23/09/2026
"साधारण कोटि के जीव अपनी निर्बलताओं को ही श्रेष्ठतायें समझकर उनसे दूर होने का यत्न ही नहीं करते। इसलिए श्रेष्ठ वस्तुओं के सामने से होकर गुजरने पर भी वे अपनी ही निर्बलताओं से चिपके रहने में अधिक सुरक्षा का अनुभव करते हैं।"
पूज्य श्री तनसिंह जी की 'डायरी' से साभार