जन चेतना मंच Jakhal Mandi

जन चेतना मंच Jakhal Mandi इंसानियत के लिए निष्पक्षता से काम करन?

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है?
वक्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आस्माँ!हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है?

26/04/2025

मैं अभी भी उस रेलगाड़ी को देख सकता हूं
जिसमें गांधी सफर कर रहे थे। वे सदा तीसरे
दर्जे, थर्ड क्लास में सफर करते थे परंतु उनका यह
थर्ड क्लास फ़र्स्ट क्लास,प्रथम श्रेणी से भी
अधिक अच्छा था। साठ सीटों के डिब्बे में
वि, उनकी पत्नी और उनका सैक्रेटरी—केवल
यह तीन लोग थे। सारा डिब्बा आरक्षित था।
और वह कोई साधारण प्रथम श्रेणी का डिब्बा
नहीं था क्योंकि ऐसा डिब्बा तो दुबारा मैंने
कभी देखा ही नहीं। वह तो प्रथम श्रेणी का
डिब्बा ही रहा होगा। और सिर्फ प्रथम
श्रेणी का ही नहीं बल्कि विशेष प्रथम श्रेणी
का, सिर्फ उस पर ‘’तृतीय श्रेणी’’ लिख दिया
गया था और तृतीय श्रेणी बन गया था। और इस
प्रकार महात्मा गांधी के सिद्धांत और उनके
दर्शन की रक्षा हो गई थी।
उस समय मैं केवल दस साल का था। मेरी मां
यानी मेरी नानी ने मुझे तीन रूपये देते हुए कहा
कि स्टेशन बहुत दूर है और तुम भोजन के समय तक
शायद वापस घर न पहुच सको। और इन गाड़ियों
का कोई भरोसा नहीं है। बारह-तेरह घंटे देर से
आना तो इनके लिए आम बात है। इसलिए ये
तीन रूपये अपने पास रख लो। भारत में उन दिनों
तीन रुपयों को तो एक अच्छा खासा खजाना
माना जाता था। तीन रुपयों में तो एक
आदमी तीन महीने तक अच्छी तरह से रह सकता
था।
नानी ने मेरे लिए एक बहुत सुंदर कुर्ता बनवाया
था। उनको मालूम था कि मुझे लंबी पतलून
अच्छी नहीं लगती । ज्यादा से ज्यादा मैं
कुरता-पायजामा पहन लेता था। कुर्ता मुझे
बहुत प्रिय था, और पायजामा तो धीरे-धीरे
गायब हो गया केवल लंबा कुर्ता ही बचा।
लोगों ने शरीर को दो हिस्सों में बाट रखा है।
एक ऊपर का हिस्सा और दूसरा नीचे का
हिस्सा। और इन दोनों के लिए कपड़े भी अलग-
अलग तरह के बनाए है। शरीर के ऊपरी हिस्से के
लिए तो सुंदर-सुंदर कपडे बनाए है और निचले
शरीर को तो ढाँक लेने का प्रयास किया गया
है बस।
नानी ने मेरे लिए बहुत सुंदर कुर्ता बनवाया था।
उन दिनों बहुत गर्मी थी। मध्य-भारत के उस
अंचल में बहुत अधिक गर्मी पड़ती है। दिन-रात
लू चलती रहती है, उस के थपेड़ों से मुंह और नाक
को बहुत परेशानी होती। बस केवल आधी रात
को लोगों के कुछ राहत मिलती। मध्य-भारत में
इतनी गर्मी पड़ती है कि हर वक्त ठंडा पानी
पीने की इच्छा रहती है। उस समय अगर कहीं से
बर्फ मिल जाए तो बड़ी खुशी होती है। उस
हिस्से में बर्फ बहुत महंगी होती है। क्योंकि
बर्फ को सौ किलोमीटर दूर कारखाने से लाते
समय आधी बर्फ तो रस्ते में ही घुल जाती है।
समाप्त हो जाती है। इसलिए उसे जल्दी से
जल्दी लाने की कोशिश की जाती है।
मेरी नानी ने मुझसे कहा कि अगर मैं महात्मा
गांधी को देखना चाहता हूं तो मुझे वहां
जाना चाहिए। और उन्होंने बहुत पतले मलमल
का बड़ा कुर्ता बनवाया। मलमल बहुत ही सुदंर
और बहुत पुराना कपड़ा है। उन्होंने बहुत अच्छा
मलमल लिया। वह बहुत ही पतला और पारदर्शी
था।
उस समय सोने की मोहरें गायब हो गई थीं और
चाँदी के रुपयों का प्रचलन था। अब उस मलमल
के कुरते की जेब के लिए चाँदी के तीन रूपये बहुत
भारी थे—जेब लटक रही थी। ऐसा मैं क्यों कह
रहा हूं, क्योंकि इसको जाने बिना आप लोग
उस बात को समझ नहीं सकोगे जो मैं कहने जा
रहा हूं।
गाड़ी हमेशा की तरह तेरह घंटे लेट आई। बाकी
सभी लोग चले गए थे। सिवाय मेरे। तूम तो
जानते है कि मैं कितना जिद्दी हूं। स्टेशन
मास्टर ने भी मुझसे कहा: बेटा तुम्हारा तो
कोई जवाब नहीं है। सब लोग चले गए हैं किंतु
तुम तो शायद रात को भी यहीं पर ठहरने के
लिए तैयार हो। और अभी भी गाड़ी के आने
को कुछ पता नहीं है। और तुम सुबह चार बजे से
उसका इंतजार कर रहे हो।
स्टेशन पर चार बजे पहुंचने के लिए मुझे अपने घर से
आधीरात को ही चलना पडा था। फिर भी
मुझे अपने उन तीन रुपयों को खर्च ने की जरूरत
नहीं पड़ी थी क्योंकि स्टेशन पर जितने लोग थे
सब कुछ न कुछ लाए थे और वे सब इस छोटे लड़के
की देखभाल कर रहे थे। वे मुझे फल, मिठाइयों
और मेवा खिला रहे थे। सो मुझे भूख लगने का
कोई सवाल ही नहीं था। आखिर जब गाड़ी
आई तो अकेला मैं ही वहां खड़ा था। बस एक
दस बरस का लड़का स्टेशन मास्टर के साथ वहां
खड़ा था।
स्टेशन मास्टर ने महात्मा गांधी से मुझे
मिलवाते हुए कहा: इसे केवल छोटा सा लड़का
ही मत समझिए। दिन भर मैंने इसे देखा है और कई
विषयों पर इससे चर्चा की है, क्योंकि और
कोई काम तो था नहीं। बहुत लोग आए थे और
बहुत पहले चले गए, किंतु यह लड़का कहीं गया
नहीं। सुबह से आपकी गाड़ी का इंतजार कर
रहा है। मैं इसका आदर करता हूं, क्योंकि मुझे
पता है कि अगर गाड़ी न आती तो यह यहां से
जानेवाला नहीं था। यह यहीं पर रहता।
आस्तित्व के अंत तक यह यहीं रहता। अगर ट्रेन न
आती तो यह कभी नहीं जाता।
महात्मा गांधी बूढे आदमी थे। उन्होंने मुझे
अपने पास बुलाया और मुझे देखा। परंतु वे मेरी
और देखने के बजाए मेरी जेब की और देख रहे थे।
बस उनकी इसी बात ने मुझे उनसे हमेशा के लिए
विरक्त कर दिया। उन्होंने कहा: यह क्या है?
, मैंने कहा: तीन रूपये।
इस पर तुरंत उन्होंने मुझसे कहा, इनको दान कर
दो। उनके पास एक दान पेटी होती थी,
जिसमें सूराख बना हुआ था। दान में दिए जाने
वाले पैसों को उस सूराख से पेटी के भीतर डाल
दिया जाता था। चाबी तो उनके पास रहती
थी। बाद में वे उसे खोल कर उसमें से पैसे निकाल
लेते थे।
मैंने कहा: अगर आप में हिम्मत है तो आप इन्हें ले
लीजिए,जेब भी यहां है रूपये भी यहां है, लेकिन
क्या मैं आप से पूछ सकता हूं कि ये रूपये आप
किस लिए इक्कठा कर रहे है।
उन्होंने कहा: गरीबों के लिए।
मैंने कहा: तब यह बिलकुल ठीक है। तब मैंने स्वयं
उन तीन रुपयों को उस पेटी में डाल दिया,
लेकिन आश्चर्य तो उन्हें होना था क्योंकि जब
मै वहां से चला तो उस पेटी को उठा कर चल
पडा।
उन्होंने कहा: अरे, यह तुम क्या कर रहे हो। यह
तो गरीबों के लिए हे।
मैंने उत्तर दिया: हां, मैंने सुन लिया है, आपको
फिर से कहने की जरूरत नहीं है। मैं भी तो
गरीबों के लिए ही ले जा रहा हूं। मेरे गांव में
बहुत से गरीब है। अब मेहरबानी करके मुझे इसकी
चाबी दे दीजिए, नहीं तो इसको खोलने के
लिए मुझे किसी चोर को बुलाना पड़ेगा।
क्योंकि चोर ही बंद ताले को खोलने की
कला जानते है।
उन्होंने कहा: यह अजीब बात है….उन्होंने अपने
सैक्रेटरी की और देखा। वह गूंगा बना था जैसे
की सैक्रेटरी होते है। अन्यथा वे सैक्रेटरी ही
क्यों बने? उन्होंने कस्तूरबा, अपनी पत्नी की
और देखा। कस्तूरबा ने उनसे कहा: अच्छा हुआ,
अब आपको अपने बराबरी का व्यक्ति मिला।
आप सबको बेवकूफ बनाते हो, अब यह लड़का
आपका बक्सा ही उठा कर ले जा रहा है।
अच्छा हुआ। बहुत अच्छा हुआ,मैं इस बक्से को
देख-देख कर तंग आ गई हूं।
परंतु मुझे उन पर दया आ गई और मैंने उस पेटी को
वहीं पर छोड़ते हुए कहा: आप सबसे गरीब मालूम
होते है। आपके सैक्रेटरी को तो कोई अक्ल नहीं
है। न आपकी पत्नी का आपसे कोई प्रेम
दिखाई देता है। मैं यह बक्सा नहीं ले जा
सकता,इसे आप अपने पास ही रखिए। परंतु इतना
याद रखिए कि मैं तो आया था एक महात्मा
से मिलने परंतु मुझे मिला एक बनिया।
उनकी जाति भी वही थी। भारत में बनिया
का अर्थ है जो यहूदी या ज्यू का होता है।
भारत में अपने ही यहूदी है, वह यहूदी तो नहीं
पर बनिया है। उस छोटी सी उम्र में भी
महात्मा गांधी मुझे व्यवसायी ही लगे।
( ओशो के अंग्रेजी प्रवचन का हिन्दी अनुवाद)

क्या आप जानते हैं भारत में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति राज्यपाल से भी ज्यादा प्रोटोकॉल जजों को हासिल है केंद्र सरकार या र...
24/03/2025

क्या आप जानते हैं भारत में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति राज्यपाल से भी ज्यादा प्रोटोकॉल जजों को हासिल है

केंद्र सरकार या राज्य सरकार इन्हें सस्पेंड या बर्खास्त नहीं कर सकती

उनके घर पुलिस सीबीआई ईडी बगैर चीफ जस्टिस के इजाजत के नहीं जा सकती

यह कितने भी भ्रष्ट हो इनकी निगरानी नहीं की जा सकती उनके फोन या तमाम गजट को सर्वेलेंस पर नहीं रखा जा सकता

इसीलिए भारत का हर एक जज खुलकर भ्रष्टाचार करता है घर में नोटों की बोरे भर भरकर रखता है

और कभी पकड़ में नहीं आता

जस्टिस वर्मा भी पकड में नहीं आते अगर उनके घर पर आग नहीं लगी होती और एक ईमानदार फायर कर्मचारी ने वीडियो नहीं बनाया होता

सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत क्लीन चिट दे दिया की अफवाह फैलाई जा रही है

दिल्ली हाईकोर्ट ने तुरंत क्लीन चिट दे दिया कि अफवाह फैलाई जा रही है

टीवी चैनलों पर वी के मनन अभिषेक मनु सिंघवी जैसे बड़े-बड़े वकील कह रहे थे आग तो जनरेटर में लगी थी अंदर कोई गया ही नहीं था तो नोट मिलने का सवाल कैसे उठाता

तरह-तरह की थ्योरी दी जा रही थी

मगर यह लोग भूल गए की आग बुझाने वाले ने यह सोचकर वीडियो बना लिया यह एक जज का घर है जो भारत में राष्ट्रपति से भी ऊंचा है बगैर सुबुत के इसके ऊपर कोई कार्रवाई नहीं होगी इसीलिए उसने वीडियो बना लिया

लेकिन जस्टिस वर्मा इतना घाघ है अब नई थ्योरी देकर कह रहा है कि स्टोर रूम तो मेरे कब्जे में था ही नहीं

यह वही जज है जिसने हेमंत सोरेन के खिलाफ सीबीआई जांच रोकने के आदेश दिए थे

यह वही जज है जिसने दिल्ली दंगों के 11 दंगाइयों को पर्याप्त सबूत होने के बावजूद रिहा करने का आदेश दिया था जबकि निचली अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा दिया था

आप लोग क्या समझते हैं यह सारे फैसले जस्टिस वर्मा ने यूं ही दिए होंगे ?? 22 मार्च 2025

23/03/2025

BP Public News 23 मार्च 1931 के अमर शहीद राजगुरु , सुखदेव - भगत सिंह की शहादत को नमन करता है , प्रार्थना शहीदों की प्रतिमा पर करें माल्यार्पण

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Police stafiction level

20/03/2025

When history is used as a weapon, the present suffers the most.

* जन चेतना मंच जाखल मंडी जिला फतेहाबाद हरियाणा ,  जनवरी 23 सन 2025*💐 नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की 128 वीं जयंती पर सभी को ...
14/03/2025

* जन चेतना मंच जाखल मंडी जिला फतेहाबाद हरियाणा , जनवरी 23 सन 2025
*💐 नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की 128 वीं जयंती पर सभी को मुबारकबाद 🌷*
🍇23 जनवरी 1897- 18 अगस्त 1945🌹
4 कैप्टन:- कामरेड लक्ष्मी सहगल,शाह नवाज खान, गुरबख्श सिंह ढिल्लों, प्रेम कुमार।
4 ब्रिगेड:- महात्मा गांधी, नेताजी,रानी झांसी व आजाद।
उनके सांझी विरासत, साम्प्रदायिकता के विरोध व गांधी जी के जन जागरण के रास्ते के सम्मान पर मनन अमल करने के दृढ़ संकल्प को दोहराते हुए।
*भारतीयता की पहचान सभी धर्मों, क्षेत्रों, जातियों से बड़ी पहचान बनाएं। संकीर्ण भेदभाव मिटाएं*
*

* जन चेतना मंच जाखल मंडी जिला फतेहाबाद हरियाणा ,  जनवरी 23 सन 2025*💐 नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की 128 वीं जयंती पर सभी को ...
24/01/2025

* जन चेतना मंच जाखल मंडी जिला फतेहाबाद हरियाणा , जनवरी 23 सन 2025
*💐 नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की 128 वीं जयंती पर सभी को मुबारकबाद 🌷*
🍇23 जनवरी 1897- 18 अगस्त 1945🌹
4 कैप्टन:- कामरेड लक्ष्मी सहगल,शाह नवाज खान, गुरबख्श सिंह ढिल्लों, प्रेम कुमार।
4 ब्रिगेड:- महात्मा गांधी, नेताजी,रानी झांसी व आजाद।
उनके सांझी विरासत, साम्प्रदायिकता के विरोध व गांधी जी के जन जागरण के रास्ते के सम्मान पर मनन अमल करने के दृढ़ संकल्प को दोहराते हुए।
*भारतीयता की पहचान सभी धर्मों, क्षेत्रों, जातियों से बड़ी पहचान बनाएं। संकीर्ण भेदभाव मिटाएं*
*

*ਕੇਂਦਰ ਸਰਕਾਰ ਨਵੀਂ ਕਿਸਾਨ ਅਤੇ ਮਜ਼ਦੂਰ ਮਾਰੂ ਖੇਤੀ ਨੀਤੀ ਦੇ ਖਰੜੇ ਦੀਆਂ ਸਾੜੀਆਂ ਗਈਆਂ ਕਾਪੀਆਂ*जनवरी 14 ਕੇਂਦਰ ਦੀ ਕਾਰਪੋਰੇਟ ਪੱਖੀ ਮੋਦੀ ਸ...
14/01/2025

*ਕੇਂਦਰ ਸਰਕਾਰ ਨਵੀਂ ਕਿਸਾਨ ਅਤੇ ਮਜ਼ਦੂਰ ਮਾਰੂ ਖੇਤੀ ਨੀਤੀ ਦੇ ਖਰੜੇ ਦੀਆਂ ਸਾੜੀਆਂ ਗਈਆਂ ਕਾਪੀਆਂ*
जनवरी 14
ਕੇਂਦਰ ਦੀ ਕਾਰਪੋਰੇਟ ਪੱਖੀ ਮੋਦੀ ਸਰਕਾਰ ਵੱਲੋਂ ਹਰ ਰੋਜ ਕਿਸਾਨਾਂ ਤੇ ਮਜ਼ਦੂਰਾਂ ਨੂੰ ਮਾਰਨ ਲਈ ਸਾਜਿਸ਼ਾਂ ਘੜੀਆਂ ਜਾ ਰਹੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਜਿਸ ਦੀ ਕੜੀ ਤਹਿਤ ਹੀ ਸਾਰੇ ਦੇਸ਼ ਦਾ ਸਰਮਾਇਆ ਚੰਦ ਕਾਰਪੋਰੇਟ ਘਰਾਣਿਆਂ ਦੇ ਹਵਾਲੇ ਕਰਨ ਲਈ ਨਵੀਂ ਖੇਤੀ ਨੀਤੀ ਦੇ ਖਰੜੇ ਰਾਜ ਸਰਕਾਰਾਂ ਨੂੰ ਭੇਜੇ ਗਏ ਹਨ। .. ਜ਼ਿਲ੍ਹਾ ਫ਼ਰੀਦਕੋਟ ਦੇ ਬਲਾਕ ਜੈਤੋ ਪਿੰਡ ਇਕਾਈ 1ਵਿਖੇ ਕੇਂਦਰ ਸਰਕਾਰ ਵੱਲੋਂ ਲਿਆਂਦੀ ਗਈ ਨਵੀਂ ਖੇਤੀ ਨੀਤੀ ਦੇ ਖੜੇ ਦੀਆਂ ਕਾਪੀਆਂ ਸਾੜਨ ਉਪਰੰਤ ਪੱਤਰਕਾਰਾਂ ਨਾਲ ਗੱਲਬਾਤ ਕਰਦੇ ਹੋਏ ਜਤਿੰਦਰਜੀਤ ਸਿੰਘ ਭਿੰਡਰ ਜੈਤੋ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ 2020/21 ਦੇ ਇਤਿਹਾਸਕ ਕਿਸਾਨ ਅੰਦੋਲਨ ਦੌਰਾਨ ਜਿਹੜੇ 3 ਕਾਲੇ ਖੇਤੀ ਕਾਨੂੰਨ ਦਿੱਲੀ ਦੇ ਬਾਰਡਰਾਂ ਉੱਪਰ 13 ਮਹੀਨੇ 13 ਦਿਨ ਚੱਲੇ ਅੰਦੋਲਨ ਸਮੇਂ 750 ਤੋਂ ਉੱਪਰ ਕਿਸਾਨਾਂ ਵੱਲੋਂ ਆਪਣੀਆਂ ਸ਼ਹੀਦੀਆਂ ਦੇ ਕੇ ਰੱਦ ਕਰਵਾਏ ਗਏ ਸਨ ਉਹਨਾਂ ਨੂੰ ਕੇਂਦਰ ਸਰਕਾਰ ਵੱਲੋ ਹੁਣ ਚੋਰ ਮੋਰੀ ਰਾਹੀਂ ਰਾਜ ਸਰਕਾਰਾਂ ਦੁਆਰਾ ਲਾਗੂ ਕਰਵਾਉਣ ਲਈ ਸਾਜਿਸ਼ਾਂ ਘੜੀਆਂ ਜਾ ਰਹੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਉਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਹੀ ਇਹ ਨਵੀਂ ਖੇਤੀ ਨੀਤੀ ਦੇ ਖਰੜੇ ਰਾਜ ਸਰਕਾਰਾਂ ਨੂੰ ਲਾਗੂ ਕਰਨ ਲਈ ਭੇਜੇ ਗਏ ਹਨ ਬਲਾਕ ਪ੍ਰਧਾਨ ਛਿੰਦਰਪਾਲ ਸਿੰਘ ਭਾਰਤੀ ਕਿਸਾਨ ਯੂਨੀਅਨ ਸਿੱਧੂਪੁਰ ਨੇ ਅੱਗੇ ਗੱਲਬਾਤ ਕਰਦੇ ਹੋਏ ਕਿਹਾ ਕਿ ਭਾਰਤ ਨੂੰ ਦੁਨੀਆਂ ਦਾ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਡਾ ਲੋਕ ਤੰਤਰ ਦੇਸ਼ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਪਰ ਇਸ ਤੋਂ ਵੱਡੀ ਤਰਾਸ ਦੀ ਹੋਰ ਕੀ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ ਕਿ ਸਰਦਾਰ ਜਗਜੀਤ ਸਿੰਘ ਡੱਲੇਵਾਲ ਸਰਕਾਰ ਵੱਲੋਂ ਮੰਨੀਆਂ ਗਿਆ ਮੰਗਾਂ ਤੇ ਕੀਤੇ ਗਏ ਵਾਅਦਿਆਂ ਨੂੰ ਲਾਗੂ ਕਰਵਾਉਣ ਲਈ 49 ਦਿਨ ਤੋਂ ਮਰਨ ਵਰਤ ਉਪਰ ਬੈਠੇ ਹਨ ਪਰ ਕੇਂਦਰ ਸਰਕਾਰ ਵੱਲੋਂ ਮੰਨੀਆਂ ਹੋਈਆਂ ਮੰਗਾਂ ਅਤੇ ਕੀਤੇ ਗਏ ਵਾਅਦਿਆ ਨੂੰ ਲਾਗੂ ਕਰਨ ਦੀ ਬਜਾਏ ਕਿਸਾਨ ਆਗੂ ਦੀ ਮੌਤ ਨੂੰ ਹੀ ਉਡੀਕਿਆ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ ਜਦੋਂ ਕਿ ਅੰਗਰੇਜੀ ਸਾਮਰਾਜ ਸਮੇਂ ਜਦੋਂ ਆਪਣੇ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਹੱਕਾਂ ਲਈ ਮਹਾਤਮਾ ਗਾਂਧੀ ਜੀ ਵੱਲੋਂ ਅੰਸ਼ਨ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਸੀ ਤਾਂ ਉਸ ਸਮੇਂ ਦੀ ਅੰਗਰੇਜ ਸਰਕਾਰ ਵੱਲੋਂ ਵੀ ਉਹਨਾਂ ਨਾਲ ਗੱਲਬਾਤ ਕਰਕੇ ਮਸਲਿਆਂ ਦਾ ਹੱਲ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਸੀ। ਛਿੰਦਰਪਾਲ.ਸਿੰਘ ਨੇ ਅੱਗੇ ਗੱਲਬਾਤ ਕਰਦੇ ਹੋਏ ਕਿਹਾ ਕਿ 2011 ਵਿੱਚ ਮਾਣਯੋਗ ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਨਰਿੰਦਰ ਮੋਦੀ ਜਦੋਂ ਗੁਜਰਾਤ ਦੇ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਦੇ ਅਹੁਦੇ ਉੱਪਰ ਹੁੰਦੇ ਹੋਏ ਖਪਤਕਾਰ ਮਾਮਲਿਆਂ ਦੀ ਕਮੇਟੀ ਦੇ ਚੇਅਰਮੈਨ ਸਨ ਤਾਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਉਸ ਸਮੇਂ ਦੇ ਤਤਕਾਲੀ ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਮਾਣਯੋਗ ਡਾ: ਮਨਮੋਹਨ ਸਿੰਘ ਨੂੰ ਇੱਕ ਰਿਪੋਰਟ ਭੇਜ ਕੇ ਕਿਹਾ ਸੀ ਕਿ ਕਿਸੇ ਵੀ ਕਿਸਾਨ ਦੀ ਫਸਲ ਸਰਕਾਰ ਵੱਲੋ ਨਿਰਧਾਰਿਤ ਕੀਤੀ MSP ਤੋਂ ਘੱਟ ਕਿਸੇ ਵੀ ਵਪਾਰੀ ਦੁਆਰਾ ਨਹੀਂ ਖਰੀਦੀ ਜਾਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸਦੇ ਲਈ ਇੱਕ ਕਾਨੂੰਨ ਬਣਾਇਆ ਜਾਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਪਰ 2014 ਵਿੱਚ ਸੱਤਾ ਵਿੱਚ ਆਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪੀਐਮ ਮੋਦੀ ਨੇ ਅਜੇ ਤੱਕ ਆਪਣੀਆਂ ਸਿਫਾਰਸ਼ਾਂ ਨੂੰ ਲਾਗੂ ਨਹੀਂ ਕੀਤਾ ਹੈ ਅਤੇ ਕਿਸਾਨਾ ਦੀਆ ਖੁਦਕੁਸ਼ੀਆਂ ਰੋਕਣ ਲਈ ਬਣੇ ਡਾ. ਸਵਾਮੀਨਾਥਨ ਕਮਿਸ਼ਨ ਨੇ 2006 ਵਿੱਚ ਆਪਣੀ ਰਿਪੋਰਟ ਦਿੱਤੀ ਸੀ ਅਤੇ ਉਸ ਸਮੇਂ ਦੀ ਯੂਪੀਏ ਸਰਕਾਰ 2014 ਤੱਕ ਸੱਤਾ ਵਿੱਚ ਰਹੀ ਪਰ ਉਨ੍ਹਾਂ ਵੱਲੋ ਵੀ ਰਿਪੋਰਟ ਲਾਗੂ ਨਹੀਂ ਕੀਤੀ ਗਈ। ਅਤੇ ਮਾਣਯੋਗ ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਨਰਿੰਦਰ ਮੋਦੀ ਵੱਲੋ 2014 ਦੀ ਲੋਕ ਸਭਾ ਚੋਣ ਮੁਹਿੰਮ ਦੌਰਾਨ ਵਾਅਦਾ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਸੀ ਕਿ ਜੇਕਰ ਉਹ ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਬਣਦੇ ਹਨ ਤਾਂ ਉਹ ਸਵਾਮੀਨਾਥਨ ਕਮਿਸ਼ਨ ਦੇ C2+50% ਫਾਰਮੂਲੇ ਅਨੁਸਾਰ ਫਸਲਾਂ ਦੀ MSP ਨੂੰ ਤੈਅ ਕਰਨਗੇ ਅਤੇ 2018 ਵਿੱਚ ਪੰਜਾਬ ਦੀ ਚੀਮਾ ਮੰਡੀ ਵਿੱਚ 35 ਦਿਨਾਂ ਤੱਕ ਚੱਲੇ ਧਰਨੇ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਮਾਣਯੋਗ ਅੰਨਾ ਹਜ਼ਾਰੇ ਜੀ ਅਤੇ ਮਾਣਯੋਗ ਜਗਜੀਤ ਸਿੰਘ ਡੱਲੇਵਾਲ ਜੀ ਵੱਲੋ ਦਿੱਲੀ ਦੇ ਰਾਮਲੀਲਾ ਮੈਦਾਨ ਵਿੱਚ ਮਰਨ ਵਰਤ ਰੱਖਿਆ ਗਿਆ ਅਤੇ ਉਸ ਸਮੇਂ ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਦਫਤਰ ਦੀ ਤਰਫੋਂ ਤਤਕਾਲੀ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਮੰਤਰੀ, ਮਾਣਯੋਗ ਰਾਧਾ ਮੋਹਨ ਸਿੰਘ ਅਤੇ ਮਹਾਰਾਸ਼ਟਰ ਦੇ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ, ਮਾਣਯੋਗ ਦੇਵੇਂਦਰ ਫੜਨਵੀਸ ਨੇ ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਦਫਤਰ ਦੀ ਤਰਫੋਂ ਮਾਣਯੋਗ ਡਾ: ਜਤਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਦੇ ਦਸਤਖਤ ਵਾਲੀ ਚਿੱਠੀ ਅੰਦੋਲਨਕਾਰੀ ਆਗੂਆਂ ਨੂੰ ਸੌਂਪਿਆ ਸੀ, ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਸਪਸ਼ਟ ਲਿਖਿਆ ਗਿਆ ਸੀ ਕਿ ਕੇਂਦਰ ਸਰਕਾਰ ਸਵਾਮੀਨਾਥਨ ਕਮਿਸ਼ਨ ਦੇ C2+50% ਫਾਰਮੂਲੇ ਨੂੰ 3 ਮਹੀਨਿਆਂ ਵਿੱਚ ਲਾਗੂ ਕਰੇਗੀ ਪਰ 6 ਸਾਲ ਬੀਤ ਜਾਣ ਦੇ ਬਾਵਜੂਦ ਵੀ ਅੱਜ ਤੱਕ ਉਸ ਨੂੰ ਲਾਗੂ ਨਹੀਂ ਕੀਤਾ ਗਿਆ। 2020-2021 ਵਿੱਚ 378 ਦਿਨਾਂ ਤੱਕ ਚੱਲੇ ਅੰਦੋਲਨ ਨੂੰ ਮੁਅੱਤਲ ਕਰਦੇ ਹੋਏ, ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਮੰਤਰਾਲੇ ਵੱਲੋਂ 9 ਦਸੰਬਰ 2021 ਨੂੰ ਇੱਕ ਚਿੱਠੀ ਮੋਰਚੇ ਨੂੰ ਸੌਂਪੀ ਗਈ ਸੀ ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਹਰ ਕਿਸਾਨ ਲਈ MSP ਨੂੰ ਯਕੀਨੀ ਬਣਾਉਣ, ਖੇਤੀ ਦੇ ਕੰਮਾਂ ਨੂੰ ਪ੍ਰਦੂਸ਼ਣ ਕਾਨੂੰਨ ਤੋਂ ਬਾਹਰ ਕੱਢਣ, ਲਖੀਮਪੁਰ ਖੀਰੀ ਦੇ ਜ਼ਖਮੀਆਂ ਨੂੰ ਢੁੱਕਵਾਂ ਮੁਆਵਜ਼ਾ ਦੇਣ, ਬਿਜਲੀ ਬਿੱਲ ਨੂੰ ਸੰਸਦ ਵਿੱਚ ਪੇਸ਼ ਕਰਨ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨਾਲ ਵਿਚਾਰ-ਵਟਾਂਦਰਾ ਕਰਨ ਅਤੇ ਅੰਦੋਲਨਕਾਰੀ ਕਿਸਾਨਾਂ ਵਿਰੁੱਧ ਸਾਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਿੱਚ ਦਰਜ ਕੇਸ ਵਾਪਸ ਲੈਣ ਸਮੇਤ ਕਈ ਲਿਖਤੀ ਵਾਅਦੇ ਕੀਤੇ ਗਏ ਸਨ, ਜੋ ਕਿ ਅੱਜ ਤੱਕ ਪੂਰੇ ਨਹੀਂ ਹੋਏ। ਜਤਿੰਦਰਜੀਤ ਸਿੰਘ ਸਿੰਘ ਨੇ ਅੱਗੇ ਗੱਲਬਾਤ ਕਰਦੇ ਹੋਏ ਕਿਹਾ ਕਿ ਉਹਨਾਂ ਹੀ ਮੰਨੀਆਂ ਹੋਈਆਂ ਮੰਗਾਂ ਨੂੰ ਲਾਗੂ ਕਰਵਾਉਣ ਲਈ ਸ. ਜਗਜੀਤ ਸਿੰਘ ਡੱਲੇਵਾਲ ਆਪਣੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਦਾਅ ਉੱਪਰ ਲਗਾ ਕੇ 26 ਨਵੰਬਰ 2024 ਤੋਂ ਮਰਨ ਵਰਤ ਉੱਪਰ ਬੈਠੇ ਹਨ ਜਿਸ ਨੂੰ ਕਿ ਅੱਜ 49 ਦਿਨ ਹੋ ਚੁੱਕੇ ਨੇ ਪਰ ਕੇਂਦਰ ਸਰਕਾਰ ਆਪਣੇ ਹੀ ਕੀਤੇ ਹੋਏ ਵਾਅਦਿਆਂ ਨੂੰ ਲਾਗੂ ਕਰਨ ਦੀ ਬਜਾਏ ਕਿਸਾਨਾਂ ਤੇ ਮਜ਼ਦੂਰਾਂ ਨੂੰ ਮਾਰਨ ਲਈ ਹਰ ਰੋਜ਼ ਨਿੱਤ ਨਵੀਆਂ ਸਾਜਿਸ਼ਾਂ ਘੜ ਰਹੀ ਹੈ ਅਤੇ ਉਹਨਾਂ ਹੀ ਸਾਜਿਸ਼ਾ ਤਹਿਤ ਲਿਆਂਦੀ ਗਈ ਨਵੀਂ ਖੇਤੀ ਨੀਤੀ ਦੇ ਖਰੜੇ ਦੀਆਂ ਅੱਜ ਦੇਸ਼ ਭਰ ਵਿੱਚ ਕਾਪੀਆਂ ਸਾੜੀਆਂ ਗਈਆਂ ਹਨ। ਇਸ ਮੌਕੇ ਉਹਨਾਂ ਨਾਲ਼ ਬਲਾਕ ਖਜਾਨਚੀ ਜਗਦੇਵ ਸਿੰਘ ਇਕਾਈ ਜੈਤੋ 1 ਪ੍ਰਧਾਨ ਸੁਰਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਸੋਢੀ ਖਜਾਨਚੀ ਗੁਰਤੇਜ ਸਿੰਘ ਪੰਮਾ ਸਿੰਘ ਜੱਗਾ ਸਿੰਘ ਸੰਦੀਪ ਸਿੰਘ ਆਦਿ ਕਿਸਾਨ ਹਾਜ਼ਰ ਸਨ

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