गया है। महीनों से बजबजाती गंदगी, गर्डरों के मध्य लोगों के द्वारा शौच तथा लघु शंका करना आम बात है। इसके अलावा लोगों ने उस इस स्थान को अघोषित कचरा घर बना दिया है। दुर्भाग्य से बीएमसी की घन कचरा तथा प्रबंधन टीम को यह आज तक दिखाई नहीं दिया है। *स्वच्छ भारत अभियान* के अंतर्गत बड़े-बड़े दावे करने वाली बीएमसी तथा लापरवाही पूर्वक इन गर्डरों को कई महीनो से रखने वाला *मुंबई मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण* (MMRDA) इस स्तर की गंदगी के लिए पूरी तरह जवाबदार है। लगातार पैदा होती नई-नई बीमारियों के बीच इस तरह के कार्य प्रशासन की घोर लापरवाही को ही प्रदर्शित करते हैं। *मेट्रो लाइन ०६* का निर्माण करने वाली ठेकेदार कंपनी *जे. कुमार इंफ्रा प्रोजेक्ट्स* MMRDA कमिश्नर तथा इंजीनियरों की कितनी लाडली है, यह कोई छुपा हुआ तथ्य नहीं है। इन्हीं की शह पर यह कंपनी पूरे शहर में गैर जिम्मेदाराना तरीके से काम करती है। उपरोक्त क्षेत्र में जहां एक ओर सुबह की सैर करने के लिए धनाढ्य, उच्च पदस्थ, बुजुर्ग तथा महिलाएं ताजा हवा की आशा में निकलते हैं, वहीं दूसरी ओर मासूम बच्चे अपनी शालाओं को भी जाते हैं। दुर्भाग्य से इसके बदले उन्हें गंदगी का अंबार, कीड़े-मकोड़े और बीमारी फैलाने वाले मच्छर मक्खियां मिलती हैं। नागरिकों की सेहत तथा शहरी स्वच्छता के नाम पर करोड़ों रुपए साफ सफाई तथा दवा छिड़काव इत्यादि पर खर्च किए जाते हैं, परंतु सत्य इसके बिलकुल विपरीत है। बीएमसी तथा MMRDA पहले समस्या को गंभीर स्तर तक स्वयं लेकर जाते हैं और फिर उसके निदान के नाम पर जनता के पैसे को बर्बाद करते हैं। घर-घर जाकर वोटो की भीख मांगने वाले तथाकथित नेता, झूठे समाजसेवकों और समीप ही निवास करने वाले तथाकथित उच्च स्तरीय ब्यूरोक्रेट्स; किसी को भी इतनी गंभीर समस्या दिखाई क्यों नहीं देती, यह समझ से परे है। *बीएमसी (कचरा तथा अपशिष्ट प्रबंधन प्रभाग)* एवं *के-पश्चिम वार्ड* को इस गंभीर समस्या के विकराल रूप धारण करने से पहले तत्काल प्रभाव से सफाई करनी चाहिए और उक्त गर्डरों को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जाना चाहिए। इस वजह से हाल ही में रोपित किए गए पेड़ पौधों को भी भारी नुकसान हुआ है। आधी से अधिक सड़क पर खतरनाक तरीके से रखे गए इन गर्डरों की वजह से वाहनों विशेषकर स्कूल बसों तथा छोटे बच्चों को लेकर चलने वाली महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न चिन्ह लग गया है। अतः इस गंभीर समस्या के लिए केवल उपरोक्त गर्डर तथा इनको रखने वाली MMRDA पूरी तरह से जवाबदार हैं और *शहरी विकास मंत्रालय तथा बीएमसी कमिश्नर* द्वारा *चीफ इंजीनियर मेट्रो लाइन ०६* तथा *बीएमसी के-पश्चिम प्रभाग* के *घन कचरा तथा अपशिष्ट प्रबंधन प्रभारी* पर सख़्त विभागीय करवाई की जानी चाहिए। *भवदीय- सुमित अशोक धुरी, अध्यक्ष- शिवतेज फाउंडेशन।*