15/02/2024
शिक्षा का द्वितीय अवसर
परिचय:
यह कहानी बिहार के जमुई जिले के एक छोटे से गाँव चौडिहा में रहने वाली दौलती नाम की एक लड़की की है। दौलती ने 5वीं कक्षा तक पढ़ाई की, लेकिन उसके बाद पढाई छोड़ दी और घर के कामों में लग गई।
शिक्षा का महत्व:
दौलती के माता-पिता हमेशा चाहते थे कि उनकी बेटी पढ़े-लिखे और जीवन में सफलता प्राप्त करे। वे उसे समझाते थे कि शिक्षा जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है।
पुनः शिक्षा की शुरुआत:
एक दिन, WAYAM संस्था के दो सदस्य दौलती के गाँव में फील्ड विजिट के लिए गए। वहाँ उन्होंने गाँव की किशोरियों से मुलाकात की और उनके जीवन के बारे में जानने की कोशिश की।
जब सभी किशोरियाँ अपनी शिक्षा के बारे में बता रही थीं, तब दौलती चुपचाप बैठी उन्हें सुन रही थी। WAYAM सदस्यों ने दौलती से पूछा कि वह क्यों नहीं बोल रही है, तो वह चुप हो गई।
गाँव के कुछ लोगों ने कहा कि वह पढ़ती ही नहीं है और उसने अपनी पढ़ाई छोड़ दी है। बार-बार पूछने पर भी दौलती कुछ नहीं बोल रही थी।
अंत में, जब उनसे पूछा गया कि क्या वह फिर से अपनी पढ़ाई शुरू करना चाहती हैं, तो उन्होंने हाँ में जवाब दिया।
आगे का रास्ता:
दौलती उसी गाँव की किरण दीदी, जो वयम की सदस्य भी हैं, के पास पढ़ने के लिए जाने लगी। किरण दीदी ने दौलती को न केवल पढ़ाई में मदद की, बल्कि उसे जीवन में आगे बढ़ने के लिए भी प्रेरित किया।
दौलती की कहानी हमें सिखाती है कि कभी भी हार नहीं माननी चाहिए। दौलती को भी जब मौका मिला तो फिर से वह अपनी पढ़ाई शुरू कर दी।
दौलती की कहानी एक प्रेरणादायक कहानी है जो हमें सिखाती है कि शिक्षा जीवन में कितनी महत्वपूर्ण है। हमें कभी भी शिक्षा को नहीं छोड़ना चाहिए, चाहे कितनी भी मुश्किलें क्यों न हों। -i i-Saksham Wayam Collective Reshma WayamEkta SinhaAditya I-Saksham Tyagii-Saksham