19/08/2026
देश के लोगों को मुबारकबाद! आप अभी आज़ादी का जश्न मना रहे हैं इधर आज सुबह मोदी सरकार की ED आज़म ख़ान के करीबियों और जौहर यूनिवर्सिटी में छापे मार रही हैं।
आज सुबह सुबह ED आज़म ख़ान से जुड़े हुए लोगों के घरों में घुसी हुई है, जौहर यूनिवर्सिटी में भी छापेमारी चल रही हैं, दिल्ली, सहारनपुर, रामपुर में ED पहुंचकर आज़म ख़ान को नए केस में गिरफ्तार कर जेल में लंबे समय तक रखने के लिए सबूत तलाश रही हैं, 2017 से अब तक आज़म ख़ान 59 महीनों की जेल काट चुके हैं और वर्तमान में भी बंदी हैं उनके विरुद्ध मुर्गी, बकरी, भैंस, पाजेब, सफ़ाई मशीन, किताबें चोरी और शराब के ठेके के गल्ले से 16800₹ चोरी समेत 121 से FIR दर्ज हैं, पिछले 10 वर्षों से आज़म ख़ान और उनका परिवार निशाने पर है।
यानी कुल मिलाकर राजनीतिक प्रतिशोध की राजनीति का शिकार आज़म ख़ान पूरी तरह निशाने पर है, सत्ता से शिकायत नहीं उमीद नहीं क्योंकि देश के PM सरकार की केंद्रीय एजेंसियां भी इसलिए हाथ धोकर पीछे पड़ी हुई हैं क्योंकि आज़म ख़ान जौहर यूनिवर्सिटी के फाउंडर हैं और मोदी जी मुस्लिमों द्वारा बनाई गई यूनिवर्सिटी के विरोधी हैं।
आज़म ख़ान आखिकार कब तक यूंही निशाने पर रहेंगे? लोकसभा में विपक्ष के नेता और सांसद के पास क्या जौहर यूनिवर्सिटी के फाउंडर आज़म ख़ान के समर्थन में लिखने बोलने के लिए एक भी लफ्ज़ नहीं? ये हैं आपका इंडिया गठबंधन और मोहब्बत की दुकान? जब पूरे देश को पता है कि आज़म ख़ान यूनिवर्सिटी बनाने की वजह से पिछले 10 वर्षों से मोदी सरकार के ज़ुल्म का शिकार है तो अब तक चुप्पी क्यों? क्या इस देश में मुसलमान होना इतना बड़ा गुनाह हो गया है कि सरकार ज़ुल्म भी करेगी तो विपक्ष उसके मुसलमान होने की वजह से चुप रहेगा?