11/09/2026
बायो-रीजन गाँव कुकड़ू में आदिवासी जंगल यात्रा |
जंगल से जीवन, परंपरा और पोषण का रिश्ता
जन अधिकार मंच झारखंड की पहल के तहत बायो-रीजन गाँव कुकड़ू में आदिवासी जंगल यात्रा का आयोजन किया गया। बरसात के मौसम में जंगल और आसपास के प्राकृतिक क्षेत्रों में मिलने वाली पारंपरिक जड़ी-बूटियों, साग-सब्जियों, कंद-मूल, फल एवं अन्य स्थानीय खाद्य पदार्थों की पहचान और उनके पारंपरिक उपयोग को समझने के उद्देश्य से ग्रामीणों के साथ जंगल की यात्रा की गई।
इस जंगल यात्रा के दौरान गाँव के आदिवासी बुजुर्गों, महिला साथियों, युवाओं, किसानों एवं समुदाय के जानकार लोगों ने बरसात के समय जंगल में मिलने वाले विभिन्न प्राकृतिक खाद्य पदार्थों और औषधीय पौधों के बारे में जानकारी साझा की। यह यात्रा केवल जंगल घूमने की यात्रा नहीं, बल्कि हमारे पूर्वजों से चली आ रही प्रकृति, पोषण, स्वास्थ्य और जीवन-पद्धति के ज्ञान को समझने और आगे बढ़ाने की पहल रही।
जंगल हमारे लिए सिर्फ लकड़ी का स्रोत नहीं है—यह भोजन, पोषण, औषधि, संस्कृति और आजीविका का आधार है।
बरसात के मौसम में मिलने वाले स्थानीय जंगली साग, कंद-मूल, फल, पत्तियाँ, जड़ी-बूटियाँ एवं अन्य खाद्य वनस्पतियाँ स्थानीय पोषण सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इन पारंपरिक खाद्य पदार्थों में मौजूद स्थानीय ज्ञान को संरक्षित करना और नई पीढ़ी तक पहुँचाना आज के समय की महत्वपूर्ण जरूरत है।
आदिवासी समुदाय का जंगल से रिश्ता सदियों पुराना है। जंगल की रक्षा के साथ-साथ जंगल से मिलने वाले प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित और सामुदायिक उपयोग हमारी समृद्ध परंपरा का हिस्सा रहा है। जंगल यात्रा के माध्यम से इसी रिश्ते, ज्ञान और परंपरा को फिर से समझने का प्रयास किया गया।
कुपोषण के खिलाफ लड़ाई केवल बाजार के पोषण उत्पादों से नहीं, बल्कि हमारे अपने स्थानीय और पारंपरिक खाद्य संसाधनों को पहचानने से भी मजबूत हो सकती है।
आइए, हम अपने जंगल, जल, जमीन, जैव विविधता, पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय खाद्य संस्कृति को बचाने के लिए सामूहिक प्रयास करें और आने वाली पीढ़ियों तक इस अमूल्य विरासत को पहुँचाएँ।
जन अधिकार मंच झारखंड
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