13/08/2026
झुंझुनूं में 15 अगस्त को धूमधाम से निकलेगी तीज माता की शाही सवारी, तैयारियाँ जोरों पर
झुंझुनूं। राजस्थान की पावन धरा अपनी समृद्ध परंपराओं, रंगों और तीज-त्योहारों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। मरुभूमि में सावन की रिमझिम फुहारों के साथ ही उत्सवों का दौर शुरू हो चुका है। इसी कड़ी में झुंझुनूं शहर में हर साल सावन मास की हरियाली तीज पर निकलने वाली श्री गोपाल गौशाला की ओर से तीज माता की भव्य व शाही सवारी इस बार 15 अगस्त को बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ निकाली जाएगी।
📌 शोभायात्रा का समय और प्रमुख मार्ग:
श्री गोपाल गौशाला के अध्यक्ष प्रमोद खण्डेलिया एवं मंत्री प्रदीप पाटोदिया ने बताया कि कार्यक्रम संयोजक नारायण प्रसाद जालान एवं डाक्टर डीएन तुलस्यान के संयोजकत्व में तीज माता की शाही सवारी का आयोजन किया जा रहा है:
रवानगी: अपराह्न 3:30 बजे श्री गोपाल गौशाला प्रांगण से गाजे-बाजे के साथ रवाना होगी।
मार्ग: सवारी झुंझुनू एकेडमी, लावरेश्वर मंदिर, राणी सती रोड और चूणा का चौक होते हुए छावणी बाजार पहुँचेगी।
विशेष पूजा-अर्चना: छावणी बाजार में श्री गल्ला व्यापार संघ के आतिथ्य में कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नंद किशोर जालान एवं सुभाष जालान द्वारा तीज माता की विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न की जाएगी।
समस तालाब आगमन: अपराह्न 5:00 बजे पूजा-अर्चना के बाद शाही सवारी ऊंट, घोड़े और बैंड-बाजे के लवाजमे के साथ छावनी बाजार से जोशियां का गट्टा, कपड़ा बाजार होते हुए समस तालाब पहुँचेगी।
वापसी: तालाब पर पूजा-अर्चना के पश्चात् सवारी ढंडों का दरवाजा और खेतान मोहल्ला होते हुए पुनः श्री गोपाल गौशाला परिसर लौटकर संपन्न होगी।
🌸 सावन की तीज, पौराणिक महत्व और सिंजारा परंपरा:
राजस्थान में कहावत बेहद मशहूर है— "तीज तीवारां बावड़ी, ले डूबी गणगौर..." अर्थात सावनी तीज के साथ ही त्योहारों की सुमधुर श्रृंखला की शुरुआत हो जाती है। इसके बाद रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, नवरात्रि, दशहरा और दीपावली जैसे बड़े त्योहार आते हैं।
🕉️ किंवदंती व पौराणिक मान्यता:
पौराणिक कथाओं के अनुसार, श्रावण शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि (हरियाली तीज / छोटी तीज / मधुश्रवा तृतीया) को माँ भगवती पार्वती सौ वर्षों की कठोर तपस्या और साधना के बाद भगवान शिव से मिली थीं। इसलिए इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
🎁 सिंजारा: सुहाग और वात्सल्य का प्रतीक
तीज से एक दिन पूर्व (द्वितीया तिथि) को नवविवाहितों व पुत्रियों के लिए 'सिंजारा' भेजने की अनूठी परंपरा है:
पीहर पक्ष (या कुछ स्थानों पर ससुराल पक्ष) द्वारा विवाहिता के लिए उपहार भेजे जाते हैं।
इसमें मेहंदी, सिन्दूर, बिंदी, चूड़ियाँ, घेवर और विशेष लहरिया साड़ी शामिल होती है।
स्त्रियां सिंजारे के उपहारों से अपना श्रृंगार करती हैं, हाथों में मेहंदी रचाती हैं, लहरिया पहनती हैं और परिवार के साथ तीज का उत्सव मनाती हैं।
📸 भव्यता का केंद्र होगी शाही सवारी:
ऊंट, घोड़ों, लोक कलाकारों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों से सजी तीज माता की यह शाही सवारी शहरवासियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी। झुंझुनूं की सड़कों पर माँ पार्वती के स्वरूप तीज माता के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ेगा।
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