07/09/2025
ये मेरे संस्कृत के सर हैं श्रीमान रामचरण लाल जी सूत्रकार। ईश्वर की असीम कृपा थी कि आज से 36 वर्ष पहले अपनी कक्षा 10 में हमें सर से पढ़ने का सौभाग्य मिला।
(1) संस्कृत के श्लोकों को जब मधुर स्वर में गाकर सुनाते थे तो लगता था मानो वाग्देवी सरस्वती साक्षात उनके कंठ में विराजमान हों। सर का एक चैप्टर 10-12 दिन में पूरा होता था, तब तक पढ़ाते जाते थे जब तक सभी को समझ न आ जाए।
(2) एक बार बच्चों को पता नहीं क्या सूझी- जोड़ बाकी गुना भाग की अंग्रेज़ी मीनिंग आपस में खोजने लगे। सभी ने मिलकर ये तो जान लिया कि जोड़ को ऐड, बाकी को माइनस, गुना को मल्टीप्लाइ कहते हैं। गाड़ी भाग पर आकर अटक गई कि भाग को अंग्रेजी में क्या कहते हैं। किसी को नहीं आया। बच्चे सभी टीचर्स के पास गए लेकिन किसी को मीनिंग नहीं सूझी। अब बच्चे अंग्रेज़ी के टीचर के पास गए, उन्हें भी नहीं आई तो उन्होंने धमका के भगा दिया कि हम लोग फालतू की नेतागिरी कर रहे हैं। तब अंत में बच्चे संस्कृत वाले सर के पास गए। उन्होंने बड़े प्यार से हंसते हुए हमारा प्रश्न सुना और कहा कि भाग को शायद डिवाइड कहते होंगे क्योंकि भाग में हम किसी चीज़ को टुकड़ों में बाँटते हैं डिवाइड करते हैं।
(3) होली का समय था। उन दिनों होली आने से कई दिन पहले से बच्चे एक दूसरे को बिगाड़ने के लिए उतावले हो फिरते रहते थे। गांवों की महिलाएं भी पीछे नहीं रहती थीं। गांव की महिलाओं ने एक दिन छुट्टी के बाद घर जाते समय टीचर्स को होली खेलने के लिए पकड लिया। अन्य टीचर्स जो तेज थे तो बच कर भाग छूटे। रह गए बेचारे संस्कृत वाले सर। महिलाओं ने बाल्टी में जो गोबर घोल रखा था उससे सर का जलाभिषेक कर दिया। बेचारे चुपचाप खड़े रहे। मंद हँसी हंसते हुए सिर्फ इतना बोले कि य़ह तो आपके गांव की महिलाओं का प्रेम है।
(4) सर रोजाना 45 किमी दूर अपने घर से पढ़ाने हमारे विद्यालय आते थे। उनका 45 km आना 45 km जाना जिसमें दोनों ओर से 15-15 km दूरी प्रतिदिन साइकिल से तय करते थे। य़ह सब इसलिए कि अपने घर पर अपने वृद्ध माता-पिता की सेवा कर सकें।
(5) जब हम सुबह अपने गांव से दूसरे गांव 2 km दूर पढ़ने स्कूल पैदल जा रहे होते थे तो उसी समय सभी सर लोग अपनी अपनी साइकिल से हम लोगों को पीछे से क्रॉस करके आगे निकल रहे होते थे। हम उन्हें नमस्कार माडसाब बोलते थे। हमारी नमस्कार का जवाब अधिकांश सर या तो नीरस फीके शब्दों से देते थे या सिर्फ अपनी मुंडी हिला देते थे। जब संस्कृत वाले सर की साइकिल क्रॉस होती थी तो सर बहुत खुश होकर अपना एक हाथ पूरा उठाकर आशीर्वाद देते हुए हमारे नमस्कार अभिवादन को स्वीकार करते थे।
तो मित्रों, जो चीज़ बच्चों को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है वह है टीचर का अपना चरित्र, टीचर का बच्चों से अपने खुद के बच्चों जैसा प्यार स्नेह, उनसे मित्रता का व्यावहार,
टीचर द्वारा बच्चों के प्रति बरती गई केयर इत्यादि इत्यादि।
कल सुबह शिक्षक दिवस पर संस्कृत वाले सर से फोन पर 11 मिनट बात हुई उन्हें और मुझे बहुत अच्छा लगा।
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