20/08/2026
भोपाल के एक निजी कॉलेज में युवाओं से बात करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने छात्र जीवन का एक अनसुना किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि कॉलेज के दिनों में जैसे ही वे साइंस कॉलेज पहुंचे, छात्र राजनीति में जॉइंट सेक्रेटरी बन गए। उसी दौरान उन्होंने मेडिकल की कठिन परीक्षा यानी पीएमटी भी निकाल ली और उनका चयन एमबीबीएस के लिए हो गया।
परिवार और हर किसी को लगा कि अब वे डॉक्टर बनेंगे। लेकिन तभी वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक प्रचारक के संपर्क में आए और साथियों ने उन्हें राजनीति के जरिए समाज सेवा की राह पर चलने की सलाह दी। प्रचारक की उस एक बात और सलाह ने उनकी पूरी दिशा बदल दी। उन्होंने एमबीबीएस छोड़कर छात्र राजनीति और राष्ट्र निर्माण का रास्ता चुना, और आगे चलकर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। हालांकि बाद में पीएचडी पूरी कर उन्होंने अपने नाम के आगे 'डॉक्टर' ज़रूर जोड़ लिया।