04/04/2026
एक आई लाल रिबन में
एक आई नीली फ़्रॉक में
एक आई चुस्की चूसती
एक आई पॉपिंस लिए
एक आई चूँ चूँ चप्पल पहने
एक आई काले चश्मे के साथ
एक आई भूरे बालों वाली
एक आई नीली आँखों वाली
एक आई पिछले घर के खाने से नाख़ुश..
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बच्चियों को बिठाया पंगत में
परोसी आलू की सब्ज़ी गर्म पूड़ियाँ
सबके अपने नखरे अपनी डिमांड
किसी ने माँगे भुजिया
किसी ने थोड़ा नमक
किसी ने बीच में पानी
किसी ने झोल कम आलू ज़्यादा
किसी ने पूड़ी थोड़ी ठंडी..
मुझे भी लग आई भूख
लेकिन नौ मुखों से
मैं ही तो जीम रहा था
मैं ही तो पी रहा था पानी
मुझे ही तो लग रहा था नमक कम
मेरी ही तो जीभ जल रही थी..
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किसी को दी पेन्सिल
किसी को दी फाइव स्टार
किसी को दी आइसक्रीम
किसी को दिया कॉपी-पेन
किसी को कुछ दिया मगर उसने लिया नहीं
किसी को एक चीज़ दी मगर उसने दो मांगी
किसी ने एक चीज़ लौटा दी दूसरी ले ली..
एक-एक कर
सभी देवियों के छुए पाँव
आलस नहीं किया
जैसे बड़ों के मामले में करता हूँ
पूरी तरह झुककर
अँगूठे छुए एक-एक के
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न दुर्गासप्तशती पढ़ता हूँ
न आरती ही पूरी याद मुझे
न नौ देवियों के नाम ही स्मरण
लेकिन पहली बार में याद हो गए
निशु रिशु अंकिता कुन्नू पुच्ची सोनू ज्योति हिमांशी और टीना के नाम
इन बच्चियों के नाम एक साथ ले लिए जाएं
तो एक मंत्र बनाया जा सकता है
बिलकुल गायत्री मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र की तासीर का
जो बड़े से बड़े संकट को काट सकता है :
ॐ निशुरिशुकुन्नूपुच्चीसोनूज्योतिअंकिताहिमांशीटीना नमः।।
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Manmeet Soni Writes
कविता : "कन्या पूजन"
[अब यह कविता "ज़िंदगी के स्क्रीनशॉट्स" में प्रकाशित]