Kamleshr_74

Kamleshr_74 Co Chair@ Brics.in

04/04/2026

एक आई लाल रिबन में
एक आई नीली फ़्रॉक में
एक आई चुस्की चूसती
एक आई पॉपिंस लिए
एक आई चूँ चूँ चप्पल पहने
एक आई काले चश्मे के साथ
एक आई भूरे बालों वाली
एक आई नीली आँखों वाली
एक आई पिछले घर के खाने से नाख़ुश..

---

बच्चियों को बिठाया पंगत में
परोसी आलू की सब्ज़ी गर्म पूड़ियाँ
सबके अपने नखरे अपनी डिमांड
किसी ने माँगे भुजिया
किसी ने थोड़ा नमक
किसी ने बीच में पानी
किसी ने झोल कम आलू ज़्यादा
किसी ने पूड़ी थोड़ी ठंडी..

मुझे भी लग आई भूख
लेकिन नौ मुखों से
मैं ही तो जीम रहा था
मैं ही तो पी रहा था पानी
मुझे ही तो लग रहा था नमक कम
मेरी ही तो जीभ जल रही थी..

---

किसी को दी पेन्सिल
किसी को दी फाइव स्टार
किसी को दी आइसक्रीम
किसी को दिया कॉपी-पेन
किसी को कुछ दिया मगर उसने लिया नहीं
किसी को एक चीज़ दी मगर उसने दो मांगी
किसी ने एक चीज़ लौटा दी दूसरी ले ली..

एक-एक कर
सभी देवियों के छुए पाँव
आलस नहीं किया
जैसे बड़ों के मामले में करता हूँ
पूरी तरह झुककर
अँगूठे छुए एक-एक के

---

न दुर्गासप्तशती पढ़ता हूँ
न आरती ही पूरी याद मुझे
न नौ देवियों के नाम ही स्मरण

लेकिन पहली बार में याद हो गए
निशु रिशु अंकिता कुन्नू पुच्ची सोनू ज्योति हिमांशी और टीना के नाम

इन बच्चियों के नाम एक साथ ले लिए जाएं
तो एक मंत्र बनाया जा सकता है
बिलकुल गायत्री मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र की तासीर का
जो बड़े से बड़े संकट को काट सकता है :

ॐ निशुरिशुकुन्नूपुच्चीसोनूज्योतिअंकिताहिमांशीटीना नमः।।

_________________________
Manmeet Soni Writes

कविता : "कन्या पूजन"

[अब यह कविता "ज़िंदगी के स्क्रीनशॉट्स" में प्रकाशित]

20/02/2026

मुगल काल ही ब्राह्मण काल था?
उद्देश्य किसी की भी भावना आहत करना नहीं
सिर्फ इतिहास से लोगो को अवगत करवाना है

1️⃣ ⚡ कब और कहाँ?
मुगल काल (1526–1857), भारत
ब्राह्मणों ने प्रशासन, धर्म और शिक्षा में प्रभुत्व स्थापित किया।
यह समय सच में ब्राह्मणों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान का युग था।

📚 Irwin, *The Administration of the Mughals*, 1963

2️⃣ 🏛️ क्यों कहा जाता है ब्राह्मण काल?

मुगलों के शासन में ब्राह्मणों को मंत्री, न्यायाधीश और लेखाकार जैसे उच्च प्रशासनिक पद दिए गए।
वे नीति निर्माण, राजस्व और न्याय व्यवस्था में प्रभुत्व रखते थे।

📚 Abul Fazl, *Ain-i-Akbari*, 1590

3️⃣ 💰 आर्थिक प्रभुत्व:

ब्राह्मणों को भूमि, जागीर और राजस्व संग्रह में अधिकार प्राप्त थे।
उन्हें धन और संपत्ति से सामाजिक शक्ति मिली।

📚 Faruqui, *Princes of the Mughal Empire*, 2002

4️⃣ 🕌 धार्मिक अधिकार:

मंदिर निर्माण और यज्ञों में आर्थिक और सामाजिक समर्थन।
कभी धार्मिक उत्पीड़न नहीं।
ब्राह्मणों को जजिया से मुक्ति और सम्मान भी मिला।

📚 Eleanor Zelliot, *From Untouchable to Dalit*, 1986

5️⃣ ✍️ शिक्षा और ज्ञान:

संस्कृत और धर्मशास्त्र का संरक्षण, प्रशासनिक ग्रंथों का नियंत्रण।
ब्राह्मण शिक्षा और प्रशासन दोनों में प्रभुत्व रखते थे।

📚 Chandra, *Medieval India*, 2005

6️⃣ 🛡️ सुरक्षा और सम्मान:

कभी हमला नहीं, हमेशा संरक्षण और अधिकार।
मुगल शासन ने ब्राह्मणों को शासन और समाज में सर्वोच्च स्थान दिया।

📚 Abul Fazl, *Ain-i-Akbari*, 1590

7️⃣ 📜 राजनीतिक प्रभुत्व:

राजस्व, न्याय और प्रशासन में भागीदारी ने उन्हें समाज में शक्तिशाली बनाया।
मुगल सत्ता के बावजूद, **ब्राह्मणों का प्रभुत्व सर्वोपरि** था।

📚 Irwin, *The Administration of the Mughals*, 1963

8️⃣ 🔑 निष्कर्ष:

भले ही राजनीतिक सत्ता मुगलों के हाथ में थी,
सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक प्रभुत्व ब्राह्मणों का था।
इसलिए इतिहासकार इसे सच में “ब्राह्मण काल” कहते हैं।

📚 References:

* Irwin, *The Administration of the Mughals*, 1963
* Abul Fazl, *Ain-i-Akbari*, 1590
* Faruqui, *Princes of the Mughal Empire*, 2002
* Chandra, *Medieval India*, 2005
* Eleanor Zelliot, *From Untouchable to Dalit*, 1986

20/02/2026

हम जानेंगे
कैसे मुगल काल ब्राह्मणों और ब्राह्मण धर्म के लिए
स्वर्ण काल था,और इसी काल में ब्राह्मण धर्म विकसित हुआ और जातीय विभाजन को मजबूत किया गया
और मुगल ब्राह्मण गठजोड़ से भारत गुलाम बना,

1. अकबर द्वारा निर्मित / संरक्षित मंदिर
गोविंददेव जी मंदिर, वृंदावन (Govind Dev Temple) — 1590

अकबर ने:
✓ मंदिर के ब्राह्मण पुजारियों को 100 बीघा जमीन दी।
✓ मंदिर को कर-मुक्ति (Tax exemption)दी।
Reference:

R. Nath, *“Architecture of Vrindavan”
Abu’l Fazl, *Ain-i-Akbari*, Book II

(B) गोपीनाथ मंदिर, वृंदावन — अकबरकालीन संरक्षण

वैष्णव ब्राह्मणों को स्थायी अनुदान।
Reference: Sharma, “Religious Policy of Akbar”

जगन्नाथ मंदिर, पुरी — ब्राह्मणों के अधिकार सुरक्षित

अकबर ने “महाल-जगन्नाथ” भूमि को सेवाायत ब्राह्मणों के नाम पुष्टि की।
Reference:Ain-i-Akbari, Vol II

काशी (वाराणसी) के मंदिर व पाठशालाएँ

अकबर ने 30+ गाँव काशी के ब्राह्मण विद्वानों को दान दिए।
Reference: Satish Chandra, Medieval India

हरिद्वार के मठों को अनुदान

ब्राह्मण पुरोहितों के लिए भूमि अनुदान।
Reference: S.A.A. Rizvi, *Religious Policies of the Mughal Emperors

जहाँगीर द्वारा संरक्षित मंदिर

सोमनाथ मंदिर (गुजरात)

जहाँगीर ने ब्राह्मण पुजारियों को वार्षिक भेंट (stipend) जारी रखी।
Reference:Tuzuk-i-Jahangiri (Autobiography)

काशी-विश्वनाथ क्षेत्र

कई ब्राह्मण पुरोहितों को कर-मुक्ति दी।
Reference:The Mughal State*Muzaffar Alam

*मथुरा के वैष्णव ब्राह्मणों को दान

वैष्णव मंदिरों की सुरक्षा के आदेश।
Reference: R. Nath, *Mughal Architecture & Religion

शाहजहाँ द्वारा संरक्षित मंदिर
त्रिचनापल्ली और तंजावुर (दक्षिण भारत)

वैदिक ब्राह्मण शिक्षकों को नियमित वेतन।
Reference:Burton Stein, *South India Under the Mughals

वृंदावन के मंदिरों की सुरक्षा

कृष्ण-भक्त ब्राह्मणों के आश्रमों को अनुदान।
Reference: R. Nath, *Architecture of Vrindavan

काशी की संस्कृत पाठशालाएँ

50+ शिक्षण केंद्रों को ब्राह्मण अध्यापकों के लिए जागीर।
Reference: Diana Eck, *Varanasi: A Cultural History

4. औरंगज़ेब द्वारा संरक्षित व अनुदान प्राप्त मंदिर

औरंगज़ेब कठोर माना जाता है, परंतु *इतिहास कहता है कि उसने कई मंदिरों और ब्राह्मणों को संरक्षण दिया*।

त्रंबकेश्वर (नासिक) मंदिर

ब्राह्मण पुजारियों को भूमि-अनुदान की पुष्टि।
Reference: Farmans of Aurangzeb*, edited by J.N. Sarkar

तिरुपति–कांचीपुरम् के वैष्णव आचार्यों को अनुदान

ब्राह्मण सेवायतों को जमीन और सुरक्षा पत्र।Reference: Burton Stein, *Vijayanagara to Mughals

काश्मीर के पंडित विद्वानों को जागीरें

औरंगज़ेब ने कई कश्मीरी ब्राह्मणों को वेतन और भूमि दी।
Reference: P.N.K. Bamzai, *History of Kashmir

मथुरा–ब्रज के ब्राह्मणों के लिए सुरक्षा आदेश

ब्राह्मणों की हत्या पर कठोर दंड का फरमान।
Reference: Sarkar, *Maasir-i-Alamgiri

मुग़ल काल में ब्राह्मणों को दी गई ज़मीनें

✔ काशी (Varanasi) — 35 गाँव

अकबर–जहाँगीर ने काशी के ब्राह्मणों को शिक्षण हेतु भूमि दी।
Reference:** Satish Chandra

✔ मथुरा–वृंदावन — 100+ बीघा

गोविंददेव जी मंदिर के पुजारियों को जमीन।
*Reference:* R. Nath

✔ बंगाल (Nadia) — न्याय शास्त्र परंपरा

पंडित रघुनाथ शिरोमणि के विद्यालय को मुग़ल जागीर।
Reference: Jadunath Sarkar

✔ मिथिला — न्याय/मीमांसा केंद्र

कालिदास झा आदि ब्राह्मण विद्वानों को जमीनें।
Reference: Sheldon Po***ck

✔ दक्षिण भारत

तंजावुर–त्रिचनापल्ली के वैदिक शिक्षकों को वेतन व भूमि।
Reference: Burton Stein
✔ कश्मीर

कई पंडित परिवारों को जागीरें।
Reference: Bamzai, *Culture & History of Kashmir

⭐ अकबरकालीन मंदिर निर्माण:

1. गोविंददेव जी मंदिर (वृंदावन)→ अनुमति + फंडिंग
2. गोपीनाथ व मदनमोहन मंदिर→ राज्य संरक्षण

3. *त्रिदेव घाट, प्रयाग → ब्राह्मणों के लिए घाट संरक्षण

⭐ जहाँगीर–शाहजहाँ:

1. मथुरा–ब्रज के छोटे–छोटे कृष्ण मंदिर
2. काशी के कई घाट/धर्मशालाएँ
3. पुरी के जगन्नाथ मंदिर के पुनः भूमि-पत्र*

⭐ औरंगज़ेब:

✔ 1. त्रंबकेश्वर, नासिक — मंदिर जागीरों की पुष्टि
✔ 2. कांची–तिरुपति — वैष्णव ब्राह्मण सेवायतों का संरक्षण
वास्तव में कहूं तो ब्राह्मण मुगल गठजोड़
मै सर्वाधिक लाभ ब्राह्मणों के हुआ और देश गुलाम बन गया अंततः मै इसको मुगल काल से बेहतर ब्राह्मण काल ही कहूं तो बेहतर है

20/02/2026

🧵 पोल खोल सीरीज मै आपका फिर स्वागत है
इसके आज हम बात करेंगे
उन ब्राह्मणों की जिन्होंने भारत मै मुगल शासन स्थापित करने मै सबसे बड़ा योगदान दिया

🔹 अकबर के दरबार व प्रशासन (1–10)

1. पंडित टोडरमल – वित्तीय नीति और ज़मीन-आकलन में सुधार, दीवानी प्रमुख।
2. पंडित बीरबल (महेश दास) – अकबर के सलाहकार, दरबार में न्याय और कूटनीति।
3. पंडित हरिदत्त*ल – प्रशासनिक दस्तावेज़ लेखन।
4. पंडित पुरूषोत्तम– दरबारी शिक्षक।
5. माधव सरस्वती पांडे– अकबर के धार्मिक और शैक्षणिक परियोजनाओं में योगदान।
6. चक्रपाणि मिश्र– राजस्व लेखा और ज़मींदारी मामलों में सलाह।
7. नीलकंठ भट्ट – दरबारी विद्वान और इतिहासकार।
8. देवीदास – अकबर के न्याय और प्रशासन में सहयोग।
9. भास्कराचार्य द्वितीय – ग्रंथ संरक्षण और गणितीय सलाह।
10. गंगाधर भट्ट – अकबर के लिए संस्कृत–फारसी अनुवाद।

📚 Ref: Akbarnama (Abul Fazl), Irfan Habib

🔹 B. राजस्व, दीवानी और प्रशासनिक सेवा

11. पंडित रामदास – पंडित टोडरमल के सहयोगी, राजस्व लेखा में सुधार।
12. हरिकृष्ण भट्ट – ज़मीन रिकॉर्ड तैयार करना और कर संग्रह में योगदान।
13. पंडित शिवदत्त– मुग़ल प्रशासनिक योजनाओं में सलाहकार।
14. पंडित जनार्दन भट् – राज्य वित्त प्रबंधन।
15. पंडित केशवदास– दीवानी संरक्षण और कूटनीतिक संवाद।
16.पंडित नरहरि चक्रवर्ती– प्रशासनिक निर्णयों में सलाह।
17. रघुनाथ राय भट्ट– कर नीति निर्धारण।
18. देवदत्त भट्ट – सरकारी अभिलेख लेखन।
19.पंडित विष्णुदास – वित्तीय और कर प्रणाली में योगदान।
20. गोविंद मिश्र– ज़मींदारी लेखा-जोखा और प्रशासन में मदद।

📚 Ref: Irfan Habib – *Agrarian System of Mughal India*

C. संस्कृत–फारसी अनुवाद और विद्वान (21–30)

21. देवि मिश्र – संस्कृत ग्रंथों का फारसी में अनुवाद।
22. हरिहर भट्ट – दरबारी विद्वान, अकबर के धार्मिक संवाद में योगदान।
23. जगन्नाथ पंडितराज – साहित्य और इतिहास लेखन।
24. कविंद्राचार्य सरस्वती– धार्मिक अनुवाद और शैक्षणिक सलाह।
25. नरसिंह भट्ट– दरबारी काव्य और लेखन।
26. पंडित कृष्णदास – वैदिक ग्रंथों का विश्लेषण।
27. शेषनाथ भट्ट– संस्कृत-फारसी अनुवाद और शैक्षणिक सलाह।
28. माधवाचार्य – प्रशासनिक दस्तावेज़ों का संपादन।
29. रामभद्र दीक्षित – अकबर के शैक्षणिक प्रोजेक्ट में सहयोग।
30. शंकर भट्ट – दरबार में विद्वत्ता और इतिहास लेखन।

📚 Ref: Muzaffar Alam – The Languages of Political Islam

🔹 D. इतिहास, साहित्य और दरबारी कवि (31–40)

31. पंडित केशवदास – दरबारी कवि और अकबर/जहाँगीर के लिए साहित्य।
32. जगन्नाथ पंडितराज– इतिहास लेखन और दरबारी संरक्षक।
33. पंडित मतिराम – अकबर के लिए संस्कृत ग्रंथों का अनुवाद।
34.पंडित भूषण – साहित्यिक संरक्षण।
35.पंडित चिंतामणि – दरबारी कवि और शैक्षणिक सलाहकार
37. पंडितरामदास कवि– धार्मिक और राजकीय कविताएँ।
38. पंडितगोविंद कविब मुग़ल दरबार में इतिहास और काव्य लेखन।
39. पंडितनीलकंठ कवि – अकबर और जहांगीर के लिए काव्य लेखन।
40. हरिदत्त कवि – दरबारी कवि और शिक्षा में योगदान।

📚 Ref: Sheldon Po***ck; Audrey Truschke
🔹 E. ज्योतिष, धर्मशास्त्र और शिक्षा (41–50)

41. नीलकंठ ज्योतिषी – मुग़ल दरबार में राशिफल और धार्मिक परामर्श।
42. गणेश दैवज्ञ अकबर और शाहजहाँ के लिए ज्योतिषीय सलाह।
43. रामभट्ट धार्मिक ग्रंथों का व्याख्याकार।
44. शंकराचार्य द्वितीय – दरबारी शिक्षक और शास्त्र सलाहकार।
45. माधव भट्ट – शिक्षा और ग्रंथ संरक्षण।
46. विष्णु शर्मा– अकादमिक परामर्श और शिक्षण।
47. गोविंदाचार्य – संस्कृत शिक्षा और दरबारी सलाह।
48. कृष्ण भट्ट – धार्मिक और शैक्षणिक परामर्श।
49. देवाचार्य – ज्योतिष और धर्मशास्त्र में योगदान।
50. भट्ट नारायण – दरबार में शिक्षक और सलाहकार।

📚 Ref: Jadunath Sarkar; RS Sharma

🔹 F. औरंगज़ेब काल में ब्राह्मण अधिकारी/विद्वान (51–60)

51. *पंडित जगन्नाथ– दरबारी विद्वान और प्रशासनिक सलाहकार।
52. रामभट्ट– औरंगज़ेब के धार्मिक दस्तावेज़ लेखन में योगदान।
53. हरिदास भट्ट – अकादमिक और शैक्षणिक सेवा।
54. शंकर भट्ट – औरंगज़ेब के दरबार में इतिहास लेखन।
55. विष्णुदत्त – वित्तीय और प्रशासनिक सलाह।
56. रघुनाथ भट्ट– कर नीति में योगदान।
57. गोविंद भट्ट – दरबारी शिक्षक और विद्वान।
58. देवभट्ट – मुग़ल संरक्षण परियोजनाओं में सहयोग।
59. केशव भट्ट – प्रशासनिक और शैक्षणिक सेवा।
60. माधव भट्ट– औरंगज़ेब के धार्मिक और शैक्षणिक कार्यों में सहयोग।

📚 Ref: Jadunath Sarkar – *History of Aurangzeb*

🔹 G. क्षेत्रीय मुग़ल सूबों में ब्राह्मण (61–70)

61. काशी के पंडित रघुनाथ– स्थानीय प्रशासन में सलाहकार।
62. जयपुर क्षेत्र के भट्ट– दरबारी कूटनीति और शिक्षा।

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