12/06/2026
झुंझुनू: श्रीगोपाल गौशाला में 125 वर्षों से जारी है सेवा का महायज्ञ, अत्याधुनिक एम्बुलेंस बन रही है बीमार गोवंश का सहारा
झुंझुनू: राजस्थान के झुंझुनू स्थित श्रीगोपाल गौशाला आज सेवा, समर्पण और मानवता की अनूठी मिसाल बनी हुई है। पिछले 125 वर्षों से निरंतर संचालित यह गौशाला न केवल बेसहारा गोवंश के लिए आश्रय स्थल है, बल्कि दानदाताओं के उदार सहयोग से समाज सेवा का एक बड़ा केंद्र भी बन चुकी है।
सेवा की एक लंबी विरासत-
सवा सौ वर्षों की लंबी यात्रा में श्रीगोपाल गौशाला ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं, लेकिन भामाशाहों और सेवाभावी लोगों के अटूट समर्थन ने इसकी नींव को हमेशा मजबूत रखा है। गौशाला प्रबंधन का कहना है कि यहाँ केवल गोवंश की देखरेख नहीं होती, बल्कि आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के माध्यम से उन्हें जीवनदान देने का प्रयास किया जाता है।
आधुनिक तकनीक से लैस एम्बुलेंस: एक बड़ी राहत-
इसी मानवीय दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए, वर्षों पूर्व श्री आनंदी देवी श्यामसुंदर संगई (जसरापुर वाले) और संगई फाउंडेशन, मुंबई द्वारा गौशाला को एक अत्याधुनिक एम्बुलेंस भेंट की गई थी। इस एम्बुलेंस की सबसे बड़ी विशेषता इसमें लगा हाइड्रोलिक सिस्टम है।
महत्व: हाइड्रोलिक सिस्टम के कारण बीमार या घायल गोवंश को एम्बुलेंस में चढ़ाने और उतारने में आसानी होती है, जिससे असहाय पशुओं को अनावश्यक पीड़ा नहीं झेलनी पड़ती।
दैनिक उपयोग: इस एम्बुलेंस के माध्यम से प्रतिदिन जरूरतमंद गोवंश को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे गौशाला के दैनिक कार्यों में अभूतपूर्व सहयोग मिल रहा है।
भामाशाहों के सहयोग से बढ़ रहे विकास के कदम-
गौशाला प्रबंधन ने बताया कि संगई फाउंडेशन जैसे उदारमना भामाशाहों के सहयोग से ही गौशाला निरंतर आधुनिक सुविधाओं से लैस हो रही है। समाज के प्रबुद्ध और दानशील व्यक्तियों की ऐसी सहभागिता ही गौ-संरक्षण के पुनीत कार्य को और अधिक प्रभावी बनाती है। आने वाले समय में भी गौशाला प्रबंधन समाज के सहयोग से ऐसी ही अन्य आवश्यक सुविधाओं को विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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