मजदूर और किसान - देश में राजनीति का नया पहलु

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मजदूर और किसान - देश में राजनीति का नया पहलु My own sunshine ☀️ मत मारो गोलियों से मुझे मैं पहले से एक दुखी इंसान हूँ,"

मेरी मौत कि वजह यही हैं , कि मैं पेशे से एक किसान हूँ," �

हमारा राष्ट्रीय पक्षी मोर चिल्ला रहा है क्योंकि उसका घर HCU में नष्ट किया जा रहा है।  तेलंगाना में रेवंथ रेड्डी के बुलडो...
05/04/2025

हमारा राष्ट्रीय पक्षी मोर चिल्ला रहा है क्योंकि उसका घर HCU में नष्ट किया जा रहा है।
तेलंगाना में रेवंथ रेड्डी के बुलडोज़र सिर्फ़ पेड़ नहीं उखाड़ रहे हैं, वे जीवन, प्रकृति और मानवता को कुचल रहे हैं।

Highlights Ravish Kumar पेड़ लगाओ जीवन बचाओ

भारत के दिग्गज बिजनेसमैन रतन टाटा ने ली अन्तिम सांस मुम्बई कैंडी अस्पताल में 86 वर्ष की उम्र में एक युग का अंत देश में ब...
10/10/2024

भारत के दिग्गज बिजनेसमैन रतन टाटा ने ली अन्तिम सांस मुम्बई कैंडी अस्पताल में 86 वर्ष की उम्र में एक युग का अंत देश में बिजनेसमैन तो बहुत थे पर अपनी अलग पहचान के लिए जाने जाते थे
सत सत नमन🙏🙏

जितनी खुशी तत्कालीन कर्मचारियों को OPS के जगह पर NPS को चुनकर हुई थी,उतनी खुशी आज भी हमारे साथियों को NPS के जगह पर UPS ...
25/08/2024

जितनी खुशी तत्कालीन कर्मचारियों को OPS के जगह पर NPS को चुनकर हुई थी,उतनी खुशी आज भी हमारे साथियों को NPS के जगह पर UPS को चुनकर होगी। लेकिन लगभग 10 वर्षों के बाद NPS की खामियां पता चलने लगी तो लगे सरकारों को कोशने। उसी तरह जब आगामी 10 वर्षों के बाद UPS की भी खामियां बाहर आने लगेगी तब फिर से हमलोग रोने धोने लगेंगे। मैं कहता हूं आप क्यों मोडिफिकेशन कर रहे, क्यों इतना दिमाग लगा रहे हो, सीधा सीधा OPS ही क्यों नहीं बहाल कर देते। मरणोपरांत UPS के अनुसार आप फैमिली पेंशन 60 फीसद देने की फजीहत कर रहे हम तो OPS के साथ 50 फीसद में खुश हैं। परंतु बात है कि हर हाल में OPS नहीं देना है इसलिए प्रपंच रचा जा रहा है। जब तक कर्मचारी को UPS समझ में आने लगेगा तबतक सरकार इसका लाभ लेकर दो टेन्योर पूरी कर चुकी होगी और कर्मचारियों का उत्साह भी ढीला पड़ चुका होगा। 5 साल के लिए ये सफेदपोश चुनकर जाते हैं उसके बाद ताउम्र पेंशन और अन्य भत्ते पाकर सुखमय जीवन का लुत्फ उठाते हैं और आम कर्मचारी जो कि नौकरी लेने के पहले से जो संघर्ष करना शुरू करता है, नौकरी लगने बाद उससे दोगुना संघर्ष करते हुए नौकरी करता है। किशोरावस्था से शुरू करते हुए युवावस्था को समर्पित करते हुए बुढ़ापा तक अपना शरीर जलाकर,घरबार छोड़कर रिटायरमेंट तक अनगिनत बीमारियों को गले लगाकर जब घर वापस आता है तो पेंशन के रूप में झुनझुना थमाया जाता है। 5 वर्षों की सेवा के बाद सफेदपोश पूर्ण पेंशन के हकदार हैं जबकि दिन रात अपना खून जलाने के बाद जब एक कर्मचारी 10 वर्षों की सेवा के बाद जब घर जायेगा तो उसे 10000 की विशाल राशि उसे पेंशन के रूप में दी जाएगी जिससे आने वाले समय में वो अपनी पतलून भी नही सिला पाएगा। आधुनिकता का आलम यह है कि रिटायरमेंट के बाद यदि वृद्धाश्रम में गुजारनी पड़े तो इन 10000 रुपए में वृद्धाश्रम की फी भी नही पूरी होगी। खाने,कपड़े और दवाई की तो बात ही अलग है। इसलिए अभी भी समय है हमसभी को मोह के मायाजाल में नहीं फंसना है और सरकार से गुजारिश करनी है कि प्रभु आप हमारे लिए ज्यादा परेशानी मत उठाएं आप हमलोगों को OPS ही दे दें बड़ी कृपा होगी आपकी।
धन्यवाद 🙏

समस्त कर्मचारी



#पुरानी_पेंशन_हक_है_लेकर_रहेंगे।

बर्तन से पूरी तरह पोंछ कर खाना खाने वाले एक युवक के दोस्त उसका रोज मज़ाक उड़ाते थे।एक ने उस युवक से पूछा - "तुम रोजाना ब...
03/09/2023

बर्तन से पूरी तरह पोंछ कर खाना खाने वाले एक युवक के दोस्त उसका रोज मज़ाक उड़ाते थे।

एक ने उस युवक से पूछा - "तुम रोजाना बर्तन में एक कण भी क्यों नहीं छोड़ते?

बालक बोला इसके 3 कारण है।

1. यह मेरे पिता के प्रति आदर है, जो इस भोजन को मेहनत से कमाए रूपयों से खरीद कर लाते हैं ।

2. ये मेरी माँ के प्रति आदर है जो सुबह जल्दी उठकर बड़े चाव से इसे पकाती हैं।

3. यह आदर मेरे देश के उन किसानो के प्रति है, जो खेतो में भूखे रहकर कड़ी मेहनत से इसे पैदा करते हैं।

इसलिए थाली में झूठा छोड़ना अपनी शान न समझे।

जितना आप अन्न बर्बाद करते हैं कई लोगों का पेट भर सकता है।

उतना ही ले थाली में, जो व्यर्थ न जाए नाली में 🙏

जब टीवी मेरे घर आया, तो मैं किताबें पढ़ना भूल गया था।  जब कार मेरे दरवाजे पर आई, तो मैं चलना भूल गया।  हाथ में मोबाइल आत...
01/09/2023

जब टीवी मेरे घर आया, तो मैं किताबें पढ़ना भूल गया था। जब कार मेरे दरवाजे पर आई, तो मैं चलना भूल गया। हाथ में मोबाइल आते ही मैं चिट्ठी लिखना भूल गया। जब मेरे घर में कंप्यूटर आया, तो मैं स्पेलिंग भूल गया। जब मेरे घर में एसी आया, तो मैंने ठंडी हवा के लिए पेड़ के नीचे जाना बंद कर दिया। जब मैं शहर में रहा, तो मैं मिट्टी की गंध को भूल गया। मैं बैंकों और कार्डों का लेन-देन करके पैसे की कीमत भूल गया। परफ्यूम की महक से मैं ताजे फूलों की महक भूल गया। फास्ट फूड के आने से मेरे घर की महिलायें पारंपरिक व्यंजन बनाना भूल गई..
हमेशा इधर-उधर भागता, मैं भूल गया कि कैसे रुकना है और अंत में जब मुझे सोशल मीडिया मिला, तो मैं बात करना भूल गया.. 😥😥

फिनांनसियल टाइम्स में आज टॉम क्रूज और रवीश कुमार एक साथ एक पेज पर हैं। यह हम सभी के लिए फक्र भरा मोमेंट है। उनकी जिंदगी ...
17/07/2023

फिनांनसियल टाइम्स में आज टॉम क्रूज और रवीश कुमार एक साथ एक पेज पर हैं। यह हम सभी के लिए फक्र भरा मोमेंट है। उनकी जिंदगी और उनकी पत्रकारिता पर एक डॉक्युमेंट्री फिल्म While We Watched बनी है जिसकी रिव्यू इसमें आयी है। पिछले कुछ दिनों से कनाडा, अमेरिका,इंगलैंड से सहित यूरोप के कई शहरों में इस फिल्म का प्रीमियर हो चुका है। दुनिया की तमाम मीडिया में इस फ़िल्म पर चर्चा हो चुकी है।
आज के दौर में किसी पत्रकार की जिंदगी पर 100 मिनट की फिल्म बनना वास्तव में बड़ी बात है। रवीश कुमार इस बात के लिए डिजर्व भी करते हैं।
बधाई मेरी तरफ से Ravish Kumar sir

18/06/2023

*एक बच्चे को आम का पेड़ बहुत पसंद था।*

*जब भी फुर्सत मिलती वो आम के पेड के पास पहुच जाता।*

*पेड के उपर चढ़ता,आम खाता,खेलता और थक जाने पर उसी की छाया मे सो जाता।*

*उस बच्चे और आम के पेड के बीच एक अनोखा रिश्ता बन गया।*

*बच्चा जैसे-जैसे बडा होता गया वैसे-वैसे उसने पेड के पास आना कम कर दिया।*

*कुछ समय बाद तो बिल्कुल ही बंद हो गया।*

*आम का पेड उस बालक को याद करके अकेला रोता।*

*एक दिन अचानक पेड ने उस बच्चे को अपनी तरफ आते देखा और पास आने पर कहा,*

*"तू कहां चला गया था? मै रोज तुम्हे याद किया करता था। चलो आज फिर से दोनो खेलते है।"*

*बच्चे ने आम के पेड से कहा,*
*"अब मेरी खेलने की उम्र नही है*

*मुझे पढना है,लेकिन मेरे पास फीस भरने के पैसे नही है।"*

*पेड ने कहा,*
*"तू मेरे आम लेकर बाजार मे बेच दे,*
*इससे जो पैसे मिले अपनी फीस भर देना।"*

*उस बच्चे ने आम के पेड से सारे आम तोड़ लिए और उन सब आमो को लेकर वहा से चला गया।*

*उसके बाद फिर कभी दिखाई नही दिया।*

*आम का पेड उसकी राह देखता रहता।*

*एक दिन वो फिर आया और कहने लगा,*
*"अब मुझे नौकरी मिल गई है,*
*मेरी शादी हो चुकी है,*

*मुझे मेरा अपना घर बनाना है,इसके लिए मेरे पास अब पैसे नही है।"*
*आम के पेड ने कहा,*

*"तू मेरी सभी डाली को काट कर ले जा,उससे अपना घर बना ले।"*
*उस जवान ने पेड की सभी डाली काट ली और ले के चला गया।*

*आम के पेड के पास अब कुछ नहीं था वो अब बिल्कुल बंजर हो गया था।*

*कोई उसे देखता भी नहीं था।*
*पेड ने भी अब वो बालक/जवान उसके पास फिर आयेगा यह उम्मीद छोड दी थी।*

*फिर एक दिन अचानक वहाँ एक बुढा आदमी आया। उसने आम के पेड से कहा,*

*"शायद आपने मुझे नही पहचाना,*
*मैं वही बालक हूं जो बार-बार आपके पास आता और आप हमेशा अपने टुकड़े काटकर भी मेरी मदद करते थे।"*

*आम के पेड ने दु:ख के साथ कहा,*

*"पर बेटा मेरे पास अब ऐसा कुछ भी नही जो मै तुम्हे दे सकु।"*

*वृद्ध ने आंखो मे आंसु लिए कहा,*

*"आज मै आपसे कुछ लेने नही आया हूं बल्कि आज तो मुझे आपके साथ जी भरके खेलना है,*

*आपकी गोद मे सर रखकर सो जाना है।"*

*इतना कहकर वो आम के पेड से लिपट गया और आम के पेड की सुखी हुई डाली फिर से अंकुरित हो उठी।*

*वो आम का पेड़ कोई और नही हमारे माता-पिता हैं दोस्तों ।*

*जब छोटे थे उनके साथ खेलना अच्छा लगता था।*

*जैसे-जैसे बडे होते चले गये उनसे दुर होते गये।*
*पास भी तब आये जब कोई जरूरत पडी,*
*कोई समस्या खडी हुई।*

*आज कई माँ बाप उस बंजर पेड की तरह अपने बच्चों की राह देख रहे है।*

*जाकर उनसे लिपटे,*
*उनके गले लग जाये*

*फिर देखना वृद्धावस्था में उनका जीवन फिर से अंकुरित हो उठेगा।*

आप से प्रार्थना करता हूँ यदि ये कहानी अच्छी लगी हो तो कृपया ज्यादा से ज्यादा लोगों को भेजे ताकि किसी की औलाद सही रास्ते पर आकर अपने माता पिता को गले लगा सके..!!

भगवान की मर्जी के बिना पत्ता भी नही हिलता। जिस व्यापरी ने दान में सोना चड़वाया था। उसको जेल होनी चाहिए। उसकी वजह से ही क...
17/06/2023

भगवान की मर्जी के बिना पत्ता भी नही हिलता। जिस व्यापरी ने दान में सोना चड़वाया था। उसको जेल होनी चाहिए। उसकी वजह से ही कोई शरीफ आदमी चोर बन गया। दान धर्म को हानि पहुंचा सकता है।

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