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एक सवाल तो बनता है !
09/08/2026

एक सवाल तो बनता है !

बिन फेरे कानून!  बहुत ही हास्यास्पद और बेहूदे फैसले आये दिन देखने को मिल रहे हैं, बिना शादी किए लिव -इन में रहने वालों प...
06/08/2026

बिन फेरे कानून!
बहुत ही हास्यास्पद और बेहूदे फैसले आये दिन देखने को मिल रहे हैं, बिना शादी किए लिव -इन में रहने वालों पर भरण-पोषण कानून तो पहले ही थोप दिया गया है, जिसमें महिला पार्टनर और बच्चा (यदि हो तो) के लिए।
अब 498a दहेज कानून भी थोप दिया गया है जबकि "शादी जैसे रहने" का क्या मतलब निकालना चाहती है न्यायपालिका?
498a कानून केवल शादी पर लागू होता है,
ऐसे में " शादी जैसे रहने" को कैसे साबित किया जाएगा ?
हो सकता है आने वाले समय में लिव - इन में अलग होने के लिए तलाक का कानून भी थोप दिया जाए, क्या पता!
लिव -इन का कल्चर आय ही इसलिए था जो युवा पीढ़ी कानूनी समस्याओं के कारण शादी में बंधना नहीं चाहती थी ,
लेकिन शादी वाले कानून थोपा जाना गैर कानूनी है,
हालाँकि लिव -इन जैसी चीज भारत जैसे धार्मिक और सामाजिक देश में उचित नहीं है, लेकिन जो भी है न्यायपालिका का दायित्व तो निष्पक्ष ही बनता है,
घूम फिरकर न्यायपालिका में बैठे जजों के निशाने पर देश का पुरुष समाज ही रहता है, पुरुष समाज के प्रति घृणा और अदृश्य दुश्मनी हमेशा ताजा बनी रहती है,
लेकिन #पुरुष समाज कभी भी अपने हक और न्याय के लिए लडने की हिम्मत नहीं दिखाता, सिर्फ मरना और घुट घुट कर जीना पसंद करता है।

लडेंगे नहीं तो गिनती जारी रहेगी, अब तो शायद नाम भी याद नहीं रहेंगे, कितने निकल गये औसतन एक दिन में 3 -4 पतियों का निपटार...
02/08/2026

लडेंगे नहीं तो गिनती जारी रहेगी,
अब तो शायद नाम भी याद नहीं रहेंगे, कितने निकल गये
औसतन एक दिन में 3 -4 पतियों का निपटारा हो रहा है,
महिलावादी खुश हैं, जज लोग खुश हैं
और पुरुष कार्यकर्ता बेबस,,

एक पति की जान की कीमत क्या है?    शायद कोई नहीं बता पाए, शायद इसीलिए धडाधड निपटाए जा रहे हैं ,   चलिए, सभी अपनी अपनी बार...
30/07/2026

एक पति की जान की कीमत क्या है?
शायद कोई नहीं बता पाए,
शायद इसीलिए धडाधड निपटाए जा रहे हैं ,
चलिए, सभी अपनी अपनी बारी का इंतजार करिये ,,

फिर निर्दोष मारा गया।  राजस्थान के अजमेर जिले में फिर वही खेल सामने आया जिसको साकार करने के लिए न्यायपालिका के जज और सरक...
25/07/2026

फिर निर्दोष मारा गया।
राजस्थान के अजमेर जिले में फिर वही खेल सामने आया जिसको साकार करने के लिए न्यायपालिका के जज और सरकार रात दिन षड्यंत्र में लगी है,
अफसोस सरकारों व जनता को हर बात में, हर आंदोलन में, हर आवाज में जहाँ विदेशी षड्यंत्र नजर आता है वहीं देश के अंदर चल रहा विदेशी फंडिंग षड्यंत्र नजर नहीं आ रहा, कारण भी है जिस षड्यंत्र में न्यायपालिका के जज व सरकार और मीडिया शामिल हो जाती है फिर वह षड्यंत्र नहीं रहता बल्कि विकास व देश की तरक्की बन जाती है, चाहे वह देश के अस्तित्व को ही क्यों ना मिटा दे,
सबसे बडा अफसोस कि देश की जनता भी इसे समझना नही चाहती,
शायद देश भगवान भरोसे ही चल रहा है,

यह  #महिला कोई हस्ती नहीं है, फिर इतनी गंभीरता से लेने की जरूरत ही क्या है,   यह  #मोहतरमा अपने  #पति को दारू पीकर बेल्ट...
19/07/2026

यह #महिला कोई हस्ती नहीं है, फिर इतनी गंभीरता से लेने की जरूरत ही क्या है,
यह #मोहतरमा अपने #पति को दारू पीकर बेल्ट से पीटना चाहती है,
जब तुमको #मर्द जात से नफरत है तो तुमको #पति चाहिए ही क्यों ?
मोहतरमा, अगर इतनी ही ख्वाहिश है तो #पुलिस और #न्यायपालिका को बीच में से हटा दो, फिर देख लेना , बेल्ट का #असली_उपयोग कौन करता है,
फिर #मोमबत्ती गैंग नाच नाच कर तमाशा करना शुरू कर देगा।।

05/07/2026

*अगर हमारा भविष्य यही कुंवारापन,अकेला और भावहीन होने वाला है,तो समाज के लिए यह गर्व की नहीं,खतरे की घंटी है, इसे समझिए और सोचिए*

खतरनाक सर्वे रिपोर्ट..???
*कुंवारेपन का विस्फोट,इस अंधी दौड़ में समाज कहाँ पहुँच रहा है...???*

अब वक्त आ गया है कि चीज़ों को मीठे शब्‍दों में कहना बंद किया जाए!
दुनियां जिस महिला आज़ादी की जय-जयकार कर रही है, वही आज़ादी धीरे-धीरे परिवार, रिश्तों,और सामाजिक संतुलन आदि,सब कुछ निगलने लगी है..???
अंतरराष्ट्रीय सर्वे कहता है कि आने वाले कुछ वर्षों में युवतियों में 45% तक विवाह से दूरी बना सकती हैं। पहली नज़र में यह प्रगति लगती है, पर असल में यह भविष्य के लिए एक टाइम-बम है,
*कैसे समझिए*
1.कैरियर, पैसे और अकेलापन….यह कैसी प्रगति...??
आज की बेटी कलेक्टर डॉक्टर, इंजीनियर, सीए, टीचर उद्यमी, सब बन रही है,बहुत अच्छा है शानदार है, पर क्या कैरियर ही पूरा जीवन है...????
जरा सोचिए. पैसा साथी नहीं बनता,पद वृद्धावस्था में हाथ नहीं पकड़ता,मोबाइल और लैपटॉप बुढ़ापे में बातें नहीं करते,लेकिन वर्तमान में समाज को इस सच्चाई से फर्क नहीं पड़ता,सबको दौड़ लगानी है।
2.*परिवार ढह रहे हैं….*
कोई देख भी रहा है..???
*कुँवारे लड़के बढ़ रहे हैं,* अविवाहित युवतियाँ बढ़ रही हैं, जनसंख्या गिर रही है,
और अकेलेपन का उद्योग (counsellor, therapy, depression pills) फल-फूल रहा है,पर हम फिर भी कहते हैं, सब ठीक है,यह आधुनिकता है,पर यह आधुनिकता नहीं, धीमी मौत है,
*परिवार,समाज और मानवीय संबंधों की*
3.सर्वाधिक खतरनाक स्थिति..
आज माता-पिता रिश्ता ढूंढते हैं, पर लड़की कहती है,अभी नहीं,
फिर कहती है,अभी नहीं और फिर......
*धीरे-धीरे कभी नहीं में बदल जाता है* और जब एहसास होता है तो मेडिकल रिपोर्ट सामने होती है, हार्मोनल इश्यू, कंसिव न होना,मानसिक तनाव, अकेलापन,
*पर तब कौन जिम्मेदार...??*
कोई नहीं,क्योंकि फैसला स्वतंत्रता का था,
4.यह एक समाजिक समस्या है,*और समाज के सफेदपोश लोग चुप क्यों हैं..???*
क्योंकि सच्चाई बोलने से उन्हें आधुनिकता-विरोधी कहलाने का डर है,पर सच्चाई यह है कि अगर 21–25 की उपयुक्त उम्र में विवाह नहीं हुए तो समाज जल्द ही दिसंबर की ठंडी रात जैसा सूना हो जाएगा,
5.*अंतिम बात जो सच्चाई है.*
प्रगति वो नहीं जो हमें अकेला कर दे,अगर हमारा भविष्य कुंवारा,अकेला और भावहीन होने वाला है, *तो समाज के लिए यह गर्व की नहीं,खतरे की घंटी है*
इतनी सच्चाई लिखने पर इस सम्बन्ध में आपकी सोच क्या है.. .....???
🌹🌹🌹जय🙏श्रीराम🌹🌹🌹
kumar varshney ji की कलम से,

राजस्थान, दो दिनों में दो पतियों की हत्या, एक दौसा में पति की हत्या वहीं जालोर में प्रेमी के साथ मिलकर कई पति की हत्या। ...
30/06/2026

राजस्थान, दो दिनों में दो पतियों की हत्या,
एक दौसा में पति की हत्या वहीं जालोर में प्रेमी के साथ मिलकर कई पति की हत्या।
आखिर चल क्या रही है,
पति ना हुआ गरीब भेड हो गया, चाहे तब हलाल कर दो,

आये दिन सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के निर्णयों में गैर कानूनी व बेतुके बयानों के साथ गलत व एकतरफा फैसले आते रहे हैं,ऐसी मा...
23/06/2026

आये दिन सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के निर्णयों में गैर कानूनी व बेतुके बयानों के साथ गलत व एकतरफा फैसले आते रहे हैं,
ऐसी मानसिकता व फैसलों को जनता को बीच लाने के लिए जन आंदोलन की शुरूआत-:
अभी 29 जून 2026 से Beging अर्थात "भिक्षा याचना" कार्य किया जायेगा। पर्याप्त राशि जमा न हो पाने पर Borrow व Steal कार्य पर भी विचार करके, आगे कार्य।किया जायेगा।
मा0 कोर्टों का ऐतिहासिक संदेश आम जनता के बीच अवश्य जायेगा।
एक जन प्रतिनिधि होने के नाते, आम जनता को कोर्ट के अंदर के फैसले बताना व उसपर जनता का विचार लेना ही हमारा काम है।

कपिल मोहन चौधरी
रा0 अध्यक्ष एवं
पूर्व सांसद प्रत्यशी लखनऊ 2019 व 2024
MARD पार्टी, लखनऊ।

क्या ऐसे फैसले स्वीकार्य हैं ?
23/06/2026

क्या ऐसे फैसले स्वीकार्य हैं ?

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