Gautam Buddha Education and Social Welfare Society, Indore

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आज भोपाल प्रवास के दौरान माननीय विधायक श्री मुरली भवर जी से सौजन्य भेंट हुई।हमने आदिवासी कल्याण विभाग की विदेश अध्ययन यो...
20/05/2025

आज भोपाल प्रवास के दौरान माननीय विधायक श्री मुरली भवर जी से सौजन्य भेंट हुई।
हमने आदिवासी कल्याण विभाग की विदेश अध्ययन योजना पर विस्तार से चर्चा की और बागली क्षेत्र के युवाओं को इस योजना से जोड़ने की रणनीति पर विचार-विमर्श किया।

माननीय विधायक जी ने जुलाई में बागली में एक कैरियर मार्गदर्शन शिविर आयोजित करने का प्रस्ताव रखा, जिसमें गौतम बुद्ध एजुकेशन सोसाइटी द्वारा 10 आदिवासी विद्यार्थियों को विदेश भेजने की पहल की जाएगी।

इस मुलाक़ात को संभव बनाने में युवा नेता श्री पवन राठौर (पूर्व सरपंच, भाजपा) का विशेष सहयोग रहा।
#शिक्षा_क्रांति #विदेश_अध्ययन_योजना #बागली

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Indore
452018

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हमारे बारे में एवं हमारी विचारधारा

गौतम बुध्दा एजुकेशनल एंड सोशल वेलफेयर सोसाइटी, इंदौर का गठन श्री नीरज कुमार राठौर के नेतृत्व में दिनांक 6 जुलाई 2017 को इंदौर में पंजीयन किया गया है. इसका गठन सर्वजन हिताय एवं सर्वजन सुखाय के सिध्धांत के देखते हुए किया गया है.

संस्था की विचारधारा-

किसी भी जाति धर्म रंग नस्ल वंश क्षेत्र देश भाषा वेशभूषा या खानपान के तरीके से नफरत न करें ! चिंतन करें यदि हम उस परिवेश में होते तब हम क्या करते ? अक्सर हम हर चीज को अपने नजरिये से देखते हैं ,दूसरों के नजरिये से भी दुनिया को देखने की कोशिश करें !! हम हर चीज को हर नजरिये से देखने की कोशिश करते है ! हमने सब पूर्वाग्रह और दुराग्रह त्याग दिए हैं ! सारा राग और द्वेष मिट चूका है ! इसलिए हम जाति धर्म सम्प्रदाय नस्ल भाषा देश आदि बन्धनों से ऊपर उठकर चिंतन मनन करना चाहते है ! कुछ लोग हमें जाति धर्म सम्प्रदाय के तंग नजरिये से देखते हैं मग़र हम विश्व मानवता के कल्याण के लिए अन्धविश्वास और अज्ञान के विरुद्ध कार्य कर रहे है ! हमारा मानना है जाति धर्म नस्ल सम्प्रदाय से ऊपर उठकर जब तक हम विश्व स्तरीय चिंतन नहीं करेंगे तब तक न हम सुखी रहेंगे न दूसरों को सुखी देख पाएंगे !

भाषा का विवाद दुनिया में व हमारे देश में बड़ा गम्भीर विवाद है ! हमारा मानना है कि भाषा साधन है न की साध्य है ! भाषा या लिपि पवित्र या अपवित्र , वैज्ञानिक या अवैज्ञानिक नहीं होती है ! विश्व में हजारों भाषाएँ और हजारों लिपियाँ है सबकी अपनी अपनी खूबियां और कमियां है ! यदि विश्व की सभी भाषाओँ की लिपि एक ही हो जाए तो बहुत सी समस्याऐं हल हो जाए ! उदाहरण के लिए यदि भारत की सभी भाषाओँ को देवनागरी या रोमन में लिखा जाए तो हम सभी पंजाबी गुजराती बंगला तेलगु उड़िया ऊर्दू सिंधी आदि भाषाएँ आसानी से सीख़ जाएंगे ! मग़र हम सभी पूर्वजों की प्राचीनता के अहंकार में जी रहे हैं अतः हम अपनी अपनी लिपि से चिपके हुए हैं! रोमन में लिखने के कई लाभ है ! केवल 26 अक्षर हैं मात्राओं या आधे अक्षर नहीं है ! हम सभी को अपनी अपनी भाषाओँ से प्रेम है !