Laxman Singh Rathore Official

Laxman Singh Rathore Official history, heritage, and honor.
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29/01/2026

चाॅंपावत खाॅंप के प्रवर्तक वीर शिरोमणि  #राव_चाॅंपा_जी_राठौड़-  #जयंती विशेषांक गौ-रक्षक वीर पितृ भक्त राव चाॅंपा जी राठ...
21/01/2026

चाॅंपावत खाॅंप के प्रवर्तक वीर शिरोमणि #राव_चाॅंपा_जी_राठौड़
- #जयंती विशेषांक

गौ-रक्षक वीर पितृ भक्त राव चाॅंपा जी राठौड़

राव चाॅंपा जी का जन्म विक्रम संवत 1459 माघ सुदी तृतीया गुरुवार, तदनुसार ई. 1413 में 01 फरवरी को सोनिगरी रानी राम कॅंवर के गर्भ से हुआ। वे राव रणमल जी के तीसरे पुत्र थे व राव जोधा जी से 3 वर्ष बड़े थे। परंतु पितृ आज्ञा एवं बड़े भाई अखैराज जी का अनुसरण करते हुए उन्होंने अपने अनुज राव जोधा जी के पक्ष में राज्य त्याग दिया।

मंडोर में राठौड़ राज्य के संस्थापक राव चुंडा जी ने अपने बड़े पुत्र राव रणमल जी के स्थान पर अपने अन्य पुत्र राव कान्हा जी को राज दे दिया। राव कान्हा जी की मृत्यु के बाद उनका छोटा भाई राव सता जी मारवाड़ के स्वामी बने। तब सभी उमरावों ने राव रणमल जी को मंडोर पर अधिकार करने के लिए बुलाया। कुछ समय बाद राव रणमल की चित्तौड़ में हत्या हो जाने पर राणा कुंभा का मारवाड़ पर अधिकार हो गया। इस राज्य को पुन प्राप्त करने में एवं जोधपुर नगर की स्थापना (ई 1459) में राव चाॅंपा जी ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।

राव जोधा जी ने भाई बंट में राव चाॅंपा जी को बनाड़ गांव दिया। नाथ योगी चिड़ियानाथ जी को मनाने के लिए (जो की पालासनी गांव में चले गए थे) राव जोधा जी ने अपने चतुर भाई राव चाॅंपा जी को भेजा, जहां उन्होंने दिल्ली से सिंध की ओर जा रही ऊंटों की कतार को लूटा। उसमें गुड़ के कापे निकले, जिन्हें अच्छा शगुन मानकर उन्होंने इस स्थान पर कापरड़ा नामक गांव बसाया।

ई. 1459 में कार्तिक सुदी 7 को गोड़वाड़ के सिंधलों, सोनीगरा चौहानों और बालियों ने मिलकर कापरड़ा पर आक्रमण किया। राव चाॅंपा जी ने अपने भाई भाकर सिंह के साथ मुकाबला किया जिसमें कंवला का बाघा सिंधल मारा गया एवं अन्य हार कर भाग गए। मिंगसर सुदी 2 को राव जोधा जी ने अपने कुल गुरु को दान दिया उस दान पत्र में राव चाॅंपा जी का नाम इस प्रकार अंकित है जो मारवाड़ राज्य में उनके महत्व को दर्शाता है

*अखैराज चाॅंपो करमसी, सकल भाया री साख।*
*राव थिरपियो रित सूं, उतपे तिंहा तलाक।।*

ई. 1465 में मांडू के सुल्तान महमूद खिलजी अहिलन्वाड़ा पाटण से सेना लेकर दिल्ली रवाना हुआ तथा पाली में ठहरा। वहां उसे सिंधलो ने कापरड़ा का इलाका लूटने के लिए उकसाया। तथा कापरड़ा से गायें लेकर चले गए। गायों के लिए राव चाॅंपा ने 53 वर्ष की आयु में युद्ध किया और सुल्तान की सेना पराजित हुई। राव चाॅंपा जी ने मेरों से गोड़वाड़ में 200 गाॅंव जीतकर मारवाड़ में शामिल किए। ई. 1466 में द्रोणपुर छापर के बछराज मोहिल को पराजित किया एवं द्रोणपुर पर अधिकार कर लिया।

ई. 1479 में जैतारण के नरसिंह सिंधल ने मेवाड़ के राणा रायमल की सहायता से कापरड़ा पर आक्रमण किया, राव चाॅंपा जी ने उनका पीछा किया एवं तुमुल युद्ध करते हुए अपने हाथों से मांस के टुकड़े और खून पृथ्वी मां को भेंट चढ़ाते हुए वीरगति प्राप्त की। उस समय उनकी आयु 67 वर्ष थी। उनके बलिदान से संबंधित दोहा प्रचलित है

*मांस पलच्चर शीष हर, हंस अपच्छर सत्य।*
*चाॅंपो चॅंपा फूल ज्यूं, होगो बत्थोहथ ।।*

राव चाॅंपा जी ने कापरड़ा में एक बावड़ी का निर्माण किया जिसे "चॅंपा बावड़ी" कहा जाता है तथा एक विशाल तालाब का निर्माण करवाया जिसे "चाॅंपासर" कहा जाता है जंहा पर राव चाॅंपा जी की अष्टकोणीय छतरी बनी हुई है। राव चाॅंपा जी ने अपने नाम के अनुरूप अपना यश चारों ओर फैलाया जिससे आज भी गायों के समूह को "चाॅंपा" कहा जाता है।

राव चाॅंपा जी ने अपने भाई-भतीजों को संगठित कर राव जोधा जी के साथ जोधपुर की स्थापना को साकार किया। राव चाॅंपा जी के वंशजों का खूब विस्तार हुआ तथा योग्य हुए मारवाड़ के उमरावों में उन्होंने शीर्ष स्थान "प्रधान" का पद प्राप्त किया।
जय मारवाड़।

✍️

शोध एवं संकलनकर्ता
चाॅंपावत प्रतिनिधि सभा

 #सादर -आमंत्रण
20/01/2026

#सादर -आमंत्रण

“हूं भूख मरूं, हूं प्यास मरूं,मेवाड़ धरा आज़ाद रैवे।हूं घोर उजाड़ा मं भटकूं,पण मन मां मां री याद रैवे।”राष्ट्र, धर्म और ...
19/01/2026

“हूं भूख मरूं, हूं प्यास मरूं,
मेवाड़ धरा आज़ाद रैवे।
हूं घोर उजाड़ा मं भटकूं,
पण मन मां मां री याद रैवे।”
राष्ट्र, धर्म और स्वाभिमान की रक्षा हेतु
अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले
राष्ट्रगौरव महाराणा प्रताप की
अमर गाथा युगों-युगों तक
हमें साहस, त्याग और आत्मसम्मान का पथ दिखाती रहेगी।
ऐसे अदम्य संकल्प, अपार शौर्य और अटूट स्वाभिमान के प्रतीक,
मेवाड़ की आन-बान-शान,
वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जी
की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि श्रद्धापूर्वक नमन।

वीरवर चांपा जी राठौड़ .....राठौड़ी कुल के वीर सपूत राव चांपा जी राठौड़ का जन्म मंडोर के राजा राव रिड़मल जी के घर हुआ। राव रि...
18/01/2026

वीरवर चांपा जी राठौड़ .....

राठौड़ी कुल के वीर सपूत राव चांपा जी राठौड़ का जन्म मंडोर के राजा राव रिड़मल जी के घर हुआ। राव रिड़मल जी के पुत्र जोधा जी राठौड़ों के राजा बने और अन्य सभी भाई इस राठौड़ी राज के मजबूत स्तम्भ। राव जोधा जी और यह चौइस भाई थे। अखेराज जी, जोधा जी, कांधल जी, चाम्पा जी, मंडला जी, भाखर जी, पाता जी, रूपा जी, करण जी, मानडण जी, नाथो जी, सांडो जी, बेरिसाल जी, अड्मल जी, जगमाल जी, लखा जी, डूंगर जी, जेतमाल जी, उदा जी, हापो जी, सगत जी, सायर जी, गोयन्द जी, सुजाण जी। मंडोर को मेवाड़ से मुक्त कराने औऱ राठौड़ों की नई व मजबूत राजधानी जोधपुर के अधीन मारवाड़ जैसे मजबूत और विशाल साम्राज्य को खड़ा करने में चांपा जी जैसे वीर सपूतों का प्रमुख योगदान रहा। आगे भी मारवाड़ के लिए चांपा जी के वंशजों ने अनेकों बलिदान दिए औऱ राठौड़ी राज को मारवाड़ में स्थायित्व व ऊंचाईयां दी। चांपा जी के वंशज चम्पावत राठौड़ कहलाए। जिनके मारवाड़, मेवाड़, जयपुर, गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और हरियाणा में बड़े ठिकाने है। चांपा जी ने जोधपुर के लिए अनेकों युद्ध लड़े और जीते। जोधपुर राज्य की तरफ से चांपा जी को राव की पदवी व बनाड़ एवं कापरड़ा की जागीर मिली। वि.सं.1536 में राव चांपा जी मणीयारी के पास गायों की रक्षा में बलिदान हुए। आज जिनके शौर्य को प्रदर्शित करती विशाल छतरी कापरड़ा गांव में आज भी अडिग खड़ी है। जोधा जी से बड़े होने पर भी चांपा जी राजा और रियासत के प्रति वफादार रहें और आजीवन अपना पूर्ण समर्पण दिया। ऐसे वीर सपूतों के त्याग, तप और वीरता के बल पर ही राज्य खड़े होते है, साम्राज्य खड़े होते है। आइए हम सब भी वीरों के उसी पथ के पथिक बनें जन्म सफल करें .....
🚩जय भवानी🙏
👑जय🤟🏻 राजपूताना।⚔️

18/01/2026

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