Raigar samaj Jhunjhunu

Raigar samaj Jhunjhunu जय श्री गंगा मैया जगत तारिणी ,सुरेश्वरि भगवती गंगा

गरीबों के लिए जीवनदायिनी गंगा ,अटूट प्रवाह, अटूट विश्वास के साथ....
30/09/2024

गरीबों के लिए जीवनदायिनी गंगा ,अटूट प्रवाह, अटूट विश्वास के साथ....

03/05/2024

कांग्रेस इतनी शक्तिशाली थी कि उन्होंने अपनी शक्ति की परवाह किए बिना अपने रास्ते में आने वाले सभी लोगों को खत्म कर दिया।

मैं आपको तीन पुरानी घटनाएं याद दिला दूं।घटनाएं जैसी घटित हुईं, वैसा ही लिखी जा रही है।

1. ज्ञानी जैल सिंह पूर्व राष्ट्रपति थे। उन्हें Z सुरक्षा मिली हुई थी। उन्होंने दिल्ली में घोषणा की - "कल चंडीगढ़ पहुंचकर......मैं बोफोर्स के सारे राज खोलने वाला हूं।" ......तो हुआ यह कि.....दिल्ली-चंडीगढ़ रोड पर एक ट्रक......सामने से दहाड़ता हुआ आया और जैल सिंह की कार को कुचल दिया। उनकी वहीं मौत हो गई। कोई जांच नहीं हुई।

2. राजेश पायलट ने कांग्रेस नेता की सलाह नहीं मानी। उन्होंने घोषणा की - "कल......मैं कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल करूंगा।" और फिर क्या हुआ,......सामने से एक बस आई और......उनकी कार को कुचल दिया। ......वहीं मर गये। कोई जांच नहीं हुई।

इन दोनों घटनाओं में कार्यप्रणाली एक जैसी थी। तीसरी घटना में कार्यप्रणाली अलग थी।

3. श्रीमंत माधवराव शिंदे (सिंधिया) उस लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के सबसे लोकप्रिय और कर्मठ नेता थे। वे लगातार नौवीं बार लोकसभा के लिए चुने गए और लोकसभा में विपक्ष के नेता भी थे। कांग्रेस नेता ने उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष से कहा - "मैं प्रचार करने आ रहा हूँ!" प्रदेश अध्यक्ष निडर थे। उन्होंने कहा - "आप मत आइए। माधवराव जी को भेजिए। वही वोट दिला सकते हैं।" और फिर क्या हुआ। माधवराव जी से कहा गया कि वे अपने निजी विमान से नहीं बल्कि इसी विमान से जाएंगे। एक प्रत्यक्षदर्शी किसान ने बयान दिया - "पहले विमान में बम फटा, फिर आग लग गई"। विमान में सवार सभी आठ लोग मारे गए लेकिन कोई जांच नहीं हुई। थोड़े समय बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भी मृत पाए गए। (डॉ ईश्वर चंद्र करकरे की कलम से साभार)*एइसी तरह 1965 के युद्ध के विजेता प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी...डॉ होमी जहांगीर भाभा...के साथ-साथ 2500 से अधिक इसरो और DRDO के वैज्ञानिक और शीर्ष इंजीनियर बेहद संदिग्ध परिस्थितियों में मारे गए...कोई जांच नहीं हुई...2014 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद स्थिति नियंत्रण में आई...*

👉राजीव गांधी ने अपने जीवनकाल में कुल 181 रैलियों को संबोधित किया था। जिसमें से 180 में सोनिया गांधी भी उनके साथ थीं, बस उस दिन उनके साथ नहीं थीं, जब राजीव गांधी के जीवन की आखिरी रैली हुई थी।*

👉राजीव गांधी की हत्या के समय 14 लोगों की भी मौत हुई थी। लेकिन दिलचस्प बात ये है कि इन 14 लोगों में एक भी कांग्रेस का नेता नहीं था, जो भी मरे वो आम लोग थे। क्या ये संभव है कि देश के प्रधानमंत्री की रैली में उनके साथ एक भी बड़ा कांग्रेस नेता न हो?*

👉राजीव गांधी के साथ कांग्रेस का कोई भी बड़ा या छोटा नेता नहीं मरा, न ही सोनिया गांधी जो हर मीटिंग में राजीव गांधी के साथ होती थीं। उस दिन वो सिरदर्द के कारण होटल में रुकी थीं, ये आधिकारिक बयान है।
👉तो क्या सबको पता था कि क्या होने वाला है और इस तरह पूरी कांग्रेस विदेशियों के हाथों हाईजैक हो गई।

👉बाद में प्रियंका गांधी ने खुद कोर्ट में अपने पिता के हत्यारे को माफ करने की अपील की।*

👉जब से इटली की मैडम इस परिवार की बहू बनकर आई हैं, तब से अब तक इस गांधी परिवार में एक भी व्यक्ति को प्राकृतिक मृत्यु का सौभाग्य नहीं मिला है, सभी की अप्राकृतिक मृत्यु हुई है।

👉इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी के ससुर कर्नल आनंद अपने ही फार्म हाउस से थोड़ी दूरी पर गोली लगने से मृत पाए गए।

👉संजय गांधी की मृत्यु तब हुई जब उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इंदिरा गांधी की हत्या उनके ही अंगरक्षकों ने गोली मारकर कर दी थी*

👉राजीव गांधी को बम से उड़ा दिया जाता है।

👉प्रियंका गांधी के ससुर राजेंद्र वाड्रा दिल्ली के एक गेस्ट हाउस में मृत पाए जाते हैं। प्रियंका गांधी की ननद जयपुर-दिल्ली हाईवे पर कार दुर्घटना में मारी जाती है। प्रियंका गांधी के देवर मुरादाबाद के एक होटल में मृत पाए जाते हैं।

हम खुद देख सकते हैं, केरल में नंबी नारायण को जेल भेजा जाना, गोधरा और मालेगांव की घटनाओं में हिंदुओं को फंसाया जाना और पाकिस्तानी आतंकवादियों को रिहा किया जाना..., हिंदू आतंकवाद शब्द गढ़ा जाना,... करोड़ों-अरबों के घोटाले, ...देश को कमजोर करना, .... गोला-बारूद का आपातकालीन स्टॉक 40 से घटाकर 7 दिन करना, .सेना को गोला-बारूद न देना, बुलेट प्रूफ जैकेट न देना, लड़ाकू विमान न खरीदना, कश्मीर से हिन्दू पंडितों को निकालना, .....26/11 के लिए पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई करने से इनकार करना, .....चीनी राजदूत से मिलना

*और सबसे दिलचस्प बात ये है कि संसद पर हमले के दिन सोनिया-राहुल गांधी संसद नहीं गए।*

21/04/2024

दिल्ली का भ्रष्टाचारी मुख्यमंत्री ना हुआ
चक्रवर्ती सम्राट हो गया

18/04/2024

20 हजार करोड़ के इलेक्टोरल बोंड घोटाले मे 6हजार करोड़ बीजेपी चोर को और बाकी14 हजार करोड़ खाने वाली विपक्ष साहूकार कैसे ।

। गंधर्वसेन के पुत्र विक्रमादित्य और भर्तृहरी थे। विक्रम की माता का नाम सौम्यदर्शना था जिन्हें वीरमती और मदनरेखा भी कहते...
08/04/2024

। गंधर्वसेन के पुत्र विक्रमादित्य और भर्तृहरी थे। विक्रम की माता का नाम सौम्यदर्शना था जिन्हें वीरमती और मदनरेखा भी कहते थे। उनकी एक बहन थी जिसे मैनावती कहते थे। उनके भाई भर्तृहरि के अलाका शंख और अन्य भी थे।


उनकी पांच पत्नियां थी, मलयावती, मदनलेखा, पद्मिनी, चेल्ल और चिल्लमहादेवी। उनकी दो पुत्र विक्रमचरित और विनयपाल और दो पुत्रियां प्रियंगुमंजरी (विद्योत्तमा) और वसुंधरा थीं। गोपीचंद नाम का उनका एक भानजा था। प्रमुख मित्रों में भट्टमात्र का नाम आता है। राज पुरोहित त्रिविक्रम और वसुमित्र थे। मंत्री भट्टि और बहसिंधु थे। सेनापति विक्रमशक्ति और चंद्र थे।

कलि काल के 3000 वर्ष बीत जाने पर 101 ईसा पूर्व सम्राट विक्रमादित्य का जन्म हुआ। उन्होंने 100 वर्ष तक राज किया। -(गीता प्रेस, गोरखपुर भविष्यपुराण, पृष्ठ 245)। विक्रमादित्य भारत की प्राचीन नगरी उज्जयिनी के राजसिंहासन पर बैठे। विक्रमादित्य अपने ज्ञान, वीरता और उदारशीलता के लिए प्रसिद्ध थे जिनके दरबार में नवरत्न रहते थे। कहा जाता है कि विक्रमादित्य बड़े पराक्रमी थे और उन्होंने शकों को परास्त किया था।


सम्राट विक्रमादित्य अपने राज्य की जनता के कष्टों और उनके हालचाल जानने के लिए छद्मवेष धारण कर नगर भ्रमण करते थे। राजा विक्रमादित्य अपने राज्य में न्याय व्यवस्था कायम रखने के लिए हर संभव कार्य करते थे। इतिहास में वे सबसे लोकप्रिय और न्यायप्रीय राजाओं में से एक माने गए हैं।


कहा जाता है कि मालवा में विक्रमादित्य के भाई भर्तृहरि का शासन था। भर्तृहरित के शासन काल में शको का आक्रमण बढ़ गया था। भर्तृहरि ने वैराग्य धारण कर जब राज्य त्याग दिया तो विक्रम सेना ने शासन संभाला और उन्होंने ईसा पूर्व 57-58 में सबसे पहले शको को अपने शासन क्षेत्र से बहार खदेड़ दिया। इसी की याद में उन्होंने विक्रम संवत की शुरुआत कर अपने राज्य के विस्तार का आरंभ किया। विक्रमादित्य ने भारत की भूमि को विदेशी शासकों से मुक्ति कराने के लिए एक वृहत्तर अभियान चलानाय। कहते हैं कि उन्होंने अपनी सेना की फिर से गठन किया। उनकी सेना विश्व की सबसे शक्तिशाली सेना बई गई थी, जिसने भारत की सभी दिशाओं में एक अभियान चलाकर भारत को विदेशियों और अत्याचारी राजाओं से मुक्ति कर एक छत्र शासन को कायम किया।


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ऐतिहासिक व्यक्ति : कल्हण की 'राजतरंगिणी' के अनुसार 14 ई. के आसपास कश्मीर में अंध्र युधिष्ठिर वंश के राजा हिरण्य के नि:संतान मर जाने पर अराजकता फैल गई थी। जिसको देखकर वहां के मंत्रियों की सलाह से उज्जैन के राजा विक्रमादित्य ने मातृगुप्त को कश्मीर का राज्य संभालने के लिए भेजा था। नेपाली राजवंशावली अनुसार नेपाल के राजा अंशुवर्मन के समय (ईसापूर्व पहली शताब्दी) में उज्जैन के राजा विक्रमादित्य के नेपाल आने का उल्लेख मिलता है।


राजा विक्रम का भारत की संस्कृत, प्राकृत, अर्द्धमागधी, हिन्दी, गुजराती, मराठी, बंगला आदि भाषाओं के ग्रंथों में विवरण मिलता है। उनकी वीरता, उदारता, दया, क्षमा आदि गुणों की अनेक गाथाएं भारतीय साहित्य में भरी पड़ी हैं।

विक्रमादित्य के नवरत्नों के नाम: नवरत्नों को रखने की परंपरा महान सम्राट विक्रमादित्य से ही शुरू हुई है जिसे तुर्क बादशाह अकबर ने भी अपनाया था। सम्राट विक्रमादित्य के नवरत्नों के नाम धन्वंतरि, क्षपणक, अमरसिंह, शंकु, बेताल भट्ट, घटखर्पर, कालिदास, वराहमिहिर और वररुचि कहे जाते हैं। इन नवरत्नों में उच्च कोटि के विद्वान, श्रेष्ठ कवि, गणित के प्रकांड विद्वान और विज्ञान के विशेषज्ञ आदि सम्मिलित थे।



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विक्रम संवत के प्रवर्तक : देश में अनेक विद्वान ऐसे हुए हैं, जो विक्रम संवत को उज्जैन के राजा विक्रमादित्य द्वारा ही प्रवर्तित मानते हैं। इस संवत के प्रवर्तन की पुष्टि ज्योतिर्विदाभरण ग्रंथ से होती है, जो कि 3068 कलि अर्थात 34 ईसा पूर्व में लिखा गया था। इसके अनुसार विक्रमादित्य ने 3044 कलि अर्थात 57 ईसा पूर्व विक्रम संवत चलाया।

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अरब तक फैला था विक्रमादित्य का शासन :
महाराजा विक्रमादित्य का सविस्तार वर्णन भविष्य पुराण और स्कंद पुराण में मिलता है। विक्रमादित्य के बारे में प्राचीन अरब साहित्य में वर्णन मिलता है। उस वक्त उनका शासन अरब तक फैला था। दरअसल, विक्रमादित्य का शासन अरब और मिस्र तक फैला था और संपूर्ण धरती के लोग उनके नाम से परिचित थे।

इतिहासकारों के अनुसार उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य का राज्य भारतीय उपमहाद्वीप के अलावा ईरान, इराक और अरब में भी था। विक्रमादित्य की अरब विजय का वर्णन अरबी कवि जरहाम किनतोई ने अपनी पुस्तक 'सायर-उल-ओकुल' में किया है। पुराणों और अन्य इतिहास ग्रंथों के अनुसार यह पता चलता है कि अरब और मिस्र भी विक्रमादित्य के अधीन थे।


तुर्की के इस्ताम्बुल शहर की प्रसिद्ध लायब्रेरी मकतब-ए-सुल्तानिया में एक ऐतिहासिक ग्रंथ है 'सायर-उल-ओकुल'। उसमें राजा विक्रमादित्य से संबंधित एक शिलालेख का उल्लेख है जिसमें कहा गया है कि '…वे लोग भाग्यशाली हैं, जो उस समय जन्मे और राजा विक्रम के राज्य में जीवन व्यतीत किया। वह बहुत ही दयालु, उदार और कर्तव्यनिष्ठ शासक था, जो हरेक व्यक्ति के कल्याण के बारे में सोचता था। ...उसने अपने पवित्र धर्म को हमारे बीच फैलाया, अपने देश के सूर्य से भी तेज विद्वानों को इस देश में भेजा ताकि शिक्षा का उजाला फैल सके। इन विद्वानों और ज्ञाताओं ने हमें भगवान की उपस्थिति और सत्य के सही मार्ग के बारे में बताकर एक परोपकार किया है। ये तमाम विद्वान राजा विक्रमादित्य के निर्देश पर अपने धर्म की शिक्षा देने यहां आए…।'



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अन्य सम्राट जिनके नाम के आगे विक्रमादित्य लगा है:- यथा श्रीहर्ष, शूद्रक, हल, चंद्रगुप्त द्वितीय, शिलादित्य, यशोवर्धन आदि। दरअसल, आदित्य शब्द देवताओं से प्रयुक्त है। बाद में विक्रमादित्य की प्रसिद्धि के बाद राजाओं को 'विक्रमादित्य उपाधि' दी जाने लगी।

विक्रमादित्य के पहले और बाद में और भी विक्रमादित्य हुए हैं जिसके चलते भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है। उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य के बाद 300 ईस्वी में समुद्रगुप्त के पुत्र चन्द्रगुप्त द्वितीय अथवा चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य हुए।


एक विक्रमादित्य द्वितीय 7वीं सदी में हुए, जो विजयादित्य (विक्रमादित्य प्रथम) के पुत्र थे। विक्रमादित्य द्वितीय ने भी अपने समय में चालुक्य साम्राज्य की शक्ति को अक्षुण्ण बनाए रखा। विक्रमादित्य द्वितीय के काल में ही लाट देश (दक्षिणी गुजरात) पर अरबों ने आक्रमण किया। विक्रमादित्य द्वितीय के शौर्य के कारण अरबों को अपने प्रयत्न में सफलता नहीं मिली और यह प्रतापी चालुक्य राजा अरब आक्रमण से अपने साम्राज्य की रक्षा करने में समर्थ रहा।


पल्‍लव राजा ने पुलकेसन को परास्‍त कर मार डाला। उसका पुत्र विक्रमादित्‍य, जो कि अपने पिता के समान महान शासक था, गद्दी पर बैठा। उसने दक्षिण के अपने शत्रुओं के विरुद्ध पुन: संघर्ष प्रारंभ किया। उसने चालुक्‍यों के पुराने वैभव को काफी हद तक पुन: प्राप्‍त किया। यहां तक कि उसका परपोता विक्रमादित्‍य द्वितीय भी महान योद्धा था। 753 ईस्वी में विक्रमादित्‍य व उसके पुत्र का दंती दुर्गा नाम के एक सरदार ने तख्‍ता पलट दिया। उसने महाराष्‍ट्र व कर्नाटक में एक और महान साम्राज्‍य की स्‍थापना की, जो राष्‍ट्र कूट कहलाया।

जय श्री राम 🚩🚩🚩🚩
24/03/2024

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🔥 *अंतिम तिथि आज**मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा छात्रवृति योजना 2024*✅👉 *12वीं कक्षा में 60% या इससे अधिक अंक प्राप्त किए हो*h...
15/03/2024

🔥 *अंतिम तिथि आज*

*मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा छात्रवृति योजना 2024*✅

👉 *12वीं कक्षा में 60% या इससे अधिक अंक प्राप्त किए हो*

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Mukhymantri Uchch Shiksha Chhaatravrti Yojana 2024 मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा छात्रवृति योजना के लिए नोटिफिकेशन जारी: आयुक्तालय कॉलेज शिक्षा राजस.....

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01/03/2024

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20/02/2024

लकवा अकेले ममता सरकार को ही नहीं हुआ है
#भारतसरकार मोदी सरकार को भी लकवा मार गया लगता है
#संदेशखाली

14/02/2024

सरस्वत्यै नमो नित्यं भद्रकाल्यै नमो नमः,वेद वेदांत वेदांग विद्यास्थानेभ्य एव च ।
सरस्वती महाभागे विद्ये कमल लोचने विद्यारुपे विशालाक्षी विद्यां देही नमोस्तुते ।। 🙏🌻🙏

सुन भक्तों कि करुण पुकारनंदी ने फिर भरी हुंकारशेषनाग जोर से रहा फूंकारमलेच्छों मे मच गया हाहाकार 🔱🙏🔱हर हर महादेव 🚩🚩🚩
02/02/2024

सुन भक्तों कि करुण पुकार
नंदी ने फिर भरी हुंकार
शेषनाग जोर से रहा फूंकार
मलेच्छों मे मच गया हाहाकार 🔱🙏🔱
हर हर महादेव 🚩🚩🚩

हर हर महादेव जिसे भी असाध्य तकलीफ़ या बीमारी हो मेरे महादेव के आगे हर सोमवार को घी का दीपक जलाएंबीमारी स्वतः दूर हो जाएगी...
30/01/2024

हर हर महादेव
जिसे भी असाध्य तकलीफ़ या बीमारी हो मेरे महादेव के आगे हर सोमवार को घी का दीपक जलाएं
बीमारी स्वतः दूर हो जाएगी
हर हर महादेव 🔱🌹🚩🕉️

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