Rajasthan Meghwal Parishad Jodhpur

इतिहास
राजस्थान मेघवाल परिषद, जोधपुर की स्थापना दिनांक 30.3.1984 में श्री पन्नालाल प्रेमी निवासी बीकानेर ने की थी राजस्थान मेघवाल परिषद, जिला शाखा जोधपुर की शरूआत सर्वप्रथम श्री नत्थुराम भाटी के जिलाध्यक्ष बनने के तदुपरान्त हुई।

परिषद के सदस्यों का कार्यकाल इस प्रकार रहा है.
1. श्री नत्थुराम भाटी --------------------------
2. श्री मोडाराम लिखनिया 22.08.1999 से 25.05.2

003
3. श्री कालूराम सोनेल 25.05.2003 से 08.03.2009
4. श्री पुखराज कटारिया 12.04.2009 से आज तक

राजस्थान मेघवाल परिषद जोधपुर में मेघवाल समाज के उत्थान के लिये कई कार्यो का आयोजन किया। जिसमें समय एवं धन की बबार्दी को रोकने के लिए युवक युवति परिचय सम्मेलन सामूहिक विवाहों का आयोजन, गरीब व असहाय लोगो को आथिर्क मदद, एवं शिक्षा एवं रोजगार के लिए उचित किया तथा प्रयास जारी मार्गदशर्न है। राजस्थान मेघवाल परिषद, द्वारा किए गए प्रयास है।
1 .मेघवाल समाज प्रथम युवक"युवति परिचय सम्मेलन 25 फरवरी 2001 ।
2 .मेघवाल समाज प्रथम सामुहिक विवाह सम्मेलन 22 अप्रैल 2004 गांधी मैदान सरदारपुरा, जोधपुर में समाज के ७१ जोड़ो को परिणय सूत्र् में बांधकर एक मिसाल कायम की एवं पुनित कार्य को सफल बनाया।
3 .25 दिसम्बर 2004 मेघवाल समाज युवक"युविका परिचय सम्मेलन एवं सम्मान समारोह मेघवाल छात्रवास एवं शिक्षा संस्थान मसुरिया में आयोजित किया जिसमें निम्न कार्यक्रम हुए है।"
मेघवाल समाज प्रथम सामूहिक विवाह सम्मेलन 22 अप्रैल 2004 सामूहिक विवाह स्मारिका का विमोचन।
मेघवाल समाज जोधपुर शहर परिवार परिचय निदेरिका का विमोचन।
मेघवाल समाज प्रथम सामूहिक विवाह सम्मेलन 22 अप्रैल 2004 के आयोजन पर दानदाताओं,सहयोगकतार्ओं एवं कार्यकतार्ओं को साफा,पॉल व स्मृति चिन्ह द्वारा सम्मानित किया गया।
4 .मेघवाल समाज द्वितीय सामुहिक विवाह सम्मेलन 7 मई 2006 गांधी मैदान सरदारपुरा, जोधपुर में मेघवाल समाज के 65 जोड़ो को परिणय सूत्र् में बांधकर पुनः एक मिसाल कायम की एवं इस पुनित कार्य को सफल बनाया।राजस्थान मेघवाल मेघवाल परिषद, जोधपुर की बैठक 8 मार्च 2009 में जिलाध्यक्ष व कार्यकारीणी के चुनाव के लिये चुनाव संयोजक मंडल का गठन किया गया एवं 8 मार्च 2009 को चुनाव संयोजक मंडल के द्वारा जिलाध्यक्ष पद के चुनाव की तिथि 12 अप्रैल 2009 की जोधाणा की गई।12 अप्रैल 2009 को चुनाव अधिकारी श्री मानाराम बालोच सी.एफ.ओ. व सहायक चुनाव अधिकारी श्री ताराराम एवं परिाद के चुनाव पर्यवेक्षक श्री मोडाराम लिखणिया की उपस्थिति में तथा परिाद के सदस्यों ने चुनाव में भाग लिया एवं राजस्थान मे मेघवाल परिषद जिला शाखा जोधपुर के जिलाध्यक्ष पद पर श्री पुखराज कटारिया को निविर्रोध चुना गया तथा शपद दिलाई गई।

राजकीय उच्च माध्यमिक विधालय , मंडाई के होनहार छात्र मदन पंवार / विरमा राम मेघवाल को कक्षा 12वीं में शानदार 99% अंक प्राप...
01/04/2026

राजकीय उच्च माध्यमिक विधालय , मंडाई के होनहार छात्र मदन पंवार / विरमा राम मेघवाल को कक्षा 12वीं में शानदार 99% अंक प्राप्त करने पर दिल से हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।

🎉 I earned the emerging talent badge this week, recognizing me for creating engaging content that sparks an interest amo...
24/03/2026

🎉 I earned the emerging talent badge this week, recognizing me for creating engaging content that sparks an interest among my fans!

नागौर जिले की होनहार बेटी सोनम मेघवाल ने Board of Secondary Education Rajasthan 10वीं बोर्ड परीक्षा में 98% अंक प्राप्त ...
24/03/2026

नागौर जिले की होनहार बेटी सोनम मेघवाल ने Board of Secondary Education Rajasthan 10वीं बोर्ड परीक्षा में 98% अंक प्राप्त कर शानदार सफलता हासिल की है। 🎉
💐 बहुत-बहुत बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की हार्दिक शुभकामनाएं 💐

हेमा राम राठौड़ पुत्र श्री केवल राम राठौड़ रोहिचा कल्ला जोधपुर का राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित व्याख्याता इतिहास...
23/03/2026

हेमा राम राठौड़ पुत्र श्री केवल राम राठौड़ रोहिचा कल्ला जोधपुर का राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित व्याख्याता इतिहास में अंतिम चयन होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं

मेघवाल समाज की होनहार बेटी डॉ. सन्तोष साँचोरिया, पुत्री श्री रामकुमार जी साँचोरिया (निवासी सोमणा, हाल इन्दिरा कॉलोनी नाग...
21/03/2026

मेघवाल समाज की होनहार बेटी डॉ. सन्तोष साँचोरिया, पुत्री श्री रामकुमार जी साँचोरिया (निवासी सोमणा, हाल इन्दिरा कॉलोनी नागौर) का राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) 2023 की अंतिम नियुक्ति सूची में SDM पद पर चयन होने पर मेघवाल समाज को गर्व है।
आपको उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएं।

आर पी एस सी अर्थशास्त्र व्याख्याता परीक्षा में प्रतिभाशाली छात्रा प्रियंका लिखाला पुत्री श्री तोलराम जी मेघवाल समंद सर क...
18/03/2026

आर पी एस सी अर्थशास्त्र व्याख्याता परीक्षा में प्रतिभाशाली छात्रा प्रियंका लिखाला पुत्री श्री तोलराम जी मेघवाल समंद सर को प्रथम स्थान प्राप्त करने पर हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं।
👍💐

डॉ अंबेडकर मेमोरियल वेलफेयर सोसाइटी के चुनाव 4 जनवरी को।
18/11/2025

डॉ अंबेडकर मेमोरियल वेलफेयर सोसाइटी के चुनाव 4 जनवरी को।

30/10/2025

(रिख मंत्र)
मेघवंशियों के लिए शिरोमणि मंत्र
ओम गुरुजी ओम, पृथ्वी की पहली रचना से, एक रिख पैदा हुआ था। बालरूपी रिख को अलखजी ने दिव्य रूप प्रदान किया। उसके देखते ही देखते रिख की शक्ति के आगे कोई नहीं आया। उनके शरीर से शब्द की उत्पत्ति हुई और ब्रह्मा, विष्णु, महेश्वर, गोरखनाथ और गणेश उत्पन्न हुए। रिख को आशीर्वाद दिया गया, और वह शरीर का नाम, पांच तत्व लाया। वह एक अचल टोपी, छह कीलें, एक थैला और झंडा, एक लकड़ी का आसन, एक छोटी छड़ी, एक छोटा बर्तन, एक कठोर कान की बाली, एक छोटा सींग, एक चंदन की माला और केसर लाया। वह पवित्र अग्नि, भोजन और औषधि लेकर आया। वह एक धागा, फूल, फल, एक लंगोटी और पवित्र राख लाया। उन्हें नौ नाथों का स्वामी और सौ संतों में संत कहा जाता था। उन्हें सृष्टि का त्यागी कहा गया। वह अमर दुनिया से आया था। निरंजन योगी को तुरन्त बुलाया गया। उन्होंने चार युगों का कार्य पूरा किया और चार कोनों की पूजा की। वह सवा हाथ का कपड़ा, एक बर्तन, एक चांदी का बर्तन और भट्टी से एक बर्तन लाया। अदृश्य प्राणी को भोजन कराया गया और सच्चे त्यागी को आशीर्वाद दिया गया। रिख ने अदृश्य प्राणी की आवाज सुनी और बोला। जैसे-जैसे ऋक्ष की शक्ति बढ़ती गई, शिव और शक्ति उसके पास बैठकर अलख नाम का जाप करने लगे। शंख और घंटियाँ बजीं और अदृश्य प्राणी की प्रतिज्ञा पूरी हो गई। फिर भाई चट्टानों पर चढ़ गए और हरि का पेड़ काट दिया गया। एक पिंजरा बनाया गया और उस पर सवा हाथ का कपड़ा बिछाया गया। रिख सफेद कपड़ा, केसरिया रंग का वस्त्र और पवित्र धागा पहनते थे। रिख ने उसके मुंह से बात की, और चंद्रमा और सूर्य ने गवाही दी। रिख ने ये शब्द कहे, और सोई हुई पीढ़ियाँ जाग उठीं।

बस हादसे में जोधपुर के महेंद्र मेघवाल का पूरा परिवार खत्म बहुत ही दुखद समाचार।जैसलमेर-जोधपुर हाईवे पर हुए भीषण बस हादसे ...
18/10/2025

बस हादसे में जोधपुर के महेंद्र मेघवाल का पूरा परिवार खत्म बहुत ही दुखद समाचार।
जैसलमेर-जोधपुर हाईवे पर हुए भीषण बस हादसे में जोधपुर के महेंद्र मेघवाल का पूरा परिवार मौत का शिकार हो गया। महेंद्र मूल रूप से बालेसर के लावारन सेतरावा गांव के निवासी थे और फिलहाल जैसलमेर की इंद्रा कॉलोनी में किराए पर रहते थे। वे गोला बारू डिपो(26 Ammunation Company )में पदस्थापित थे। हादसे में महेंद्र, उनकी पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा जिंदा जल गए।
भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।
ॐ शांति शांति शांति...

दानवीर कपूरो मेघवाल              गुजरात के इतिहास में लाखा फूलानी की कथा से हर कोई परिचित है। राजा लाखा फुलानी ने अपने श...
22/11/2024

दानवीर कपूरो मेघवाल
गुजरात के इतिहास में लाखा फूलानी की कथा से हर कोई परिचित है। राजा लाखा फुलानी ने अपने शौर्य और साहस से स्वतंत्र राज्य की स्थापना की थी। उसके ऐश्वर्य और शौर्य में मेघवालों का बहुत बड़ा योगदान रहा है। केर कोट के राजा लाखा फुलानी को वीरता का प्रतीक माना जाता था। जितनी उसके शौर्य और बल की चर्चा की जाती है, उतनी ही उसकी दानवीरता की भी चर्चा की जाती है। वह सुबह प्रभात से ही चारणो, मंगणारियों और जरूरतमंदों को खुले हाथ दान देता था, उसके बाद ही वह दातुन आदि करके दैनिक कार्यों में प्रवृत्त होता था।
उसके राज्य में अणगौरगढ़ में एक कपूरा नाम का मेघवाल रहता था। वह भी लाखे फुलानी की तरह ही दानवीर था और लाखा फुलानी का दोस्त था। लाखा फुलानी के हर सुख-दुख, लड़ाई-युद्ध में वह साथी था। कपूरा मेघवाल भी खुले हाथ दान किया करता था। उसकी दानवीरता की चर्चा चारों ओर होती थी। उसे दानवीर कर्ण कहकर लोग उसका बहुमान करते थे अर्थात वह दान में कर्ण के समान था। लाखा फुलानी और गुजरात के मेघवालों के संबंध कई प्रसंगों में उल्लेख किए जाते है।
लाखा फुलानी के प्रसंग में कपूरा मेघवाल का फुटकर उल्लेख गुजराती साहित्य और इतिहास की कई पुस्तकों में हुआ है। चंद्रवंश चरित्र में भी कपूरा मेघवाल के दान के बारे चर्चा की गई है। चंद्रवंश चरित्र में कपूरा मेघवाल की दानवीरता को दर्शाने वाला एक दोहा उद्धृत किया गया है। चंद्रवंश चरित्र में कपूरा मेघवाल का उल्लेख निम्न तरह वर्णित है:
જામ લાખાર્ના સમયમા અણુગોર ગઢમાં ક્પુરા નામને. એક મેઘવાળ રહેતો હુતો. અ મેઘવાળ પણુ અત્યંત શ્રીમંત અને ઉદાર હુતો. જામ લાખાના દાનવીર પણાએ આ કપુરા મેઘવાળને પણુ દાતારીને રંગ ચડાવ્યો. તેને પણુ પોતાનુ નામ જુગાજીગ ષ'કાય એવી આકાંક્ષા જાગી ઊડી તેના એવા નિયમ હતો, કે અમ લાખો જેને જને ઘોડાનું' દોન આપે, તેને પાતો તરેકેથી તે સંજાઇનું' દાન આપતો. જોમ લાખો ત્તો એક મહાન દાતાર હતે, તેથી તે દર રોજ સેંકડો ઘોડાએ દાનમાં આપતો. અને અ કપુરા મેઘવાળ પણુ એ હરેક ઘોડાને ભાટે સજાઈ તેયાર કરાવી આપતો. તેતે આ કાર્યતે માટે અનેક કારીગરોને રોકી લીધા હેતા. આ કારીગરો ઇ૨રોજ સેક્ડામધ સજયીઇચે તૈયાર કરતાં, અને કપુરો તે દાનમાં આપી દેતો. આર્થી કપુરા મેવવાળની કીર્તિ પણુ દેશ પરદેશમાં ગવાવા લાગી. ભા-ચારણો આ કપુરા મેઘવાળની પ્રશંસા કરતાં કહેવી લાગ્યા:-
દહો-
લાખો લખ સુરજ સમ, કપુરો કરણ,
મ'ગણહારે જે મન, પ્રામે દાતાર પધરા,
ભ્રાવાર્ધ-- જાલાખો લાખ સુરજ સમાન દાતવીર્‌ છે, અને કાપુરો મેધવાળ કરણુ દાતાર જેવો છે, માગણુ લોકા માટે દાતારો પ્રભાત માજ પાધરા થઇ જાય છે.

(अर्थात जाम लाखा के समय, अणुगोरगढ़ में कपुरा नाम का एक मेघवाल रहता था। कपूरा मेघवाल भी बहुत अमीर और उदार था। जाम लाखा दानवीरपाने में तो कपूरा मेघवाल दान दातारी में अग्रणीय था। उसे अपना नाम युगोंयुग बनाये रखने की भी इच्छा थी और उसका ऐसा नियम था कि जिसे जाम लाखा 'घोड़े का दान देता था, वह सबकी 'संजाई' का दान देता था। जाम लाखा तो एक महान दानवीर था, इसलिए वह प्रतिदिन सैकड़ों घोड़े दान करता था और कपूरा मेघवाल भी हर एक घोड़े को साज के लिए तैयार करता था। उसने इस काम के लिए कई कारीगरों को लगा रखा था। ये कारीगर प्रतिदिन सजाई का सैकड़ों सामान तैयार करते थे और कपूरा मेघवाल उन्हें दान कर देता था। कपूरा मेघवाल की महिमा पूरे देश-प्रदेश में गाई जाने लगी। चारण कपूरा मेघवाल की प्रशंसा करते और कहने लगते:-
दोहा-
लाखो लख सूरज सम, कपूरो करण,
मांगणहार जे मन, प्रामें दातार पधरा,
भावार्थ - लाखो करोड़ सूर्य के समान दानवीर है और कपूरो मेघवाल कर्ण के समान दातार है, मांगणियारो के लिए भोर से ही दातारी शुरू हो जाती है।

लाखा फुलानी और कपूरा मेघवाल की वीर मृत्यु
दानवीर कपूरा मेघवाल एक बहादुर और साहसी वीर था। लाखा फुलानी के हर युद्ध में वह लाखा फुलानी के साथ युद्ध मैदान में रहता था और अपनी तलवार का चमत्कार दिखाता था। जब गृहरिपु के ऊपर आक्रमण हुआ तो लाखा फुलानी उसकी मदद को गया। गुजरात के शासक मूलराज सोलंकी और लाखा फुलानी के बीच भयंकर युद्ध हुआ। इसी युद्ध में लाखा फुलानी और कपूरा मेघवाल वीरगति को प्राप्त हुए। इस युद्ध के प्रसंग में कपूरा मेघवाल जब लाखा फुलानी की मदद को पहुंचा तो लाखा फुलानी को अपार खुशी हुई।
चंद्रवंश चरित्र में कपूरा मेघवाल का युद्ध में शामिल होने फुटकर वर्णन किया गया है, जो निम्नवत है:
ખીજ દિવસે મૂળરાજ સોલ'કીએ પોતાની ફોજને વધારે બળવાન ખનાવી લીધી જે કાઢીઓ ને જામ લાખાસએ કચ્છમાંથી નસાડીને કાઢી મૂક્યા હુતા, તેમને પણુ તેણ પોતાની મદદમાં બોલાવી લીધા હતાઃ આથી સોલંકી લસ્કરતુ' ખળ હવે સારીપેઠે વધી જવા પામ્યુ હતુ, દિવસ ઉગતાંજ લડાઈ જહેર કરવામાં આવી સિંધુડાતાનો ગગનભેરી નાદ વાતાવરણને ગજાવવા લાગ્યો

જામ લાખો પણુ પોતાના સૈન્ય સહિત તરત તૈયાર થઇ ગયો. એટલામાં કચ્છને કાપૂરો મેઘવાળ જેતા દાનવીરપણાને ચારણેધએ જામ લાખાની દાતારી સાધે સરખાનેક છે, તેને નન લાખાની કૂચનો ખઝર પડતાં તે પણુ તરતજ પોતાના અશ્વતે તૈવાર કરી શસ્ત્રાસ્ત્ર સાજ થઇને મારતે ઘોડે જામ લાખાની છાવણીમાં આવી પહોચ્યો,

કપૂરાને આવા કટોકટીના પ્રસંગે આવી પહોંચેલો! જેઇને જામ લાખાને અત્યંત આનંદ થયો જામ લાખાએ તેને શાબાશી આપી. અને તેને પણુ સાથે લઈને કચ્છ-નરેશ જામ લાખે ફૂલાણી તેજ વખતે રણસંગ્રામમાં કૂદી પડ્યો.

ઉભય સેન્યોનો ભેટો થતાજ તટવારોની ઝડીએ ચાલવા લાગી શૂરવીરો સામી છાતીએ ઘા ઝીલતા જગના મયડાનમાં ઝઝૂમવા લાગ્યા કાયરાના પગ આ દેખાવ જોઇને છૂઢી જતા તેએ ઉભી પુછડીએ નાસભાગ કરવા લાગ્યા શૂરવીર યોદ્ધાઓના કપાઇ! ગએલા હાથ-પગ આદિ અવયવો જમીન પર ટપે।2૫ પડવા લાગ્યા. શોણિ તની છોળ ઉછળવા લાગી અને દારૂણુ યુદ્ધ મચી રહ્યુ.

આ વખતે મૂળરાજ સોલ'દી તથા તેને! ભાઇ લાખાઇત જામ લાખા પાસે તેમના પિતાનુ વેર લેવા તેને રણસંગ્રામમાં સાધવા લાગ્યા. તદ્વારોની રમઝટ વચ્ચે ત્ત્યાં કચ્છને કેસરી જામ લાખા ઝઝૂમી રહ્યો હતો, ત્યાં તેએ આવી પહોંચ્યા. રણુખેલના ખેલનમાં મસ્તે બની રહેવા જામ લાખા પર તેનાં ભાલેજ લાખાઇતે “ આ ખાપનુ' વેર ” એ શખ્રોના ઉચ્ચાર સાથે પછવાડેથી બરછીનો ઘા કર્યો, આ ઓર્ચીતો ઘા થવાથી જામ લાખો ચમકી ગયો. એ નવી દિશાના હુમલાનો સામને કરવા તે તૈયાર થાય, ત્યારપહેલાં તે. મૂળરાજ સોલંકીએ તેના પર પોતાના સઘળા બળથી બીજે જીવલેળુ ઘા કર્ચ, અને તેજ ક્ષણે કચ્છનો! આ પ્રતાપી ભૂપાળ જામ લાખા કુલાણી પાતાના ઘોડા પરથી ધબ! દેતો! જમીન પર તુટી પક્યો. તેમજ તેની સાથે લડતાં પેશ કપૂરા મેઘવાળનો પણુ અંત આવ્યો.
ડહો-
અચી ફૂલાણી ફરૉરેએઇ રારો મ'ઢાણુ
મૂળરાજેજી સાંગસે લાખો મારાણુ
ભાવાર્થ્-- લાખો ફૂલાણી રણુમેદાનમાં ઝંઝૂમવા લાગ્યો, અને ભયંકર યુદ્ધ મચી રહ્યુ. મૂળરાજતી સાંગ વડે જામ લાખાનો અંત આવ્યો.
मूलराज सोलंकी और लाखा फुलानी के युद्ध में लाखा फुलानी के साथ ही कपूरा मेघवाल भी रणभूमि में युद्ध करते हुए वीर गति को प्राप्त हुआ। इस प्रकार शूरवीरता और दानवीरता में अपनी कोई शानी नहीं रखने वाले दोनों वीर इस पृथ्वी से विदा हुए और पीछे अपनी दानवीरता और शौर्य की वीर कथाएं छोड़ गए। ऐसे वीरों को शत शत नमन।
( चंद्रवंश चरित्र, पृष्ठ 399, 469 व अन्य)

साभार मेघवंशी इतिहास पेज

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