14/08/2025
जैसलमेर का परंपरागत ज्ञान और परंपराएं लोगों के आचरण, व्यवहार और सदाचार में दिखाई देती है
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स्थान- जैसलमेर, राजस्थान
13 अगस्त 2025 को यात्रा तरुण आश्रम, भीकमपुरा से जैसलमेर पहुंची। इस यात्रा में जलपुरुष श्री राजेंद्र सिंह जी के साथ श्री रमेश शर्मा जी, चमन सिंह जी और चतर सिंह जी मौजूद रहे। सुबह 6 बजे यात्रा ने मोकला गांव के चाहड़ सर तालाब का निरीक्षण किया। यहां जलपुरुष जी ने पूछा कि, तालाब की जगह का चुनाव कैसे किया जाता है। इस पर उपस्थित जितेंद्र ने बताया कि जहां स्तंभ होते हैं, वहीं हमारे पानी के चिन्ह होते हैं। चाहड़ सर तालाब में भी मौजूद स्तंभ पर जीव-जंतु, पशु-पक्षियों के चिन्ह बने हुए हैं। यह लगभग 40 हजार बीघा ओरण भूमि है, जिसका सारा पानी इस तालाब में इकट्ठा होता है। इस तालाब से आसपास के गांवों की गाय, बकरी, भेड़ आदि पानी पीती हैं। यहां की गायों की एक विशेषता है कि ये एक-दो दिन बिना पानी के भी स्वस्थ रह सकती हैं और फिर समाज का पोषण करती हैं। यहां का परंपरागत ज्ञान और परंपराएं लोगों के आचरण, व्यवहार और सदाचार में दिखाई देती हैं। इसलिए गांव के लोग तालाब के लिए जुझारूपन दिखाते हैं और अपने उद्देश्य के लिए प्राण तक न्यौछावर करने को तैयार रहते हैं। यहां की चाहड़ जुझारू जूंजा व्यक्ति की कहानी भी ऐसी ही है, जब विरोधियों ने उनकी गर्दन काट दी, तब भी वे अपने प्रभाव क्षेत्र तक पहुंचे। समाज ने उनकी आत्मा की शांति के लिए तालाब और मंदिर बनाए।
इसके बाद जलपुरुष जी ने रामगढ़ के सावरा सर तालाब का भ्रमण किया। उन्होंने कहा कि यह तालाब बहुत सुंदर है। इसके निर्माण में चौथाई श्रमदान गांव के लोगों का और तीन चौथाई योगदान तरुण भारत संघ का है। इस तालाब की खासियत यह है कि इसमें एकत्रित पानी में बहुत सारी शैवाल हैं, जो पानी की शुद्धि का काम करती हैं। तालाब में थोड़ी चिकनी मिट्टी भी मौजूद है। यह तालाब आसपास के लोगों को पीने का पानी देता है और यहां का प्रमुख तीर्थ स्थल भी है, जहां मंदिर और मेला आयोजित होता है।
Tarun Bharat Sangh