Shri Vidya Jyoti Foundation Society श्री विद्या ज्योति फाउंडेशन सोसाइटी

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Shri Vidya Jyoti Foundation Society श्री विद्या ज्योति फाउंडेशन सोसाइटी बच्चों की पढ़ाई में मदद करके उनमें आत्

24 मार्च को हमारे कक्षा-10 के बच्चों का रिजल्ट आया। सभी बच्चे पास। प्रथम श्रेणी में 23 बच्चे उत्तीर्ण हुए।  बिटिया रितिक...
29/03/2026

24 मार्च को हमारे कक्षा-10 के बच्चों का रिजल्ट आया। सभी बच्चे पास। प्रथम श्रेणी में 23 बच्चे उत्तीर्ण हुए। बिटिया रितिका को अधिकतम अंक 93.83% मिले। बहुत सारे बच्चे ऐसे हैं जिन्होंने जमीन से उठकर आसमान छुआ है। स्वअनुशासन में रह कर एक दूसरे की मदद करते हुए आगे बढ़े हैं हमारे बच्चे।
⚘️⚘️🙏🙏
www.shrividyajyoti.org

हमारे यहाँ तो सरकारी  स्कूलों में बच्चों की संख्या कम हो जाने पर स्कूल ही बंद कर देते हैं। इन स्कूलों में आर्थिक रूप से ...
12/02/2026

हमारे यहाँ तो सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या कम हो जाने पर स्कूल ही बंद कर देते हैं। इन स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर एवं साधनहीन माता पिता के बच्चे जो पढ़ते हैं। होना तो यह चाहिए कि समुदाय, समाज और सरकारें निजी और सार्वजानिक रूप से अनेक मदों पर हो रही फिजूलखर्ची को कम करके स्कूलों को बंद होने से रोकें। जिस बच्चे का स्कूल बंद हो जाता है उस पर क्या बीतती होगी वही जाने। टीचर्स की अपने विद्यालय एवं बच्चों के प्रति उदासीनता भी बच्चों की संख्या कम होने का एक कारण हो सकती है अन्यथा प्रेम, धैर्य , विवेक और समर्पण से क्या कुछ संभव नहीं है।

26.1.2026 दैनिक भास्कर आप सभी की शुभकामनाओं एवं आशीर्वाद के लिए हृदय से शुक्रिया। 🙏🙏
27/01/2026

26.1.2026 दैनिक भास्कर
आप सभी की शुभकामनाओं एवं आशीर्वाद के लिए हृदय से शुक्रिया।
🙏🙏

प्रिय हिमांशु सर्वप्रथम मैं आपसे हृदय से माफ़ी मांगता हूँ। आज से अढ़ाई वर्ष पहले जब आप कक्षा 10 पास कर कक्षा 11 में आए थे ...
14/12/2025

प्रिय हिमांशु

सर्वप्रथम मैं आपसे हृदय से माफ़ी मांगता हूँ। आज से अढ़ाई वर्ष पहले जब आप कक्षा 10 पास कर कक्षा 11 में आए थे तो मैंने आपको हमारे यहाँ पढ़ने से मना कर दिया था। मैंने अपने मन में इस कृत्य को इस प्रकार उचित ठहरा लिया था कि आप 10 वीं कक्षा में बहुत बार यह कह कर छुट्टी मांगते थे कि आपके पेट में दर्द हो रहा है। मैंने कभी भी आपकी इस परेशानी पर सहानुभूति पूर्वक विचार करने की कोशिश नहीं की, कि आपकी बात में भी सच्चाई हो सकती है। फिर आप पूरी कक्षा 11 में हमारे यहाँ नहीं पढ़े। 12 वीं क्लास भी आपकी आधी निकल गई। जब मैं 12th वाले बच्चों की इंग्लिश की क्लासेस ले रहा था तो पता नहीं एक दिन कैसे ईश्वर ने मुझ पर कृपा की, मेरी बुद्धि फेरी और मैंने आपके बारे में आपके साथी और मित्र विष्णु महावर से पूछ लिया और अगले ही दिन विष्णु आपको अपने साथ ले आया। विष्णु बेटा, आपका हृदय से शुक्रिया अपने दोस्त को पुनः SVJF से जोड़ने के लिए।

अब वही हिमांशु श्री विद्या ज्योति के चतुर्वेदी स्कूल SVJF केंद्र का एक मजबूत आधार स्तम्भ है। अपनी क्लासेज को बेहद संजीदगी से संभालता है और सुबह लाइब्रेरी की व्यवस्थाओं को सँभालने में अमन की मदद करता है। हिमांशु बेटा, एक प्रकार से आप एक बेस्ट लीडर बनने की ओर अग्रसर हो।

हम बड़ी उम्र वाले लोग छोटी उम्र के बच्चों को आखिर धैर्य और प्रेम से कब समझने लगेंगे। कब इन पूर्वाग्रहों से मुक्त होंगे कि बच्चे सदैव बहाने ही बनाते हैं। हिमांशु बेटा, आपने मेरी समझ को परिपक्व होने में मदद की, इसके लिए में आपका आभारी हूँ।

आपकी यह कहानी इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि प्रत्येक बच्चे के अंदर अनंत संभावनाओं का अथाह सागर होता है। काश! हम बड़े लोग अपनी द्रष्टि का परिमार्जन कर पाएं।

आपके लिए समर्पित दो पंक्तियाँ:

Kindness is the language a deaf can hear and a blind can see.

Kindness is a gift that everybody can afford to give. 🥰🥰🥰🥰
(Deshraj Verma Executive Engineer PWD Rajasthan Jaipur)

टॉयलेट के अंदर सामने की दीवार काफी ऊपर तक गीली थी। जाहिर था कि बच्चों (लड़कों) ने यूरिन नीचे पॉट में न कर सामने वाली दीव...
14/09/2025

टॉयलेट के अंदर सामने की दीवार काफी ऊपर तक गीली थी। जाहिर था कि बच्चों (लड़कों) ने यूरिन नीचे पॉट में न कर सामने वाली दीवार पर विसर्जित किया था। मैंने अपने चेहरे पर गुस्से का भाव लेशमात्र भी न आने दिया और कक्षा 9 में जाकर सहज भाव से मुस्कराते हुए कक्षा के लड़कों से पूछा कि भाई लोगों टॉयलेट में दीवार पर पेशाब किस किसने किया है ?ईमानदारी से बताएं, हम आपको बिल्कुल भी नहीं डांटेंगे। य़ह सुनते ही तीन चार लड़के जो थोड़े शरारती थे, मंद हँसी हंसते हुए एक दूसरे की ओर दबी नजरों से देखने लगे। लेकिन किसी ने अपनी गलती स्वीकार करने का साहस नहीं दिखाया। उसके पश्चात्‌ उन्हें पूरे धैर्य और प्रेम से समझाया कि हमारी छोटी-छोटी बुरी आदतें कैसे हमें गलत रास्ते पर ले जाती हैं। छोटी कक्षाओं में पढ़ने वाले आपके छोटे भाई बहिन आपसे क्या सीखेंगे। स्वच्छता का हमारे जीवन में कितना बड़ा योगदान है।


बच्चों के ऊपर जितना फर्क समझाने का पड़ा उससे कहीं ज्यादा फर्क़ अब तक उनके साथ उनकी पढ़ाई में ईमानदारी पूर्वक की गई हमारी मेहनत का पड़ा। अब तक उन्हें किए गए स्नेह का पड़ा। मार्मिक अपील सुनकर अंकित से अब नहीं रहा गया और रुआँसा होकर उसने अपना कृत्य स्वीकार कर लिया। उसकी स्वीकारोक्ति के समय इस कार्य में सहभागी शेष तीन बच्चे नीचे नजर करते हुए शायद पश्चाताप कर रहे थे। मैंने अंकित को अपने गले लगा लिया। इन तथाकथित शैतान बच्चों के प्रति हमारा प्रेम और अपनेपन भरा स्नेहिल व्यावहार उन्हें बड़ी बुराईयों की ओर जाने से रोक सकता है। लेकिन हम टीचर ऐसे बच्चों से दूरी बनाकर रखते हैं। उनसे आंखें नहीं मिलाते। क्लास से बाहर भेज देते हैं। उन्हें उनके हाल पर छोड़ देते हैं।हमारी प्राथमिकता आगे की दो तीन पंक्तियों में बैठे बच्चे ही रहते हैं। हमारी बेरुखी इन्हें और विद्रोही बना देती है। आगे चलकर यही बच्चे जब समाज के लिए कांटे बनते हैं तो हम असहाय नजर आते हैं।

जो बच्चे पहले से ही अनुशासित हैं ,पढ़ने में अच्छे हैं उन्हें थोड़ा और अनुशासित कर दिया - थोड़ा और होशियार बना दिया तो शायद समाज पर उतना बड़ा इम्पैक्ट न आए। बड़ा इम्पैक्ट तब आएगा जब ये तथाकथित समाजकंटक मुख्यधारा में शामिल हो समरस समाज निर्माण में भागीदार बनेंगे।

श्री विद्या ज्योति पाठशाला में ऐसे शैतान बच्चे हमारी प्राथमिकता में होते हैं।
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ये मेरे संस्कृत के सर हैं श्रीमान रामचरण लाल जी सूत्रकार। ईश्वर की असीम कृपा थी कि आज से 36 वर्ष पहले अपनी कक्षा 10 में ...
07/09/2025

ये मेरे संस्कृत के सर हैं श्रीमान रामचरण लाल जी सूत्रकार। ईश्वर की असीम कृपा थी कि आज से 36 वर्ष पहले अपनी कक्षा 10 में हमें सर से पढ़ने का सौभाग्य मिला।

(1) संस्कृत के श्लोकों को जब मधुर स्वर में गाकर सुनाते थे तो लगता था मानो वाग्देवी सरस्वती साक्षात उनके कंठ में विराजमान हों। सर का एक चैप्टर 10-12 दिन में पूरा होता था, तब तक पढ़ाते जाते थे जब तक सभी को समझ न आ जाए।

(2) एक बार बच्चों को पता नहीं क्या सूझी- जोड़ बाकी गुना भाग की अंग्रेज़ी मीनिंग आपस में खोजने लगे। सभी ने मिलकर ये तो जान लिया कि जोड़ को ऐड, बाकी को माइनस, गुना को मल्टीप्लाइ कहते हैं। गाड़ी भाग पर आकर अटक गई कि भाग को अंग्रेजी में क्या कहते हैं। किसी को नहीं आया। बच्चे सभी टीचर्स के पास गए लेकिन किसी को मीनिंग नहीं सूझी। अब बच्चे अंग्रेज़ी के टीचर के पास गए, उन्हें भी नहीं आई तो उन्होंने धमका के भगा दिया कि हम लोग फालतू की नेतागिरी कर रहे हैं। तब अंत में बच्चे संस्कृत वाले सर के पास गए। उन्होंने बड़े प्यार से हंसते हुए हमारा प्रश्न सुना और कहा कि भाग को शायद डिवाइड कहते होंगे क्योंकि भाग में हम किसी चीज़ को टुकड़ों में बाँटते हैं डिवाइड करते हैं।

(3) होली का समय था। उन दिनों होली आने से कई दिन पहले से बच्चे एक दूसरे को बिगाड़ने के लिए उतावले हो फिरते रहते थे। गांवों की महिलाएं भी पीछे नहीं रहती थीं। गांव की महिलाओं ने एक दिन छुट्टी के बाद घर जाते समय टीचर्स को होली खेलने के लिए पकड लिया। अन्य टीचर्स जो तेज थे तो बच कर भाग छूटे। रह गए बेचारे संस्कृत वाले सर। महिलाओं ने बाल्टी में जो गोबर घोल रखा था उससे सर का जलाभिषेक कर दिया। बेचारे चुपचाप खड़े रहे। मंद हँसी हंसते हुए सिर्फ इतना बोले कि य़ह तो आपके गांव की महिलाओं का प्रेम है।

(4) सर रोजाना 45 किमी दूर अपने घर से पढ़ाने हमारे विद्यालय आते थे। उनका 45 km आना 45 km जाना जिसमें दोनों ओर से 15-15 km दूरी प्रतिदिन साइकिल से तय करते थे। य़ह सब इसलिए कि अपने घर पर अपने वृद्ध माता-पिता की सेवा कर सकें।

(5) जब हम सुबह अपने गांव से दूसरे गांव 2 km दूर पढ़ने स्कूल पैदल जा रहे होते थे तो उसी समय सभी सर लोग अपनी अपनी साइकिल से हम लोगों को पीछे से क्रॉस करके आगे निकल रहे होते थे। हम उन्हें नमस्कार माडसाब बोलते थे। हमारी नमस्कार का जवाब अधिकांश सर या तो नीरस फीके शब्दों से देते थे या सिर्फ अपनी मुंडी हिला देते थे। जब संस्कृत वाले सर की साइकिल क्रॉस होती थी तो सर बहुत खुश होकर अपना एक हाथ पूरा उठाकर आशीर्वाद देते हुए हमारे नमस्कार अभिवादन को स्वीकार करते थे।

तो मित्रों, जो चीज़ बच्चों को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है वह है टीचर का अपना चरित्र, टीचर का बच्चों से अपने खुद के बच्चों जैसा प्यार स्नेह, उनसे मित्रता का व्यावहार,
टीचर द्वारा बच्चों के प्रति बरती गई केयर इत्यादि इत्यादि।

कल सुबह शिक्षक दिवस पर संस्कृत वाले सर से फोन पर 11 मिनट बात हुई उन्हें और मुझे बहुत अच्छा लगा।
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हमारी सायंकालीन निशुल्क पाठशाला झालाना डूंगरी जयपुर की दो बेटियों अंजलि और निकिता को इस वर्ष एन. आई. टी. जालंधर में प्रव...
07/09/2025

हमारी सायंकालीन निशुल्क पाठशाला झालाना डूंगरी जयपुर की दो बेटियों अंजलि और निकिता को इस वर्ष एन. आई. टी. जालंधर में प्रवेश मिला है। आप सभी की शुभकामनाओं के लिए शुक्रिया आभार।

Two of our evening charitable Pathshala girls named Anjali and Nikita got admission in NIT Jalandhar this year. We express our gratitude for your wishes and blessings to our children.

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हर कक्षा में कुछ बच्चे ऐसे होते हैं जो एक शिक्षक को प्रोत्साहित करते हैं, उन्हें थकने नहीं देते। Some students with brig...
09/08/2025

हर कक्षा में कुछ बच्चे ऐसे होते हैं जो एक शिक्षक को प्रोत्साहित करते हैं, उन्हें थकने नहीं देते।

Some students with bright and sparkling ✨️ eyes, with ears raised to hear and assimilate even a single word spoken, ever ready to grasp each bit of learnings being imparted fill hope, give warmth to heart and the strength to move on the mission.

We have many such innocent souls at our SVJF evening Pathshala filling peace and fulfillment in our lives . Blessed we are. Obeisances to the Supreme.
🥰🥰

⚘️⚘️विद्या वृक्ष पर पहली बार फल लगे⚘️⚘️हमारी सायंकालीन SVJF निशुल्क पाठशाला रूपी जो पौधा आज से 10 वर्ष पूर्व रोपा गया था...
03/08/2025

⚘️⚘️विद्या वृक्ष पर पहली बार फल लगे⚘️⚘️

हमारी सायंकालीन SVJF निशुल्क पाठशाला रूपी जो पौधा आज से 10 वर्ष पूर्व रोपा गया था अब वह फलने लगा है। बिटिया सविता को Tata Motors में Assistant Manager और मोहित को Genus Power Limited में Diploma Trainee Engineer की जॉब मिल गई है।

इन बच्चों के परिवारों के लिए ये उपलब्धियां चाँद को छूने से कम नहीं हैं।

हमारे बच्चों को स्नेह और आशीर्वाद प्रदान करने के लिए आप सभी गुणीजनों को हृदय से शुक्रिया नमस्कार।

🙏🙏😇😇

मेरे दायीं ओर प्रियांशु है और बाएँ देवांशु। कक्षा 10 के ये विद्यार्थी, दोनों ही इतने चंचल हैं कि टीचर के धैर्य की परीक्ष...
26/07/2025

मेरे दायीं ओर प्रियांशु है और बाएँ देवांशु। कक्षा 10 के ये विद्यार्थी, दोनों ही इतने चंचल हैं कि टीचर के धैर्य की परीक्षा लेते रहते हैं। पिछले दो तीन वर्षों के दौरान इनकी शैतानियों के चलते इन्हें कई बार कुछ कुछ दिनों के लिए कक्षाओं में आने से मना भी कर दिया गया था। लेकिन अभी जब से ये कक्षा 10 में सीधे मेरे नियंत्रण में आए हैं इनके अंदर सकारात्मक बदलाव देखने को मिला था।
पिछले शनिवार को कक्षा की शुरुआत में बात चल रही थी पर-अनुशासन और स्व-अनुशासन में अंतर की। मैं बता रहा था, "पर-अनुशासन उसे कहते हैं जब अनुशासन किसी दूसरे अथॉरिटेटिव व्यक्ति के द्वारा लागू किया जाता है जैसे अध्यापक के रहते कक्षा कक्षीय अनुशासन, घर परिवार के वरिष्ठजनों, पुलिस एवं प्रशासन के कारण समाज में स्थापित अनुशासन। स्व-अनुशासन में आपकी निगरानी करने वाला कोई नहीं होता, आपके पास मौका होता है अनुचित काम करके लाभ उठाने का लेकिन आप फिर भी विवेकशील बने रहकर अपने आप को गलत मार्ग पर जाने से रोक लेते हैं।"

अब इन दोनों महाशय को छोड़कर पूरी कक्षा विषयांतर्गत चर्चा को बहुत ध्यानाकर्षक सुन रही थी और ये दोनों वीर बिल्कुल आगे की सीट पर बैठे सिर नीचे किए लगातार हँस रहे थे। दूसरे शब्दों में कहें तो पर-अनुशासन की खुलेआम धज्जियाँ उड़ा रहे थे। अब क्या था- मेरे अंदर का अथॉरिटेटिव टीचर जाग उठा। तुरंत दोनों को क्लास से बाहर निकाल हमेशा के लिए घर भेज दिया।

लेकिन क्लास समाप्त होते होते मैं असहज हो गया, ऐसा लगने लगा कि बच्चों के साथ ठीक नहीं किया। घर लौटते समय पूरे रास्ते इन्हीं के विचार मन मस्तिष्क में छाए रहे। एक बार उनसे पूछ तो लेना चाहिए था। मैं शेष बच्चों के सामने एक अच्छा उदाहरण पेश करने में असफल रहा। भविष्य में बच्चे हमारा ही तो अनुकरण करते हैं।

अगली क्लास में प्रियांशु तो नहीं आया लेकिन देवांशु को देखकर मन को बहुत शांति मिली। मिलते ही सॉरी बोलने लगा। धीरे से बोला- सर मेरी नाक में मक्खी घुस गई थी तो प्रियांशु अपनी हँसी रोक ही नहीं पा रहा था। सॉरी सर हम आगे से ध्यान रखेंगे।

अगले दिन मैंने प्रियांशु को भी संदेश भेजकर बापिस बुला लिया। पूरी कक्षा के सामने दोनों को सीने से लगाकर मैंने माफ़ी माँगी। मक्खी वाली बात सुनकर बाकी बच्चे बहुत जोर से हँसे।

हमारा पूरा जीवन एक सीखने की प्रक्रिया है। 🥰🥰

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कक्षा-10 के हमारे नन्हे मुन्ने बच्चों का कल राजस्थान बोर्ड का परीक्षा परिणाम आया। इनमें अनेक बच्चे ऐसे हैं जो ज़मीन से उ...
29/05/2025

कक्षा-10 के हमारे नन्हे मुन्ने बच्चों का कल राजस्थान बोर्ड का परीक्षा परिणाम आया। इनमें अनेक बच्चे ऐसे हैं जो ज़मीन से उठकर अपने आप को पूरी निष्ठा से उत्तरोत्तर उठाते चले गए। खुद भी उठे और अपने साथियों को भी सहारा देकर उठाया। पहले जहाँ खड़े होकर कुछ बोल नहीं पाते थे, आज उन्हीं का आत्मविश्वास देखते बनता है।

ये होनहार देश के लिए ईमानदार, विनम्र, विवेकशील और श्रम-शील किसी भी काम को बड़ा छोटा न मानने वाले श्रेष्ठ नागरिक साबित हों, इस प्रयास में ईश्वर श्री विद्या ज्योति परिवार की सहायता करें।

सभी ने परीक्षा में खूब अंक प्राप्त किए हैं। कुल 50 बच्चे थे, सभी अच्छे मार्क्स से पास हुए हैं और 93%, 94% तक अंक प्राप्त किए हैं।
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हमारे इन बच्चों को राजस्थान बोर्ड की परीक्षाओं में अच्छे अंक लाने पर government से सैमसंग के टेबलेट मिले हैं।
31/01/2025

हमारे इन बच्चों को राजस्थान बोर्ड की परीक्षाओं में अच्छे अंक लाने पर government से सैमसंग के टेबलेट मिले हैं।

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