सनातन सुरक्षा मंच

सनातन सुरक्षा मंच प्रखर राष्ट्रवादी संगठन

13/11/2025
05/04/2025

ब्रेकिंग न्यूज़:
"सनातन सुरक्षा मंच" का ऐतिहासिक गठन
राष्ट्रवादी पत्रकार सत्यनारायण जोशी के नेतृत्व में सनातन धर्म की रक्षा और सनातनी एकता के लिए एक नया मंच गठित।
संतों व समाज के प्रतिष्ठित जन होंगे संरक्षक।
सुनामी आने वाली है सनातन एकता की!

#सनातनसुरक्षामंच #सत्यनारायणजोशी

बड़ी ब्रेकिंग 🚨 मोदी सरकार ने आधी रात को इतिहास रच दिया। वक्फ बिल राज्यसभा में पास हुआ🔥🔥सरकार: 128विपक्ष: 95भारत के लिए ...
05/04/2025

बड़ी ब्रेकिंग
🚨 मोदी सरकार ने आधी रात को इतिहास रच दिया। वक्फ बिल राज्यसभा में पास हुआ🔥🔥

सरकार: 128
विपक्ष: 95

भारत के लिए ऐतिहासिक दिन !!

पीएम मोदी ने कहा था कि उनका तीसरा कार्यकाल ऐतिहासिक होगा 🔥 पीएम मोदी की विरासत को इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा।

विपक्ष द्वारा पेश किए गए सभी संशोधन गिर गए। मोदी है तो मुमकिन है !!

अब ये सब दुर्लभ हो गये है एक समय था जो ब्राह्मण ,संत ,वैष्णव , पुजारी , और सेवा करने वाले परिवार को घर से कच्ची रसोई देत...
05/04/2025

अब ये सब दुर्लभ हो गये है
एक समय था जो ब्राह्मण ,संत ,वैष्णव , पुजारी , और सेवा करने वाले परिवार को घर से कच्ची रसोई देते थे आप में से कितने जन है जो आज भी घर से कच्ची रसोई निकालते और देते है द्वादशी, अमावस्या, पुर्णिमा, व धार्मिक दिवस पर
कार्य करते थे
जय सियाराम

एक महिला के भाई नहीं था रक्षाबंधन के दिन वह राखी, नारियल और मिठाई लाई।।पति - बोला तुम्हारा कोई भाई तो है नहीं फिर ये सब ...
20/08/2024

एक महिला के भाई नहीं था रक्षाबंधन के दिन वह राखी, नारियल और मिठाई लाई।।

पति - बोला तुम्हारा कोई भाई तो है नहीं फिर ये सब क्यों लाई हो..?

पत्नी बोली मेरा कोई भाई नहीं है इसलिए मैंने बाजू वाले सलीम भाई को अपना धर्म भाई बनाया है।

पति - बोला ठीक है पर राखी बांधने से पहले तुम सलीम से ये पूंछकर आओ कि शादी से पहले उसकी बीवी उसकी क्या लगती थी??

उस महिला ने सलीम से जाकर पूंछा कि तुम्हारी पत्नी रेहाना शादी से पहले तुम्हारी क्या लगती थी??

सलीम - बोला रेहाना शादी से पहले मेरे चाचा की बेटी मेरी चचेरी बहन थी।।।

पत्नी ने घर आकर अपने पति को बताया,

पति बोला जब उसने अपनी सगी बहन को नहीं छोड़ा तो वह राखी बांधने से तुम्हें छोड़ देगा क्या??

पत्नी को अब सारी बात समझ में आ गई थी....

बात - बात पर जातिवाद फैलाने का आरोप लगाने वाले और हिंदू - मु स मान भाई - भाई मानने वाले उन सभी सेक्युलर भाई - बहनों को समर्पित... ✍️

एक बार सभी सेकुलर हिंदू धीरे से बोलो हिंदू & 🐖 मु & लिं भाई भाई ✍️
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#हिंदुस्तान #जगो_हि़दू_जागो िन #हिंदुत्व

12/06/2024
24/04/2024

गज्जू बन्ना निर्दोष है

एक मुस्लिम लेखिका ने हिन्दू समाज के लोगों के गालों पर  कैसा करारा थप्पड़ मारा है, जरा देखिए --{1} आपकी विवाहित महिलाओं ने...
14/03/2024

एक मुस्लिम लेखिका ने हिन्दू समाज के लोगों के गालों पर कैसा करारा थप्पड़ मारा है, जरा देखिए --

{1} आपकी विवाहित महिलाओं ने माथे पर पल्लू तो छोड़िये, साड़ी पहनना तक छोड़ दिया ... दुपट्टा भी गायब ? किसने रोका है उन्हें ? हमने तो तुम्हारा अधोपतन नहीं किया .. हम मुसलमान तो इसके जिम्मेदार नहीं हैं ?

{2} तिलक बिंदी तो आपकी पहचान हुआ करती थी न.. तुम लोग कोरा मस्तक और सूने कपाल को तो अशुभ, अमंगल और शोकाकुल होने का चिह्न मानते थे न । आपने घर से निकलने से पहले तिलक लगाना तो छोड़ा ही, आपकी महिलाओं ने भी आधुनिकता और फैशन के चक्कर में और फॉरवर्ड दिखने की होड़ में माथे पर बिंदी लगाना तक छोड़ दिया, यहाँ मुसलमान कहाँ दोषी हैं ?

{3} आप लोग विवाह, सगाई जैसे संस्कारों में पारंपरिक परिधान छोड़कर....लज्जाविहीन प्री-वेडिंग जैसी फूहड़ रस्में करने लगे और जन्मदिवस, वर्षगांठ जैसे अवसरों को ईसाई बर्थ-डे और एनिवर्सरी में बदल दिया, तो क्या यह हमारी त्रुटि है ?

{4} हमारे यहां बच्चा जब चलना सीखता है तो बाप की उंगलियां पकड़ कर इबादत / नमाज के लिए मस्जिद जाता है और जीवन भर इबादत /नमाज को अपना फर्ज़ समझता है, आप लोगों ने तो स्वयं ही मंदिरों में जाना 🛕 छोड़ दिया । जाते भी हैं तो केवल ५ - १० मिनट के लिए तब, जब भगवान से कुछ मांगना हो अथवा किसी संकट से छुटकारा पाना हो । अब यदि आपके बच्चे ये सब नहीं जानते - करते कि मंदिर में क्यों जाना है ? वहाँ जाकर क्या करना है ? और ईश्वर की उपासना उनका कर्तव्य है .... तो क्या ये सब हमारा दोष है ❓

{5} आपके बच्चे कान्वेंट ✝️ से पढ़ने के बाद पोयम सुनाते हैं तो आपका सर गर्व से ऊंचा होता है ! होना तो यह चाहिये कि वे बच्चे नवकार मंत्र या कोई श्लोक याद कर सुनाते तो आपको गर्व होता ! .. इसके उलट, जब आज वे नहीं सुना पाते तो न तो आपके मन में इस बात की कोई ग्लानि है, और न ही इस बात पर आपको कोई खेद है !
हमारे घरों में किसी बाप का सिर तब शर्म से झुक जाता है जब उसका बच्चा रिश्तेदारों के सामने कोई दुआ नहीं सुना पाता ! हमारे घरों में बच्चा बोलना सीखता है तो हम सिखाते हैं कि सलाम करना सीखो बड़ों से, आप लोगों ने प्रणाम और नमस्कार को हैलो हाय से बदल दिया, तो इसके दोषी क्या हम हैं ?

{6} हमारे मजहब का लड़का कॉन्वेंट से आकर भी उर्दू अरबी सीख लेता है और हमारी धार्मिक पुस्तक पढ़ने बैठ जाता है, और आपका बच्चा न हिन्दू पाठशाला में पढ़ता है और संस्कृत तो छोड़िये, शुद्ध हिंदी भी उसे ठीक से नहीं आती, क्या यह भी हमारी त्रुटि है ?

{7} आपके पास तो सब कुछ था - संस्कृति, इतिहास, परंपराएं !
आपने उन सब को तथाकथित आधुनिकता की अंधी दौड़ में त्याग दिया और हमने नहीं त्यागा बस इतना ही भेद है ! आप लोग ही तो पीछा छुड़ाएं बैठे हैं अपनी जड़ों से ! हमने अपनी जड़ें न तो कल छोड़ी थीं और न ही आज छोड़ने को राजी हैं !
{8} आप लोगों को तो स्वयं ही तिलक, शिखा आदि से और आपकी महिलाओं को भी माथे पर बिंदी, हाथ में चूड़ी और गले में मंगलसूत्र - इन्हें धारण करना अनावश्यक लगने लगा ?

{9} अपनी पहचान के संरक्षण हेतु जागृत रहने की भावना किसी भी सजीव समाज के लोगों के मन में स्वत:स्फूर्त होनी चाहिये, उसके लिये आपको अपने ही लोगों को कहना पड़ रहा है ।

{10} जरा विचार कीजिये कि यह कितनी बड़ी विडंबना है ! यह भी विचार कीजिये कि अपनी संस्कृति के लुप्त हो जाने का भय आता कहां से है और असुरक्षा की भावना का वास्तविक कारण क्या है? हम हैं क्या....?

{11} आपकी समस्या यह है कि आप अपने समाज को तो जागा हुआ देखना चाहते हैं, किंतु ऐसा चाहते समय आप स्वयं आगे बढ़कर उदाहरण प्रस्तुत करने वाला आचरण नहीं करते ।
जैसे बन गए हैं वैसे ही बने रहते हैं ... आप स्वयं अपनी जड़ों से जुड़े हुए हो, ऐसा दूसरों को आप में दिखता नहीं है और इसीलिये आपके अपने समाज में तो छोड़िये, आपके परिवार में भी कोई आपकी धार्मिक बाते सुनता नहीं । ठीक इसी प्रकार आपके समाज में अन्य सब लोग भी ऐसा ही आपके जैसा डबल स्टैंडर्ड वाला हाइपोक्रिटिकल व्यवहार ( शाब्दिक पाखंड ) करते हैं । इसीलिये आपके समाज में कोई भी किसी की नहीं सुनता, क्या यह हमारी त्रुटि है ?

{12} आपने अपनी दिनचर्या बदली । एक समय था जब आपकी वेशभूषा से कोई भी बता देता था कि ये मारवाड़ी / वैश्य परिवार से है । आप लोगों ने अपनी वेशभूषा छोड़ी, आपने अपना खान-पान बदला, लहसुन प्याज आलू खाना आपके लिए आम बात हो गई, शराब व मांसाहार भी आदतें हो गईं ?

*कृपया इस बारे में जरा गहन चिंतन करें ।*

 #दो_तोला_मांस मगध सम्राट बिंदुसार ने एक बार अपनी सभा में पूछा, ‘देश की खाद्य समस्या को सुलझाने के लिए सबसे सस्ती वस्तु ...
20/01/2024

#दो_तोला_मांस

मगध सम्राट बिंदुसार ने एक बार अपनी सभा में पूछा, ‘देश की खाद्य समस्या को सुलझाने के लिए सबसे सस्ती वस्तु क्या है?’

मंत्री परिषद् तथा सभा के अन्य सदस्य सोच में पड़ गए। कुछ देर बाद शिकार का शौक पालने वाले एक सामंत ने कहा, ‘राजन, सबसे सस्ता खाद्य पदार्थ मांस है।’

सभी ने सामंत की इस बात का समर्थन किया, लेकिन चाणक्य चुप थे।
सम्राट ने उनसे पूछा, ‘आपका इस बारे में क्या मत है?’

चाणक्य ने कहा, ‘मैं अपने विचार कल आपके समक्ष रखूंगा।’

रात होने पर चाणक्य उस सामंत के महल पहुंचे। सामंत ने द्वार खोला। चाणक्य ने कहा, ‘शाम को महाराज एकाएक बीमार हो गए हैं, राजवैद्य ने कहा है कि किसी बड़े आदमी के हृदय का दो तोला मांस मिल जाए तो राजा के प्राण बच सकते हैं, इसलिए मैं आपके पास आपके हृदय ❤️ का सिर्फ दो तोला मांस लेने आया हूं। इसके लिए आप एक लाख स्वर्ण मुद्राएं ले लें।’ सामंत ने चाणक्य के पैर पकड़ कर माफी मांगी और उल्टे एक लाख स्वर्ण मुद्राएं देकर कहा कि इस धन से वह किसी और सामंत के हृदय का मांस खरीद लें।

इस तरह प्रधान मंत्री चाणक्य एक एक करके उन सभी के घर गए, जिन्होंने मांस का समर्थन किया था लेकिन कोई भी राजी नहीं हुआ बल्कि सभी ने माफी मांगने के साथ एक - एक लाख स्वर्ण मुद्राएं चाणक्य को दीं कि वह किसी और का मांस खरीद लें।

चाणक्य सुबह होने से पहले वापस अपने महल पहुंचे और राजा के समक्ष कई लाख स्वर्ण मुद्राएं रख दीं।

सम्राट ने पूछा, ‘यह सब क्या है?’

तब चाणक्य ने बताया कि दो तोला मांस खरीदने के लिए इतनी धनराशि इकट्ठी हो गई, फिर भी दो तोला मांस नहीं मिला।

‘राजन, अब आप स्वयं विचार करें कि मांस कितना सस्ता है? जीवन अमूल्य है। जैसे हमें अपनी जान प्यारी है, बाकी सभी जीवों को भी अपनी जान उतनी ही प्यारी है। लेकिन वे अपनी जान बचाने में असमर्थ हैं। पशु न तो बोल सकते हैं, न ही अपनी व्यथा बता सकते हैं। तो क्या बस इसी कारण उनसे जीने का अधिकार छीन लिया जाए?

शुद्ध आहार, शाकाहार !
मानव आहार, शाकाहार !

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#शाकाहारी बनें।
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