Swachhatapukare Foundation

Swachhatapukare Foundation A group of Shramdani, committed to protect River and Water bodies through their continuous efforts We work in the area of Water, Waste, Air, Soil and Energy.

Swachhata ( Cleanliness in every aspects of Environment)

आज दोमुहानी में आयोजित स्वच्छता अभियान में Kerala Public School Kadma Eco Club के ऊर्जावान विद्यार्थियों और सदस्यों ने ब...
10/05/2026

आज दोमुहानी में आयोजित स्वच्छता अभियान में Kerala Public School Kadma Eco Club के ऊर्जावान विद्यार्थियों और सदस्यों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।

आज की सबसे बड़ी खुशी यह रही कि समाज का युवा वर्ग अब बदलाव की जिम्मेदारी अपने हाथों में लेने लगा है। हर हाथ में सफाई का संकल्प और हर चेहरे पर एक बेहतर कल की उम्मीद दिखाई दी।

दोमुहानी के किनारों को स्वच्छ बनाते हुए यह एहसास और मजबूत हुआ कि जब समाज जागरूक होता है, तब परिवर्तन निश्चित होता है।

यह सिर्फ एक क्लीनअप ड्राइव नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक संदेश है —
“स्वच्छ पर्यावरण ही सुरक्षित भविष्य की नींव है।”

हम सभी सहभागी साथियों का हृदय से आभार।
आइए, मिलकर प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं और एक बेहतर कल का निर्माण करें।

आज नदी सफाई में लोग भले कम थे, पर सामूहिक श्रमदान की ऊर्जा कुछ और ही होती है। यह सिर्फ सफाई नहीं, अपने भीतर की जड़ता को ...
03/05/2026

आज नदी सफाई में लोग भले कम थे, पर सामूहिक श्रमदान की ऊर्जा कुछ और ही होती है। यह सिर्फ सफाई नहीं, अपने भीतर की जड़ता को भी हटाने का काम है—और यही ऊर्जा पूरे सप्ताह हमें तरोताज़ा रखती है।

लोग कहेंगे—“इससे क्या बदलता है?”
पर सच यह है कि बदलाव कभी भीड़ से नहीं, छोटे-छोटे कछुआ प्रयासों से आता है—धीरे, स्थिर, लेकिन स्थायी।

विडंबना यह है कि जो सबसे ज़्यादा बदलाव की बातें करते हैं, वही ऐसे प्रयासों से दूर रहते हैं।

सोचिए—आप दर्शक बनकर रहना चाहते हैं, या बदलाव का हिस्सा बनना?

#दोमुहानी

हर रविवार कुछ खास होता है…नई और पुरानी ऊर्जा का संगम, एक ही उद्देश्य के साथ—अपनी नदी के लिए, अपने शहर के लिए। आज दोमुहान...
26/04/2026

हर रविवार कुछ खास होता है…

नई और पुरानी ऊर्जा का संगम, एक ही उद्देश्य के साथ—अपनी नदी के लिए, अपने शहर के लिए। आज दोमुहानी घाट की सुबह भी इसी समर्पण और सकारात्मकता से भरी रही।

लोगों का यूँ जुड़ना सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि एक संदेश है—कि बदलाव हम सब मिलकर ला सकते हैं।

आइए, हर रविवार सुबह हमसे जुड़िए… अपनी नदी के लिए थोड़ा समय निकालिए। यकीन मानिए, ये सुकून आपको भी महसूस होगा।

#दोमुहानी

7.5 साल पहले, दोमुहानी घाट पर एक सुबह कुछ लोग चुपचाप खड़े थे। हाथों में न कोई बड़ा प्लान था, न संसाधनबस एक बेचैनी थी… कि...
19/04/2026

7.5 साल पहले, दोमुहानी घाट पर एक सुबह कुछ लोग चुपचाप खड़े थे। हाथों में न कोई बड़ा प्लान था, न संसाधन

बस एक बेचैनी थी… कि जिस नदी ने हमें जीवन दिया, हम उसे इस हालत में कैसे छोड़ सकते हैं।

किसी ने झुककर एक प्लास्टिक उठाया। फिर दूसरे ने। उस दिन सफाई से ज्यादा एक सोच की शुरुआत हुई कि बदलाव का इंतज़ार नहीं, उसे शुरू करना होता है।

रविवार दर रविवार, ये छोटे कदम एक अखंड स्वच्छता अभियान में बदलते गए। लोग जुड़ते गए, इरादे मजबूत होते गए… और नदी के साथ हमारा रिश्ता भी।

आज, उसी दोमुहानी घाट पर, अक्षय तृतीया के दिन, Jamshedpur Notified Area Committee और Green Caps के साथ इस बार सिर्फ सफाई के लिए नहीं, बल्कि एक बड़े बदलाव की नींव रखने के लिए एकत्रित हुए ।

अब ये सिर्फ एक दिन की कहानी नहीं रही।
ये हर रविवार की प्रतिबद्धता है।
ये एक मास मूवमेंट है।

क्योंकि जब लोग साथ आ जाते हैं, तो नदी सिर्फ साफ नहीं होती—वो फिर से जीने लगती है।

आइए, अवेयरनेस को एक्शन में बदलें… और अपनी नदियों को बचाएं। 🌿

#दोमुहानी #अक्षयतृतीया

आज Domuhani Ghat पर खड़े होकर एक कड़वी सच्चाई फिर सामने आई—हम सब मिलकर अपनी ही नदियों को खत्म कर रहे हैं। पानी में तैरता...
12/04/2026

आज Domuhani Ghat पर खड़े होकर एक कड़वी सच्चाई फिर सामने आई—हम सब मिलकर अपनी ही नदियों को खत्म कर रहे हैं। पानी में तैरता प्लास्टिक ऐसा लग रहा था मानो मछलियों का भोजन हो। क्या यही विकास है? क्या यही हमारी संवेदनशीलता है?

सबसे दुखद यह नहीं कि प्रदूषण हो रहा है, बल्कि यह है कि जिम्मेदार लोग—नेता, अधिकारी और हम आम नागरिक—सिर्फ एक-दूसरे पर उंगली उठाने में व्यस्त हैं। Kharkai River का जहरीला पानी चुपचाप Subarnarekha River में मिल रहा है, और हम सब अपने-अपने दायित्वों से आंखें चुरा रहे हैं।

7.5 साल के अनुभव के बाद एक ही बात समझ आई है—अगर जिम्मेदार संस्थाएं अपनी ऊर्जा का सिर्फ 10% भी नदियों के संरक्षण में लगा दें, तो हालात बदल सकते हैं। लेकिन जब नीयत में ही कमी हो, तो योजनाएं भी कागजों तक सीमित रह जाती हैं।

सवाल यह नहीं है कि “किसने क्या किया?”
सवाल यह है कि “हमने क्या नहीं किया?”

क्योंकि जब इतिहास लिखा जाएगा, तब यह नहीं देखा जाएगा कि आप किस पद पर थे, बल्कि यह कि आपने अपनी नदी को बचाने के लिए क्या किया।

अब भी समय है कि आरोप छोड़कर उत्तरदायित्व उठाने का। वरना आने वाली पीढ़ियाँ हमें माफ़ नहीं करेंगी।

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