25/06/2026
सत्ता के गलियारे में सड़ता 'विकास': क्या यही इटारसी की नियति है?
➖️ ✍️ अजय रणजीत सिंह राजपूत
शहर की नाक के नीचे से 'विकास' का जो कच्चा चिट्ठा बह रहा है, उसकी बानगी देखनी हो, तो बस नगर पालिका परिषद इटारसी के मुख्य द्वार पर चले आइए।
साझा किए विडियों में साफ देखा जा सकता है कि नजारा किसी जिम्मेदार नगर निकाय के गरिमामयी कार्यालय का नहीं, बल्कि किसी उपेक्षित दलदल का है। हैरानी तब और भी बढ़ जाती है जब आप देखते हैं कि सत्ता का यह केंद्र➖️जहाँ से पूरे शहर की तकदीर और व्यवस्था तय होनी चाहिए➖️वह खुद ही घुटनों तक कीचड़ और जलभराव में सराबोर है। यह सिर्फ कल हुई एक दिन की बारिश का तात्कालिक नतीजा नहीं है, बल्कि यह वर्षों से अनवरत चली आ रही उस प्रशासनिक उदासीनता की दास्तान है, जिसे 'आदतन लापरवाही' कहना भी शायद कम होगा।
सबसे मर्मस्पर्शी और विचारणीय पहलू तो यह है कि यह 'नर्क' शहर के किसी सुदूर कोने में नहीं, बल्कि इसके सबसे महत्वपूर्ण और जीवंत हिस्से में मौजूद है। इसी कतार में, जहाँ यह नगर पालिका कार्यालय स्थित है, वहाँ से महज कुछ ही मीटर की दूरी पर देश का भविष्य संवारने वाले स्कूल और कॉलेज हैं, जहाँ से हमारे बच्चे और युवा रोजाना गुजरते हैं। चंद कदमों की दूरी पर आम जनता की गाढ़ी कमाई और वित्तीय लेन-देन को संभालने वाले बैंक हैं, और इसी वीआईपी क्षेत्र के बेहद करीब माननीय विधायक जी का निवास स्थान भी है। जिन गलियों से होकर शहर के प्रबुद्ध नागरिक, नौनिहाल छात्र और आम आदमी अपनी दैनिक जरूरतों के लिए रोजाना निकलते हैं, वहां की यह नारकीय बदहाली यह बताने के लिए काफी है कि प्रशासन अपनी फाइलों और दावों के बाहर की वास्तविक दुनिया से कितना बेखबर हो चुका है। क्या हमारे जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की नजर इन सड़कों पर नहीं पड़ती, या फिर अब यह गंदगी ही हमारी नियति बन चुकी है?
यह कीचड़ महज जलभराव की एक मौसमी समस्या नहीं है, बल्कि उस प्रशासनिक आचरण और इच्छाशक्ति का सटीक प्रतिबिंब है जिसे जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि रोज अपनी वातानुकूलित कुर्सियों तक जाते हुए मूकदर्शक बनकर लांघते हैं। जब आपके खुद के कार्यालय की देहरी पर 'विकास' का यह हाल हो, तो शहर के सुदूर वार्डों और तंग गलियों के लिए उम्मीद का धागा टूटना लाजमी है। आइना आपके बिल्कुल सामने है➖️अब प्रशासन को यह तय करना होगा कि क्या वे इस गंदगी में अपनी कार्यक्षमता का अक्स देख पा रहे हैं, या सत्ता और व्यवस्था का चश्मा इतना धुंधला हो चुका है कि उन्हें जनता की यह बेबसी और सड़क का यह कीचड़ भी एक चमकता हुआ 'विकास' नजर आता है?
इटारसी की इस बदहाली, प्रशासनिक जवाबदेही और शहर के बुनियादी ढांचे पर आपकी क्या राय है? क्या आपके वार्ड या क्षेत्र में भी प्रशासन की ऐसी ही उदासीनता देखने को मिलती है?
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