29/07/2026
" आज गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व है। सभी को हमारी तरफ से ढेर सारी शुभकामनाएं एवं बधाइयां। आज का दिन हम गुरुओं (शिक्षक) के लिए बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखता है और भविष्य में भी हमेशा रहेगा।"
" गुरु गोविंद दोउ खड़े काके लागूं पाय।
बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताए।।"
आजकल का मार्डन युग है जिसे डिजिटल युग भी कहा जाता है। अगर आज गुरु, गोविंद, गूगल और एआई चारों की चर्चा करें तो प्रणाम की परंपरा और प्राथमिकता तीन क्रम में होगी।
पहला प्रणाम ---- कबीर दास जी के दर्शन के अनुसार पहला प्रणाम गुरु जी को किया जाएगा। गूगल और एआई ज्ञान के असीमित भंडार हो सकते हैं लेकिन विवेक केवल "गुरुजी" से मिलता है।
एआई(AI) और गूगल भी गुरुजी के ही बनाए हुए उपकरण(टूल) हैं। तकनीक का सही, नैतिक और मानव- हित में उपयोग कैसे करना है, यह दिशा हमें गुरूजी ही दिखाते हैं।
दूसरा प्रणाम ----गोविंद अर्थात भगवान का दूसरा स्थान है। गुरुजी की कृपा से ही मनुष्य भगवान या सत्य का साक्षात्कार करता है। गुरु ही हमें उस चेतना तक पहुंचने का मार्ग प्रशस्त करते हैं जिसने इस सृष्टि की रचना की है।
तीसरा स्थान ----गूगल और एआई को प्रणाम के स्थान पर"आदर और आभार " क्योंकि ये हमारे साधन हैं, साध्य नहीं । (Not Goal)
गूगल आज का विशाल पुस्तकालय है जो सूचना की ओर उंगली दिखाता है जबकि एआई(AI) उस सूचना का विश्लेषण करके उत्तर गढ़ने वाली तेज बुद्धि है लेकिन यह याद रखना चाहिए कि एआई के पास डेटा(Data) है, दिशा (Direction) अपने सम्मानित "गुरुजी" से ही मिलती है।
बलिहारी गुरु आपने, जिन्होंने गूगल -एआई समझाय।
गूगल ने उत्तर दिया परन्तु "चेतना" गुरु ही जगाए ।।