Sanatan dharam prachar samiti

Sanatan dharam prachar samiti sanatan dharam prachar samiti

10/04/2026

श्री राजीव दीक्षित जी ज्ञान🙏

11/12/2025

शिवलिंगी बाझपनरोग को गर्भधारण करने की क्षमता पुत्र प्रदान करने की क्षमता रखता हैं यह 100%गारंटी का प्रयोग है ।
जो हताश निराश हो चुके हो एक बार इस प्रयोग को जरूर आइए

शिवलिंगी एक पारंपरिक आयुर्वेदिक औषधि है, जो पुत्र प्राप्ति में मददगार मानी जाती है। यह औषधि मुख्य रूप से शिवलिंगी के बीजों से तैयार की जाती है, जिनमें प्रजनन क्षमता बढ़ाने वाले गुण होते हैं।

शिवलिंगी के गुण?

- यह शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता में सुधार करती है।
- यह हार्मोनल संतुलन को बनाए रखने में मदद करती है।
- यह प्रजनन प्रणाली को मजबूत बनाती है।

औषधि प्रयोग

1. शिवलिंगी बीज चूर्ण: शिवलिंगी के बीजों को सुखाकर पीस लें। इस चूर्ण को 1-2 ग्राम की मात्रा में दूध या पानी के साथ सेवन करें।

2. शिवलिंगी बीज का काढ़ा: शिवलिंगी के बीजों को पानी में उबालकर काढ़ा बनाएं। इस काढ़े को नियमित रूप से सेवन करें।

3. शिवलिंगी के बीज का घी:* शिवलिंगी के बीजों को घी में भूनकर सेवन करें।

दूसरी विधि.
शिवलिंगी का बीज 100 ग्राम
पुत्रजीवक का बीज 100 ग्राम
मोर के पंख का जो चांद होता है उसको भस्म बनाकर घिसकर 10 ग्राम की मात्रा
सभी पाउडर को एक में बढ़िया से मिला लेना चाहिए
उसके बाद 20 ग्राम तक दूध में उबालकर कपिला गाय के दूध में
और जो बछड़ा को जन्मदिन है ऐसे दूध में मिलाकर पीना चाहिए खाली पेट ऋतुमता स्नान करने के दिन से लेकर के 7 दिन तक लगातार पीना चाहिए या 14 दिन तक पीना चाहिए

सावधानियां
- शिवलिंगी का सेवन करने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श लें।
- निर्धारित मात्रा में ही सेवन करें।
- गर्भावस्था के दौरान इसका सेवन न करें।

निष्कर्ष,,,,
शिवलिंगी का पुत्र प्राप्ति योग एक पारंपरिक आयुर्वेदिक औषधि है, जो प्रजनन क्षमता बढ़ाने में मददगार हो सकती है। हालांकि, इसका सेवन करने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है।

इसे इतना अधिक से अधिक शेयर करें कि लोगों का काफी पैसा बच जाए इस पर लोग काफी पैसा खर्च करके इलाज करते हैं ठीक नहीं हो पाते हैं यह बहुत ही रामबाण औषधि है 100% सब प्रतिशत अनुभूत है








02/11/2025
29/10/2025

छठ पूजा और यदुवंशियों का संबंध.!

भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र राजा शाम्ब ने कुष्ठ रोग से मुक्ति पाने के लिए सर्वप्रथम सूर्य देव की उपासना अर्थात छठ पूजा की थी, वर्तमान समय में भगवान श्रीकृष्ण के वंशज श्री लालू प्रसाद जी ने इस छठ पर्व को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है।

।। जय यादव ।। जय माधव ।।

22/08/2025
09/07/2025

मंगलम भगवान विष्णु, मंगलम गरुड़ ध्वजा ।
मंगलम कुंडली कांक्षय:, मंगलाय तनु हरि: ।।
यह श्लोक वैवाहिक संस्कार के निमंत्रण पत्र में क्यों लिखा जाता है ?
जब भगवान श्री विष्णु जी का विवाह संपन्न होने जा रहा था तब सभी देवी देवताओं सहित शिव पार्वतीजी को निमंत्रण दिया गया लेकिन श्री गणेश जी को अलग से निमंत्रण नहीं दिया गया
सभी बाराती सज धज कर बारात में चलने को तैयार हुए कि वहां पर श्री नारद जी का आगमन हुआ नारद जी ने देखा कि श्री गणेश जी बारात में नहीं है बस नाराद जी जो थे तुरंत गणेश जी के पास पहुंच गए नारायण हरि नारायण हरि क्यों प्रथम पूज्य श्री गणेश जी आपको मालूम नहीं है क्या कि श्री भगवान विष्णु जी का विवाह संपन्न होने जा रहा है और आपको निमंत्रण नहीं दिया गया है गणेश जी बोले मुझे निमंत्रण नहीं मिला, नारद जी ने कहा अब आप उनके रास्ते में मूषक को पहुंचा दो और वह मूषक रास्ता को खंड-खंड कर देंगे तो वह उनकी बारात नहीं निकल पाएगी गणेश जी बोले ठीक है तो श्री गणेश जी ने अपने सारे चूहों की सेना को उनके मार्ग में भेज दिया और उन्होंने रास्ता को खंड-खंड, कहीं ऊंचा कहीं नीचा कहीं गड्ढा कहीं पुल्खर छोड़ दी, जब बारात वहां से निकली तो किसी का रथ टूटा किसी का रथ फसा कोई गड्ढे में गिर गया और बारात आगे को न बढ़ पाई उसी समय नारद जी बारात में पहुंचे भगवान विष्णु से कहा कि हे भगवन आपने सभी को निमंत्रण दिया है बारात में, भगवान श्री विष्णु बोलें हां सभी को निमंत्रण दिया है, नाराद जी ने फिर पूछा कि गणेश जी को भी निमंत्रण नही दिया है भगवान विष्णु ने कहा हां शिव पार्वती जी को दिया है लेकिन गणेश जी को अलग से नहीं दिया गया है उसी निमंत्रण में गणेश जी का माना जाएगा, तभी नारद जी ने कहा है भगवान आपने यही भूल कर दी है कि प्रथम पूज्य एवं विघ्नहर्ता श्री गणेश जी को निमंत्रण नहीं दिया इसलिए आपकी बारात आगे नहीं चल सकती अतः आप श्री गणेश जी का तुरंत पूजन करें तब नारद जी के कहने पर भगवान श्री विष्णु जी ने यही मंत्र उच्चारण के साथ पूजन किया -आचार्य विवेक

06/06/2025

बहुत मुश्किलों से यह ओरिजनल फोटो मिला है।
नाम :` चाँद मियां
`जन्म :` 1838
`मृत्यु :` 15 अक्टुबर 1918
`उपासक :` अल्लाह ताला के।
`निवास स्थान :` द्वारका म
ई मस्जिद शिर्डी।`भोजन :` शाकाहार + मांसाहार
`नशा :` चिलम पीना।
`काम :` झाड़ फूंक लगाना।
`भक्तों का इलाज :` चिलम की पी हूई राख की पुड़िया बनाकर देते थे।
`आजादी की लड़ाई में योगदान :` 0 (शून्य)`चढ़ाए हुए चंदे का उपयोग :` चिलम व बीड़ी खरीदने में रहने सहने के लिए।
`फेवरेट डायलोग :` अल्लाह सबका भला करें।`मरने के बाद क्या हुआ :` मुस्लिम रीति-रिवाजों से कब्र बनाई गई। फिर भी हिंदूओं की आँखे नहीं खुलती, चाँद मियाँ को श्रीराम कृष्ण हनुमान जी से भी ऊपर दर्जा दे रखा है। पिछले 40 सालों में ही योजनाबद्ध तरीके से साई उर्फ चाँद मियां की मार्केटिंग हुई है ▬▬▬▬▬▬๑⁂❋⁂๑▬▬▬▬
जनजागृति हेतु लेख प्रसारण अवश्य करें॥

04/04/2025

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