14/01/2026
हज़रत इमाम मेहंदी के ज़हूर के तक़रीबन 6 या 7 साल बाद दज्जाल ज़ाहिर होगा,
ये क़ौमे यहूद का एक शख्स होगा लोगों में इसका ख़िताब मसीह होगा उसकी दाहिनी आंख अंगूर की तरह बाहर को लटकी होगी उसके बाल घुंगराले उसकी सवारी में बहुत बड़ा गधा होगा,
उसकी पेशानी पर ق ا ف ر काफिर लिखा होगा जिसको हर मुसलमान बे पढ़ा भी पढ़ लेगा,
इसके साथ यहूदियों के 70000 लोगों का लश्कर होगा जो इसकी बैयत करेंगे,
अपने साथ बहुत बड़ी आग जिसका नाम जहन्नम रखा होगा मगर दरअसल वो जन्नत होगी और एक बहुत बड़ा बाग़ जिसका नाम जन्नत रखा होगा मगर वो जहन्नम होगी को लिए फिरता होगा,
अपनी खुदायी का दावा करेगा जो उसको खुदा कह देगा उसे जन्नत में और जो ना मानेगा उसे जहन्नम में डाल देगा,
पूरी दुनिया में गश्त करेगा महज़ 40 दिन ही वो दुनिया में रहेगा मगर उसका पहला दिन 1 साल के बराबर दूसरा दिन 1 महीने के बराबर तीसरा दिन 1 हफ्ते के बराबर और बाकी के 37 दिन आम दिनों के बराबर होंगे..
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जब ये बात सहाबा इकराम रज़ी अल्लाहु तआला अन्हु को खबर हुई तो सबने हुज़ूर सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम से पूछा कि या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम उन दिनों में जबकि 1 दिन 1 साल के बराबर होगा तो नमाज़ कैसे पढ़ी जायेगी तो आप फरमाते हैं कि क़यास करके साल भर की पढ़नी होगी..
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पूरी दुनिया में क़त्लो गारत करके मक्का व मदीना जाने की कोशिश करेगा मगर अल्लाह के कुछ फ़रिश्ते नंगी तलवार लिए उस सरहद की निगेहबानी करते होंगे जिससे ये अंदर दाखिल ना हो पाएगा..
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जब ये ज़ाहिर होगा तो उससे 2 साल पहले से दुनिया में अकाल पड़ा होगा और अनाज की बेहद किल्लत होगी तो ये अजायबात दिखाते हुए अनाज पैदा करेगा,
दरख्तों में फ़ल लगा देगा, जानवरों को मोटा ताज़ा कर देगा जिससे कि वो खूब दूध देने लगेंगे, मुर्दों को जिलाएगा..
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उस साल अरब शरीफ में 3 बड़े ज़लज़ले आएंगे और जिनका ईमान कमज़ोर होगा वो शहर से बाहर निकल आएंगे और दज्जाल की कौम में शामिल हो जाएंगे उसी वक़्त मदीना तय्यबह में एक बुज़ुर्ग होंगे जो दज्जाल से सवाल करने के लिए बाहर आएंगे जब उन्हें दज्जाल के सामने पेश किया जाएगा तो दज्जाल को देखकर वो कहेंगे कि मैंने तुझे पहचान लिया तू वही है जिसकी खबर हमारे नबी सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने हमको बहुत पहले ही दे दी थी, तू मलउन है ये सुनकर दज्जाल गज़बनाक होगा और उनके सर पर आरा रखकर उन्हें 2 टुकड़ों में चीर देगा फिर अपने मानने वालों से कहेगा कि क्या मैं फिर से इसे ज़िंदा न कर दूं ताकि तुम लोगों का ईमान और मज़बूत हो जाए और फिर वो दोनों टुकड़ों को मिला देगा जो कि अल्लाह की क़ुदरत से फिर जिंदा हो जाएगा वो जिंदा होते ही फिर यही कहेंगे कि अब तो मेरा ईमान पहले से ज़्यादा पक्का हो गया कि तू मलऊन है फिर वो गुस्से में भरकर उनको मारने की कोशिश करेगा मगर इस बार उन्हें ना मार सकेगा और आखिर में उन्हें अपनी जहन्नम में डलवा देगा जो कि अल्लाह की तरफ़ से जन्नत होगी..
इसके बाद वो कोई अजायब न दिखा सकेगा फिर वहां से खायब व खासिर होकर मुल्के शाम को रवाना होगा..
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उधर इमाम मेहंदी रज़ी अल्लाहु तआला अन्हु उससे जंग की तैयारी में लगे होंगे की फज्र की नमाज़ का वक़्त हो जाएगा जैसे ही जमात की तैयारी होगी उसी वक़्त हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम फरिश्तों की बाज़ुओं पर बैठे हुए मस्जिद की मीनार पर उतरेंगे और आवाज़ देंगे की सीढ़ी लाओ तब उन्हें वहां से उतारा जाएगा..
हज़रत इमाम मेहंदी रज़ी अल्लाहु तआला अन्हु हज़रत ईसा को इमामत के लिए कहेंगे पर आप मना फरमा देंगे तो हज़रत इमाम मेहंदी रज़ी अल्लाहु तआला अन्हु इमामत फरमायेंगे और हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम मुक़तदी होंगे..
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फिर इमाम मेहंदी रज़ी अल्लाहु तआला अन्हु हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम को लश्कर की कमान सौंपेंगे तो हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम फरमाएंगे की लश्कर की कमान आप ही फरमांए, मैं तो बस दज्जाल के क़त्ल के लिए आया हूं और हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम दज्जाल के पीछे जाएंगे उस वक़्त आपकी सांसों में ये तासीर होगी की कई कई कोस तक जायेगी और जो उसकी ज़द में आ जायेगा वो पानी में नमक की तरह पिघल जाएगा ।
आप दज्जाल को खदेड़ते हुए बाबे 'लद' तक ले जाएंगे और उसे जल्दी से क़त्ल करेंगे ताकि वो पिघल न जाए और उसका खून अपनी क़ौम को दिखाएंगे ताकि मुसलमानों को राहत मिले और मुसलमान उसके लश्कर के खात्मे में लगे होंगे,
हत्ता कि अगर कोई यहूदी पत्थर या पेड़ के पीछे छिपा होगा तो वो पत्थर और पेड़ आवाज़ देगा कि ऐ अल्लाह के नेक बन्दे एक काफिर मेरे पीछे छिपा हुआ है आकर इसे क़त्ल कर..
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इस तरह क़त्ले दज्जाल के बाद पूरी रूए ज़मीन पर हज़रत इमाम मेहंदी रज़ी अल्लाहु तआला अन्हु की बादशाहत क़ायम होगी..
* ज़लज़लातुस साअत,सफ़ह 7
* अनवारुल हदीस,सफ़ह 135