26/01/2026
जैसलमेर पुष्करणा समाज के मूल निवासी वरिष्ठ पुरातत्ववेत्ता श्री नारायण व्यास सुपुत्र स्व. श्री अनन्त लाल जी व्यास भोपताणी देश के सर्वोच्च सम्मानों में से एक #पद्मश्री से सम्मानित होने बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं।
उज्जैन के सेवानिवृत्त पुरातत्वविद् डॉ. नारायण व्यास को भारत सरकार द्वारा #पद्म_श्री सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के पूर्व सुप्रिटेंडेंट आर्कियोलॉजिस्ट डॉ. व्यास वर्ष 2009 में सेवानिवृत्त हुए थे। वे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण में टेंपल सर्वे प्रोजेक्ट के इंचार्ज भी रह चुके हैं। अपने लगभग 37 वर्षों के सेवाकाल में उन्होंने मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान सहित कई राज्यों में ऐतिहासिक धरोहरों की खोज, संरक्षण और शोध कार्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया। भीमबेटका, सांची, खजुराहो, बेसनगर और रायसेन किला जैसे प्रमुख स्थलों पर उनका कार्य विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा है।
पद्म श्री सम्मान मिलने पर डॉ. व्यास ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, "यह सम्मान मेरे लिए नहीं, बल्कि उन अज्ञात लोगों की भावनाओं की पहचान है, जिनके लिए हमने जीवनभर काम किया। मोदी सरकार ने हमारी निस्वार्थ सेवा को समझा, इसके लिए मैं आभार व्यक्त करता हूं।" उन्होंने अपने साथियों को निस्वार्थ भाव से सेवा करने का संदेश भी दिया।
डॉ. व्यास के परिवार में उनकी पत्नी हैं, जो पहले प्रिंसिपल रह चुकी हैं और वर्तमान में गृहिणी हैं। उनके दो बच्चे हैं; बेटा भारतीय सेना में लेफ्टिनन कर्नल है, जबकि बेटी डॉक्टर हैं। डॉ. व्यास छह भाइयों और दो बहनों वाले एक बड़े परिवार से संबंध रखते हैं।
डॉ. नारायण व्यास को इससे पहले भी कई राष्ट्रीय पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। हालांकि, पद्म श्री सम्मान ने उनके जीवनभर के योगदान को देशभर में एक नई पहचान दिलाई है। यह सम्मान न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे उज्जैन शहर के लिए भी गौरव का क्षण है।
#परिचय
डॉ. नारायण व्यास (डी.लिट्)
जन्म: 05 जनवरी 1949, उज्जैन, मध्य प्रदेश
पिता: स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वयोवृद्ध श्री अनन्त लाल व्यास
डॉ. नारायण यास एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय स्तर के पुरातत्वविद् हैं, जो पिछले पाँच दशकों से अधिक समय से भारतीय पुरातत्व क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। डॉ. व्यास ने उज्जैन में रहकर डॉ. वाकणकर के मार्गदर्शन में एम.ए. किया एवं पुरातत्त्व में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त किया।
जुलाई 1972 से जनवरी 2009 तक भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण में कार्यरत रहते हुए इन्होंने मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, दमन-दीव, छत्तीसगढ़ आदि क्षेत्रों में व्यापक पुरातात्विक कार्य किया।
उनका शोधक्षेत्र शैलचित्र कला, प्राचीन स्थलों का संरक्षण, भारतीय धरोहरों की खोज, एवं यूनेस्को से जुड़े परियोजनाओं तक विस्तृत है। सेवा निवृत्ति के उपरांत भी वे सक्रिय रूप से शोध, मार्गदर्शन और संग्रह निर्माण में लगे हुए हैं।
प्रमुख शोध व खोजें
1. भीमबैठका, साँची, सतधारा, विदिशा, रायसेन जैसे स्थलों पर गहन कार्य।
2. रानी की वाव (गुजरात) पर पीएच.डी., भीमबैठका एवं रायसेन की शैलचित्र कला पर डी.लिट।
3. रायसेन ज़िले में भारत की सबसे बड़ी दीवार एवं अवशेष की खोज।
4. दौलतपुर, भोपाल में चित्रित शैलाश्रयों की खोज।
5. पेरू व पेन (स्पेन) के विशेषज्ञों के साथ भारतीय शैलचित्रों का तुलनात्मक अध्ययन।
6. भोज नगर में 11वीं शताब्दी के परमारकालीन मंदिर समूह की खोज।
7. चंबल व बेतवा नदी घाटियों में सर्वेक्षण।
8. 2024 में उज्जैन के गढ़ कालिका क्षेत्र में महत्वपूर्ण अवशेषों की प्राप्ति।
संस्थागत सहभागिता
• भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण, नई दिल्ली की मूल्यांकन समिति व राजभाषा कार्य में योगदान।
• राष्ट्रीय अभिलेखागार, राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण, राष्ट्रीय संग्रहालय, वाकणकर शोध संस्थान, विश्वमाध्य शोधपीठ आदि की समितियों में सदस्यता।
• भोपाल, उज्जैन व अन्य क्षेत्रों में अनेक विश्वविद्यालयों और संस्थानों में अतिथि वक्ता, मार्गदर्शक और कार्यशाला आयोजक।
प्रकाशन व लेखन
• 100+ शोध पत्र, लेख, व विश्लेषण प्रमुख समाचार पत्रों एवं शोध-पत्रिकाओं में प्रकाशित।
• प्रमुख पुस्तकों में: भीमबैठका, भोजपुर, रानी की वाव (गुजरात), पुरापथ के राही, हमारे मार्गदर्शक गुरुदेव डॉ. वाकणकर आदि।
सम्मान व पुरस्कार
1. डॉ. वाकणकर राष्ट्रीय सम्मान (2019–20) – मध्य प्रदेश शासन द्वारा जीवनपर्यंत योगदान हेतु।
2. कला समय पुराविद् शिखर सम्मान (2022), भोपाल।
3. इंडिया स्टार रिपब्लिक अवार्ड, लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड, भर्तृहरि सम्मान।
4. भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण, मध्य प्रदेश शासन, अखिल भारतीय संस्कृति परिषद आदि से बहुप्रशंसित।
5. हिंदी कार्य में उत्कृष्ट योगदान हेतु अनेक राजभाषा पुरस्कार।
6. कला प्रतियोगिताओं में भी विशिष्ट स्थान प्राप्त (डॉ. हरिवंशराय बच्चन द्वारा पुरस्कृत 1967)।
पुष्टिकर ब्राह्मण समाज जोधपुर आपको पद्मश्री सम्मान के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित करता है।
जय माँ उष्ट्रवाहिनी।
समस्त सूचना सोसियल मीडिया एवं दैनिक भास्कर द्वारा साभार प्राप्त।