विश्नोईवाद-The Eco-Dharma

विश्नोईवाद-The Eco-Dharma इस पेज का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और पशु क्रूरता को रोकना है।

पवित्र अपराध नाम की कोई चीज़ नहीं होती है।
17/10/2024

पवित्र अपराध नाम की कोई चीज़ नहीं होती है।

04/10/2024

क्या खेजड़ी वृक्ष के संरक्षण के संबंध में राजस्थान सरकार द्वारा कोई आधिकारिक आदेश पारित किया गया है?

जल जमीन और जंगल नहीं बचा तो अंत तय है।
01/10/2024

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09/02/2024

खेजड़ियां और स्वदेशी वृक्ष उद्योगपतियों से कटवाकर संग्रहालय में रखने से माता अमृता देवी की आत्मा कांप उठेगी।

Happy New Year To All
01/01/2024

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26/06/2023
21/02/2023

मुक़ाम मेला : सामाजिक सुषुप्तता का अनुपम उदाहरण
CA रामसिंह विश्नोई
एक ऐसा समाज जिसके पूर्वजों में अगले ५०० साल बाद दुनिया में होने वाले परिवर्तनों से संबंधी दूरदर्शिता थी, उस समाज की वर्तमान स्वघोषित नेतृत्व में दूरदर्शिता का नितांत अभाव किसी भी जागरूक व्यक्ति को विचलित करने वाला है। निज मंदिर मुक़ाम के सामने सौंदर्यकरण के नाम पर किया गया विकास कार्य इसकी सबसे बड़ी गवाही है। मंदिर प्रवेश से पहले पैर धोने की व्यवस्था बेशक एक नेक सोच थी लेकिन भीगे पैरों से पूरे मंदिर में कीचड़ फैलने से रोकने के लिए पोछा लगाते रहने वाले स्वयं सेवकों की अनुपस्थिति दूरदर्शिता के नहीं होने की निशानी थी। स्वर्ण मंदिर की तर्ज़ पर की गई इस पहल में ना ही पैर धोने के बाद मंदिर में प्रवेश की व्यवस्था के बारे में सोचा गया था और ना ही ये विचार किया गया था कि स्वर्ण मंदिर का परिसर बेहद विशाल है व हर समय गीला फ़र्श साफ़ करने वाले स्वयंसेवक उपलब्ध रहते है। निज मंदिर में पक्षियों के चुग्गे हेतु लाए गये धान एकत्रीकरण की व्यवस्था नहीं थी और अगर थी भी तो उचित निर्देश कहीं भी दृष्टि गोचर नहीं थे। नतीजतन संपूर्ण परिसर में गीले पैरों के नीचे चिपक कर चुग्गे का धान बिखर रहा था। हाथ धोने के लिए लगाये गये नल अपर्याप्त थे और उन्हें हटा कर लगाये गये फ़व्वारे हाथ धोने के लिये इस्तेमाल किए जा रहे थे। अगले किसी मेले में यदि कोई वाहन स्नान करता या कुल्ला करता भी पाया जाये तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। मंदिर के सामने का मैदान जो कभी सामाजिक मेलज़ोल का साक्षी होता था, एक बेतरतीब पब्लिक पार्क लग रहा था। मेले में लगी स्टाल्स तो कुकरमुतों जैसे ऊगी हुई लग रही थी। जहां रास्ता सँकरा था वहाँ भी उसी साइज की स्टाल्स थी जिस साइज की खुल्ले में थी। समराथल से मुक़ाम के बीच पैदल चलना बेहद मुश्किल था। जगह जगह अनाधिकृत सामग्री विक्रेता और कीचड़ इस भीड़ में चलने को एक अग्नि परीक्षा बना रहा था। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि सिर्फ़ एक ही काम की उचित व्यवस्था है और वो है चंदा इक्कठा करने की। महासभा के लिए मेला मात्र फण्ड रेजिंग इवेंट हो गया है। मंच एक दूसरे पर कीचड़ उछालने का अखाड़ा और नेतृत्व बपौती तक ही सिमट कर रह गया है।
एक संपन्न समाज होने के कारण मेले में निजी वाहनो की बहुतायत होती है। इतना खुला क्षेत्र होने के बावजूद आज तक एक सुव्यवस्थित एवं सुचारू पार्किंग स्टैंड नहीं होना अचरज का विषय है। सोये हुए समाज की यही निशानी है कि सबको ख़ुद के गाड़ी की पार्किंग के अलावा किसी चीज़ से सरोकार नहीं है। पुलिस को सिर्फ़ ट्रैफिक सम्भालना होता है जिसकी वो बैरिकेड लगाकर इतिश्री कर लेते है। रसूकदार लोग अपनी गाड़ियाँ जहां मर्ज़ी वहाँ पार्क कर रहे है। रोड के दोनों तरफ़ गाड़ियों की क़तार लगी है। मंदिर स्थल से अपनी गाड़ी तक पहुँचना भी अपने आप में एक जंग और गाड़ी लेकर जाम से निकलना एक महायुद्ग से कम कार्य नहीं है।
समाज में एक और जहां समराथल फाउंडेशन जैसी प्रगतिशील पहल हो रही है, ज़रूरी है कि समाज के ठेकेदार दूरदर्शिता का परिचय दे और मार्केटिंग और ब्यूटीफ़िकेशन पर अपव्यय की बजाय धरातल पर ज़रूरी कार्यों को प्राथमिकता देवे या योग्य व्यक्तियों के लिए रास्ता बनाये।
आंखो देखी और समझी,
द्वारा
रामसिंह विश्नोई , चार्टर्ड अकाउंटेंट,
मेड़ता, नागौर

 #स्वतंत्रता उन लोगों के लिए मुफ्त उपहार है जिन्होंने इसे कभी महत्व नहीं दिया और इसे पाने के लिए कई लोगों ने अपने प्राणो...
07/02/2023

#स्वतंत्रता उन लोगों के लिए मुफ्त उपहार है जिन्होंने इसे कभी महत्व नहीं दिया और इसे पाने के लिए कई लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी

प्रेस नोट *बिश्नोई समाज द्वारा दुबई में आयोजित अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन अभूतपूर्व सफलता के साथ सम्पन्न*           ...
06/02/2023

प्रेस नोट
*बिश्नोई समाज द्वारा दुबई में आयोजित अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन अभूतपूर्व सफलता के साथ सम्पन्न*

पर्यावरण संरक्षण को अपना धर्म मानकर भारत भूमि पर पिछले साढ़े पांच सौ सालों से सेवा कर रहा बिश्नोई समाज ने पहली बार इस पर्यावरणीय संदेश को विश्व स्तर पर प्रचारित करने के लिए अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा मुकाम,जाम्भाणी साहित्य अकादमी बीकानेर, जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर की गुरु जम्भेश्वर पर्यावरण संरक्षण शोधपीठ तथा गमबुक एनजीओ दुबई के तत्वावधान में दुबई में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन आयोजित किया जो अभूतपूर्व सफलता और अविस्मरणीय यादों के साथ 5 फरवरी को संपन्न हुआ।अखिल भारतीय बिशनोई महासभा के सरंक्षक श्री बिशनोई रत्न चौधरी कुलदीप जी बिशनोई ने बताया कि सहज,सरल और सादगीपूर्ण जीवन के साथ हमें न्यूनतम सुविधाओं के साथ जीवन का अधिकतम आनंद मनाना होगा। अखिल भारतीय बिशनोई महासभा के अध्यक्ष श्री देवेंद्र जी बुड़िया ने बताया कि अगर धरती पर जीवन को बचाना है तो जीवनशैली का बिश्नोई प्रतिरूप सबसे उपयुक्त है और विश्व को इसे अपनाना चाहिए। श्री देवेंद्र जी ने यूएई सरकार से समाज के लिए पर्यावरण, व्यवसाय, रोज़गार में सहयोग आदि के लिए भी निवेदन किया । कार्यक्रम के संयोजक श्री रमेश बाबल ने बताया कि 'वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियाँ और बिश्नोई समाज के सिद्धांतों में समाधान' विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में 60 उत्कृष्ट विद्वानों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत करते हुए समवेत स्वरों में विश्व को चेताया कि पिछले लगभग पचास सालों में प्रकृति का अंधाधुंध विनाश हुआ है, समय रहते हमने पर्यावरण संरक्षण के लिए गंभीर प्रयास नहीं किया तो धरती समस्त जीव प्रजातियां का जीवन खतरे पड़ जाएगा। जाम्भाणी साहित्य अकादमी की अध्यक्षा डॉक्टर इंद्रा जी ने बताया कि हमें धरती पर अधिक से अधिक वृक्ष लगाने होंगे, लगे हुए वृक्षों का प्राणपण से संरक्षण करना होगा। इसके लिए दुबई में भी अमर शहीद अमृतादेवी बिश्नोई पर्यावरण पार्क की स्थापना का संकल्प लिया गया और इसकी शुरुआत करते हुए खेजड़ली के शहीदों की याद में 363 खेजड़ी वृक्षों का वृक्षारोपण किया गया। फिल्म स्टार विवेक ओबेरॉय ने कहा कि बिश्नोई समाज की इस विलक्षण जीवनशैली पर फिल्में बननी चाहिए ताकि विश्व को इससे जानने का मौका मिले। आर के जी ने बताया कि हमे अपने व्यवहार में पर्यावरण सरंक्षण को लाना होगा और उसके लिए जम्भेश्वर भगवान की शिक्षाएँ बहुत सार्वभौमिक एवं महत्वपूर्ण है । श्री गुरमीत सिंह जी सोढ़ी ने कहा कि वे आगे भी हमेशा बिशनोई समाज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग करेंगे । सम्मापन समारोह में अति विशिष्ट मेहमान शेख माजिद राशिद अल मुअल्ला एवं उनकी टीम जिसमे डॉक्टर कबीर, हफ़ीज़ा इब्राहिम, खालिद अल बलोशी एवं अन्य सदस्य मौजूद थे ।अति विशिष्ट मेहमान शेख माजिद राशिद अल मुअल्ला की तरफ़ से यह घोषणा हुई कि यूएई में बिशनोई समाज को तीन लाख एवं पचास हज़ार स्क्वायर फीट ज़मीन पौधारोपण, पर्यावरण एवं उसके सरंक्षण के लिए दी जाएगी ।
विशिष्ट मेहमान गुरमीत जी राणा सोढ़ी , फ़ारूख अब्दुल्ला जी , रेणुका जी बिशनोई भूतपूर्व एमएलए, गीतांजली जी UK, संजय सिंह जी, अमिता सिंह जी, सलिल जी एमएलए, देवेंद्र जी आईपीएस, श्री महंत शिवदास जी, महंत भगवान दास जीं, आचार्य सच्चिदानंद जी, राजू जी महाराज, आचार्य कृष्णानंद जी ने अपने- अपने विचार रखे और पूरे कार्यक्रम की भूरी भूरी प्रशंसा की ।
बिशनोई महासभा के संरक्षक बिश्नोई रत्न चौधरी कुलदीप बिश्नोई, महासभा के अध्यक्ष श्री देवेन्द्र बुड़िया,जाम्भाणी साहित्य अकादमी की अध्यक्षा डॉ इंदिरा बिश्नोई, शोधपीठ के निदेशक डॉ ओमप्रकाश बिश्नोई, सम्मेलन के संयोजक श्री रमेश बाबल ने सभी विद्वानों, प्रतिभागियों और इस सम्मेलन को सफल बनाने हेतु परिश्रम करने वाले सभी महानुभावों का धन्यवाद और आभार व्यक्त किया। विशेष धन्यवाद और आभार हमारी दुबई टीम संयोजक सुनील जी धायल, सुनील जी सिहाग, वेद प्रकाश जी, अभिषेक जी तँवर , फरसाराम जी गोदारा, मनोज जी माँजू, सुधीर जी माँजू, सुभाष जी पुनिया, आर के जी बिशनोई, गजेंद्र जी धामा, मुकेश जी शर्मा, छोगेश जी पुनिया, बलजिंदर जी, अशोक जी, सौमराज जी, प्रवीण जी, शीतल जी, विमला जी एवं पूरी टीम ।

धन्यवाद और आभार 🙏🙏

रमेश बाबल बिशनोई
संयोजक- दुबई अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन समिति
संयोजक - अंतर्राष्ट्रीय प्रकोष्ठ, अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा
सचिव- जाम्भाणी साहित्य अकादमी

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342027

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